डिप्रेशन और एंजाइटी से कैसे निकले? [ 100% Reliable ] : How to get out of depression and anxiety?

डिप्रेशन और एंजाइटी से कैसे निकले? [ 100% Reliable ] : How to get out of depression and anxiety?

डिप्रेशन और एंजाइटी से कैसे डील करें? यह कोई मजाक नहीं है,, लेकिन फिर भी इसमें घबराने की जरूरत नहीं और शर्मिंदा होने वाली तो कोई बात ही नहीं"


 
यह किसी को भी हो सकता है यहां तक कि कुछ बड़े-बड़े सेलिब्रिटी जो पर्दे पर काफी खुश दिखते हैं इन्होंने भी अपनी लाइफ में मेंटल इशूज फेस किए हैं लेकिन अपनी हिम्मत से ये भी बाहर निकले हैं आप भी निकल जाएंगे" 

इस पोस्ट में मैं आपसे कुछ बातें शेयर करना चाहता हूं जिससे आपको मदद होगी, 

आईये तो फिर शुरू करते हैं -

डिप्रेशन और एंजाइटी में कैसा फील होता है यह वही बता सकता है जिसने इसे खुद झेला हो, सच में ऐसा लगता है जैसे अब कुछ नहीं होने वाला लाइफ जैसे खत्म हो गई हो, ऐसा लगता है जैसे किसी गहरे गड्ढे में गिरे जा रहे हों और उम्मीद की कोई किरण ही नहीं दिखती, लेकिन दोस्तों सच कहूं तो बस ऐसा लगता है 'उस वक्त' 

मैं इसलिए कह पा रहा हूं कि मैंने खुद कुछ साल पहले अपनी लाइफ में ऐसा ही एक लो फेज देखा था, तब पता लगा कि डिप्रैशन-एंजायटी किसी भी और फिजिकल डिजीज( रोग ) की तरह ही रीयल है और होती है और इसी एक्सपीरियंस के बेसिस पर मैं कह सकता हूं कि आप इससे पक्का निकल जाएंगे, 

बस एक चीज कर लो वह है "डिसाइड" कि मुझे निकलना है, अपने लो फेज में मैंने कुछ ऐसी चीजें की थी जिससे मुझे बहुत फायदा हुआ था और वही मैं आपसे शेयर करने वाला हूं,

दोस्तों यह तो हमें पता ही है कि हमारा शरीर पांच तत्वों से बना है, आपके डिप्रैशन एंजायटी का रीजन चाहे कुछ भी क्यों ना हो, अगर आप थोड़ा थोड़ा इन पांच तत्वों से कनेक्ट करो तो इंस्टेंट रिलीफ मिलता है, लेकिन कैसे? -

जैसे पानी की बात करते हैं आई एम स्योर आपने नोटिस किया होगा कि कैसे नहाने के बाद भले थोड़ी देर के लिए सही लेकिन सारी टेंशन धूल सी जाती है, ये इसलिए होता है क्योंकि हमारा कनेक्शन पानी तत्व से हुआ जिससे 70% हमारा शरीर बना है, 

ऐसी हालत में मन नहीं करता नहाने का,, ऐसा लगता है कि बस लेटे रहो लेकिन मैं यह कह रहा हूं कि नहाना बिल्कुल भी मिस ना करें बल्कि दो बार नहाये बहुत फायदा होगा, 

अच्छा,, एक और चीज बताता हूं तो शायद अजीब लगे लेकिन काम करती है यह कॉन्सेप्ट है वाटर मेमोरी का आज मॉडर्न साइंस ने भी इसे प्रूफ कर दिया है, 

बेसिकली जब भी आप पानी पिए उसे 10-15 सेकेंड के लिए पॉजिटिवली चार्ज करें अपने थॉट( सोच ) से,,, जैसा आप उसे चार्ज करेंगे वैसा ही वह पानी आपकी बॉडी में जाकर बिहेब है करेगा, 

दोस्तों हमारा माइंड हमारी बॉडी से कनेक्टेड है आपने सुना होगा कि "जैसा अन्न वैसा ही मन" आप जो भी खाते हैं उसका पॉजिटिव या नेगेटिव इंपैक्ट माइंड पर पड़ता है, फ़ूड की जैसी वाइब्रेशन होगी वैसा ही माइंड रिएक्ट करेगा, सात्विक, राजसिक और तामसिक भोजन का कॉन्सेप्ट इसी चीज पर आधारित है,

कहते है कि अगर हम मैक्सिमम टाइम सात्विक आहार लें तो हमारा माइंड इतने न्यूरोट्रांसमीटर बना सकता है कि एंटीडिप्रेशन पिल्स की जरूरत ही ना पड़े,वैसे किसी भी केश में एंटीडिप्रेशन पिल्स तो कोई सलूशन है ही नहीं, 

स्ट्डीज भी यही कहते हैं इन गोलियों से माइंड थोड़ी देर के लिए इनएक्टिव जरूर हो जाता है लेकिन इनके साइड इफेक्ट होते हैं और सबसे बड़ी बात एक डिपेंडेंसी क्रिएट हो जाती है, अगर आपको मेडिसिन लेनी है तो वह ले जिनका कोई भी साइड इफेक्ट ना हो, 

बाकी पृथ्वी तत्व से कनेक्ट करने के लिए आप नेचर से थोड़ा जूड़े, आपने देखा होगा की कैसे एक बच्चा मिट्टी में खेल कर खुश हो जाता है, यह हमारा पृथ्वी तत्व के साथ कनेक्शन ही है दोस्तों, 

