संभावित गर्भपात ( Threatened abortion ) क्या है ? : What is Threatened Abortion ?

संभावित गर्भपात ( Threatened abortion )

संभावित गर्भपात ( Threatened abortion ) क्या है ? : What is Threatened Abortion ?

महिला कुछ घबरायी हुई - सी थी । पूछने पर पता लगा कि एक वर्ष पूर्व ही उसका विवाह हुआ था तथा दो माह से उसके माहवारी बंद थी किंतु पिछली रात से उसे थोड़ा - थोड़ा दर्द एवं रक्तस्राव ( Bleeding ) हो रहा था । पूछने पर महिला ने बताया कि अपने संदेह को दूर करने के लिए उसने 15 दिन पहले पेशाब वगैरह की जांच करवायी थी जिसके अनुसार चिकित्सक ने उसे गर्भवती बताया था । 

महिला के प्रजनन अंगों ( Reproductive organs ) की अंदरूनी जांच की गयी । उसे दो माह का गर्भ था किंतु गर्भाशय ( Uterus ) का मुंह बंद होने पर भी उसमें से रक्तस्राव हो रहा था उसके बाद महिला के रक्त , पेशाब तथा योनिमार्ग ( Vagina ) की पूरी तरह से जांच की गयी । जांच से पता लगा कि पेशाब में खराबी के साथ - साथ उसके शरीर में प्रोजेस्टेरोन ( Progesterone ) हॉर्मोस की कमी थी । 

ऐसा माना जाता है कि गर्भधारण ( Conception ) के बाद गर्भवती महिला के शरीर में प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोस की कमी होने से भी गर्भपात हो जाता है । अतः उसी के अनुरूप ऐंटीबायोटिक ( Antibiotic ) तथा हॉमोंस के साथ ही गर्भाशय की ऐंठन को बंद करने के लिए महिला को उचित दवाएं दी गयीं । 

दवाओं के साथ - साथ उसे पूरी तरह आराम करने की सलाह दी गयी । परिणामस्वरूप वह एक सप्ताह में ही ठीक हो गयी तथा बाद में हरेक माह प्रसवपूर्व केंद्र ( Antenatal clinic ) जाकर जांच कराती रही । भ्रूण ( Embryo ) बिलकुल स्वस्थ था तथा समयानुसार विकसित हो रहा था । 

एक अन्य उदाहरण महिला बैंक अधिकारी का है । स्कूटर पर बैंक जाते हुए अचानक उसकी साड़ी का पल्लू पहिये में फंस गया तथा वह एकदम जमीन पर गिर पड़ी । आसपास के लोग उसे अस्पताल ले आये । प्राथमिक उपचार ( First aid ) के बाद उसे छुट्टी दे दी गयी किंतु शाम को फिर वही महिला हड़बड़ाती हुई चिकित्सालय पहुंची । 

दरअसल उसे तीन माह का गर्भ था और उसके गर्भाशय ( Uterus ) से रक्तस्राव ( Bleeding ) हो रहा था । जांच से पता लगा कि उसका गर्भाशय द्वार ( Cervix ) बंद था और गर्भाशय में दर्द हो रहा था । महिला बहुत दुखी थी क्योंकि उसके पहले बच्चे की एक वर्ष की ही उम्र में मृत्यु हो गयी थी । दूसरी बार इस अनहोनी से भी उसे गहरा आघात पहुंचा था परंतु समयानुसार उचित चिकित्सा एवं आराम से वह महिला एक सप्ताह में ही सामान्य हो गयी । उपरोक्त दोनों उदाहरण संभावित गर्भपात से पीड़ित महिलाओं के हैं ।

लक्षण ( Symptoms ) -

अधिकांश महिलाओं में संभावित गर्भपात के लक्षण गर्भावस्था ( Pregnancy ) के प्रारंभिक सप्ताहों में ही दिखाई देने लगते हैं । इस अवस्था में योनिमार्ग ( Vagina ) से हलका - हलका रक्तस्राव ( Bleeding ) होने लगता है , जिससे बेचैनी तो होती है कितु पीड़ा इतनी अधिक नहीं होती । 

परीक्षण के समय गर्भाशय - नलिका ( Cervical canal ) में से रक्तस्राव होता हुआ दिखाई देता है किंतु गर्भाशय द्वार ( Cervix ) बंद रहता है । पेट के निचले हिस्से में दर्द होने लगता है और गर्भाशय में ऐंठन महसूस होती है । यह अवस्था इतनी गंभीर नहीं होती । यदि समय पर उचित इलाज की व्यवस्था हो जाये तो गर्भपात की संभावनाओं को समाप्त किया जा सकता है किंतु उचित चिकित्सा के न होने से गर्भ गिर कर अपरिहार्य गर्भपात ( Inevitable abortion ) में परिवर्तित हो सकता है । 

अधिक तेज रक्तस्राव और गर्भाशय में पीडायुक्त ऐंठन ( Painful utering contractions ) अपरिहार्य गर्भपात के लक्षण हैं , जिनकी विस्तृत चर्चा हम आगे करेंगे । 

