होठों के रोग ( Diseases of lips ) किस - किस तरह की हो सकती है ?

होठों के रोग ( Diseases of lips )

होठों के रोग ( Diseases of lips ) किस - किस तरह की हो सकती है ?

■ होठों का फटना -

होठों का फटना एक आम समस्या है । यह रोग शरीर के अन्य भाग की त्वचा के शुष्क होने के साथ संबंधित हो सकता है या स्वतंत्र रूप में हो सकता है । 

इस रोग का प्रमुख कारण शुष्क तथा ठण्डा मौसम है । पर इसके साथ - साथ ठण्डी हवा , तेज आहार , ज्वर ( Fever ) इत्यादि भी धूप , अपौष्टिक रोग के कारणों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं । 

इस रोग में ग्रसित व्यक्ति की शिकायत होती है कि होठों पर अजीब प्रकार की दुखन होती है । 

होठों के फटने को रोकने के लिये तेज धूप व तेज ठण्डी हवा से बचाव करना अति आवश्यक है । भोजन की ओर भी ध्यान देना चाहिए । पौष्टिक व संतुलित आहार रोगी के लिये आवश्यक है । इसके साथ - साथ होठों के फटने पर किसी चिकने पदार्थ का लेप आवश्यक है । घी या ग्लिसरीन सर्वाधिक उपयुक्त पदार्थ हैं ।

इन पदार्थों को होठों के ऊपर एक या दो बार आहिस्ता - आहिस्ता लगा लेना चाहिए । 

■ होठों की सूजन ( Cheilitis ) -

इस रोग में होठ सूज जाते हैं । उन पर लालिमा छा जाती है । तेज जलन रोगी को परेशान कर देने के लिये पर्याप्त होती है । खाना खाने तथा पानी इत्यादि पेय पदार्थ पीने पर यह जलन असहनीय भी हो सकती है । होठों की सूजन के कई कारण हो सकते हैं जैसे : -

1 . लिपस्टिक तथा सौन्दर्य प्रसाधनों के कारण , 

2. फलों के कारण , विशेषकर आम तथा टमाटर के कारण , 

3. सिगरेट के कारण ,

4. नेल वानिश के कारण । 

इस रोग का वास्तविक इलाज तो कारण को हटाना ही है । पर कभी - कभी कारण अज्ञात रहता है । ऐसी अवस्था में निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए : -

1. मिर्च या अत्यधिक गर्म खाद्य तथा पेय पदार्थों से बचा चाहिए । 

2. होठों पर ग्लिसरीन का लेप । 

3. हाइड्रोकार्टिसोन क्रीम भी लगाई जा सकती है । 

( पर सामान्यतः इस क्रीम का प्रयोग तभी करना चाहिए जब ग्लिसरीन लगाने से लाभ न हो रहा हो तथा तकलीफ बहुत अधिक हो )

■ अवधारण सिस्ट ( Retention cyst ) -

यह छोटी - छोटी गांठों के रूप में होठों पर हो जाती हैं । यह म्यूकस ग्रंथियों ( Mucous glands ) की वाहिनियों के बन्द हो जाने के परिणामस्वरूप होती हैं । वाहिनियों के बन्द होने से म्यूकस भीतर ही एकत्र होता रहता है और ग्रंथि फूलकर गांठ के रूप में परिवर्तित हो जाया करती है । 

इस रोग में गांठ के सिवाय और कोई तकलीफ नहीं होती है । गांठ कभी - कभी दांतों के बीच में आकर कट जाती है जिससे थोड़ा बहुत दर्द हो सकता है । 

इस रोग का सिर्फ एक ही इलाज है - शल्य चिकित्सा ( ऑपरेशन ) द्वारा गांठ को निकाल देना । यह अत्यन्त साधारण आपरेशन होता है तथा होठ को सुन्न करके किया जा सकता है ।

