मुखपाक [ Stomatitis ] की बीमारी क्या है,इसके प्रकार,लक्षण, एवम चिकित्सा प्रणाली क्या है,,? What is oral disease [Stomatitis], its type, symptoms, and what is the medical system ?

मुखपाक [ Stomatitis ] 


मुखपाक [ Stomatitis ]
मुखपाक [ Stomatitis ]

पर्याय-  

मुँह आना , मुुँह फलना , स्टोमेटाइटिस ।

परिचय-  

मुख की अंदरूनी हिस्सों में किसी प्रकार का फोड़ा जैसा या सूजन लिए जख्म सा दिखाई पड़ता है, इस रोग में मुख के भीतर होठों , जीभ में अल्सर या छाले पड़ जाते हैं। 
यह रोग आँतों , चर्म , गर्भाशय , फेफड़ों और मस्तिष्क के अंदरूनी लेयर में भी फैल सकता है । मुख्यतः यह देखा गया है कि यह रोग आंतो की गड़बड़ी में होता है। 
ओरल हाइजीन ( Oral Hygiene ) के अभाव में बैक्टीरिया मुख में पनपते हैं । जिसके परिणामस्वरूप ' मुखपाक रोग होता है । 

रोग के सामान्य -

◆  तीव्र दवाइयों एवं गर्म मसाले के निरन्तर सेवन से । 
◆  दांतों में कीड़े होने से भी आदि रोगों से। 

◆विशेष कीटाणुओ द्वारा जैसे - डिफ्थीरिया , विन्सेन्ट्स ओरगेनिज्म , स्ट्रेप्टोकोकस , सिफलिस जीवाणु यह रोग विशेषकर " मोनीलिया फफूंदी " से होता है । 

परनीसियस अनीमिया , स्पू , बेरी - बेरी आदि रोगों से । 


विटामिन ' बी ' का अभाव एवं  ' सी ' की न्यूनता ।

सहायक कारण - 


◆ शारीरिक रूप से दुर्बलता प्रमुख सहायक कारण है। 

◆ आमाशय की क्रिया की गड़बड़ी । 


◆ अधिक मात्रा में चूना अथवा चीनी का प्रयोग ।

◆ मलिन एवं गन्दे स्थान में निवास । 

◆ रक्त विकार भी इसका एक मुख्य सहायक कारण है । 


◆ खूब जलती हुई गर्म चीज का सेवन ।

रोग के प्रकार -


■ कटारल स्टोमेटाइटिस ( श्लेष्मिक , मुख पाक ) - रोग के लक्षण →)

1 . इसमें मुख की झिल्ली लाल एवं कंजेस्टिड हो जाती है । 

2.जीभ सुखी , सूजी हुई , कंजेस्टिड , एवं मोटी सफेद परत से ढकी रहती है । 


3.रोगी के श्वास में गन्ध ।

■ एप्थस स्टोमेटाइटिस ( ग्लोसाइटिस ) - रोग के लक्षण →)

 1 . जीभ के test resepter नष्ट होकर उस पर छोटे छोटे व्रण ( Ulcers ) बन जाते हैं । यह दर्द युक्त होते हैं। 

2. व्रण ( Ulcers ) पीले रंग के होते हैं । इनके चारों तरफ ' पीलें अथवा लाल रंग ( विशेष ) का घेरा होता है । 


3. रोग का आक्रमण कुछ दिनों अथवा सप्ताहों तक रहता है । उसके बाद रोग स्वयं ठीक हो जाता है । पर रोग का आक्रमण बार - बार होता रहता है । 

4. रोगी को भोजन करने में कष्ट। भोजन में तनिक सी मिर्च होने पर उसका मुुँह जलने लगता है ।
याद रखिये-  यह दर्द से भरे छाले होठों के अंदर के सतह या गाल पर या जीभ पर होते हैं । दर्द के अतिरिक्त मुह से लार बराबर आती है । यह बच्चों तथा युवा व्यक्तियों में मिलता है ।
■ इन्फेक्टिव स्टोमेटाइटिस ( संक्रमित मुख पाक ) - रोग के लक्षण →)

