सिर के बालों का गिरना ( गंजापन ) ( Alopecia ) इलाज क्या है ?

( गंजापन - Alopecia )

सिर के बालों का गिरना ( गंजापन ) ( Alopecia ) इलाज क्या है ? What is the treatment for hair fall (baldness) on the head?

गंजेपन ( Baldness ) की समस्या एक आम शिकायत है । समाज के विकास के साथ - साथ गंजेपन की समस्या भी विकराल रूप धारण करती जा रही है । 

वैसे सामान्यतः गंजापन एक रोग नहीं होता है । इससे सामान्य जीवन पर कोई प्रभाव भी नहीं पड़ता है । पर गंजेपन का मानसिक रूप से बहुत महत्व है । 

गंजा व्यक्ति प्रायः हीन भावना से ग्रमित हो जाता है । कभी - कभी गंजापन विभिन्न रोगों के कारण भी हो सकता है । 

■ गंजेपन का वर्गीकरण -

  • 1. सामान्य गंजापन ( Defluvium capillorum ) 
  • 2. सीमित खालित्य ( Alopecia areata ) 
  • 3. कर्षण खालित्य ( Traction alopecia ) 
  • 4. पुंसत्व खालित्य ( Masculine alopecia ) 

इनके अतिरिक्त गंजापन फंगस संक्रमण के कारण भी हो जाता है । यह कारण बहुत अधिक रोगियों में देखने में आता है । कभी - कभी उपदंश के रोगियों के सिर के बाल भी झड़ जाते हैं । 

1. सामान्य गंजापन -

सिर के चारों ओर से बालों का गिरना व्यक्ति के लिए गंभीर समस्या पैदा कर देता है । जब भी ऐसा रोगी बालों पर कंधा करता है , गुच्छे के गुच्छे बाल सिर से टूटकर कंधे पर आ जाते हैं । लगता है सिर के बाल पतले होते जा रहे हैं पर सिर गंजा नहीं हुआ है । यह सामान्य गंजेपन की प्रथम सीढ़ी है ।

इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे - लम्बी बीमारी के पश्चात , वातावरण का परिवर्तन , भोजन में विटामिनों व प्रोटीन की न्यूनता , ज्यादा कार्य , गर्भावस्था , अधिक चिन्ता करना , सल्फा ड्रग्स का सेवन आदि । 

इस रोग के इलाज के लिए कारण का ढूंढना अति आवश्यक है । जब तक समुचित कारण का पता न लग जाए , कोई भी इलाज सफल नहीं हो सकता है । 

हां , यह हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि किसी भी समय 80 % बाल परिपक्व अवस्था में होते हैं तथा 20 % बाल युवा अवस्था में । अतः थोड़े बालों का गिरना एक सामान्य प्रक्रिया है । 

पौष्टिक आहार इस रोग के इलाज के लिए अत्यन्त आवश्यक है । ज्यादा सोचना हानिकारक हो सकता है । बार - बार बालों को धोने तथा कंधा करने से बचना चाहिए । रोज - रोज तेल डालना भी स्वस्थ बालों के लिए हानिकारक है । 

★ इलाज -

सिर पर निम्न मरहम के मलने से बहुत फायदा होता है : 

जब बाल तेजी से गिर रहे हों तो -

  • ● स्टिलबीस्ट्राल - 50 मि.ग्रा.
  • ● प्रेडनीसोलोन - 50 मि.ग्रा.
  • ● वैसलीन या लेनोलिन - 100 ग्राम 

इस मरहम को सिर पर प्रत्येक रात्रि हल्के - हल्के मलना चाहिए । वैसलीन की जगह रिफाइंड तिल या मूंगफली का तेल प्रयोग करके दवा को तेल के रूप में तैयार कर सकते हैं । 

जब बालों का गिरना रुक जाए तो - 

  • ● टिक्चर कैप्सिकम - 12 मि.ली.
  • ● टिक्चर कैन्येराइडीन - 12 मि.ली. 
  • ● जल - 100 मि.ली.

इस लोशन को बालों पर धीरे - धीरे सप्ताह में दो - तीन बार मलना चाहिए ।

अथवा 

  • ● वर्गामोट आयल ( Bergamot oil ) - 3.0 मि.ली.
  • ● बाबची का तेल - 3.0 मि.ली.
  • ● टिंचर कैंथेराइडिन 12.0 मि.ली.
  • ● जल - 100 मि.ली.

