पूर्ण गर्भपात ( Complete abortion ) क्या है ? : What is a complete abortion ?

पूर्ण गर्भपात ( Complete abortion ) क्या है ? : What is a complete abortion ?


यह एक ऐसी महिला का केस है जिसे दो माह का गर्भ था किंतु पिछले कुछ दिनों से वह रक्तस्राव से पीड़ित थी । जिस दिन वह चिकित्सालय में मेरे पास आयी थी , उसी दिन सुबह स्राव ( Secretion ) के साथ उसके योनिमार्ग ( Vagina ) से रक्त का एक गोला - सा बाहर निकला था । उसी कारण वह काफी घबरायी हुई थी और जांच करवाना चाहती थी कि गर्भपात हो गया है अथवा नहीं । 

उसकी शारीरिक जांच की गयी । महिला की नब्ज ( Pulse ) कुछ तेज चल रही थी और रक्तदाब ( Blood pressure ) सामान्य से कुछ कम था । इसके अलावा कुछ भी असामान्य नहीं था । पेट को देखकर गर्भाशय ( Uterus ) का उभार प्रतीत नहीं होता था । योनिमार्ग से जांच करने पर पता लगा कि गर्भाशय का मुंह बंद हो चुका है तथा गर्भाशय द्वार ( Cervix ) से रक्त की कुछ बूंदें आ रही हैं । 

महिला को एक ऐम्पूल ( Ampule ) अर्गोमेट्रिन का इंजेक्शन दिया गया और एक बोतल ग्लूकोज ( Glucose ) चढ़ाया गया । धीरे - धीरे उसका रक्तदाब सामान्य हो गया । संक्रमण ( Infection ) से बचाने के लिए उसे ऐंटीबॉयोटिक ( Antibiotics ) तथा गर्भाशय के संकुचन ( Uterine Contractions ) की दवाइयां दी गयीं । 

दूसरे दिन महिला सामान्य हो गयी । उसे यह परामर्श देकर चिकित्सालय से छुट्टी दे दी गयी कि वह दुबारा 6 माह तक गर्भधारण न करे । यह पूर्ण गर्भपात की अवस्था है । महिलाओं में इस तरह के गर्भपात प्रायः गर्भधारण ( Conception ) के आठ सप्ताह के दौरान होते हैं । 

लक्षण ( Symptoms ) -

गर्भस्थ थैली ( Uterovesical pouch ) एक पिंड के रूप में होती है । पूर्ण गर्भपात में यह पिंड पूरी तरह से गर्भाशय से बाहर निकल पड़ता है । देखा गया है कि इस दौरान महिलाओं के गर्भाशय में संकुचन Uterine contractions ) सामान्य होने से रक्तस्राव ( Bleeding ) बंद हो जाता है और नाममात्र को रक्त के धब्बे भर दिखाई देते हैं । 

चूंकि गर्भाशय ( Uterus ) पूरी तरह से संकुचित हो जाता है , इसलिए महिलाओं को उदरस्थल के निचले भाग में दर्द नहीं होता । गर्भाशय का मुंह बंद हो जाता है और गर्भाशय धीरे - धीरे सामान्य आकार में आने लगता है ।

उपचार ( Treatment ) -

पूर्ण गर्भपात में महिला की सावधानीपूर्वक जांच की जानी चाहिए । गर्भपात में अत्यधिक रक्तस्राव के कारण यदि महिला के शरीर में रक्त की बहुत कमी हो गयी हो तो उसे उचित दवाइयां दी जानी चाहिए ताकि रक्त की कमी पूरी हो सके । 

इसके अलावा गर्भपात की ऐसी स्थिति में संक्रमण ( Infection ) की भी बहुत संभावनाएं रहती हैं । इसलिए महिला को ऐंटीबायोटिक्स ( Antibiotics ) के साथ - साथ योनिमार्ग ( Vagina ) में 6 से 15 दिनों तक ऐंटीसेप्टिक पेसरी ( Antiseptic pessary ) रखने को दें । इस दौरान लगभग एक माह तक पति के साथ संभोग ( Intercourse ) न करें । दुबारा गर्भधारण ( Conception ) करने के बाद चिकित्सक से नियमित जांच करायें । 

गर्भपात के बाद सामान्य गर्भाशय संकुचन ( Normal uterine Contractions ) में थोड़ी देर लगती है । इसलिए इस दौरान गर्भाशय ( Uterus ) में तथा उदरस्थल के नीचे हलका - हलका दर्द होता रहता है । उसके इलाज के लिए दर्दनिरोधक गोलियों ( Painkilling tablets ) तथा गर्भाशय में सामान्य संकुचन के लिए अर्गोमेट्रीन ( Ergometrine ) के इंजेक्शन या उसकी गोलियों का प्रयोग करें । 

गर्भ के परिणामस्वरूप स्तनों ( Breasts ) में भारीपन तथा दूध भी आ सकता है । इसके लिए स्तनों को ऊपर उठाकर सहारा देने वाली ' ब्रा ' ( Bra ) पहननी चाहिए और कभी - कभी हलका सेंक भी उपयोगी हो सकता है ।

image credit - Stan Wiechers from New York

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