त्वचा रोगों [ Skin Disease's ] के लिए बाह्य प्रयोग की बेहतरीन दवाइयों के नाम ? | Name of external drugs for skin diseases [Skin Disease's]?

त्वचा रोगों के लिए बाह्य प्रयोग में लाये जाने वाले दवाइयों के नाम -


शांति तथा सुरक्षा प्रदायक दवाईयां  -

● BADIONAL - GEL ( बैडियोनाल - जैल ) -

सल्फानिलथियोकार्बामाइड 10 % जेल । 

प्रयोग - 

प्रथम और द्वितीय डिग्री के दग्ध ( Burn ) और उबलते हुए पानी या तेल से जल जाने में उपयोगी । इसके अतिरिक्त संक्रमीक्षतों में भी लाभकारी । 

मात्रा - 

प्रभावित क्षेत्र में दिन में दो बार लगाएं । 


● CALADRYL ( कैलाड्रिल ) -

- पार्क डेविस कैलामिन 8 % , 

- डाइफैनहायड्रामाइन हाइड्रोक्लोराइड 1 % ,

- कैम्फर 0.1 % , क्रीम ,

प्रयोग - 

अंधौरी , लू लगना , कीट दंश , शीत पित्त की खुजली आदि में उपयोगी । 

मात्रा - 

थोड़ी सी औषधि दिन में दो - तीन बार लगाएं । 

कैलाड्रिल लोशन -

कैलामिन 8 % , 

डाइफैनहायड्रामाइन हायड्रोक्लोराइड 1 % , 

कैम्फर 0.1 % , 

स्प्रिंट 2.37 % ,

● GESICAIN ( जैसीकेन ) -

लिग्नोकेंन हायड्रोक्लोराइड 50 % , मरहम ,

प्रयोग- 

दग्ध , घर्षण , कीट दंश , अर्श , त्वचा का फटना , हर्पीज जोस्टर , एक्जीमा , मुंह की श्लेष्मल कला पर व्रण आदि अवस्थाओं में पीड़ा को दूर करने के लिए इस मरहम का स्थानीय प्रयोग बहुत लाभप्रद सिद्ध होता है । इससे संवेदनाहरण होकर रोगी को पीड़ा की अनुभूति नहीं होती । 

मात्रा - 

आवश्यकतानुसार मरहम प्रभावित क्षेत्र में लगाना चाहिए । 


● SILODERM ( साइलोड्रम ) -

- डाइमेथीकोन 20 % , 

- जिंक ऑक्साइड 7.5 % , 

- कैलामिन 1.5 % मरहम ,

प्रयोग -

संस्पर्श त्वकशोय , स्वच्छता पैड विस्फोट , शय्या वर्ण, त्वग्वलिशोथ आदि में परम गुणकारी । 

मात्रा - 

आवश्यकतानुसार लगाएं । 


फंगस तथा संक्रमण नाशक बाह्य प्रयोग के लिए दवाईयां - 

● ASCABIOL ( एस्केबिऑल ) -

- बैंजिल बेन्जोएट 25 % एमल्शन | 

प्रयोग- 

स्केबीज , यूकोपसर्ग , 

मात्रा व प्रयोग विधि - 

शिशुओं पर प्रयोग करने से पूर्व औषधि को तिगुने पानी में मिलाकर हल्का कर लेना चाहिए और फिर गर्दन से नीचे समस्त शरीर पर मलना चाहिए । 

बालकों में प्रयोग में लाते समय बराबर मात्रा के पानी से हल्का कर लेना पर्याप्त है । 

वयस्कों में औषधि बिना जल मिलाए प्रयोग में लाई जा सकती है । 

उपरोक्त विधि से लगातार दो दिन औषधि लगाकर दोबारा पांच दिन के अन्तराल पर एक बार फिर मलने से स्केबीज जड़ से नष्ट हो जाती है । 

सावधानी - 

औषधि को शरीर पर केवल गर्दन से नीचे के भाग में लगवाएं । इसके अतिरिक्त औषधि आंखों पर नहीं लगनी चाहिए ।


● BRADEX - VIOFORM ( ब्राडेक्स - वायोफौर्म ) -

- सोबा कुइनीओडोक्लोर 3 % , 

- ट्राइपलीनामाइड हायड्रोक्लोराइड 2 % , 

- डोमीफैन ब्रोमाइड 0.05 % , क्रीम , 

प्रयोग- 

डमॅटोफाइट रुग्णता ( Dermatophytosis ) , उंगलियों के बीच में कवकता ( Mycosis ) , ट्राइकोफाइटॉनता ( Trichophy tosis ) , श्मश्रुलोमकूपशोथ ( Sycosis barbae ) , एरिस्मा ( Erythrasma ) , संक्रमी मोरायसिस ( Infected psoriasis ) में परम उपयोगी । 

मात्रा -

आवश्यकतानुसार दिन में दो - तीन बार लगाएं । 


● CROTORAX ( क्रोटोरेक्स ) -

- क्रोटामिटीन 10 % , क्रीम ,

प्रयोग - 

वृद्धावस्था के कारण उत्पन्न कण्डू , गुदा कण्डू , भग कण्डू - तथा अन्य ऐसे प्रकार के कण्डू जिसके मुख्य कारण एलर्जी , पीलिया , मधुमेह , कीट दंश होते हैं में , यह औषधि अत्यन्त उपयोगी है । 

मात्रा -

आवश्यकतानुसार दिन में दो - तीन बार मलना चाहिए । 

क्रोटोरेक्स लोशन -

- क्रोटामिटोन 10 % ,

प्रयोग -

स्केबीज , यूकोपसर्ग , कण्डू में परम गुणकारी । 

प्रयोग विधि -

स्कैबीज - 

समस्त शरीर पर लोशन मलना चाहिए । 24 घंटे बाद दोबारा बिना स्नान किए एक बार फिर मलवाएं । इसके 48 घंटे बाद स्नान करना चाहिए । 

कण्डू - 

प्रभावित क्षेत्र में प्रति 4-6 घंटे बाब मलते रहना आवश्यक है । 

यूकोपसर्ग -

समस्त सिर में अच्छी तरह मलें । अगली सुबह बाल धोकर पुनः मलना चाहिए ।

● DAKTARIN ( डाकटेरिन ) -  

- मिकोनाजोल नाइट्रेट 2.0 % जेल , 

प्रयोग -

डर्मेटोफाइट , यीस्ट तथा अन्य कवकों ( Fungi ) द्वारा त्वचा, बालों तथा नाखूनों के संक्रमण में अत्यन्त उपयोगी । इसके अतिरिक्त जीवाणुओं के संक्रमण में भी लाभकारी है । 

प्रयोग विधि -

त्वचा के संक्रमण -

थोड़ी सी औषधि लगाकर दिन में दो बार धीरे - धीरे मलें । जब समस्त विक्षतियां ( Lesions ) अदृश्य हो जाएं उसके बाद और दो सप्ताह तक औषधि का प्रयोग जारी रखना चाहिए । ऐसा करने से रोग की आवृत्ति नहीं होती है । 