1. इसमें व्रण ( Ulcers ) ( छाला ) एक भूरी झिल्ली से ढका रहता है । अधिक मात्रा में मुंह से लार निकलता है। 

2. मसूड़ों में सूजन के कारण रक्त आता है।


3. लिम्फ ग्रन्थियाँ बढ़ जाती हैं तब रोगी को बुखार रहता है ।

■ फंगस ( थ्रस या मोनिलिएसिस ) जन्य मुखपाक - रोग के लक्षण →)

1. यह शिशुओं ( Infants ) तथा कमजोर युवा व्यक्तियों में मिलता है । 


2. इसमें मुख की श्लेष्म कला ( शरीर के आंतरिक अंगों को घेरे रहती है तथा यही आंतरिक अंगों का सबसे ऊपरी परत है ) पर सफेद रंग के छोटे दाने से बन जाते हैं जिन पर नाजुक झिल्ली रहती है । अन्त में यह दाने एक दूसरे से मिल कर बड़े आकार के व्रण छाला ) बन जाते हैं । 
नोट - 
1. बोतल से पीने वाले बच्चों में मिलता है । 
2. ' स्टेराइड्स एवं ' एण्टीबायोटिक दवाईयों के लम्बे समय तक सेवन करने से यह मुखपाक होता है ।

■ एलर्जिक स्टोमेटाइटिस ( एलर्जी जन्य मुखपाक ) - रोग के लक्षण →)


1. कुछ प्रकार के वेजीटेबिल्स आहार से , एण्टीबायोटिक दवाईयों के द्वारा , स्थानीय एलर्जी से । 


2. कुछ डेन्टल पेस्ट ( thooth paste ) एवं डेण्ट्रेस में केमिकल के प्रयोग से भी ' एलर्जिक मुखपाक हो जाता है ।

■ मालन्यूट्रीशन जन्य स्टोमेटाइटिस - यह मुखपाक ' विटामिन डिफीसिएन्सी के परिणामस्वरूप होता है । विशेषकर विटामिन ' बी कम्पलेक्स , रिबो फ्लेवीन , निकोटिनिक एसिड , फोलिक एसिड एवं बी - 12 के अभाव में ।

■ रक्तरोग में मुखपाक - एप्लास्टिक अनीमिया एवं ल्यूकेमिया के केस में ।


■ चर्म रोग द्वारा मुखपाक - ' लिचिन प्लेनस ' , ' इरीथेमा मल्टीफार्म , ' फेम्फीगस वल्गेरिस के रोगियों में कभी- कभी मुख प्रभावित हो जाता है ।

■ गैंग्रीनस स्टोमेटाइटिस - 2-5 वर्ष की अवस्था वाले बालकों में । लड़कियों में नहीं । मिजिल्स के दौरों , टायफाइड के पश्चात तथा चिरकारी कालाजार ( एक प्रकार का संक्रमण ) के समय देखने को मिलता है ।
सिफिलिस की ' द्वितीयावस्था ' में मुख के अंदर हल्के व्रण ( अलसर ) बन जाते हैं तथा मुख की झिल्ली पर एक सफेद झिल्ली का निर्माण हो जाता है । 

सामान्य लक्षण- 


मुँह के अंदर जीभ , होंठ , तालु - कंठ आदि में व्रण ( अल्सर ) , फुंसी या छाले पड़ जाते हैं , जिससे लार टपकती रहती है । मुँह को ढकने वाली झिल्ली लाल , फूली हुई , पीड़ा युक्त होती है । सांस से बदबू , खाने में कष्ट । मन निरन्तर कष्ट निवारण के लिये व्याकुल रहता है । तालु एवं मसूड़ों में सूजन हो जाती है । 

विशिष्ट लक्षण - 


■ मुखपाक पोषण की कमी ( Nutritional deficiency ) एवं अन्य भाग ( Factors ) के परिणामस्वरूप होता है । 


