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निम्न रक्तचाप [ हाइपोटेन्शन- Hypotension ] की समस्या क्या है? और इसकी उचित चिकित्सा किस प्रकार संभव है? What is the problem of low blood pressure [Hypotension]? And how is its proper treatment possible?

 निम्न रक्तचाप [ हाइपोटेन्शन- Hypotension ] 


अन्य नाम - हीन रक्त दाब , न्यून रक्त दाब , अल्प रक्त चाप , लो ब्लड प्रेशर ( Low Blood Pressure ) आदि । असामान्य रूप से कम धमनीय रक्त दाब । 

परिचय - प्रकुंचनीय तथा अनुशिथिलनीय रक्त दाब का सामान्य से कम हो जाना अल्परक्त दाब ( Low Blood Pressure ) कहलाता है । Decreased Systolic and Diastolic blood pressure below normal . 

किसी भी कारण से उत्पन्न रक्त दाब की कमी की अवस्था को न्यून रक्त दाब कहते हैं ।

रोग के प्रमुख कारण - 

■ कभी - कभी आनुवंशिक ( Heredi- tary ) । 

■ पूरे परिवार में सम्भव । 

■ हृदय रोग - विशेषकर वाम निलय का हृद् पात । हृद् गति का बंद होना । 

■ एडिसन का रोग , राजयक्ष्मा , पोषण की कमी । 

■ रक्त के आयतन में कमी ( जैसे - रक्तस्राव एवं डिहाइड्रेशन ) ।

■ शोक एवं निपात ( Collapse ) की अवस्था । 

■ अत्यधिक थकावट एवं ज्वर । 

■ तीव्र संक्रामक रोग विशेषतः डिफ्थी रिया , टी.बी. एवं रक्ताल्पता में । 

■ मायोकार्डियल इन्फार्कशन , इम्फाय सीमा , एक्यूट कार्डियक फेल्योर । 

■ अन्य रोग - अति इन्सुलिनता , स्त ब्धता ( Shock ) , हृद् धमनी रोध । 

■ हीन रक्त दाब की अवस्था पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक मिलती है ।


रोग के प्रमुख लक्षण -

■ आलस्य का आना स्वाभाविक । 

■ शरीर का दुर्बल होना । 

■ सिर चकराना । 

■ सिर भारी होना । 

■ मन का दुखी रहना । 

■ अनिद्रा एवं थकान । 

■ कानों में धूं - धूं की आवाज । 

■ दिल डूबना ( Sinking ) । 

■ ठंडे पसीने आना । 

■ दिल की धड़कन बढ़ना । 

■ शक्ति का घटते जाना । 

■ मस्तिष्क अवसाद या बातें भूल जाना । 

■ उठने - बैठने तथा लेटने पर अंगों में शून्यता आ जाना । 

■ झुनझुनी उठना । 

 लाक्षणिक अल्प रक्त दाब -

■ हाथ - पैरों का ठंडा पड़ जाना ।

■ श्वास कष्ट , शरीर तापमान अवसामान्य । 

■ त्वचा पाण्डुता ( Pallor ) युक्त ।

जब सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर स्थायी रूप से मत और थतत मि.मी. पारद से कम रहता है तब अल्प रक्त दाब कहा जाता है ।

■ इसमें लक्षणों की उपस्थिति आवश्यक नहीं । रोगी को कोई कष्ट नहीं होता । यदि कोई लक्षण होते भी हैं तो -

■ सिर दर्द , 

■ मितली , 

■ कभी - कभी मूर्छा की शिकायत होती है । मूर्छा प्रायः लेटी हुई अवस्था अथवा खड़े होने पर

मस्तिष्क थोड़ी भी मेहनत से चिड़चिड़ा हो उठता है तथा सिर दर्द बना रहता है ।

रोग की पहिचान - 

■ किसी युवक का रक्त दाब ( B.P. ) न्यून ( low ) तब माना जाता है जबकि उसका सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 110 मि.मी. से कम हो जाता है । 

■ नब्ज धीमी एवं छोटी । उंगलियों से आसानी से दबाई जा सकती है । 

■ रोगी जरा - सा परिश्रम करने पर थक जाता है , उसे गश आजाता है- इन लक्षणों से इसे आसानी से पहिचाना जा सकता है । 

■ शारीरिक परीक्षण में कोई खास बात नहीं मिलती है , केवल रोगी दुर्बल एवं सुस्त हो सकता है । 


रोग का परिणाम - 

■ उचित चिकित्सा से रोगी का जीवन सरलता से चलता रहता है । 

■ रोग के अधिक दिन तक चलते रहने से ' सिर दर्द बराबर बना रहता है और उसका सिर चकराया करता है । 

■ न्यून रक्त दाब की उत्पत्ति प्रायः केशिकाओं के विस्फारण ( Capillary dilatation ) के कारण होती है ।