नाखूनों के संक्रमण -

औषधि प्रयोग में लाने से पूर्व नाखूनों को काटकर छोटा कर लेना चाहिए और फिर प्रभावित क्षेत्र में औषधि धीरे - धीरे मलकर पट्टी बांध दें , ऐसा दिन में एक बार करना पर्याप्त होता है । जब तक स्वथ्य नाखून न निकल आएं तब तक चिकित्सा जारी रखनी चाहिए ।


● DERMOQUINOL ( डर्मोकुइनौल ) -

- कुइनीओडोक्लोर 4 % एवं 8 % क्रीम ,

प्रयोग - 

सब प्रकार के त्वकशोथ , श्मश्रुलोमकूप कवकता , इम्पेटाइगो , शिशुओं का एक्जीमा , मोनीलीयता , कैंडिडा रुग्णता , गुद कण्डू , भग कन्डू , तुषाभ शल्कन ( Pityriasis ) , एपिडर्मोफाइटॉन रुग्णता आदि में उपयोगी । 

मात्रा -

आवश्यकतानुसार दिन में दो - तीन बार लगाएं । 


● DERMOSCAB ( डर्मोस्कैब ) -

- मोसल्फेन 40 % , 

- बैंजिल बैंजोएट 20 % , मरहम ,

प्रयोग - 

स्कैबीज में परम लाभदायक ।

प्रयोग विधि - 

गर्दन से नीचे समस्त शरीर में लगाएं तथा 24 घंटे उपरान्त स्नान करना चाहिए । 


● EMSCAB ( एमस्कैब ) -

- गामा बँजीन हैक्साक्लोराइड 1 % , 

- एमिनाक्राइन हाइड्रोक्लोराइड 0.1 % , लोशन । 

प्रयोग -

स्केबीज , यूकोपसर्ग ,

मात्रा व प्रयोग विधि -

समस्त शरीर में गर्दन से नीचे एक बार · लगाना पर्याप्त होता है । 


● ETHNOSCAB ( एथनोस्कैब ) -

गामा बेन्जीन हेक्साक्लोराइड 1- 0 % क्रीम ,

प्रयोग -

स्केबीज और यूकोपसर्ग में उपयोगी । 

मात्रा व प्रयोग विधि - 

गर्म जल से स्नान करने के बाद और शरीर को खुश्क करके गर्दन से नीचे शरीर के समस्त भाग पर औषधि अच्छी तरह लगाएं । सूख जाने पर कपड़े पहन लें । 

इसके 12 घंटे बाद फिर से स्नान करके शरीर को किसी स्वच्छ कपड़े से अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए । इस प्रकार एक बार औषधि प्रयोग में लाना पर्याप्त होता है । 

सावधानी - 

औषधि नेत्रों पर न लगे इस बात का ध्यान रखना जरूरी है । 


● FARIDERM ( फैरीडर्म ) -

टोलनैफ्टेट 1 % , लोशन ,

प्रयोग - 

काय दद्रु , वंक्षण दद्रु , श्मश्रु दद्रु , बहुवर्णी द्रु ( Tines Versicolor ) आदि की एक उत्तम औषधि ।

मात्रा -

प्रभावित क्षेत्र में औषधि दिन में तीन बार तीन - चार दिन तक लगानी चाहिए । 


● HAMYCIN ( हामाईसि ) -

सस्पैन्दान ( बाह्य प्रयोग के लिए ) - हामाईसिन 200,000 यूनिट प्रति मि.लि. । 

प्रयोग -

त्वचागत् कैंडिडा रुग्णता ,

मात्रा -

प्रभावित क्षेत्र पर प्रतिदिन दो - तीन बार औषधि 7 से 10 दिन तक लगानी चाहिए । 


● JADIT ( जेडिट ) -

- ब्यूक्लोसामाइड 10 % , 

- सैलिसिलिक एसिड 1 % , सस्पेन्दशन ,

प्रयोग -

फंगस के संक्रमण में उपयोगी । 

मात्रा -

दिन में दो बार प्रभावित क्षेत्र में लगाएं । 

जेडिट आइन्टमेन्ट -

- ब्यूक्लोसामाइड 10 % , 

- सैलिसिलिक एसिड 2 % 

प्रयोग - 

काय दद्रु , वंक्षण दद्रु , बहुवर्णी दद्रु आदि फंगस जन्म संक्रमणों में उपयोगी । 

मात्रा - 

प्रभावित क्षेत्र में मरहम दिन में दो बार लगाएं । 

● JADIT - H ( जेडिट एच ) -

- ब्यूक्लोसामाइड 10 % , 

- सैलिसिलिक एसिड 2 % , 

- हायड्रोकोटीसोन एसिटेट 0.5 % , मरहम , 

प्रयोग -

काय दद्र , वंक्षण दद्र , बहुवर्षी दद् आदि फंगस के संक्रमणों में जिनमें विशेषकर शोथ और कण्डू पाया जाए इसका प्रयोग बहुत लाभप्रद सिद्ध होता है ।

मात्रा -

रोग ग्रस्त स्थानों पर मरहम दिन में दो बार लगाना चाहिए , 


● MULTIFUNGIN ( मल्टीफंगिन ) -

- 5 श्रोमा सैलिसिल - 4 नलोनिलआइड 2 % , 

- सौवेन्टोल सैलिसि 1 % मरहम ,

प्रयोग - 

वक्षण दद्र , बहुप्चक्री दद्र ( Tinea Circinata ) , बहुवर्षी दद्र , नख दद्र , शीर्ष दद्र , बाह्य कर्ण का फंगस संक्रमण , मोनीलीयता , प्रश , फेवस ( Favus ) , एरिथ्रस्मा ( Erythrasma ) आदि में उपयोगी । 

मात्रा - 

दिन में तीन बार लगवाएं । 

मल्टीफंगिन लोशन -

- 5 श्रोमासैलिसिल - 4 क्लोनिलआइड 2 % , 

- सोवेंटोल सैलिसिलेट 1 % पैकिंग 30 मि.लि. । 

मात्रा - 

दिन में तीन बार प्रयोग करें । 

मल्टीफंगिन पाउडर -

- 5 श्रोमा सेलिसिल - 4 क्लोरेंनिलआइड 2 % ,

मात्रा - 

दिन में तीन बार प्रभावित क्षेत्र पर छिड़कें । 

● MYCOCID ( माइकोसिड ) -

क्लोट्राइमेजोल 1 % क्रीम ,

प्रयोग - 

विस्तृत क्षेत्र वाली फंगसरोधी औषधि । 

मात्रा - 

दिन में 2-3 बार लगवाएं । 


● MYCODERM ( माइकोडर्म ) -

- सैलिसिलिक एसिड 3 % , 

- बैंजोइक एसिड 6 % , 

- कैम्फर , 0.52 % , 

- मेन्योल 0.08 % , 

- स्टार्च 31 % , 

- शुद्ध टेल्क तथा कैथोलिन लाईट पाउडर समुचित मात्रा में , छिड़कने का पाउडर ।

प्रयोग - 

काय दद्रु , वंक्षण दद्रु , बहुवर्णी दद्रु , इन्टरट्राइगो , गर्मियों में शरीर पर उत्पन्न बमोरियां , त्वकवसा स्रावी त्वकशोथ , नितम्ब प्रदेश का त्वकशोथ , अतिस्वेदलता , पूतिस्वेद ( Bromidrosis ) आदि में एक बहुत सफल औषधि । त्वचा के प्रभावित क्षेत्र पर दिन में दो - तीन बार छिड़कना चाहिए । 