इस लोशन को भी उपरोक्त मरहम की भांति धीरे - धीरे सिर पर मलना चाहिए । 

2. सीमित खालित्य -

यह रोग प्रायः सिर तथा दाढ़ी में ही पाया जाता है । यद्यपि यह रोग शरीर के बालों वाले किसी भी भाग में हो सकता है , पर सिर तथा दाड़ी विशेष रूप से प्रभावित होते हैं । 

वैसे तो यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है पर जवान पुरुषों में यह रोग बहुत पाया जाता है । इस रोग में गोल - गोल या अण्डाकार स्थानों से बाल गिर जाते हैं , आस - पास की त्वचा में सूजन के कोई भी निशान नहीं होते हैं । 

वह त्वचा , जहां से बाल गिर जाते हैं , चमकीली होती है । इस त्वचा पर रोम कूप ( Hair pores ) दिखाई देते हैं । रोग प्रायः अचानक ही शुरू हो जाता है । 

गोल - गोल स्थानों से बाल गिर जाते हैं फिर ये स्थान आपस में मिलने लगते हैं । रोग पूरे सिर पर अपना आधिपत्य जमा सकता है । इस अवस्था को सम्पूर्ण खालित्य ( Alapecia totalis ) कहते हैं । 

रोग का विकास प्रायः बहुत धीरे - धीरे होता है । बाल दो - तीन माह में पुनः उगना प्रारम्भ कर देते हैं । कुछ लोगों में बाल पुनः नहीं उगते हैं तथा साथ ही साथ त्वचा का क्षय ( Atrophy of skin ) होने लगता है । आयुर्वेद में इस रोग को इन्द्रलुप्त कहते हैं । 

रोग का कारण अभी तक अज्ञात ही है । सोचा जाता है कि कुछ विशेष प्रकार के विषाणु इस रोग के लिए उत्तरदायी हैं । क्योंकि रोग के कारण पता नहीं है अत : इसकी चिकित्सा भी बहुत कारगर नहीं है । 

सन्तुलित आहार , विटामिन तथा प्रोटीन इस प्रकार के रोगियों के लिए लाभदायक सिद्ध होते हैं । पाइलोकार्पीन, हाइड्रोक्लोराइड के इंजेक्शन उसी स्थान पर जहां पर बाल गिर गए हैं लगाने से कभी - कभी चमत्कारिक प्रभाव पड़ता गया है । 

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में रोगियों पर किए गए परीक्षणों से पता चला है कि दारुहल्दी ( Berberis aristata ) के सत्व रसौत ( या रसत ) को निम्नलिखित विधि से प्रयोग करने पर इस रोग के शत प्रतिशत रोगी ठीक हो जाते हैं , भले ही रोग कितना ही बढ़ गया हो ।

रसौत दो भाग तथा हाथी दांत का बुरादा एक भाग लें । पहले हाथी दाँत के महीन बुरादे को कड़ाही या गहरे तवे पर डालकर मन्द - मन्द आंच पर भून लें । यह काला हो जाएगा । 

अब रसौत को थोड़े बकरी या गाय के दूध में घोलकर गाढ़ा लेप जैसा बना लें । फिर इस लेप में हाथी दांत का भुना हुआ बुरादा मिलाकर खरल में डालकर अच्छी तरह घुटाइ करें । 

दूध केवल इतना डालना चाहिए कि घोटते - घोटते वह काफी खुश्क हो जाय और सिर्फ इतना गीला रहे कि उसकी लम्बी मोटी बत्ती सी बनाई जा सके । बत्ती बनाकर छाया में सुखा लें । 

इस सूखी बत्ती को पानी के साथ घिस कर गंज के धब्बों पर प्रतिदिन दो - तीन बार लगाते रहें । इसको नियम पूर्वक लगाते रहने से दस - पन्द्रह दिन के अन्दर ही धब्बों पर नए बाल उगने आरंभ हो जाते हैं । 

3. कर्षण खालित्य -

इस प्रकार का खालित्य बहुधा भारतीय नारियों में देखने के लिए मिलता है । कुछ नारियां अपने बालों का जूड़ा बनाती हैं , जिसके बनाते समय बालों पर काफी कर्षण ( Traction ) अर्थात खिंचाव का प्रयोग करना पड़ता है । 