अल्प रक्तदाब की चिकित्सा विधि -

■ स्वास्थ्य के कारण पर ध्यान आवश्यक । 

■ धड़कन की गड़बड़ी अथवा हृदय स्थान के अत्यधिक कमजोर होने पर उसके अवसाद को मिटाने एवं शक्तिदायक औषधियों की व्यवस्था करनी चाहिये । 

■ यदि रोग प्लीहा की खराबी तथा आँतों के सम्यक कार्य न होने से यदि रोग है तो तत्सम्बन्धी व्यवस्था करनी चाहिये । 

■ चिकित्सा मुख्य रूप से कारण पर आधारित । 

■ रोगी को मनोविकारों से बचायें । 

■ कब्ज न होने दें ।


पथ्यापथ्य एवं सहायक चिकित्सा - 

■ सामान्य स्वास्थ्य की ओर ध्यान विशेष आवश्यक । 

■ आहार में पौष्टिक पदार्थ तथा विटामिनों की प्रचुरता करने से रोग दूर हो सकता है । 

■ शारीरिक एवं मानसिक विश्राम पर्याप्त मात्रा में मिलना चाहिये । 

■ अधिक देर तक खड़े रहना , गरम एवं नम वायुमंडल में रहना तथा गरम पानी से स्नान आदि से बचना चाहिये ।


ऐसा भी - 

■ शरीर पर महानारायण तेल की मालिश विशेष उपयोगी । 

■ कोमल शैया पर पूर्ण विश्राम । 


अल्प रक्तदाब की पेटेन्ट औषधि चिकित्सा ' . -

■ अंशकालिक रूप से रक्तचाप की वृद्धि के लिये - ' मेफेण्टीन सल्फेट ( Mephentine Sulphate ) तथा ' कोरामीन ' ( Coramine ) , एवं ' एड्रिनलीन ' ( 1 : 1000 शक्ति का ) का मांसपेशीगत् इन्जेक्शन दिया जाता है । 

■ इफेड्रीन सल्फेट ( Ephedrine Sulphate ) 45 मि . ग्रा . की मात्रा में टेबलेट दिन में 3 बार देते हैं । अथवा - 

■ एम्फिटामिन सल्फेट ( Amphetamine Sulphate ) की 1 टेबलेट मुख द्वारा सेवन कराते हैं ।


विशेष चिकित्सा के अन्तर्गत -

★ ग्लूकोज सैलाइन ' , डेक्स्ट्रावेन तथा उसी के समक्ष औषधि का इन्फ्यूजन शिरामार्ग ( I / V ) से देते हैं । 

नोट- तब देते हैं जब तक रक्त दाब ( B.P. ) स्वाभाविक रूप में नहीं आ जाता । 

★ इसके साथ ही आवश्यकता पड़ने पर इसी के साथ - ' नोर - एड्रिनलीन ( Nor adrenaline ) , वेरिटॉल ( Veritol ) आदि औषधियाँ भी देते हैं । 

★ अनीमिया ' की स्थिति में ' आयरन के योग तथा लिवर एक्स्ट्रेक्ट के इन्जेक्शन दिये जाते हैं ।

★ रक्तस्राव से उत्पन्न अल्प रक्त दाब में - ब्लड ट्रान्सफ्यूजन । 

नोट - 

विटामिन बी कम्पलेक्स , बी12 के साथ अधिक मात्रा में सेवन करायें । 

इफेड्रीन ' , ' डेक्सीड्रीन ' आदि औषधियाँ तात्कालिक आवश्यकता की पूर्ति कर सकती हैं । 

याद रखिये - ' सुपरग्लूकोज 50 % -25 मि . ली . शिरा द्वारा कोरामीन के साथ देने से भी इस रोग में लाभ होता है । इसके अतिरिक्त ' मल्टीविटामिन्स एवं विटामिन बी कम्पलेक्स का मुख तथा इन्जेक्शन द्वारा काफी दिनों तक प्रयोग करें। 

टॉनिक रूप में - टोनियाजोल ' या ' कार्डियाजोल का प्रयोग उत्तम रहता है ।


अल्प रक्त दाब की लक्षणों के अनुसार चिकित्सा - 

1. आर्थो स्टेटिक हाइपोटेन्शन - ' इफेड्रीन 60 मि . ग्रा . की मात्रा में दिन में 2-3 बार दें । अथवा एम्फोटेमीन ' 10 मि . ग्रा . की मात्रा में ।

2. लगातार रक्त के दबाव को गिरने से रोकने के लिये - कोर्बासिमटोन की 1-1 टेबलेट रोग के अनुसार दिन में 2 या 3 बार तक ।

3. हृतक्रिया के विकार के कारण रोग हो तो - ' कारनीजेन ड्राप्स ' ( हैक्स्ट कं . ) की 10 या 15 बूंदें आवश्यकतानुसार कई बार दें ।


