अपरिहार्य गर्भपात ( Inevitable abortion ) क्या है ? : What is Inevitable Abortion ?

अपरिहार्य गर्भपात ( Inevitable abortion ) क्या है ?

अपरिहार्य गर्भपात ( Inevitable abortion ) क्या है ? : What is Inevitable Abortion ?

एक कमजोर महिला चिकित्सालय में मेरे पास आयी , जिसे चार महीने का गर्भ था और जो पिछले सात दिन से अपने को अस्वस्थ महसूस कर रही थी । उसे रुक - रुक कर पेट में दर्द तथा योनिमार्ग ( Vagina ) से रक्तस्राव ( Bleeding ) हो रहा था । हालांकि वह तीन दिनों से एक महिला - चिकित्सक का भी इलाज ले रही थी किंतु स्वस्थ नहीं हो पा रही थी । बीते 12 घंटों से तो उसकी तकलीफ अधिक बढ़ गयी थी और रक्तस्राव भी तेज होने लगा था । 

जांच करने पर मैंने पाया कि महिला के शरीर में खून की बहुत कमी हो गयी थी और पेट के निचले भाग में भी दर्द हो रहा था । गर्भाशय ( Uterus ) की अंदरूनी जांच की गयी और पता लगा कि उसका गर्भाशय - द्वार ( Cervix ) खुल चुका था , जिससे भ्रूण ( Embryo ) का अंश दिखाई दे रहा था । भ्रूण के चारों ओर की झिल्ली फट चुकी थी । 

महिला को शीघ्र ही ग्लूकोज ( Glucose ) में ऐसी दवाइयां डालकर दी गयीं जिनसे गर्भाशय में संकुचन ( Uterine Contractions ) पैदा हो सके और दर्द से भी राहत मिल सके । सावधानी के तौर पर महिला के रक्त और पेशाब की भी जांच की गयी । दवाओं के प्रभाव से लगभग दो घंटे के बाद भ्रूण गर्भाशय से पूर्णतः बाहर आ गया । 

यही नहीं , गर्भाशय की पूरी तरह से जांच की गयी कि भ्रूण का कोई अंश गर्भाशय में शेष तो नहीं रह गया है क्योंकि इस तरह का कोई भी अंश अंदर रह जाये तो ऑप्रेशन से बाहर निकालना पड़ता है , नहीं तो कई प्रकार की खराबियां पैदा हो सकती हैं । 

भ्रूण के बाहर आने पर अर्गोमेट्रीन ( Ergometrine ) का इंजेक्शन दिया गया ताकि गर्भाशय के संकुचन से रक्तस्राव रुक सके । दो दिन बाद महिला सामान्य हो गयी और उसे चिकित्सालय से छुट्टी दे दी गयी । 

लक्षण ( Symptoms ) -

यह अपरिहार्य गर्भपात की अवस्था है । यदि संभावित गर्भपात ( Threatened abortion ) का संदेह होते ही योग्य चिकित्सक की सलाह न ली जाये और रक्तस्राव लगातार बढ़ता रहे तो उस स्थिति में गर्भ का गिरना निश्चित है । 

अपरिहार्य गर्भपात में योनि से रक्तस्राव ( Vaginal bleeding ) और गर्भाशय में संकुचन ( Uterine Contractions ) बड़ी तेज गति से और कष्टदायक होते हैं । जब गर्भाशय - द्वार ( Cervix ) खुल जाता है , उस स्थिति में उसकी झिल्ली फटे या न फटे , गर्भावस्था ( Pregnancy ) को कायम रखना असंभव है । 

तेज रक्तस्राव ( Severe bleeding ) के कारण अधिकतर गर्भनाल ( Placenta ) भी गर्भाशय से अलग हो जाता है । इस प्रकार के गर्भपात को रोकना मुश्किल ही नहीं बल्कि पूरी तरह से असंभव है । गर्भपात के अपरिहार्य ( Inevitable ) होने की स्थिति में अधिकतर गर्भाशय नलिका ( Cervical canal ) फैल जाती है । इसमें उंगली डालकर डिम्ब ( Ovum ) के निचले हिस्से को छूकर महसूस किया जा सकता है । 

