कण्डू ( Pruritus ) आखिर किस प्रकार की बीमारी है ? इलाज के लिए क्या किया जा सकता है ?

कण्डू ( Pruritus )

कण्डू ( Pruritus ) आखिर किस प्रकार की बीमारी है ? इलाज के लिए क्या किया जा सकता है ? What type of disease is Kandu (Pruritus)? What can be done for treatment?

यह रोग भी काफी सामान्य है और यह कई प्रकार का होता है । इसका मुख्य लक्षण खुजली है ।

यह कोई स्वतंत्र रोग नहीं है बल्कि किसी अन्य व्याधि का लक्षण मात्र है । कण्डू शरीर के एक ही भाग में सीमित रह सकती है जैसे कि गुद कण्डू या भग कण्डू अथवा पूरे शरीर पर पीलिया ( Jaundice ) अथवा वृद्धावस्था के कारण ( Senile form ) हो सकती है । 

अथवा कभी - कभी एक्जीमा , स्केबीज , दद्रु आदि त्वचा के संक्रमणों के साथ साथ हो सकती है । 

यह चाहे किसी भी रूप में या कारण से हो परंतु जब खुजली का दौरा सा पड़ता है उस समय रोगी बड़ी जोर - जोर से खुजाता है , इस कारण इस रोग के साथ द्वितीयक संक्रमण भी हो सकते हैं । 

इस रोग के दो प्रकार होते हैं - 

गुद क्षेत्र की कण्डू और भग क्षेत्र की कण्डू , जिनका विवरण तथा चिकित्सा आगे दी जा रही है । इसका तीसरा प्रकार जराजन्य कण्डू ( Senile pruritus ) कहलाता है । 

वृद्धावस्था के कारण त्वचा में थोड़ी सी अपुष्टि ( Atrophy ) होने लगती है जो खुजली को जन्म देती है । 

इन रोगियों के भोजन में समुचित मात्रा में विटामिन रहने चाहिए । इन रोगियों को मल - मूत्र का वेग रोकना नहीं चाहिए । शरीर पर तेल की मालिश करने तथा हल्के व्यायाम से काफी लाभ होता है । 

■ गुद कण्डू ( Pruritus ani ) -

गुदा द्वार के चारों तरफ खुजली का होना कभी - कभी एक भयंकर समस्या बनकर खड़ी हो जाती है । यह खुजली केवल गुदा द्वार के आस पास की त्वचा में हो सकती है या भग के चारों ओर अथवा वृषणकोष की त्वचा के साथ - साथ भी हो सकती है ।

गुदा द्वार के चारों ओर खुजली महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिकतर पायी जाती हैं । भारतवर्ष में गुदा द्वार के चारों ओर खुजली का होना एक सामान्य समस्या है । 

इस प्रकार की खुजली के अनेक कारण हो सकते हैं : 

  • 1. स्वच्छता की कमी 
  • 2. कृत्रिम कपड़ों के अण्डरवीयर , 
  • 3. गुदा से विभिन्न प्रकार के पदार्थों का आस्राव ( Discharge ), जिसके कई कारण हो सकते हैं जैसे गुदा विदर ( Anal fissure ) , गुदा का नाल व्रण ( Fistula in ano ) तथा बवासीर ( Piles ), 
  • 4. योनि आस्राव ( Vaginal discharge ), 
  • 5. परजीवी जैसे कि स्केवीज ( Scabies ) तथा सूत्र परजीवी ( Thread worm ), 
  • 6. एलर्जी, 
  • 7. सोरायसिस, 
  • 8. संक्रमण, 
  • 9. दिमागी कारण आदि, 

गुदा द्वार के चारों के ओर खुजली के कई कारण होने के कारण यह आवश्यक हो जाता है कि खुजली का सही कारण ज्ञात किया जाए । जब तक खुजली का सही कारण ज्ञात नहीं किया जाएगा , किसी भी प्रकार की . चिकित्सा प्रभावशाली सिद्ध नहीं हो सकती । 

खुजली का कोई भी कारण हो पर यह ध्यान में रखना चाहिए कि खुजलाने से परेशानी बढ़ने का खतरा रहता है । 

खुजलाने से त्वचा जाती है और उसमें द्वितीयक संक्रमण ( Secondary infection ) होने का खतरा रहता है । द्वितीयक संक्रमण होने पर पूय ( Pus ) पड़ सकता है और एक सामान्य - सा दिखने वाला रोग खतरनाक , मोड़ ले सकता है । 

अतः जहाँ तक सम्भव हो सके खुजली होने पर खुजलाने से बचा जाना चाहिए ।

इलाज -

गुद कण्डू के इलाज़ के लिए आवश्यक है कि कारण का पता लगाया जाए । पर कई बार सही कारण का पता नहीं चल पाता है । ऐसी अवस्था में निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए । 