अल्प रक्त दाब की मिश्रित औषधि चिकित्सा -

【 1. 】 ' मिग्रिल ' ( वरोज वैल्कम ) 2 टेबलेट , ' सीलिन ' ( ग्लैक्सो ) 500 मि . ग्रा . की 1/2 टेबलेट , ' सैगोलियोन ' 1 कैप्सूल + विटामिन ' बी कम्पलेक्स ' 1 छोटा चम्मच । कैप्सूल की औषधि निकालकर पेय में मिला दें । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 या 3 बार दें । 

【 2. 】' एमीकार ' ( सायनामिड )टेबलेट , ' केम्पोफेरोन ' 1 कैप्सूल , ' वायसोग्रेन ' ( केडिला )टेबलेट , ' मेटाटोन ( पी . डी . ) 2 छोटे चम्मच । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार भोजन के बाद दें । 


अल्प रक्त दाब में प्रयुक्त अनुभूत व्यवस्था पत्र -

Rx -

■ 1 दिन छोड़ कर - इन्जे . न्यूहेपाटेक्स -2 मि . ली . माँस में । 

■ प्रा . दो . सायं - इफेड्रीन सल्फेट - 1 टेबलेट जल से । 

■ सुबह 8 बजे - एम्फिटामीन -1 टेबलेट जल से ।

■ दिन के 10 बजे , 2 बजे , रात 8 बजे - औट्रीन ( Autrin ) 1 कै . जल से ।  

■ दिन में 3 बार औषधि नं . 1 के साथ - टोनियाजोल - 2-2 चम्मच । 

नोट - रोग की तीव्रता में वेरिटोल ( Veritol ) नोल कं . - 1 मिली का इन्जेक्शन मांस में लगावें । 


निम्न रक्त दाब में सेवन कराने योग्य पेटेन्ट टेबलेट . -

1. कोरामीन इफेड्रीन ( सीबा गायगी ) -  1-1 टेबलेट दिन में 2 या 3 बार दें । 

2. डिण्डेवान ( Dindevan ) ( वी . इवान्स ) -  1-2 टे . दिन में 3 बार प्रति 4 घण्टे पर । 

3.कोर्वासिम्टोन ( Corvasymton ) - 1/2-1 टेबलेट दिन में 3 या 4 बार । 

4.ऑट्रीन ( Autrin ) ( सायनामिड ) - कमजोरी दूर करने के लिये 1-1 कै . प्रति 4 घण्टे पर । 


निम्न रक्त दाब में सेवन कराने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेन्ट पेय . -

1. कोरामीन इफेड्रीन ( सीबा - गायगी ) - 10-20 बूंद जल में मिलाकर रोगानुसार।

2.वेरिटोल ( Veritol ) ( नोल कं . ) - 10-15 बूंद दिन में कई बार । 

3.कोर्वासिम्टोन ( Corvasymton ) - 20-40 बूंद दिन में 3-4 बार आवश्यकतानुसार । 

4. कार्डियाजोल ( Cardiazol ) ( नोल ) - 20 बूंद पानी में मिलाकर रोगानुसार। 


निम्न रक्त दाब में लगाने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेन्ट इन्जेक्शन . -

1. कोरामीन ( Coramine ) ( सीबा - गायगी ) - 2 मि . ली . माँस में आवश्यकतानुसार ।

2. कार्डियाजोल ( नोल ) - तीव्र रोग में 1 एम्पुल चर्म या माँस ' में 1/2-1 घण्टे में आवश्यकतानुसार लगावें ।

3. कोर्वासिम्टोन ( ड्यूफार ) -  1 मि . ली . माँस में आवश्यकतानुसार लगायें । 

4. ट्राई - रेडिसॉल - एच ( मर्कशार्प डोम ) 500 / 1000 मा.ग्रा . - 1 मि . ली . माँस में एक दिन छोड़कर ।

5. वेसोक्सीन ( Vasoxine ) ( वैल्कम ) - 1/2-1 एम्पुल रोगानुसार माँस या नस में लगावें । 

6. लीवोफेड ( Levophed ) ( डेज कं . ) - 4 मि . ली . के एक एम्पुल को 1000 मि . ली . सैलाइन में मिलाकर I/V दें ।

7.डोकेबोलिन ( Docabolin ) ( आर्गेनन ) - 1 मि . ली . माँस में सप्ताह में 1 बार । कुल 4 से 6 इन्जे . पर्याप्त ।

  

निम्न रक्त दाब व्यवस्था एक दृष्टि में . -

■ Specific management of predisposing cause . 

■ Ephedrine , 25-50 mg 3-4times daily , in cases of postural hypotension .

■ Liberal use of salt in diet in postural hypotension .




image creadit - https://www.myupchar.com/en,, firesam!,, Source http://www.volganet.ru/news/archive/news/news/2009/09/news_14063.html, exact image source,,Author Администрация Волгоградской области


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