■ होठों पर लाली लगाना -

नारियां अधिक सुन्दर व आकर्षक दिखने के लिए होठों पर विभिन्न प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधनों को लगाती हैं । ये सौन्दर्य प्रसाधन अधिकतर रासायनिक पदार्थों के बने होते हैं जो धीरे - धीरे मुंह से होते हुए लार ( Saliva ) के साथ आमाशय में चले जाते हैं जहां पर उनका अवशोषण हो जाता है । 

ये रासायनिक पदार्थ स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव डालते हैं । इनके कारण विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न हो सकते हैं यहां तक कि विभिन्न प्रकार के कैंसर भी इन प्रसाधनों के प्रयोग का परिणाम हो सकते हैं । 

बहुधा देखा जाता है कि इस प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधन खुले छोड़ देने पर सूख जाते हैं । नारियां इन सूखे प्रसाधनों में स्प्रिट मिलाकर प्रयोग करने से भी बाज नहीं आती हैं । स्प्रिट स्वयं में स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त हानिकारक है । 

इसके अतिरिक्त ये सौन्दर्य प्रसाधन एलर्जी ( Allergy ) भी कर सकता हैं जिसके परिणाम स्वरूप पूरा होंठ सूज जाता है । होठों पर लाली लगाकर सुन्दर दिखने से पूर्व सोचिए , यह आपके स्वास्थ्य के लिए कितनी हानिकारक है । 

फिर भी अगर लाली का प्रयोग करना ही है तो केवल विशेष अवसरों पर तथा बहुत कम मात्रा का प्रयोग ही करें । होठों का कैंसर होठों का कैंसर भारत वर्ष में पाए जाने वाले कैंसरों में प्रमुख स्थान रखता है । सारे शरीर में पाए जाने वाले कैंसरों का एक प्रतिशत हिस्सा होठों के कैंसर से बनता है । 

कैंसर प्रायः निचले होंठ में होता है तथा 87 प्रतिशत मामलों में रोगी पुरुष होता है । यह कैंसर 40 वर्ष की आयु के पश्चात ही पाया जाता है । कैंसर प्रायः उन व्यक्तियों में पाया जाता है जिनका व्यवसाय धूप में देर तक कार्य करना होता है । यही कारण है कि होठों का कैंसर वृद्ध किसानों तथा मजदूरों का रोग माना जाता है ।

सिफलिस तथा सिगरेट बीडी तथा पाइप के इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति इस रोग के शिकार शीघ्र ही बन जाते हैं । गांवों में हुक्का पीने की प्रथा भी इस रोग को जन्म देती है । 

कैंसर की प्रारम्भिक अवस्था में होठों पर एक गांठ बन जाती है । यह गांठ धीरे - धीरे बड़ी होती जाती है । एक अवस्था ऐसी आती है कि गांठ में घाव ( Ulcer ) बन जाता है । धीरे - धीरे यह घाव बढ़ता जाता है । पर कभी भी इसमें दर्द नहीं होता है । 

रोगी प्रायः डाक्टर के पास बहुत देर से जाता है क्योंकि दर्द न होने के कारण वह छोटी सी गांठ ( Swelling ) की तरफ ध्यान नहीं देता है । रोग अत्यधिक फैल जाने पर ला - इलाज ( Untreatable ) हो सकता है पर प्रारम्भिक अवस्था में ही पता लग जाने पर रोग का पूर्ण इलाज संभव है । 

अतः किसी भी गांठ के बनने पर तुरन्त कुशल चिकित्सक की राय अवश्य लेनी चाहिए । 

कैंसर की प्रारम्भिक अवस्था में होंठ का कैंसर वाला हिस्सा काटकर निकाल दिया जाता है तथा शरीर के दूसरे हिस्से से मांस लेकर प्लास्टिक सर्जरी द्वारा होठों पर लगा दिया जाता है लेकिन ध्यान यह रखना पड़ता है कि होठों को बनाने वाली त्वचा बालों से स्वतंत्र हो , माथे की त्वचा , शिश्न मुंडच्छद की त्वचा तथा लघु भगोष्ठ की त्वचा इसके लिए उपयोगी रहती है ।


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