1. भोजन पौष्टिक , सुपाच्य व संतुलित होना चाहिए । 

2. भोजन में मिर्च की मात्रा नगण्य होनी चाहिए ।

3. गुदा के चारों तरफ की त्वचा साफ व शुष्क रखनी चाहिए , यह बहुत आवश्यक है । स्वचा के शुष्क व स्वच्छ न होने की दशा में खुजली का ठीक होना लगभग असंभव हो जाता है । 

इसके लिए रोजाना स्नान करना अत्यन्त आवश्यक है । स्नान करते समय गुदा द्वार के चारों तरफ साबुन का प्रयोग करना चाहिए तथा जल से रगड़ - रगड़ कर त्वचा को स्वच्छ कर लेना चाहिए । 

तत्पश्चात स्वच्छ व सूखे तौलिये से त्वचा को रगड़ - रगड़कर शुष्क कर लेना चाहिए । 

4. अण्डरवियर सूती कपड़ों के बने होने चाहिए । बाजार के अण्डर वियर अथवा टेरीन इत्यादि कपड़ों के अण्डरवियर कभी - कभी स्वयं खुजली का कारण होते हैं । 

5. अगर इन उपायों से लाभ न हो तो विशेष प्रकार की क्रीमों का उपयोग किया जा सकता है । पिपरमेण्ट ( menthol ) की क्रीम इसके लिए सर्वाधिक उपयुक्त है । 

कैलामीन लोशन का प्रयोग भी लाभदायक पाया गया है । कभी - कभी ऐसी क्रीमों का प्रयोग भी किया जा सकता है जिनमें कार्टिकोस्टेराइड या एण्टी हिस्टामीन ( Anti histaminic ) दवा हो जैसे बेटनोवेट । 

पर ऐसी क्रीमों को एक - दो बार से अधिक प्रयोग में नहीं लाना चाहिए अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि होने का खतरा ही रहता है । 

6. अगर खुजली के कारण नींद नहीं आ रही है तो किसी एन्टी हिस्टामीन का प्रयोग किया जा सकता है । 

बाजार में इस प्रकार की कई दवाएं उपलब्ध हैं । पिरीटोन ( Piritone ) की गोली इस प्रकार की दवा का एक उदाहरण है । 

7. अगर किसी भी दवा से लाभ के आसार नजर नहीं आ रहे हैं तो गुदादवार के चारों ओर जाइलोकेन ( Xylocaine ) का इंजेक्शन लगाया जा सकता है । 

प्रायः इस इंजेक्शन के पश्चात एक महीने तक खुजली नहीं होती है । तब तक खुजली का कारण ढूंढ निकाला जा सकता है । 

■ भग कण्डू ( Pruritus vulvae ) -

भग के चारों तरफ खुजली कई प्रकार के रोगों में पाई जा सकती है । पर भग कब्डू में केवल वही रोग सम्मिलित किया जाता है जिसमें खुजली केवल मेग के आसपास ही सीमित रहती है न कि गुदाद्वार के चारों ओर या सदर इत्यादि पर भी हो सकती है । 

भग कण्डू के कई कारण होते हैं जैसे : 

  • 1. योनि आस्राव ,
  • 2. विटामिन A तथा B की कमी,
  • 3. मधुमेह ,
  • 4. त्वचा की बीमारियां स्केबीज , फंगल संक्रमण , सोरायसिस ( psoriasis ) ; इत्यादि जब भग की त्वचा को प्रभावित करती हैं । ,
  • 5. भग का कैंसर ( Cancer of vulvae ),
  • 6. मानसिक कारण ,

भग कण्डू के कई कारण होने के कारण यह आवश्यक हो जाता है कि कारण का पता लगाया जाए । इसके लिए तरह - तरह के परीक्षणों ( Investigations ) की आवश्यकता होती है पर सामान्यत : निम्नलिखित विधि से उपचार करने पर लाभ हो जाता है ।

भग के चारों ओर स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए । बाजार के कृत्रिम धागों से बनी पॅन्टीज का उपयोग छोड़ देना चाहिए । किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ का उपयोग हानिकारक सिद्ध हो सकता है । 

रात्रि में पूर्ण नींद भर सोना आवश्यक है क्योंकि अगर गहरी नींद न सोया जाए तो अनजाने में ही हाथ भग के चारों ओर खुजलाने लगता है । अगर किसी पदार्थ से एलर्जी होने का खतरा है तो एन्टीहिस्टाम क्रीमों का उपयोग किया जा सकता है । अगर खुजली बहुत ज्यादा हो रही है तो कॉटिकोस्टेराइड क्रीम का उपयोग किया जा सकता है ।


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