● MYCOSTATIN ( माइकोस्टैटिन ) -

निस्टेटिन 100,000 यूनिट प्रति ग्राम मरहम ,

प्रयोग -

त्वचा गत फंगस द्वारा उत्पन्न संक्रमणों में बहुत उपयोगी ,

मात्रा - 

दिन में तीन - चार बार प्रयोग में लाएं । 


● SCABALCID ( स्केबाल्सिड ) -

- फेयरडील बैंजिल बैंजोएट 15 % , 

- डाइकोफैन 1 % , 

- बैंजोकेन 2 % , 

- पोलीसौर- बेट 1 % एमल्शन । 

प्रयोग - 

स्केबीज एवं यूकोपसर्ग में उपयोगी । 

मात्रा - 

गर्म जल से स्नान करने के बाद शरीर को खुश्क करके गरदन से नीचे के समस्त भागों में अच्छी तरह मलें । एम्लशन सूखने पर कपड़े पहन लें ।अगले दिन एक बार फिर इस प्रक्रिया को दोहराएं । 

यूकोपसर्ग की अवस्था में सिर को अच्छी तरह गरम जल से धोकर घोल को अच्छी प्रकार मलना चाहिए । लगभग तीन - चार दिन तक ऐसा करने से यूकोपसर्ग स्थाई रूप से दूर हो जाता है । 

सावधानी -

घोल नेत्रों के अन्दर नहीं लगना चाहिए । 


● SCABINDON ( स्केबिनडॉन ) -

- बैंजिल बैंजोएट 25 % , 

- बैंजोकेन 2 % , 

- डी . डी . टी . 1 % क्रीम ,

प्रयोग - 

स्कैबीज में अत्यन्त उपयोगी ,

मात्रा - 

गरदन से नीचे सम्पूर्ण शरीर में दिन में एक बार क्रीम को अच्छी तरह मलना चाहिए । सामान्यतः दो बार औषधि मलने से स्कैबीज पूर्णतः दूर हो जाती है । 


● SPENCOBIOL ( स्पेनकोबिऑल ) -

- बेन्जिल बेन्जोएट 25 % इमल्यान ,

प्रयोग - 

स्वबीज और यूकोपसर्ग में उपयोगी । 

मात्रा - 

आवश्यकतानुसार सिर और समस्त शरीर में मलें । 

सावधानी - 

औषधि आंखों में नहीं लगनी चाहिए । 


● TINADERM ( टीनाडर्म ) -

टोलनैफटेट 10 मिग्रा प्रति मिलि लोशन ,

प्रयोग - 

दाद में बहुत लाभदायक । 

मात्रा -

प्रभावित क्षेत्र में दिन में दो बार लगाएं । 


● VIOFORM ( वायोफार्म ) -

- फुइनीओडोक्लोर 3 % क्रीम ,

प्रयोग -

त्वचा के कवकता संक्रमण , त्वकवसा स्रावी त्ववक्षोय , श्मश्रु सोमकूप शोय , कण्डू , त्वकरोग आदि में बहुत लाभकारी । 

मात्रा - 

दिन में दो - तीन बार लगाएं । 


● TINEAFAX ( टीनियाफैक्स ) -

- जिंक अनडीसीनोएट 8 % , 

- जिंक नॅफथीनेट 8 % , 

- टर्पीनियौल 2.5 % , 

- क्लोरोक्रीसोल 0.1 % , 

- मीसल्फ़ेन 8 % , 

- मैथिल सैलिसिट 2.5 % मरहम ,

प्रयोग -

त्वचा के फंगस जन्य संक्रमणों में परम लाभकारी । 

मात्रा - 

दिन में दो - तीन बार लगाना चाहिए ,


संक्रमण नाशक बाह्य प्रयोग के लिए दवाईयां -

● BETADINE ( बीटाडाइन ) -

- प्रोवीडोन आयोडीन 5 % मरहम । 

प्रयोग - 

फोड़ा , फुन्सी , इम्पेटाइगो ( Impetigo ) श्मधुलोमकूपशोष , बाह्य कर्णशोथ , पैरानोइया ( Paranoia ) , प्रण , क्षत , दंग्ध आदि के द्वितीयक संक्रमण , कायदद्रु , वंक्षण दद्रु , बहुवर्णी दगु , त्वचागत् कैडिंडा रुग्णता आदि जीवाणु और फंगस जन्य संक्रमणों में अत्यन्त उपयोगी । 

बीटाडाइन लोशन -

- प्रोवीडोन आयोडीन 5 % 

मात्रा - 

मरहम अथवा लोशन को आवश्यकतानुसार दिन में दो - तीन बार लगवाएं । 

● CHLOROMYCETIN TOPICAL ( क्लोरोमाइसिटीन टौपीकल ) - 

- क्लोरमफेनिकोल 100 मिग्रा प्रति मिलि लोशन ,

प्रयोग -

संक्रमी क्षतों तथा व्रणों में मात्रा बहुत उपयोगी ,

मात्रा - 

प्रतिदिन गाज के माध्यम लगाकर पट्टी बांध दें ।


FURACIN ( फूरासिन ) -

- नाइट्रोफराजोन 0.2 % मरहम ,

प्रयोग - 

दग्ध और क्षतों में ड्रेसिग के लिए एक बहुत उपयोगी मरहम ,

मात्रा - 

आवश्यकतानुसार गॉज के माध्यम से लगाकर पट्टी बांध देनी चाहिए ।

फुरासिन पाउडर -

- नाइट्रोफू राजोन 0.2 % , 

फूरासिम क्रीम -

नाइट्रोफराजोन 0.2 % ,

● GENTICYN TOPICAL ( जैन्टीसिन टौपोकल ) -

जैंटामाइसिन सल्फेट 0.1 % क्रीम , 

प्रयोग -

जीवाणुओं द्वारा सक्रमी व्रणों , क्षतों आदि में बहुत लाभदायक । 

मात्रा - 

दिन में दो - तीन बार क्रीम लगाकर तथा गॉज व रुई रखकर पट्टी बांध देनी चाहिए ।


● LEDERMYCIN ( लिडरमाईसिन ) -

- डिमोक्लोसाइ क्लिन हायड्रोक्लोराइड 5 % मरहम ,

प्रयोग -

घावों , व्रणों आदि में जीवाणु संक्रमणों की रोकथाम के लिए एक अत्यन्त उपयोगी मरहम ,

मात्रा - 

विसंक्रमित गॉज पर मरहम लगाकर दिन में एक या दो बार - पट्टी बांध देनी चाहिए ।


LYKACETIN ( लायकासिटिन ) -

- क्लोरमफेनिकॉल 10 मिश्रा प्रति ग्राम क्रीम ,

प्रयोग - 

व्रणों , दग्ध तथा त्वचा की अन्य विक्षतियों में संक्रमण की अवस्या उत्पन्न होने पर इस मरहम का प्रयोग बहुत लाभप्रद है । 

