फोड़ा या बॉइल ( Boil ) क्या है ? इलाज कैसे किया जाता है ?

फोड़ा या बॉइल ( Boil )

फोड़ा या बॉइल ( Boil ) क्या है ? उचित इलाज की प्रक्रिया क्या है ? What is Boil or Boil? What is the proper treatment process?

इस रोग में रोम कूप ( Hair follicle ) में संक्रमण हो जाता है । यह तो पहले ही बताया जा चुका है कि शरीर में करोड़ों की संख्या में रोम कूप होते हैं ; अतः शरीर में फोड़ा किसी भी स्थान पर तथा कभी भी हो सकता है । 

फोड़े में ज्यादातर मामलों में पूय ( Pus ) पड़ जाता है । अगर प्रारम्भिक अवस्थाओं में ही इसका इलाज शुरू कर दिया जाए तो पूय नहीं पड़ पाता है । 

फोड़े की शुरूआत एक गांठ से होती है जो शरीर के किसी भी भाग पर हो सकती है । इस गांठ में तीव्र शूल भी होता है । दो - तीन दिनों के पश्चात गांठ की चोटी का भाग ( Summit ) मुलायम पड़ जाता है जिससे पूय की एकाच बूंद निकलती है , तत्पश्चात फोड़ा प्रायः स्वयं ही सही हो जाता है । 

फोड़े प्राय: निम्न दशाओं में पाए जाते हैं : 

  • स्वास्थ्य खराब हो , 
  • काम ज्यादा करना पड़ रहा हो, 
  • किसी बात की चिन्ता हो , 
  • किसी अन्य रोग के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ गई हो । 

अधिकतर यह पाया गया है कि फोड़े उन्हीं बच्चों में निकलते हैं जो कुपोषण के शिकार होते हैं । इन बच्चों में फोड़े एक के पश्चात एक पूरे शरीर पर निकलते रहते हैं । एकाघ फोड़ा तो किसी भी व्यक्ति के शरीर पर पाया जा सकता है ।

चिकित्सा -

अगर फोड़ा प्रारम्भिक अवस्था में हो तथा उसमें पूय पड़ा हो तो : 

एन्टीबायटिक का प्रयोग प्रारम्भ कर देना आवश्यक हो जाता है । यह एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम एन्टीबायटिक होना चाहिए । 

निम्नलिखित एन्टीबायटिकों में से किसी एक का प्रयोग किया जा सकता है : 

1. टेट्रासाइवलीन कैप्सूल 250 मिलिग्राम वाले एक - एक कैप्सूल प्रत्येक छं घण्टे बाद,

अथवा 

ऐम्पीसिलिन कैप्सूल ( 250mg ) , दिन भर में चार कैप्सूल एक सुबह , एक दोपहर , एक शाम , एक रात । 

2. पेंन्टिड टेबलेट ( Pentid tablet ) दिन भर में चार गोलियां - एक सुबह , एक दोपहर , एक शाम , एक रात । 

यह मुंह से सेवन करने वाली पेनिसिलिन होती है । बच्चों में इससे आधी मात्रा की आवश्यकता होती है । 

3. दर्द के लिए निम्नलिखित दवाओं में से किसी दर्दनाशक दवा का प्रयोग किया जा सकता है । पर हमेशा याद रखना चाहिए कि दर्द नाशक दवाएं कुछ ख़ाकर ही खानी चाहिए , खाली पेट नहीं : 

  • माइक्रोपायरीन - सी टेब्लेट ( Tab . Micropyrin - C ) 
  • एनालजीन टेब्लेट ( Tab Analgin ) 
  • ए ० पी ० सी ० टेब्लेट ( Tab . APC ) 

4. फोड़े वाले हिस्से को स्वच्छ रखना चाहिए । 

5. फोड़े की चोटी ( Summit ) पर टिंक्चर आयोडीन की केवल एक बूंद छुआ देने पर , चोटी का भाग शीघ्र ही मुलायम होकर पूर्व की बूंद बाहर निकाल देता है और रोग ठीक हो जाता है । 

■ अगर फोड़े - फुंसियां ( बॉइल ) पूरे शरीर पर बार - बार निकल रहे हों - 

1. यह एक अत्यन्त परेशान करने वाली अवस्था होती है । कभी बॉइल चेहरे पर निकल आता है तो कभी हाथ पर । एक बॉइल ठीक होता नहीं है , दूसरा पहले ही निकल आता है अगर ऐसा है तो : ध्यान दीजिए कि आपका आहार संतुलित है या नहीं अगर नहीं है तो सन्तुलित आहार की व्यवस्था कीजिए ।

2. मानसिक तनाव से बचने का प्रयास कीजिए,

3. रात देर तक जागना बॉइल को जन्म देने में मदद करता है अतः अपनी आदत बदलिए । रोज स्नान करिए । स्नान करते समय आधा ढक्कन सँवलोन ( Savlon ) का एक बाल्टी जल में डाल लीजिए । 

4. मूत्र की शर्करा के लिए परीक्षण आवश्यक है । प्रायः मधुमेह रोग सर्वप्रथम बॉइल के साथ ही प्रारम्भ होता है अतः अगर बार - बार बॉइल निकल रहे हों तो मूत्र में शर्करा का परीक्षण आवश्यक हो जाता है ।

मूत्र में शर्करा के परीक्षण के लिए विशेष प्रकार के कागज ( Dip stick ) भी उपलब्ध हैं जिन्हें मूत्र में डुबाने के पश्चात रंग परिवर्तन के लिए देखा जाता है । 

अगर रंग परिवर्तित हो गया है तो मूत्र में शर्करा की उपस्थिति प्रगट हो जाती है इसका तात्पर्य है कि रोगी मधुमेह रोग का शिकार है । 

■ मूत्र में शर्करा की उपस्थिति ज्ञात करने के लिए निम्न परीक्षण भी किया जा सकता है : 

एक परखनली लीजिए । इसमें 5 मिली० बेनेडिक्ट रीजेन्ट ( Solution Benedict ) जो किसी भी मेडिकल स्टोर से प्राप्त किया जा सकता है ) डालिए । 

तत्पश्चात इसमें मूत्र की 8 बूंदे डालिए । इसको स्प्रिट लैंप पर गरम कीजिए । जब रीजेन्ट खौलने लगे तो परखनली आग पर से हटा लीजिए । इसको ठण्डा होने दीजिए । 

अब देखिए । अगर रंग नीला ही बना रहता है तो इसका तात्पर्य है कि मूत्र में शर्करा नहीं है । अगर रंग हरा हो जाता है तो इसका तात्पर्य है कि मूत्र में शर्करा थोड़ी है । इसे 1 ( + ) से दर्शाया जाता है।

अगर रंग पीला हो जाता है तो इसका तात्पर्य है कि शर्करा अधिक है । इसे 2 ( + ) से दर्शाया जाता है । 

अगर रंग ऑरेन्ज ( Orange ) अर्थात नारंगी हो जाता है तो इसका तात्पर्य है कि मूत्र में शर्करा 3 ( + ) है । 

लाल रंग होने पर मूत्र में शर्करा 4 ( + ) मानी जाती है ।

अगर बॉइल के रोगी को मधुमेह का रोग भी है तो इसका इलाज अत्यन्त आवश्यक है ।

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