अपूर्ण गर्भपात ( Incomplete abortion ) क्या है ? : What is an incomplete abortion ?

अपूर्ण गर्भपात ( Incomplete abortion ) क्या है ?

अपूर्ण गर्भपात ( Incomplete abortion ) क्या है ? : What is an incomplete abortion ?

यह एक ऐसी महिला का उदाहरण है जो पांच बच्चों को जन्म देने के बाद एक बार फिर गर्भवती थी । उसे दो माह का गर्भ था । हड़बड़ी और घबराहट की हालत में उसके रिश्तेदार उसे अस्पताल लाये थे क्योंकि पिछले दो दिनों से उसे लगातार भीषण रक्तस्राव ( Severe bleeding ) हो रहा था । कई तरह की दवाइयां लेने तथा दूसरे प्रयत्नों के बावजूद स्राव रुक नहीं पा रहा था । 

महिला की जांच की गयी तो पता लगा कि उसका गर्भाशय ( Uterus ) सामान्य से कुछ बड़ा तथा पिलपिला - सा हो गया था । गर्भाशय - द्वार ( Cervix ) न तो पूरी तरह से बंद था और न ही खुला । लगातार रक्तस्राव के कारण उसके शरीर में खून की अत्यधिक कमी से रक्तक्षीणता ( Anaemia ) की स्थिति पैदा हो गयी थी । उसे उचित चिकित्सा दी गयी चार - पांच दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी । 

दरअसल गर्भपात के बाद भी उस महिला का गर्भाशय पूरी तरह से साफ नहीं हुआ था बल्कि उसमें कुछ अंश शेष रह गये थे । रक्तस्राव ( Bleeding ) जारी था । कभी - कभी ऐसा होता है कि गर्भपात होने के बाद भी गर्भनाल ( Placenta ) या अन्य भाग पूरी तरह से बाहर नहीं निकल पाते और उनके अंश गर्भाशय में ही रह जाते हैं । यही अपूर्ण गर्भपात है । 

लक्षण ( Symptoms ) - 

अपूर्ण गर्भपात में योनिमार्ग ( Vagina ) से रक्तस्राव के साथ कुछ टुकड़े - टुकड़े से भी बाहर निकलते हैं और उस समय पेट में ऐंठन के साथ जोरदार दर्द होता है । महिला अक्सर पेट में भारीपन और कभी - कभी दर्द का अनुभव करती है । 

यदि महिला इस तरह के रक्तस्राव के तुरंत बाद चिकित्सालय आ जाती है तो उस समय जांच करने पर गर्भाशय - द्वार ( Cervix ) पूरी तरह से खुला मिलता है और कभी कभी गर्भस्थ शिशु के बचे भाग अथवा गर्भनाल ( Placenta ) भी दिखाई दे जाते हैं । 

यदि महिला पीड़ा शुरू होने के लगभग 12 घंटे के बाद आती है , तब जांच करने पर पता लगता है कि गर्भाशय ( Uterus ) का आकार सामान्य से बड़ा हो गया है तथा गर्भाशय - द्वार पूरी तरह बंद नहीं है । यदि इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है ।

कारण ( Causes ) -

अपूर्ण गर्भपात में गर्भ पूरी तरह से गर्भाशय से बाहर नहीं निकल पाता और भूण ( Embryo ) , गर्भनाल ( Placenta ) या विकसित होते बच्चे के कुछ अंश अंदर ही रह जाते हैं । यह स्थिति ग्रामीण महिलाओं के लिए बहुत कष्टदायक होती है क्योंकि गांवों में चिकित्सालय अथवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों ( Primary Health Centres ) की सुविधाएं या तो होती नहीं अथवा दूर होती हैं।

कभी - कभी अस्पतालों या केंद्रों में चिकित्सकों की नियुक्ति ( Appointment ) ही नहीं होती अथवा वे ड्यूटी के घंटों में भी अनुपस्थित होते हैं।

इन हालात में यदि किसी महिला का गर्भ गिर जाये और उसे उचित चिकित्सा न मिले तो उसका बचना लगभग असंभव हो जाता है । यही नहीं , गांवों में लोग मिडवाइफ ( दाई ) या अन्य अनुभवी बूढ़ी महिलाओं से ही प्राथमिक चिकित्सा की सहायता लेते हैं किंतु यह ज्ञात नहीं हो पाता कि गर्भपात पूरी तरह से हो गया है या नहीं । गर्भाशय की जांच भी नहीं हो पाती और सफाई भी । इसलिए कई मामलों में गर्भपात महिलाओं के लिए जानलेवा सिद्ध हो सकते हैं । 

उपचार ( Treatment ) -

महिला को गर्भधारण के प्रारंभिक दिनों से ही प्रसव - पर्व चिकित्सा केंद्रों ( Antenatal Clinics ) में जाकर अपनी नियमित जांच करानी चाहिए और शरीर में पायी गयी बीमारियों का यथाशीघ्र इलाज कराना चाहिए । 

गर्भपात की स्थिति में जरा - सी भी लापरवाही न बरतें बल्कि तुरंत गर्भाशय ( Uterus ) की जांच तथा सफाई करायें । कहीं ऐसा न हो कि थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा बन जाये और कीटाणुओं से शरीर में संक्रमण ( Infection ) फैल जाये । 

चूंकि इस गर्भपात में भी योनि ( Vagina ) से काफी रक्त निकल चुका होता है और महिला के शरीर में रक्त की कमी हो जाती है , इसलिए रक्त देने के लिए ताजे रक्त का प्रबंध रखें । इसके साथ - साथ महिला को सिटोसिनॉन ( Syntocinon ) या अर्गोमेट्रीन ( Ergometrine ) के इंजेक्शन भी दें , जिससे उसके गर्भाशय की सफाई हो सके । 

चिकित्सक या मिडवाइफ को चाहिए कि वे ऐंटीसेप्टिक ऑबस्टेट्रिक बस्ताने ( Antiseptic obstetric gloves ) पहन कर गर्भाशय की अंदर से हलकी - हलकी मालिश करें । इससे गर्भाशय में शेष रह गये गर्भनाल ( Placenta ) और झिल्लियां वगैरह बाहर निकल आते हैं । 

गर्भाशय संकुचन ( Uterine Contractions ) के लिए भी दवाइयां दी जाती हैं यदि फिर भी रक्तस्राव ( Bleeding ) बंद न हो तो स्वच्छ पैड ( Sanitary pads ) का उपयोग करें । ग्लूकोज ( Glucose ) में भी सिटोसिनॉन ( Syntocinon ) या पिटोसिन मिलाकर दी जाती है । ये दवाइयां भी गर्भाशय के संकुचन में सहायक होती हैं । 

गर्भाशय की सफाई के लिए वैक्यूम ऐस्पिरेटर ( Vacuum aspirator ) का भी उपयोग किया जाता है ।


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