मात्रा - 

दिन में तीन चार बार इसका प्रयोग किया जा सकता है । आवश्यकता होने पर ऊपर से गाँज और रुई रखकर पट्टी बांध देनी चाहिए । 


NEBASULF नीबासल्फ -

- नियोमाईसिन सल्फेट 5 मिग्रा , 

- बेंसीसिन 250 यूनिट , 

- सल्फासीटामाईड 30 मि.ग्रा , 

- सल्फासीटामाइड सोडियम 36 मि.ग्रा प्रति ग्राम मरहम | 

प्रयोग -

संक्रमी क्षतों , व्रणों आदि में बाह्य प्रयोग के लिए एक उच्तम क्रीम ,

मात्रा -

दिन में दो बार लगाएं । 

निबासल्फ पाउडर -

- नियोमाईसिन सल्फेट 5 मिश्रा , 

- वैसीट्रेसिन 250 यूनिट , 

- सल्फासीटा माईड 60 मिश्रा प्रति ग्राम । 

NEOBACIN ( नियोबेसिन ) -

- नियोमाइसिन सल्फेट 5 मिग्रा , 

- जिंक बेसीट्रेसिन 500 यूनिट , 

- प्रिडनीसोलोन एसिटेट 2.5 मिश्रा प्रति 15 ग्राम मरहम ,

प्रयोग - 

क्षतों , व्रणों तथा त्वचा की अन्य अवस्थामों में संक्रमण उत्पन्न होने पर इसका प्रयोग करना चाहिए । 

मात्रा -

दिन में एक दो बार लगवाएं ।


NEOSPORIN ( नियोस्पोरिन ) -

- पौलीमिक्सिन-बी सल्फेट 5000 यूनिट , 

- नियोमाइसिन सल्फेट 3400 यूनिट , 

- जिंक बेसीसिन 400 यूनिट प्रति प्राम मरहम् ,

प्रयोग -

त्वचा के बाह्य संक्रमणों के लिए अति उत्तम ,

मात्रा -

आवश्यकतानुसार दिन में तीन चार बार लगवाएं । 

नियोस्पोरिन पाउडर -

- पोलिमिक्सिन-बी सल्फेट 5000 यूनिट , 

- नियोमाइसिन सल्फेट 3400 यूनिट , 

- जिंक बेसीट्रेसिन 400 यूनिट प्रति ग्राम ,

मात्रा - 

आवश्यकतानुसार ,

● NEOSPORIN - H ( नियोस्पोरिन - एच ) -

- पोलीमिक्सिन बीं सल्फेट 5000 यूनिट , 

- नियोमाइसिन सल्फेट 3400 यूनिट , 

- जिंक बेसीट्रेसिन 400 यूनिट , 

- हायड्रोकोर्टिसोन 10 मिग्रा प्रति ग्राम मरहम ,

प्रयोग - 

हायड्रोकोर्टिसोन युक्त यह मरहम त्वचा के बाह्य संक्रमणों में अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होता है । इसके प्रयोग से शोथ बहुत शीघ्र दूर होकर त्वचा एकदम साफ हो जाती है । 


● PIODIN ( पायोडिन ) -

- प्रोवीडोन आयोडीन 1.0 % माउथवाश ,

प्रयोग -

यह जीवाणुनाशक , फंगस नाशक , वाइरसनाशी तथा स्पोरनाशी ( Sporicidal ) औषधि है । मुंह में जीवाणुओं , फंगस अथवा बाइरस के कारण संक्रमण उत्पन्न हो गया हो तो इसको कुछ देर मुंह में रखकर कुल्ला कर देना चाहिए । 

पायोडिन लोशन -

- प्रोवीडोन आयोडीन 10 %

पायोडिन मरहम - 

प्रोवीडोन आयोडीन 10 % । 

प्रयोग - 

बाह्य त्वचा पर जीवाणुओं , फंगस अथवा वाइरसका संक्रमण होने पर लोशन अथवा मरहम का प्रयोग से तुरंत लाभ पहुंचाता हैं । 

मात्रा -

आवश्यकतानुसार गाज के माध्यम से प्रयोग में ला सकते हैं । गाज के ऊपर रुई रखकर पट्टी बांध देनी चाहिए । 

PRAGMATER ( प्रेग्मेटर ) -

- सीटिल एल्कोहल 5 % ,

- सीटिल टार डिस्टीलेट 4 % ,

- सल्फर प्रिसी पिटेटेड 3 % , 

- सैलिसिलिक एसिड 3 % मरहम ,

प्रयोग -

डैनड्रफ ( Dandrurff ) अर्थात सिर की रूसी या खुश्की , फंगस संक्रमण तथा त्वचा की वसास्रावी व्याधियों में उपयोगी । 


SILVER SULPHADIAZINE ( सिल्वर सल्फाडायजीन ) - 

- सिल्वर सल्फाडायाजीन 1 % क्रीम ,

प्रयोग -

दग्ध , बहुत मन्द गति से भरने वाले जख्म , किसी अंग पर अधिक समय तक दबाव पड़ते रहने के कारण उत्पन्न जस्म आदि में लाभकारी । 

मात्रा - 

दिन में दो बार प्रयोग में लाना चाहिए । 


● SKINOCHLOR ( स्किनोक्लोर ) -

क्लोरकुइनँलडोल 5 % पेस्ट ,

प्रयोग - 

क्लोरकुइनलडोल के लिए सुग्राही जीवाणुओं तथा फंगस के संक्रमणों में बाह्य प्रयोग के लिए उत्तम पेस्ट ।

स्किनोक्लीर मरहम -

क्लोरकुइनँलडोल 5 % ,

मात्रा व प्रयोग विधि -

यदि मरहम प्रयोग में लाया जा रहा है तो गॉज तथा रुई रखकर पट्टी बांधना आवश्यक है । पेस्ट जल्दी शुष्क हो जाता है अतएव विक्षति ( Lesion ) पर लगाकर इसको खुला रखा जा सकता है ,

SOFRAMYCIN ( सोफेरामाईसिन ) -

- सोफरामाइसिन 1 % क्रीम ,

प्रयोग -

सोफरामाईसिन सुग्राही जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न संक्रमण मे बाह्य प्रयोग के लिए उत्तम क्रीम ,

मात्रा - 

दिन में दो - तीन बार आवश्यकतानुसार ,


TYRODERM ( टाइरोडर्म ) - 

- टाइरोथ्रिसिन 0.5 मिग्रा प्रति ग्राम क्रीम 

प्रयोग - 

इम्पेटाइगो , त्वकशोथ तथा अन्य ग्राम पोजीटिव जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न त्वक् रोगों में उपयोगी । 

मात्रा -

प्रतिदिन दो - तीन बार औषधि प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं ।


TERAMYCIN ( टेरामाइसिन ) -

- ऑक्सीटेट्रासाइक्लिन हायड्रोक्लोराइड 30 मिग्रा प्रति ग्राम मरहम 

प्रयोग - 

जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न बाह्य प्रयोग के लिए लाभप्रद । 

