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गठिया( gout ) क्या है? कैसे होता है? इलाज किस प्रकार किया जाता है? What is gout? How does it happen? How is treatment done?


गाउट( गठिया ) एक अर्थराइटिस रोग है, गाउट में यूरिक एसिड लेवल खून में ज्यादा होने लगता है और जहां यह जमा होता है वहां inflammation करने लगता है, यह सबसे पहले जमा जॉइंट में होता है और जॉइंट में प्रॉब्लम क्रिएट करना शुरू कर देता है,

गाउट दो प्रकार का होता है -

■ Acute gout - इस प्रकार के गठिया में जोड़ों में बहुत तेज दर्द होता है,

■ Chronic gout - इसमें दर्द लगतार न होकर कुछ-कुछ समय अन्तराल में होता है इसमें दर्द ज्यादा तेज नहीं होता, पर इस प्रकार के गठिया में एक से ज्यादा ज्वाइंट इफेक्ट हो सकते हैं,


नोट - अल्टीमेटली देखा जाए तो गाउट की प्रॉब्लम शरीर में ज्यादा यूरिक एसिड की मात्रा बनने से ही होता है या तो शरीर यूरिक एसिड ज्यादा बना रहा है या तो शरीर से बाहर नहीं निकाल पा रहा, तो ऐसी स्थिति में यूरिक-एसिड जॉइंट के सोबोनियल फ्लुइड मे जमा होने लगेगा और वहां दिक्कत उत्पन्न करने लगेगा,

कारण -

गाउट होने के कई सारे फैक्टर है :-

■ इसमें सबसे पहला फेक्टर जेनेटिक्स है,

■ गाउट की प्रॉब्लम पुरुषों में महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा होने के चांसेस होते हैं,

■ अगर आप शराब पीते हैं तो भी गाउट होने का खतरा बना रहता है क्योंकि शराब यूरिक एसिड की मात्रा को बढ़ाता है,

■ उम्र बढ़ने के साथ गाउट होने की संभावनाएं भी बढ़ने लगते हैं,

■ इसके अलावा डायबिटीज, मोटापा, किडनी प्रॉब्लम, एनीमिया, सिकल सेल डिजीज, ल्यूकेमिया, ब्लड कैंसर और भी बहुत से कारणों से भी यूरिक एसिड लेवल बढ़ जाता है इसीलिए यूरिक एसिड की मात्रा को समय-समय पर जांचना जरूरी हो जाता है,

■ गाउट कुछ प्रकार के दवाइयों के वजह से भी हो सकता है कुछ दवाई यूरिक एसिड को इफेक्ट करती है जैसे कि - अगर आप पेशाब ज्यादा लाने वाली दवाइयां ज्यादा ले रहे हैं तो इस तरह की दवाइयां यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ाती हैं,

नोट :- यूरिक एसिड की मात्रा खून में नॉर्मल मात्रा में रहना अच्छा रहता है, यूरिक एसिड समय पर बॉडी में एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है पर इसकी ज्यादा मात्रा हमारे शरीर के लिए खराब है, यूरिक एसिड जब हमारे बॉडी में ज्यादा होता है तो इसके छोटे-छोटे क्रिस्टल बनने लगते हैं जो जोड़ों जैसे कि - पैर के अंगूठे मैं जमा होने लग जाते हैं और वहां गांठ पैदा करते हैं, यह ज्यादातर पैर के अंगूठे, घुटने जैसे ज्वाइंटो को ज्यादा इफेक्ट करती हैं,

गाउट होने पर यह जॉइंट में सूजन पैदा करता है इसके साथ ही वहां का हिस्सा फूलने लगता है और दर्द शुरू हो जाता है कई बार यह दर्द है रात को शुरू होता है और धीरे-धीरे यह दर्द बढ़ते चले जाता है तथा तेज दर्द का रूप ले लेता है, जॉइंट दिखने में लाल दिखाई देने लगेगा तथा दबाने से दर्द भी होगा इसके साथ सूजन भी होगा, गाउट के अटैक से बुखार तक भी हो सकता है,


"गाउट से होने वाला दर्द और सूजन कुछ दिनों में ठीक हो जाता है पर यह 6 से 12 महीनों में इसके दोबारा शुरू होने के चांसेस ज्यादा होते हैं"

अगर किसी को गठिया बार-बार हो रहा है तो इसे क्रॉनिक गाउट या गठिया कहते हैं जैसे कि ऊपर हमने जाना इस प्रकार के गाउट में जॉइंट का हिलाना डुलाना यानी मोशन बिल्कुल खत्म हो जाती है,


कैसे चेक किया जाता है?

यूरिक एसिड की मात्रा को कई प्रकार से चेक किया जा सकता है :- 

■ ब्लड से, 

■ यूरिन से, 

■ ज्वाइंट का एक्स-रे करके चेक कर सकते हैं, 

■ या फिर जॉइंट के लुब्रिकेशन फ्लुइड को निकाल कर भी चेक किया जा सकता है,

यूरिक एसिड का लेवल अगर 7 है तो यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ी हुई है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि जिनका 7 से ज्यादा है उनको गाउट की प्रॉब्लम होगी, गाउट की प्रॉब्लम अन्य दूसरे कारणों से भी हो सकते हैं लेकिन जिन लोगों में जॉइंट प्रॉब्लम है और यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है ऐसे लोगों को यूरिक एसिड को कम करके जरुर देखना चाहिए,


क्या-क्या दवाइयां चलती है इसमें?

इसमें सबसे पहला दवा सूजन और दर्द कम करने वाली चलती है anti-inflammatory non-steroidal ( anseds, ब्रूफेन, इंडामेथासेन, पेरासिटामोल ऐसी दवाइयां दी जा सकती है )

कई बार दर्द बहुत ज्यादा बढ़ जाता है ऐसे में और स्ट्रांग मेडिसिन की जरूरत पड़ जाती है जैसे कि - कोलचीसीन, कार्टिगो स्टेरॉयड,

और इसके कुछ इंजेक्शन आती है जो जरूरत पड़ने पर दे सकते हैं, एनाकिनरा  इंजेक्यशन यह भी अर्थराइटिस में मोस्ट कॉमनली दी जाती है,

कई बार दवाओं से 24 से 48 घंटों में दर्द और सूजन चला जाता है लेकिन दवाइयां कंटिन्यू करनी पड़ती है, लंबे समय तक यूरिक एसिड को कम रखने वाली दवाइयां चलानी पड़ती है उसी में कुछ दवा का नाम है जैसे- एलो-प्यूरोनॉल, प्रोबेनेसीड यह सभी दवाइयां खून में यूरिक एसिड लेवल को कम करती है,


इसके साथ ही आपको अपनी लाइफ स्टाइल में भी कुछ बदलाव करने होंगे -

■ शराब पूरी तरह बंद करनी होगी ( इसमें बियर सबसे खराब है वाइन तो फिर भी ठीक है लेकिन बीयर सबसे खराब है )

■ वजन कम करें - एक्सरसाइज रोजाना करें,

रेड मीट, शक्कर, गुड़, चीनी का सेवन कम ही करें,

■ डेरी प्रोडक्ट खा सकते हैं मलाई छोड़कर, दूध भी बिना मलाई वाला ही पिए,

■ साथ ही साथ वेजिटेबल्स, नट्स, फ्रूट्स, वॉल-ग्रेन, कॉफी, विटामिन-C इसमें मददगार होती हैं,



image credit - Parkov~enwiki,, www.scientificanimations.com/,, Taka Morita

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