कारबंकल ( Carbuncle ) रोग क्या है ? सही इलाज कैसे करें ?

 कारबंकल ( Carbuncle ) 

कारबंकल ( Carbuncle ) रोग क्या है ? सही इलाज कैसे करें ? What is Carbuncle Disease? How to do the right treatment?

इस रोग में अधस्त्वक् ( Subcutaneous ) ऊतकों की मृत्यु ( Gang rene ) हो जाती है । ऐसा इन ऊतकों के संक्रमण ग्रस्त हो जाने के कारण होता है । यह रोग 40 वर्ष की आयु के पूर्व प्रायः नहीं पाया जाता है । 

पुरुष वर्ग इस रोग का अधिक शिकार होता है । गर्दन के पिछले हिस्से की त्वचा में यह रोग होता है क्योंकि इस त्वचा में रक्त प्रवाह की कमी के कारण बैक्टीरिया से लड़ने की ताकत कम होती है । 

रोग की शुरूआत में त्वचा में दर्द होने लगता है । यह दर्द धीरे - धीरे बढ़ता जाता है । दर्द के साथ शरीर का तापमान बढ़ जाता है । रुग्ण भाग वाले स्थान की त्वचा लाल पड़ जाती है । इसका तापमान शरीर के अन्य भागों की त्वचा की अपेक्षा अधिक होता है । 

तीव्र शूल के कारण त्वचा को छूना भी कठिन होता है । अगर प्रारम्भिक अवस्थाओं में ही इसका इलाज न कराया जाए तो रोग बढ़ता जाता है , त्वचा मुलायम पड़ जाती है , त्वचा के नीचे जमा पूय एक स्थान से बाहर निकलने लगता है । धीरे - धीरे त्वचा पर कई छिद्र हो जाते हैं जिनसे पूय बाहर निकलता रहता है । 

इलाज- 

इस रोग के इलाज के लिए निम्न बातें आवश्यक हैं : 

- संतुलित आहार दीजिए । 

- मूत्र परीक्षण करके देखिए कि रोगी को मधुमेह तो नहीं है । एन्टीबायटिक दीजिए – ( इनका विवरण फोड़ा ( बॉइल ) के वर्णन में दिया जा चुका है ) 

- छिद्रों को थोड़ा सा चिमटी की सहायता से चौड़ा कर दीजिए जिससे भीतर जमा पूय आसानी से बाहर निकल आए ।


■ दिल्ली फोड़ा ( Delhi Sore ) -

- इस रोग को कई नामों से जाना जाता है जैसे : दिल्ली फोड़ा , बगदाद बॉइल , ओरियन्टल सोर , लाहोर सोर आदि - आदि । 

- इस रोग की शुरूआत चेहरे पर तथा कभी - कभी हाथ - पैरों पर एक लाल रंग की गांठ के साथ होती है । धीरे - धीरे यह गांठ बढ़ती जाती है । कुछ समय पश्चात गांठ के ऊपर की त्वचा मुलायम हो जाती है जिससे मवाद निकलने लगता है । 

- यह रोग एक विशेष प्रकार के परजीवी जीवाणु के कारण होता हैं । जिसे लीशमेनिया ट्रॉपिका के नाम से जाना जाता है । यह जीवाणु सैण्ड फ्लाई नामक मच्छर की लार ग्रन्थियों में एकत्र रहता है । 

- जब भी यह मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है ; यह जीवाणु उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है । जिस भाग पर मच्छर काटता है , प्रायः उसी भाग पर जीवाणु उपरोक्त वर्णित रोग को उत्पन्न कर देता है । 

- रोग के निदान के लिए आवश्यक है कि गांठ से कुछ ऊतक लेकर सूक्ष्मदर्शी द्वारा परीक्षण किया जाए । अगर ऊतनों में जीवाणु दिखाई देता है तो रोग का निदान हो जाता है । 

इलाज -

इस रोग का इलाज निम्न प्रकार करते हैं : 

- गांठ को छुए नहीं बल्कि इस पर 2-4 % सोडियम एन्टीमनी टारटरेट ( Sodium antimony tartarate ) का मरहम लगाइए । 

- अगर इस मरहम से फायदा न हो रहा हो तो डीप एस्स-रे-थिरेपी ( Deep x - ray therapy ) का उपयोग किया जा सकता है । 

- टारटार इमेटिक ( Tartar emetic ) का इंजेक्दान 30 मिग्रा से शुरू करके 120 मिग्रा ० तक दिया जा सकता है । ऐसे 15-20 इंजेक्शनों के पश्चात लाभ नजर आने लगता है ।


 और भी जानें :-

त्वचा और उसकी संरचना [ SKIN AND IT'S STRUCTURE ] आखिर क्या है ? ( संक्षेप्त में )


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