मात्रा -

दिन में दो - तीन बार प्रयोग में लाना चाहिए । 


बाह्य प्रयोग के स्टीरायड -

BFCLATE ( बोक्लेट ) -

- बीवलोमीथासोन डाइप्रोपियोनेट 0.25 % क्रीम , 

प्रयोग - 

कौर्टीकोस्टिरॉयड से ठीक होने वाले त्वचा के शोथज विकारों में अत्यन्त उपयोगी ,

मात्रा - 

तीव्र रोग में दिन में तीन बार और चिरकारी प्रकार के रोग में प्रतिदिन एक बार प्रलेप करना चाहिए । 


● BECLATE - N ( बोक्लेट एन ) -

- बीक्लोमीथासोन डाइप्रोपियोनेट 0.25 % , 

- नियोमाइसिन सल्फ 0.5 % क्रीम ,

प्रयोग -

जीवाणुओं द्वारा शोथजं प्रकार के संक्रमणों के लिए एक लाभकारी क्रीम , 


BETNOVATE ( बैटनोवेट ) -

- बीटामीथासोन वैलीरेट 0.12 % क्रीम ,

प्रयोग - 

एक्जीमा , बाह्य कर्ण शोथ , गुद एवं भग कंण्डू , संस्पर्श त्वक शोथ , त्वक्वसा स्रावी त्वकशोय ( Seborrheic Dermatitis ) सोराय सिस , शैवाक ( Lichen ) आदि रोगों में परम गुणकारी । 

मात्रा - 

दिन में दो - तीन बार लगाएं । 


BETNOVATE - N ( बैटनोवेट - एन ) -

- बोटालीयासोन वैलीरेट 0.12 % , 

- नियोमाइसिन सल्फेट 0.5 % मरहम ,

प्रयोग -

एक्जीमा , गुद एवं भग कण्डू , संस्पर्श स्वकशोथ , सोरायसिस बाह्य कर्ण शोथ आदि अवस्थाओं में जब जीवाणु संक्रमण की भी सम्भावना हो तब इस का प्रयोग करना चाहिए । 

मात्रा -

प्रतिदिन तीन चार बार लगवाना चाहिए । 


BETNOVATE - C ( बैटनोवेट - सी ) -

- बीटामीथासोन वैलीरेट 0.12 % 

- आयोडोक्लोर हाइड्रोक्सी 3 % मरहम व क्रीम ,

प्रयोग -

एक्जीमा , बाह्य कर्ण शोथ , शोथज गुद एवं भग कण्डू, संस्पर्श त्वकशोय , त्वकवसा स्रावी त्वकशोथ , सोरायसिस आदि रोगों में साथ में फंगस का संक्रमण होने की अवस्था में इस औषधि का प्रयोग करना चाहिए । 

मात्रा -

दिन में आवश्यकतानुसार तीन अथवा चार बार लगवाएं । 


CAMBISON ( कैमबाइसन ) -

- प्रिडनीसोलोन 0.25 % , 

- नियोमाइसिन 0.16 % , 

- फार्बामाइड हाय ड्रोक्लोराइड 0.30 % मरहम ,

प्रयोग -

त्वचा , बाह्य कणं आदि के जीवाणुओं द्वारा संक्रमित रोगों में लाभदायक । इसके अतिरिक्त एलर्जी के फलस्वरूप उत्पन्न विकृतियों में बहुत लाभ पहुंचाता है । 

मात्रा -

दिन में दो तीन बार प्रयोग में लाना चाहिए । 


● COLSIPAN ( कौलसीपैन ) -

- फ्लूओकोरटोलोन 0.125 % , 

- फ्लूओकोरंटोलोन कंपरोएट 0.5 % ,

- नियोमाइसिन सल्फेट 0.33 % मरहम ,

प्रयोग - 

त्वकशोय , संस्पर्श त्वकशोय , एक्जीमा , इम्पेटाइगो , दग्ध आदि त्वचा के ऐसे रोग जिनमें नियोमाइसिन सुग्राही जीवाणुओं का संक्रमण हो चुका है यह मरहम बहुत लाभप्रद सिद्ध होता है । 

मात्रा - 

दिन में दो तीन बार लगवाएं । 


CORTOQUINOL ( कोर्टोकुइनाल ) -

- फुईनीओडोक्लोर 4 % , 

- हायड्रोकोसोन 1 % क्रीम ,

प्रयोग - 

फंगस जन्य त्वचा के समस्त रोगों में लाभदायक । 

मात्रा - 

दिन में दो - तीन बार प्रभावित क्षेत्र पर लगवाना चाहिए ।


COTARYL - H ( कोटा रिल - एच  ) -

- यूरिया 12 % , 

- लैक्टिक एसिड 6 % ,

- एमिनोएसिटिक एसिड 3 % , 

- एमोनियम क्लोराइड 0.5 % , 

- सोडियम क्लोराइड 0.5 % , 

- पोटोशियम क्लोराइड 0.5 % , 

- कैल्शियम लॅक्टेट 0.5 % , 

- मैगनीशियम क्लोराइड 0.3 % , 

- सोडियम एसिड फॉस 0.5 % , 

- हायड्रोकोसोन एसिटेट 1 % क्रीम ,

प्रयोग - 

एटोपी त्वकशोय ( Atopic dermatitis ) , तीव्र एवं चिरकारी एलर्जिक एक्जीमा , न्यूरोत्वकशोय ( Neurodermatitis ) , त्वचा की शुष्क तथा अतिकिरेटिनता ( Hyperkeratosis ) की शोषयुक्त अवस्थाओं में अत्यन्त उपयोगी । 

मात्रा - 

दिन में दो बार प्रभावित क्षेत्र को जल से धोकर एवं खुष्क करके लगवाएं । 


CROTORAX - HC ( क्रोटोरंक्स - एच.सी. ) -

- कोटामिटौन 10 % , 

- हायड्रोकोर्टिसोन 0.25 %  क्रीम , 

प्रयोग -

एक्जीमा , त्वकुवसा स्रावी त्वकशोय , शीत पित्त , गुद एवं भग कण्डू , जरा कण्डू , चयापचय के असंतुलन से उत्पन्न कण्डू , संस्पर्श त्वकशोष , समतल शैवाक ( Lichen planus ) आदि में उपयोगी । 

मात्रा -

दिन में दो - तीन बार लगवाना चाहिए । 


DECADRON ( डेकाड्रोन ) -

- डैक्सामीथासोन सोडियम फॉसफेट 1.0 मिग्रा , 

- नियोमाइसिन सल्फ 5.3 मिग्रा प्रति ग्राम क्रीम ,

प्रयोग -

त्वचा की शोय युक्त एवं नियोमाइसिन सुग्राही जीवाणुओं द्वारा संक्रमित व्याधियों में अत्यन्त लाभकारी । इसके अतिरिक्त एलर्जी जन्य त्वकरोगों में भी बहुत लाभ पहुंचाता है । 