कारण ( Causes ) -

संभावित गर्भपात के कारण गर्भस्थ शिशु और गर्भवती महिला दोनों से संबंधित हैं । 30 से 40 % कारण गर्भस्थ शिशु में क्रोमोसोम ( Chromosome ) की खराबी से पैदा होते हैं । क्रोमोसोम्स में खराबी के कारण ही संसेचित डिम्ब ( Fertilized ovum ) का सही तरह से विकास नहीं हो पाता और वह रोगग्रस्त हो जाता है । 

कभी - कभी गर्भनाल ( Placenta ) के गर्भाशय से अलग हो जाने अथवा किसी गड़बड़ी के कारण भ्रूण ( Embryo ) का विकास रुक जाता है और गर्भपात की संभावनाएं बढ़ जाती हैं । बच्चे के अतिरिक्त कुछ कारण ऐसे हैं जो मां के शरीर से जुड़े हैं । जैसे , तेज बुखार से पैदा हुई बीमारियां गुर्दो ( Kidneys ) में खराबी , माँ और शिशु के रक्तसमूह ( Blood group ) में असमानता तथा दवाइयों के उलटे तथा बुरे प्रभाव ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से गर्भाशय में अनेक खराबियां उत्पन्न हो जाती हैं । 

परिणामस्वरूप स्थापित डिम्ब ( Implanted ovum ) के विकास और पोषण में बाधा आ जाती है और गर्भपात की संभावनाएं बढ़ने लगती हैं । इसके अलावा गर्भाशय में चोट , नीम - हकीमी नुस्खे , महिलाओं द्वारा सौंदर्य तथा इकहरेपन को बनाये रखने के लिए किये गये भारी व्यायाम , कम खुराक , संभोग के दौरान पति के साथ उलटी - सीधी क्रीड़ाएं भी संभावित गर्भपात के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं । 

कभी - कभी गर्भाशय द्वार ( Cervix ) की अक्षमता तथा गर्भाशय के गोलों ( Fibroids ) के कारण भी गर्भपात की स्थिति उत्पन्न हो जाती है । यह गर्भपात की संभावनाओं की शुरुआत है , इसलिए इतनी गंभीर नहीं । 

यदि प्रारंभिक अवस्था में ही उचित इलाज हो जाये तो गर्भावस्था ( Pregnancy ) पूरे समय तक स्थित रहती है किंतु लगातार स्राव होने पर यदि उसे रोका न जाये तो स्थिति भयानक हो सकती है । कभी - कभी गर्भाशय में ही शिशु की मृत्यु हो जाती है और वह वहीं रह जाता है । गर्भपात की इस अवस्था को लीन अथवा मृत भ्रूणपात ( Missed abortion ) कहते हैं । 

उपचार ( Treatment ) -

संभावित गर्भपात का प्रारंभिक उपचार है - बिस्तर पर लेटकर पूरी तरह से आराम करना । रक्तस्राव के बंद होने के बाद भी सात दिन तक बिस्तर पर बिलकुल आराम करें तथा चिकित्सक की सलाह से ही दवाइयों का इस्तेमाल करें । एनिमा ( Enema ) और अत्यधिक गर्म पानी से स्नान करने जैसे तीव्र उपचारों से दूर रहें । 

पेशाब , रक्त एवं योनिमार्ग ( Vagina ) से निकले द्रव की सावधानीपूर्वक जांच होनी चाहिए ताकि शरीर में हॉर्मोस ( Hormones ) की कमी का भी पता लगाया जा सके । प्रोजेस्टेरोन ( Progesterone ) तथा ईस्ट्रोजेन ( Oestrogen ) हॉर्मोस की कमी को भी गर्भपात का एक कारण मानते हैं । अतः चिकित्सक की सलाह पर इनके इंजेक्शन भी लगवाये जा सकते हैं ।

शारीरिक और मानसिक अशांति का उपचार आवश्यक है । इसके अतिरिक्त रक्तस्राव ( Bleeding ) तथा संक्रमण ( Infection ) , आदि को रोकने के लिए दवाओं तथा हॉर्मोस का इस्तेमाल करना चाहिए । 

जांच के दौरान यदि लगे कि गर्भाशय द्वार ( Cervix ) ढीला या अक्षम ( Incompetent ) हो गया है तो ऑप्रेशन द्वारा उसका इलाज किया जाना चाहिए । धीरे - धीरे महिलाएं अपनी सामान्य स्थिति में आने लगती हैं । जब रक्तस्राव बंद हो जाता है , तब महिलाओं को बिस्तर से उठने की अनुमति दी जाती है । 

महिलायें जिस पलंग पर लेटें , उसका पायताना सामान्य कर दिया जाना चाहिए । इससे गर्भपात की संभावनाएं भी कम होंगी । ऐसी महिलायें घर का काम - काज सामान्य सीमा से अधिक न करें और एक माह तक पति के संग संभोग पर भी पाबंदी रखें । उसके बाद यदि फिर रक्तस्राव प्रारंभ होने लगे तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लेकर इलाज करवायें ।


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