अल्सरेटिव स्टोमेटाइटिस ( विन्सेट इन्फेक्शन ) मुख्य रूप से वयस्कों में कुपोषण ( Malnutrition ) एवं दाँतों की अस्वच्छता से होता है । इसमें मसूड़ों पर विशेष घाव बन जाते हैं जो मुख के सतह एवम होंठो को भी प्रभावित कर देते हैं । 

■ कंडिडा एल्वीकेन्स फंगस ( फफूंदी ) मुख्य रूप से बच्चों में ' थ्रस नामक मुखपाक उत्पत्र करता है । इसमें जीभ एवं मुख की श्लेष्म कला शरीर के आंतरिक अंगों को घेरे रहती है तथा यही आंतरिक अंगों का सबसे ऊपरी परत है ) पर सफेद धब्बे उत्पत्र हो जाते हैं । गम्भीर अवस्था में - यह फेरिन्गस के निचले भाग एवं ईसोफेगस को भी प्रभावित कर लेता है । यहाँ तक कि फंगस फेफड़ों तक भी फैल जाता है।


■ ' एप्थस अलसरेशनमें रोगी प्रायः स्वस्थ प्रतीत होता है । यह गम्भीर एवं जीर्ण स्वरूप में ' क्रोहन्स रोग ' , ' अल्सरेटिव कोलायटिस ' अथवा सिलियक रोग के साथ मिलता है ।

आनुषंगिक चिकित्सा


◆  बोरिक एसिड पाउडर 300 मि . ग्रा . + ग्लिसरीन 8 मि . ली . - इन दोनों को भली भांति मिलाकर गर्म कर लें । इसे दिन में 2-3 बार लगाते रहें । 

- अथवा- रोगी को दिन में कई बार पोटास ( लाल दवा ) के हल्के घोल से बार - बार कुल्ले करावें । तत्पश्चात उपरोक्त बोरो ग्लिसरीन लगावें । 

- अथवा- ' जेन्शन बायोलेट क्रिस्टल 1 ग्राम को 100 मि . ली . जल में घोल कर रख लें । इसे दिन में 2-3 बार फुरेरी( short stick ) से लगाते रहें । 

- अथवा - ' हाइड्रोजन परओक्साइड 30 मि . ली . को 120 मि . ली . डिस्टिल्ड वाटर में घोल कर छालों पर लगावें।

सरल पेटेन्ट चिकित्सा - 



मल्टी - फंगेन सलूशन ( नोल ) को फुरेरी( stick ) से दिन में 2-3 बार लगावें अथवा निस्टेटिन टेबलेट ( Nystatin Tab . ) 500,000 यूनिट्स अधिक से अधिक समय तक जीभ पर रखे। अथवा- निस्टेटिन टे . ' या माइकोस्टेटिन टेबलेट ( Mycostatin Tab . ) , ग्लिसरीन में घोल कर लगावें । 

साथ ही - 

साधारण रोग में सीलिन 100 एम . जी . ( mg . ) की 1 टेबलेट , निकोटिनिक एसिड की 1 टेबलेट दिन में 2-3 बार दें। अथवा माइकोस्टेटिन 1 टेबलेट जल से दें । अथवा फेनोसिन निर्माता ' फीजर की 1 टेबलेट हर 2 घण्टे पर चूसें । अथवा बीकोजाइम - सी फोर्ट 1 टेबलेट पैलोनिन ( ग्लैक्सो ) 1 टेबलेट दिन में 2-3 बार मिलाकर दें । 


---- मेडिकल व्यवस्था पत्र ( Medical Prescription ) ----


Rx 

' बोरो - ग्लिसरीन , / निस्टेटिन टेबलेट + ग्लिसरीन दिन में 3-4 बार मुख में पेन्ट ।

 
साथ ही -

1.प्रातः सायं -  पेलोनिन ( Pelonin ) निमार्ता - ग्लैक्सो 1 टे . , बीकाडेक्सामिन ( Becadexamin ) 1 टेबलेट . दोनों को मिलाकर दें । 