क्या आपको पता है कि सर्दियों में सूरज की कमी की वजह से डिप्रेशन के केसेस बढ़ जाते हैं यह मैं नहीं कह रहा बल्कि रिसर्च ने भी इस बात को कंफर्म किया है कि धूप निकली हो तो मूड अच्छा रहता है, 

इसलिए आपको कोशिश करनी चाहिए कि थोड़ी देर धूप में जरूर बैठा जाए बाकी आप सूर्य नमस्कार कर सकते हैं, आग जलाकर बैठ सकते हैं या रात को सोने से पहले त्राटक भी कर सकते हैं, त्राटक तो जबरदस्त योगिक प्रेक्टिस है जिसका एक ही बार में बिनीफिट दिख जाता है, 

या एक रूम में बंद होने से अच्छा अकेले पार्क निकल जाओ, हो सके तो दिन में 10-15 मिनट प्राणायाम कर सको तो बहुत फायदा होगा, अनुलोम-विलोम, कपालभाति, ब्राह्मणी बहुत इफेक्टिव है, 

कुछ भी मन ना करे तो खुली हवा में थोड़ी देर बैठकर लंबी सांसें ही ले लो, सुबह-सुबह ऐसी शुरुआत हो जाए तो पूरा दिन माइंड स्टेबल रहेगा, अगर सुबह उठने की हिम्मत ना बने तो शाम को ही कर लो, 

मेरा यह एक्सपीरियंस है जब हम ऐसे लो फेज से गुजर रहे होते हैं तो मेडिटेशन करना थोड़ा इजी हो जाता है, 5-10 मिनट आती जाती सांसों पर मन ठिकाना आसान भी लगता है और इससे बहुत शांति भी मिलती है आपको जो मेडिटेशन प्रेस्टिक अच्छी लगे वह कर लो लेकिन कर लो यह मौका अच्छा है, 

म्यूजिक - 

सूदिंग इंस्ट्रुमेंटल म्यूजिक से माइंड पर इंस्टेंट पॉजिटिव इंपैक्ट पड़ता है, ऐसे म्यूजिकस का एक प्ले लिस्ट बना लो और बस उनकी आवाज कानों में पड़ने दो, आपको जरूर सुकून मिलेगा, 

दोस्तों यह छोटी-छोटी चीजें करने से हम उन पांच तत्वों के करीब आ जाएंगे जिनसे हमारे शरीर की रचना हुई है, डिप्रेशन से निकलने का इससे फुल प्रूफ तरीका हो ही नहीं सकता, 

जैसे खाना खाने से हमारी बॉडी को नरिसमेन्ट मिलती है उसी तरह से हम क्या देखते हैं, क्या पढ़ते हैं, किससे बात करते हैं यह सब माइंड को खाना खिलाने जैसा है, आप जैसा खिलाएंगे वैसा ही आपका मन हो जाएगा और फिर वैसे ही थॉट्स आएंगे, 

इसलिए अगर आप महान लोगों की बायोग्राफीस पढ़े, टीवी पर ऐसी चीजें देखें जिससे आपको इंस्पिरेशन मिले तो आप बड़ी जल्दी इससे निकल जाएंगे, 

मेरा एक पर्सनल सजेशन है बी आर चोपड़ा जी की महाभारत का एपिसोड 73 जरूर देखना जिसमें भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को गीता का सार सुनाते हैं इसे रिलीजन से जोड़कर नहीं बल्कि अन-बाएसड होकर ऐसे ही देखना, जैसे हम पिक्चर देखते है,, हो सकता है इसे देखकर आपकी लाइफ बदल जाए,  

पास्ट को भूलने के लिए आप जल्दी उठना स्टार्ट कर सकते हो, मैं जानता हूं ऐसे केस में सुबह उठना सबसे मुश्किल होता है लेकिन ट्राई करो,, 

बॉडी मसाज करने से नाड़ीया स्ट्रांग होती है ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है थोड़ी देर खेलो थोड़ा पसीना बहाओ इससे भी माइंड में फील गुड्स हॉर्मोन प्रड्यूस होते हैं, 

मेरा पर्सनल ओपिनियन है कि ऐसे टाइम में मंदिर, गुरुद्वारा जाने से बहुत सुकून मिलता है, बाकी अगर आपके मन में कोई बात हो तो इसे या तो अपने किसी अंडरस्टैंडिंग दोस्त शेयर करो या आप अकेले में शीशे के सामने ही बोल दो मन हल्का हो जाता है, 

मुझे पता है कि आप कहोगे कि हम से तो उठा नहीं जा रहा और आपने इतना कुछ बता दिया,, लेकिन मैं यही कहूंगा कि जितना हो सके उतना कर लो, कोई एक चीज स्टार्ट करो और धीरे-धीरे सब ट्रैक पर आ जाएगा, 

दोस्तों डिप्रेशन या एंजाइटी भी बहुत कुछ सीखा जाता है यह वो फेश होता है जब हमें सच मे लाइफ का थोड़ा सा मतलब समझ आने लगता है इसलिए भले ही आपको यह बहुत बेकार फेज लग रहा हो लेकिन सच कहूं तो यह एक ब्लेसिंग भी है, 

इसको खाली ना जाने दे फिर कुछ महीने बाद जब आप पीछे मुड़ के देखेंगे तो इसी वक्त में सीखी हुई चीजों के लिए उस सुप्रीम एनर्जी का शुक्र करेंगे, 

दोस्तों अगर आपको यह पोस्ट लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें,,


image credit - Sachhiprerna

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