फाइलेरिया रोग ( Filariasis ) क्या है ? What is Filariasis?CDC Global

फाइलेरिया रोग ( Filariasis ) क्या है ? 

फाइलेरिया रोग ( Filariasis ) क्या है ? What is Filariasis?
What is Filariasis?


नेमाटोड्स ( nematodes ) नामक धागों जैसे कीड़ों की एक या अधिक जातियों के कारण उत्पन्न हए संक्रामक रोगों के समूह को फाइलेरिया रोग का नाम दिया गया है । 

नेमाटोड्स परोपजीवी कीड़े होते हैं । उनमें से कुछ तो इतने छोटे होते हैं कि उन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी की सहायता से ही देखा जा सकता है । उनमें से अधिकांश की लम्बाई 1 मिमी . से 5 सेमी . तक होती है। नेमाटोड्स कीड़े का शरीर अपने दोनों सिरों पर सामान्यतः नुकीला होता है । नर कीड़ों का आकार मादा कीड़ों से छोटा होता है। 

कुछ नेमाटोड्स मिट्टी तथा पानी में रहते हैं । इलवॉर्म ( eelworm ) जैसे नेमाटोड्स वनस्पतियों में परोपजीवियों के रूप में रहते हैं । हुकवोर्म ( hookworms ) , लंगवोर्म ( lungworms ) , पिनवोमं ( pinworms ) , ट्रिचिनेल्लास ( trichinellas )फाइलेरियास ( filarias ) मनुष्य के शरीर में परोपजीवियों की भांति रहते हैं । कुत्तों , भेड़ों तथा घोड़ों में भी यह पाया जाता है । 

पाइलेरिया के परजीवी कीड़े मनुष्य के सब्स्क्युटेनियस ( subscutaneous ) ऊतकों तथा लसीका वाहिनी ( lymphatic ) पर आक्रमण करके जबर्दस्त सुजन पैदा कर देते हैं । 

फाइलेरिया रोग ( Filariasis ) क्या है ? What is Filariasis?

नेमाटोड का जीवन चक्र दो मेजबानों पर निर्भर करता है जिनमें एक संधिपाद ( arthropod ) होता है ( मध्यवर्ती मेजबानों के रूप में ) और एक अन्य जंतु ( प्राथमिक मेजबान के रूप में ) होता है । एक काटने वाले कीड़े के शरीर में लार्वा सम्बंधी चरण उत्पन्न होता है तथा कीड़े द्वारा काटे गये जीव के शरीर में परिपक्व चरण उत्पन्न होता है ।

मानवीय शरीर में मादा कीड़ा प्रलंबित ( elongated ) भ्रूणों को जन्म देता है , जिन्हें माइक्रोफाइलेरिया ( microfilariae ) कहते हैं , और जो परिवृत्तीय ( peripheral ) रक्त तथा त्वचा में प्रवेश कर जाता है । 

जैसे ही कीड़ा संक्रामण के शिकार व्यक्ति को काटता है वैसे ही यह उसके शरीर में चला जाता है । कीड़ा वाहक ( insect carrier ) के अंदर माइक्रोफाइलेरिया लावा सम्बंधी ( larvae ) में विकसित हो जाता है तथा कीड़े द्वारा काटने से वह मानवीय शरीर में प्रवेश कर जाता है । एक वर्ष के अंदर मानवीय शरीर में यह कीड़ा परिपक्व अवस्था में पहुंच जाता है । 

फाइलेरिया रोग ( Filariasis ) क्या है ? What is Filariasis?
BY - CDC Global

फाइलेरिया का मानवीय रोग फाइलेरिया कीड़ों की विभिन्न जातियों , विशेषकर वुचेरेरिया बानक्रोफ्टी ( wuchereria, bancrofti ) के कारण होता है । 

ये अवयवी विश्व के उष्णकटिबंधीय तथा उप उष्णकटिबंधीय इलाकों में व्यापक रूप से फैले हुए हैं तथा मनुष्यों में मच्छरों सामान्यतः स्यूलेक्स फटिगांस ( culex fatigans ) के माध्यम से पहुंचते हैं । 

यह कीड़ा जिस ऊतक , विशेषकर त्वचा तथा लसीका सम्बंधी ऊतक में रहता है उसमें सुजन लाना तथा उसे मोटा करना शरू कर देता है । 

शुरुआत में सूजन की स्थिति के लक्षण कण मय सत स्थल ( granular lesions ) , सूजन तथा गड़बड़ परिसंचरण ( impaired circulation ) के रूप में दिखाई देते हैं । 

इस चरण के बाद लसीका गांठों ( lymph nodes ) में वृद्धि होने लगती है तथा लसीका वाहिनियों में विस्तारण होने लगता है जो कई वर्षों में कड़ी और बोझिल होने लगती हैं । टांगों और वृषण कोष ( scrotum ) के ऊतकों में काफी विस्तार हो जाता है । इस रोग को हाथी पांव ( Elephantiasis ) कहते हैं । 

इस रोग के लिये सर्वाधिक प्रभावी औषधि डाईथिलकार्बामाजिन ( diethylcarbamazine ) तथा सोडियम कापारसोलेट ( sodium caparsolate ) होती है जो वयस्क कीड़ों तथा माइक्रोफाइलेरिया को मार देती हैं । फाइलेरिया का रोग भूमध्यसागर के तट पर अरब , एशिया , इण्डोनेशिया तथा दक्षिण प्रशांत के द्वीपों में पाया जाता है ।


 List of General Knowledge ( GK ) ~




ऐसे ही अन्य विषयों की रोचक जानकारी के लिए Infarmo.com में विजिट करें ।

Infarmo.com के कुछ प्रमुख पेजेस - 






















 



और भी जाने ~





Previous
Next Post »