मात्रा - 

प्रतिदिन दो - तीन बार लगवाना चाहिए । 


DEXAMYCIN - C ( डैक्सामाइसिन - सी ) -

- डैक्सामीथासोन 0.1 % , 

- चिनोफॉर्म 3.0 % क्रीम ,

प्रयोग - 

त्वचा के एलर्जी जन्य तथा फंगस संक्रमी रोगों में अत्यन्त लाभकारी । 

मात्रा - 

दिन में तीन - चार बार लगवाएं ।


DEXAQUIN ( डेक्साकुईन ) -

- डैक्सामीयासोन सोडियम फॉस्फेट 0.05 % , 

- आयोडोक्लोरो हायड्रोक्सीकुइनोलीन 3 % मरहम ,

प्रयोग - 

एलर्जी , जीवाणुज और फंगस जन्य त्वचागत रोगों में परम गुणकारी । 

मात्रा -

प्रतिदिन 2-3 बार ।

DEXATOPIC ( डेक्साटोपिक ) -

- डेक्सामीथासोन 0.4 मिग्रा , 

- नैनड्रालोन डेकानोएट 0.5 मिग्रा ,

- क्लोरहैसाडाइन हायड्रोक्लोराइड 10 मिग्रा प्रति ग्राम क्रीम ,

प्रयोग -

त्वचा के शोथज एवं एलर्जी जन्य रोगों में परम गुणकारी । 

मात्रा - 

दिन में तीन बार लगाना चाहिए । 


FLUCORT ( फ्लूकोर्ट ) -

- फ्लूओसीनोलोन एसिटोनाईड 0.025 % मरहम ,

प्रयोग - 

त्वचा की शोथज व्याधियों में गुणकारी । अन्य औषधियों से नियंत्रण में न आने वाले रोगों में भी इसके प्रयोग से लाभ पहुंचता है । 

मात्रा - 

दिन में दो बार लगाएं । 

फ्लूकोर्ट लोशन -

- फ्लुओसीनोलोन एसिटोनाईड 0.01 % ,

मात्रा - 

सुबह और शाम प्रभावित क्षेत्र पर लोशन को धीरे - धीरे हलके हाथ से लगाना चाहिए । 

FLUCORT - C ( फ्लूकौर्ट - सी ) -

- फ्लूओसीनोलोन एसिटोनाईड 0.025 % , 

- चिनोफोमं ( आयोडोक्लोर हायड्रोक्सीकुइनोलीन ) 3 % मरहम ,

प्रयोग - 

फंगस संक्रमी त्वचा के समस्त रोगों में लाभप्रद । 

मात्रा - 

दिन में दो - तीन बार प्रयोग में लाना चाहिए । 


FLUCORT - H ( फ्लूकौर्ट - एच ) -

- फ्लूओसीनोलोन एसिटोनाईड 0.1 % मरहम , 

प्रयोग -

चिरकारी तथा उपचार होते रहने पर भी ठीक न होने वाले जिद्दी प्रकार के त्वक रोगों के लिए अधिक शक्ति का एक परम उपयोगी मरहम ,

मात्रा -

दिन में दो - तीन बार प्रयोग करवाना चाहिए । 


● FLUCORT - N ( फ्लूकोर्ट - एन ) - 

- फ्लूमोसीनोलोन एसिटोनाईड 0.025 , 

- नियोमाईसिन सल्फेट 0.5 % मरहम ,

प्रयोग -

जीवाणुओं द्वारा संक्रमी त्वक रोगों में उपयोगी । 

मात्रा -

प्रतिदिन दो बार प्रयोग में लाना चाहिए । 


● GENTICYN - HC ( जेन्टोसिन - एच सी ) -

- निकोल जंन्टामाइसिन सल्फ 0.1 % , 

- हायड्रोकोर्टीसोन एसिटेट 1.0 % क्रीम ,

प्रयोग -

एक्जीमा , त्वक शोथ एवं कण्डू में अत्यन्त उपयोगी । 

मात्रा -

प्रतिदिन तीन चार बार प्रयोग में लाएं । आवश्यकता महसूस होने पर गॉज की पट्टी बांधी जा सकती है । 


● KENACOMB ( केनाकौम्ब ) -

- ट्राइएमसीनोलोन एसिटोनाईड 1.0 मिग्रा , 

- नियोमाइसिन 2.5 मिग्रा , 

- ग्रामीसीडिन 0.25 मिग्रा , 

- निस्टेटिन 100,000 यूनिट प्राति ग्राम मरहम । 

प्रयोग -

जीवाणुओं और फंगस द्वारा उत्पन्न समस्त त्वक रोगों में एक परम गुणकारी मरहम ,

मात्रा - 

दिन में तीन - चार बार लगवाएं ।


KENALOG - S ( कैनालॉग - एस ) -

- ट्राइएमसीनोलोन एसिटोनाईट 01 % ( 1.0 मिग्रा ) , 

- ग्रामीसोडिन 0.25 मिग्रा , 

- नियोमाइसिन 2.5 मिग्रा प्रति ग्राम मरहम , 

प्रयोग -

जीवाणुओं तथा फंगस द्वारा उत्पन्न त्वक रोगों में जिनमें शोथ और कण्डू विशेष रूप से पाए जाएं , उपयोगी मरहम 

मात्रा - 

दिन में दो - तीन बार प्रभावित क्षेत्र में लगवाना चाहिए । 


LEDERCORT ( लिडरकोर्ट ) -

- ट्राइएमसीनोलोन एसिटोनाईड 0.1 % मरहम ,

प्रयोग -

त्वचा के शोथज एवं एलर्जी जन्य रोगों में उपयोगी । 

मात्रा -

दिन में तीन - चार बार लगवाना चाहिए । 

लिडरकोट क्रीम -

- ट्राइएमसीनोलोन एसिटोनाईड 0.1 % ,

- नियोमाईसिन सल्फेट  0.5 % ,

प्रयोग -

त्वचा के शोथज एवं एलर्जी जन्य रोगों में जिनमें नियोमाइसिन सुग्राही जीवाणुओं का संक्रमण हो चुका है यह क्रीम बहुत लाभकारी सिद्ध होती है । 

मात्रा -

दिन में तीन - चारे बार लगवानी चाहिए । 


LYCORTIN ( लाइकौटिन ) -

- हायड्रोकोट्रीसोन एसिटेट 1 % मरहम ,

प्रयोग -

गुद व भग कण्डू , संस्पर्श त्वकशोय , एक्जीमा , त्वकवसा त्वकशोय ( Seborrheic Dermatitis ) आदि त्वचा के शोयज एवं एलर्जी जन्य रोगों में अत्यन्त उपयोगी । 

मात्रा - 

दिन में 2-3 बार लगवाएं ।


MILICORTENOL ( मिलीकोरटेनॉल ) -

- डेक्सामीयासोन ट्राइमेथिल एसिटेट 0.1 % क्रीम 

प्रयोग -

विभिन्न कारणों से उत्पन्न एक्जीमा , संस्पर्शको त्वग्वलिशोथ , सोरायसिस , समतल शंबाक , गुद एवं भग कडू आदि में परम गुणकारी । 

मात्रा -

दिन में दो - तीन बार लगवाना चाहिए । 


MILICORTEN - VIOFORM ( मिलीकोर्टेंन - बायोफार्म ) -

- डॅक्सामीयासोन ट्राइमेथिल एसिटेट 0.02 % , 

- कुइनआयोडोक्लोर 3 % क्रीम , 

प्रयोग -

जीवाणुओं और फंगस के फलस्वरूप उत्पन्न त्वक रोगों में लाभकारी । 

मात्रा - दिन में दो - तीन बार मरहम का प्रयोग करना चाहिए । आवश्यकता महसूस होने पर गॉज और कई रखकर पट्टी बांधी जा सकती है । 


