त्वचा के रोगों ( skin disease's ) की चिकित्सा के सामान्य नियम क्या हैं ?

त्वचा के रोगों ( skin disease's ) की चिकित्सा -

त्वचा के रोगों ( skin disease's ) की चिकित्सा के सामान्य नियम क्या हैं ?

त्वचा के रोग की चिकित्सा करते समय हमेशा याद रखना चाहिए । कि त्वचा के रोग कभी - कभी गंभीर रूप भी धारण कर सकते हैं । अगर दो - चार दिनों की घरेलू चिकित्सा से लाभ के आसार नजर नहीं आ रहे हैं तो बेहतर है किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ से राय लें । 

वैसे तो त्वचा के रोगों की चिकित्सा उनके कारकों ( Causative factors ) पर निर्भर रहती है । पर फिर भी कुछ सामान्य नियम निर्धारित किए जा सकते हैं : 

1. अगर त्वचा का रोग शरीर के ऐसे भाग पर है जो धूप में खुला रहता है , तो धूप में निकलना बन्द कर देना चाहिए । अगर धूप में निकलना आवश्यक हो तो छाते का प्रयोग आवश्यक हो जाता है । 

उदाहरण के लिए धूप के कारण हुआ त्वकशोथ ( Photodermatitis ) प्राय : चेहरे , गर्दन तथा हाथ - पैरों की त्वचा को प्रभावित करता है । इसके इलाज लिए धूप से बचाव अत्यन्त आवश्यक है । 

2. अगर रोग वाले स्थान पर छाले ( Blisters ) पड़ गए हैं , उससे सीरम निकल रहा है , जलन हो रही है तो निम्नलिखित विधि से उपचार करना चाहिए : 

एक कपड़े को शीतल जल , जिसमें सफेद सिरका ( White vinegar ) पड़ा हो , में भिगोकर रोग वाली त्वचा पर रखना चाहिए । दो चम्मच सिरके को 250 मिली० जल में मिलाना चाहिए । 

जब रोग सही हो जाए तथा नई मुलायम त्वचा पुरानी खराब त्वचा का स्थान लेने लगे तो त्वचा पर किसी एन्टीबॉयटिक क्रीम जैसे कैम्बिसोन ( Cambi on ointment ) का प्रयोग करना चाहिए ।

3. जुएं सिर तथा शरीर में तीव्र खुजली पैदा कर देती हैं । जुओं से बचने के लिए स्वच्छता नितांत आवश्यक है । अगर स्वच्छता का सावधानीपूर्वक ध्यान रखा जाए तो जुएं होने का प्रश्न ही नहीं उठता है । 

अगर सिर में जुएं पड़ गई हों तो निम्नलिखित विधि से इलाज करना लाभ सिद्ध होता है : 

मिट्टी के तेल तथा सिर में डालने वाला तेल ( जो भी आप सिर में डालते हों सरसों का , तिल का , नारियल का या अन्य कोई तेल ) को बराबर - बराबर मात्रा में मिलाकर एक घोल तैयार कर लो । 

घोल को सिर पर रात के वक्त लगाएं । घोल को सिर के प्रत्येक बाल पर लगाने का प्रयास करना चाहिए जिससे दवा जुओं के प्रत्येक अण्डे पर प्रभावी हो, घोल लगाने के पश्चात सिर पर तौलिया लपेट लो और ध्यान रखना कि आग के पास हगिज नहीं जाना है नहीं तो बाल आग पकड़ लेंगे । 

सुबह सिर को साबुन से साफ कर लो । फिर बालों की महीन दांतों वाली कंधी से काढ़ो । कंधी को मिट्टी के तेल में भिगो दो । ऐसा कम - से कम लगातार तीन दिन तक करने से जूंओं से मुक्ति मिल जाती है । इन तीनों दिनों तक आग के पास हगिज न जाएं । 

4. त्वचा पर तीव्र खुजली के साथ दाने पड़ने की अवस्था को अर्टीकेरिया ( Urticaria ) कहा जाता है । इस अवस्था में शरीर में इतनी तीव्र खुजली होती है कि व्यक्ति बेहाल हो जाता है । 

ऐसी दशा में निम्नलिखित विधि का प्रयोग अत्यन्त प्रभावी होता है । शरीर पर बर्फ के पानी में भीगे कपड़ों से मालिश करो । बर्फ के द्वारा ठण्डा किया गया चावलों का मांड भी उपरोक्त कार्य के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है ।

बच्चों में तीव्र खुजली होने की अवस्था में उनके हाथ किसी कपड़े में बांघ देने चाहिए जिससे वे खुजला न सकें क्योंकि खुजलाने से द्वितीयक संक्रमण होने के अवसर बढ़ जाते हैं । 

5. कभी - कभी चेहरे तथा शरीर पर हल्के सफेद रंग के धब्बे पड़ जाते हैं । ये धब्बे वैसे तो हानिकारक नहीं होते हैं पर देखने में बहुत भद्दे लगते हैं । 

ऐसे धब्बों के लिए निम्नलिखित विधि से उपचार अत्यन्त लाभ दायक होता है : 

गन्धक के एक भाग को नारियल या तिल के 10 भाग में मिलाकर खरल में घोट कर एक क्रीम जैसी बना लेते हैं । 

इस क्रीम को सफेद धब्बों पर प्रतिदिन तब तक लगाते हैं जब तक वे खत्म न हो जाएं । अगर घब्बे गालों तक ही सीमित हैं तो किसी भी प्रकार के इलाज की आवश्यकता नहीं होती है ।


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त्वचा और उसकी संरचना [ SKIN AND IT'S STRUCTURE ] आखिर क्या है ? ( संक्षेप्त में )


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