यदि किसी भी तरह के रक्तस्राव का प्रमाण मिले तो समझना चाहिए कि भ्रूण ( Embryo ) की स्थिति में गड़बड़ी है और गर्भपात हो सकता है । इसके अतिरिक्त यदि नाभिनाल ( Umbilical Cord ) अपनी जगह से हिल जाये अथवा गर्भ से नाब ( Secretion ) शुरू हो जाये तो स्पष्टतः यह अपरिहार्य गर्भपात होता है । 

कारण ( Causes ) -

गर्भाशय में किसी प्रकार की असामान्यता मालूम पड़े या उदरस्थल के निचले भाग में दर्द या रक्तस्राव हो तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए । प्रायः देखा गया है कि महिलाएं चिकित्सक की सलाह को अधिक महत्त्व नहीं देतीं । जैसे , दवाओं का नियमित रूप से लेना , ज्यादा मेहनत न करना एवं चिकित्सक की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या निर्धारित न करना अपरिहार्य गर्भपात के कारण बनते हैं । 

इसके अलावा कभी - कभी अक्षम गर्भाशय - द्वार ( Incompetent Cervix ) की उचित चिकित्सा न की जाये तो भी अपरिहार्य गर्भपात की संभावनाएं पैदा हो जाती हैं ।

उपचार ( Treatment ) -

गर्भपात के अपरिहार्य होने की स्थिति में मुख्य उपचार गर्भाशय की सफाई करना है क्योंकि गर्भाशय में भ्रूण के किसी भी अंश के रहने से सेप्टिक ( Septic ) अथवा संक्रमण ( Infection ) हो सकता है । इससे मां की मृत्यु भी हो सकती है । इसलिए यदि गर्भ 12 सप्ताह से कम का हो तो उसकी आम सफाई जरूरी है । 

यदि 12 सप्ताह से अधिक की अवधि हो जाये तो सिटोसिनॉन ( Syntocinon ) के ड्रिप द्वारा गर्भाशय के संकुचनों ( Uterine Contractions ) को बढ़ाकर गर्भाशय की सफाई की जानी चाहिए । 

सके अतिरिक्त उपचार दो प्रकार से और किया जाता है - 

दवाओं द्वारा , या 

सर्जरी ( Surgery ) द्वारा । 

रोगी को सबसे पहले पिटोसीन ( Pitocin ) का इंजेक्शन दिया जाना चाहिए । बाद में दिन में दो बार 0.5 मि.ग्रा , की अर्गोमेट्रीन दवा तब तक खानी चाहिए , जब तक गर्भपात के बाद का रक्तस्राव ( Bleeding ) पूरी तरह से न रुक जाये । 

ध्यान रहे कि अर्गोमेट्रीन का सेवन एक बार में पांच दिनों से अधिक समय तक न किया जाये । यदि रक्तस्राव रुक जाये अथवा कोई ज्वर या बेचैनी , वगैरह न हो तो रोगी पांच दिन के अंदर - अंदर घर वापस जा सकता है किंतु अगले मासिक धर्म से पहले उसे जांच करवा लेनी चाहिए और तीन माह तक गर्भधारण नहीं करना चाहिए ।

यदि खून में हीमोग्लोबिन ( Haemoglobin ) की कमी काफी गंभीर हो जाये तो उपरोक्त इलाज तक ही सीमित रहना मूर्खता है । अर्गोमेट्रीन ( Ergometrine ) देते रहने के बावजूद यदि रक्तस्राव ( Bleeding ) जारी रहे तो गर्भाशय ( Uterus ) की पूरी तरह से जांच कर लेनी चाहिए कि गर्भपात पूर्ण है अथवा नहीं तथा गर्भनाल के ऊतक ( Placental tissues ) तो नहीं रह गये हैं । ऐसी अवस्था में गर्भाशय की सफाई करवाना ही बेहतर होगा । 

इसके अलावा Rh निगेटिव ( Rhesus Negative ) महिला को आर.एच. ऐंटी ' डी ' इम्यूनोग्लोबुलिन ( Anti 'D ' Immunoglobulin ) दिया जाना चाहिए ।


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