MULTIFUNGIN - H ( मल्टीफन्गिन - एच ) -

- 5-ब्रोमसेलिसिस - 4-क्लोररेनीलिड 0.03 ग्राम , 

- सोवॅन्टोल लेक्टेड 0.005 ग्राम , 

- हायड्रोकोसोन एसिटेट 0.003 ग्राम प्रति एक ग्राम क्रीम । " 

प्रयोग -

त्वचा के शोथज तथा एक्जीमा सदृश फंगस द्वारा उत्पन्न रोगों जैसे वंक्षण दद्रु , बहुचक्री दद्रु , नख दद्रु , शीर्ष दद्रु , मोनीलीयता , थ्रूस , फेवस ( Favus ) आदि में परम लाभकारी । 

मात्रा - 

दिन में तीन - चार बार लगवाएं ।


MYCOSTATIN ( माइकोस्टेटिन ) -

- निस्टेटिन 100,000 यूनिट प्रति प्राम , मरहम ,

प्रयोग - 

कैडिडा ऐल्बीकैन्स द्वारा उत्पन्न त्वक रोगों में बहु उपयोगी ,

मात्रा - 

दिन में तीन - चार मर्तबा लगवाएं । 


NEBACORTRIL ( नीबाकौट्रिल ) -

- नियोमाइसिन सल्फ 5 मिग्रा , 

- बेसीट्रेसिन 250 यूनिट , 

- हायड्रोकोर्टीन 10 मिश्रा प्रति ग्राम मरहम ,

प्रयोग -

त्वचा के संक्रमी एवं एलर्जी जन्य रोगों में परम लाभकारी । 

मात्रा -

दिन में तीन - चार बार लगवाएं । 


NEOSPORIN - H ( नियोस्पोरिन - एच ) -

- पौलीमिक्सिन बी सल्फेट 5000 यूनिट , 

- नियोमाइसिन सल्फेट 3400 यूनिट , 

- जिंक बेसीट्रेसिन 400 यूनिट , 

- हायड्रोकोटसोन 10 मिश्रा प्रति ग्राम मरहम , 

प्रयोग -

त्वचा के संक्रमी तथा शोयज रोगों में अत्यन्त उपयोगी । 

मात्रा - 

दिन में तीन - चार बार प्रयोग करवाएं । 


POLMYCIN - H ( पौलमाइसिन - एच ) -

- पौलीमिक्सिन बी - सल्फेट 5000 यूनिट , 

- बेसीट्रेसिन 500 यूनिट , 

- नियोमाइसिन 2.5 मिग्रा , 

- हायड्रोकोसोन एसिटेट 5 मिग्रा , मरहम 

प्रयोग -

त्वचा के संक्रमी तथा एलर्जी जन्य रोगों के लिए बहुत ही सफल मरहम , 

मात्रा -

आवश्यकतानुसार दिन में तीन बार बार लगवाएं ।


POLYDERM ( पोलीड्रम ) -  

- प्रिडनोसोलोन 0.5 % , 

- आयोडोक्लोर-हायड्रोक्सीकुइन 4 % , 

- मीसल्फेन 40 % , 

- सैलिसिलिक एसिड 5 % मरहम ,

प्रयोग - 

एक्जीमा , पनसिका ( Acne ) , इमथुलोमकूपशोच ( Sycosis Barbac ) , सोरायसिस , त्वकवसा स्रावी त्वकशोथ तथा विभिन्न प्रकार के दादों में उपयोगी । 

मात्रा -

दिन में दो - तीन बार लगवाएं । 


● QUADRIDERM ( कुआडरीडैम ) -

- बीटामीथासोन 0.05 % , 

- जेन्टामाइसिन सल्फेट 0.1 % , 

- टौलनंफटेट 1.0 % , 

- आयोडोक्लोर-हायड्रोक्सीकुइन 1.0 % , क्रीम ,

प्रयोग -

जीवाणुओं तथा फंगस के संक्रमण के फलस्वरूप उत्पन्न त्वचा को शोथज रोगों में अत्यन्त लाभकारी मरहम इसके अतिरिक् एलर्जी जन्य रोगों में भी बहुत गुणकारी । 

मात्रा - 

दिन में दो - तीन बार प्रयोग करवाएं । 


● SOFRADEX ( सोफ्रार्डक्स ) -

- डैक्सामीयासोन एसिटेट 0.1 % , 

- सोफामाईसिन 1.0 % , क्रीम ,

प्रयोग - 

एटोपी त्वकशोथ , त्वकवसा स्रावी त्वकशोय , एकजीमा , गुद एवं भग कण्डू , संस्पर्श त्वकशोय आदि में अत्यन्त उपयोगी । 

मात्रा - 

दिन में तीन - चार बार लगवाएं । 


● TERRACORTRIL ( टेराकौट्रिल ) -

- ऑक्सीटेट्रासाइक्लिन हायड्रोक्लोराइड 30 मिग्रा , 

- हायड्रोकोर्टिसोन 10 मिग्रा प्रति ग्राम , मरहम 

प्रयोग -

त्वचा के टेट्रासाईमिलन सुप्राही जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न संक्रमणों में अत्यन्त उपयोगी । इसके अतिरिक्त एलर्जी के कारण उत्पन् त्वक रोगों में भी इसके प्रयोग से बहुत लाभ पहुंचता है । 

मात्रा -

दिन में दो - तीन बार प्रयोग में लाएं । 


TOPICASONE ( टोपिकासोन ) -

- बीटामीथासोन बैंजोएट 0.025 % , क्रीम 

प्रयोग - 

एक्जीमा , कण्डू , सोरायसिस , स्वकशोथ , बाह्य कर्ण शोथ , कीट दंश आदि त्वक रोगों में परम गुणकारी ,

मात्रा - 

दिन में दो - तीन बार लगवाना चाहिए । 


● TOPICASONE WITH NEOMYCIN ( टोपिकासोन विद् नियोमाइसिन ) - 

- बीटामोथासोन बँजोएट 0.025 % , 

- नियोमाइसिन सल्फेट 0.5 % , क्रीम

प्रयोग - 

एक्जीमा , कण्डू , सोरायसिस , त्वकशोथ , ब्राह्म कर्ण शोथ आदि अवस्थाओं में साथ में जीवाणुज संक्रमण की भी उपस्थिति होने पर इसका प्रयोग करना चाहिए । 

मात्रा -

दिन में आवश्यकतानुसार तीन - चार बार लगवाएं । 


ULTRALAN ( अल्ट्रॉलान ) -

- फ्लूकोर्टोलोन 2.5 मिग्रा , 

- फ्लूफौटॉलोन हैक्सानोएट 2.5 मिग्रा प्रति ग्राम , मरहम ,

प्रयोग - 

एक्जीमा तथा अन्य ऐसे त्वकरोगों में जिनमें स्टीरॉयडस लाभदायक सिद्ध होते हैं , विशेष उपयोगी |

मात्रा -

दिन में तीन - चार बार लगवाना चाहिए । 


WYCORT ( वाइकार्ट ) -

- हायड्रोफोसोन ऐसिटेट 25 मिग्रा प्रति प्राम , मरहम 

प्रयोग - 

त्वकवसा स्रावी त्वकशोथ , संस्पर्श त्वकशोथ , गुद कण्डू , भग कण्डू , एक्जीमा तथा त्वचा के अन्य एलर्जी जन्य रोगों में परम गुणकारी । 