इस कर्षण के कारण बालों की अग्ररेखा ( Frontal hair line ) भद्दी दिखाई पड़ने लगती है तथा कुछ - कुछ गंजापन भी आ जाता है । 

बालों के गिरने के अलावा इस क्षेत्र की त्वचा में और कोई परिवर्तन नहीं आता है । यही कारण है कि इस प्रकार का गंजापन पूर्णत : ठीक हो सकता है ।

बालों का जूढ़ा बनाते समय या चोटी करते समय ध्यान रखना चाहिए कि बालों पर जरूरत से ज्यादा कर्षण न पड़े । उन्हें उतना ही खींचा और कसा जाए जितनी आवश्यकता है । 

प्रायः नारियों की आदत होती है कि जूड़ा बनाते समय या चोटी करते समय बालों को बार - बार खींचती हैं जिससे बाद में बाल तितर - वितर न हो सकें । यह अत्यन्त हानिकारक है । बालों को अधिक से अधिक ढीला रखा जाना चाहिए । 

अगर बालों की अम्ररेखा भद्दी दिखाई पड़ने लगे या अग्र पंक्ति के बाल गिरने लगें तो बालों पर कर्षण का प्रयोग एकदम रोक देना चाहिए । आवश्यकता पड़ने पर केश विन्यास ( Hair style ) में परिवर्तन भी किया जा सकता है । 

ऐसे रोगियों के लिए ऐसा केशविन्यास जिसमें बाल माथे को ढके रहें , अत्यधिक उपयुक्त रहता है । 

4. पुंसत्व खालित्य -

इस प्रकार का गंजापन सबसे अधिक पाया जाता है । यह प्रायः पुरुषों में 20-25 वर्ष की आयु से आरम्भ हो जाता है । गंजापन धीरे - धीरे ललाट ( Frontal ) से प्रारम्भ होता है , जिसके कारण ललाट चौड़ा हो जाता है । 

गंजापन धीरे - धीरे बढ़ता जाता है और कभी - कभी पूरे सिर पर फैल जाता है । नए बाल उगते तो हैं परन्तु उनमें वृद्धि करने की क्षमता नहीं होती है । इस प्रकार के गंजेपन का कोई भी कारण ज्ञात नहीं है । 

गंजापन पुरुष व स्त्रियों , दोनों में हो सकता है पर प्रायः पुरुष ही इसके शिकार बनते हैं पुरुष जो बौद्धिक कार्य में व्यस्त रहते हैं , शीघ्र ही इस रोग के रोगी हो जाते हैं । इसलिए ऐसे गंजेपन को प्रायः बुद्धिमत्ता का पर्याय माना जाता है । 

रोग का कारण तो पता नहीं है , पर यह सोचा जाता है कि यह रोग पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है । अगर घर में पिता को गंजेपन का रोग है तो बहुत संभव है कि संतान भी रोग के शिकंजे में फंस जाए ।

स्त्रियों में यह रोग प्राय : देखने को नहीं मिलता है । सोचा जाता है कि मादा हार्मोन ( Female sex hormones ) स्त्रियों की इस रोग से रक्षा करते हैं । 

पर रजोनिवृत्ति ( Menopause ) के पश्चात बहुत सी स्त्रियां भी इस रोग का शिकार बन जाती हैं क्योंकि उस समय मादा हार्मोनों का बनना एकदम कम हो जाता है । इस प्रकार के गंजेपन का कोई इलाज नहीं है । 

अतः यह रोग एक भयंकर समस्या बनकर खड़ा हो जाता है , क्योंकि गंजेपन से भयंकर मानसिक आघात होता है । 

आधुनिक युग में केश प्रतिरोपण ( Hair transplantation ) इस रोग का सफल इलाज माना जा सकता है । केश प्रतिरोपण एक प्रकार की शल्य चिकित्सा के द्वारा किया जाता है । इस प्रक्रिया में शरीर के उस भाग की खाल जहां बाल हों , गंजे भाग पर लगा दी जाती है कुछ समय पश्चात ये बाल बढ़ना शुरू हो जाते हैं । 

पढ़ने में यह क्रिया अत्यन्त सुगम प्रतीत होती है , पर वास्तव में यह अत्यन्त कठिन है । कुछ बड़े शहरों में इसकी सुविधा उपलब्ध है ।


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