मात्रा - 

दिन में दो - तीन बार लगवाना चाहिए । 


● WYCORT WITH NEOMYCIN ( वाइकौटं विद् नियोमाइसिन ) -

हायड्रोकोटींसोन एसिटेट 5 मिग्रा, नियोमाइसिन सल्फ 5 मिश्रा प्रति ग्राम , मरहम 

प्रयोग - 

सब प्रकार के एक्जीमा तथा संक्रमी प्रकार के त्वक रोगों में उपयोगी । इसके अतिरिक्त भग व गुद कण्डू में भी गुणकारी । 

मात्रा - 

दिन में दो - तीन बार लगवाएं । 


त्वचा रोगों के लिए और विभिन्न दवाईयां -

EKZEBROL ( एक्जीब्रोल ) -

- स्ट्रौनशियम ब्रोमाइड 1.0 ग्राम प्रति 10 मिलि इंजेक्शन ,

प्रयोग -

यह सब प्रकार की कडू में उपयोगी औषधि है । इसके अतिरिक्त एक्जीमा , सोरायसिस , गुद और भग कण्डू तथा जरा कण्डू , शीत पित्त , एलर्जी जन्य त्वरक्तिमा ( Erythema ) , समतल शैवाक आदि में भी बहुत उपयोगी सिद्ध होती है ।

मात्रा -

एक एम्पूल प्रतिदिन अन्तःशिरा मार्ग से लगाना चाहिए । एक दिन छोड़कर भी इंजेक्शन लगाया जा सकता है । तीव्र रोगों में तीन चार इंजेक्शन तथा चिरकारी रोगों में 6-10 इंजेक्शन पूर्ण लाभ करने के लिए पर्याप्त होते हैं । 

नोट - 

यदि अन्तःशिरा मार्ग से इंजेक्शन देना संभव न हो तो कम मात्रा में औषधि अन्तःपेशी मार्ग से भी दी जा सकती है ।


HIRUDOID ( हिरुडोइड ) -

- हीपेरीनॉयड 10 मिश्रा प्रति ग्राम , मरहम ,

प्रयोग -

उपरिस्थ घनासशिराशोथ ( Superficial Thrombo phlebitis ) , अपस्फीत शिरा ( Varicose Veins ) , कोमल ऊतकों का अभिघात । 

मात्रा -

दिन में दो - तीन बार लगवाएं । आवश्यकता हो तो ड्रैसिंग की जा सकती है । 


MASSE CREAM ( मासे क्रीम ) -

- 9-एमिनो एक्रीडाइन पाईरुवेट 0.0695 % , 

- एलनटौइन 2.0 % , क्रीम ,

प्रयोग - 

चूचुक के छिल जाने , फट जाने और संक्रमण में उपयोग विशेषकर गर्भावस्था और स्तन्यस्रवणकाल में इसके प्रयोग से बहुत लाभ पहुंचता है । चूचुक के प्रत्याकुंचन ( Retraction of Nipple ) में भी उपयोगी ,

मात्रा -

प्रसव पूर्व - दिन में एक दो बार क्रीम को धीरे - धीरे मलना चाहिए । प्रसवोत्तर - प्रत्येक स्तन्यपान के उपरान्त लगवाएं तथा दूध पिलाने से पूर्व चूचुक को जल से अच्छी तरह धोना आवश्यक है ताकि औषधि शिशु के पेट में न जा पाए ।

प्रतिनिर्देश - 

तीव्र स्तनशोथ ( Acute Mastitis ) और स्तन विद्रधि पें प्रयोग नहीं करना चाहिए । 


MITIGAL ( मिटीगल ) -

- मोसल्फेन 65 % , तेल , 

प्रयोग - 

स्कैबीज तथा कण्ड में अत्यन्त सफल औषधि ,

मात्रा -

तीन दिन तक लगातार दिन में केवल एक बार तेल को प्रभावित क्षेत्र में अच्छी प्रकार मलना चाहिए । 

मिटीगल मरहम -

मीसल्फेन 65 % , 

● THROMBOPHOB ( थ्रोम्बोफ़ोब ) -

- हीपेरिन 5000 यूनिट , 

- बेंजिल निकोटीनेट 0.2 ग्राम प्रति 100 ग्राम , क्रीम । 

प्रयोग - 

घनास्त्रशिराशोथ , रक्तगुल्म ( Haematoma ) , कंडरा श्लेषक - कलाशोथ ( Tenosynovitis ) , नील , मोच एवं खरोंच आदि अवस्थाओं में अत्यन्त उपयोगी क्रीम ,

मात्रा -

दिन में दो - तीन बार लगवाएं । क्रीम को सख्त हाथ से मलना नहीं चाहिए । 

थ्रोम्बोफोब जैल -

- होपैरिन 20,000 यूनिट प्रति 100 ग्राम ,


वर्णकता के रोग  के लिए दवाईयां -

MACSORALEN ( मैकसोरालेन ) -

- मिथोक्सालन 10 मिग्रा , कैप्सूल 

प्रयोग -

विटिलिगो ,

मात्रा -

एक केप्सूल प्रतिदिन प्रथम सप्ताह अगले दो सप्ताह में दो केप्यूल प्रतिदिन एक मात्रा के रूप में । 

मैकसोरालेन लोशन -

मिथोक्सालेन 1 % , 

मात्रा - 

रात में सोने से पूर्व प्रभावित क्षेत्र में लोशन लगाकर धीरे धीरे मलें । 

● MANADERM ( मैनाड्रम ) -

- सोरालेन 10 मिग्रा , टेब्लेट । 

प्रयोग -

विटिलिगो , ल्यूकोडर्मा ( श्वेत कुष्ट ) , सोरायसिस में उपयोगी ,

मात्रा -

0.6 से 0.7 मिग्रा / किलो शरीर भार अनुसार औषधि प्रतिदिन विभाजित मात्राओं में दें । 

मेनाड्रम मरहम -

- सोरालेन 10 मिग्रा प्रति ग्राम । 

मात्रा व प्रयोग विधि - 

पैकिंग के साथ उपलब्ध - साहित्य के अनुसार ।

● MELANOCY ( मीलेनोसिल ) -

- एमोयडीन 10 मिग्रा , टेब्लेट । 

प्रयोग -

त्वचा की विवर्णकता ( Depigmentation of the skin ) ,

मात्रा - 

0.7 मिश्रा प्रति किलो शरीर भार अनुसार औषधि विभाजित मात्राओं में प्रतिदिन दें । 

मोलनोसिल लोशन -

- एमोयडीन 0.75 % 

मोलेनोसिल मरहम -

- एमौयडीन 0.75 % , 

- पैराएमिनो बैंजोइक एसिड 2 % ,

प्रयोग विधि - 

पैकिंग के साथ उपलब्ध साहित्य अनुसार । 


 और भी जानें :-

त्वचा और उसकी संरचना [ SKIN AND IT'S STRUCTURE ] आखिर क्या है ? ( संक्षेप्त में )


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