2. भोजन से पूर्व - माइकोस्टेटिन ( साराभाई ) 1 टेबलेट , जल से , दिन में 2 बार । 

3. भोजन के बाद - लिबोजिन सीरप 2 चम्मच । अथवा कोबाडेक्स फोर्ट ( Cobadex Forte ) ग्लैक्सो 1 कै . । 
अथवा - बिवीनाल फोर्ट विद विटा , सी ( Bivinal Forte with Vit . C ) एलेम्बिक 1 कै . दोपहर भोजन के बाद । 

4. रात सोते समय - सेनेडी ( Senade ) सिपला 1-3 टेबलेट । अथवा डूफालेक ( Duphalac ) निमार्ता - ' डूफा - इन्टरफेरान ' 15 से 30 मि . ली . । अथवा जूलेक्स ( Julax ) नि . - ' रैलिस - 1-2 टेबलेट सोते समय ।

आवश्यक निर्देश - 


रोगी का पेट निरन्तर साफ रहे , इसलिये सोते समय ऐसी ही औषधि दी जाती है । 
याद रहे - ' मलावरोध भी मुखपाक का कारण हो सकता है । 

--- ' मुखपाक ' या मुँह आने में ऐलो . पेटेन्ट उपयोगी गोलियाँ ---



1. डेक्वाडिन लोजेन्जेज ( Dequadin Lo . ) ( नि . ग्लैक्सो )  1 टेबलेट दिन में 5-6 बार चुसवायें । 

2. माइकोस्टेटिन ( Mycostatin ) ( सारा भाई )  1 टेबलेट दिन में 2 बार जल से ।

3. पेन्टिडस ( Pentids ) ( साराभाई )  2 लाख यूनिट की 1 टेबलेट दिन में 2-3 बार मुँह में रख कर चुसवायें । 

4. पेलोनिन ( Pelonin ) ( ग्लैक्सो फार्मा )  1 टेबलेट , दिन में 2-3 बार जल से दें ।

5. बीकोडेक्सामीन ( Becodexamine ) ( ग्लैक्सो फार्मा )  1 टेबलेट दिन में 2-3 बार ।

6. लोजेन्ड्रॉट ( Lozenthrot ) ( हिन्दु- स्तान - सिवागेगी )  1 लोजेन्जेज प्रति 2 घण्टे पर चूसें ।

7. बीकोजाइम फोर्ट ( Becozyme Forte ) ( रोश कं . )  2 टे . प्रति 3 घण्टे पर दें ।

8. रीबोफ्लेविन टेबलेट ( Reboflavin tab . ) ( नि . टी . सी . एफ . )  2-3 टेबलेट दिन में 4 बार दें ।

9. ' सुक्रेट्स ( Sucrets ) ( नि . मर्क शार्प डोम )  1 टेबलेट . मुख में डालकर चुसवायें ।

10. बीकोसूल्स ( Becosules ) ( नि . ' फाइ-जर )  1 कै . नित्य 10 दिन तक।

11. बीप्लेक्स टे . ( Beplex Tab . ) ( नि . एन्गलो - फ्रेंच )  1-2 टेबलेट . दिन में 2-3 बार ।--(  यह Forte रूप में भी आती है )

12. बीटावाइट फोर्ट ( Betavite Forte ) ( नि . निकोलस )  1 कै . नित्य , जल से


--- मुखपाक में लगाये जाने योग्य सुप्रसिद्ध सूचीवेध ----



1. बीप्लेक्स इन्जे . ( Beplex Inj . ) नि . एंगलो फ्रेंच  1-2 मि . ली . ×  नित्य मांस में 10 दिन तक।

2. बीप्लेक्स फोर्ट ( Beplex Forte ) नि . एंगलो फ्रेंच  1 मि . ली . , नित्य मांसपेशी में 10 दिन तक ।

3. प्रोकेन पेनिसिलीन ( Procain Penicillin )  1 वायल मांस में प्रति 6 घण्टे पर टेस्ट करके लगावें । 

4. एम्पीसिलीन ( Ampicillin )  250 से 500 मि . ग्रा . , मांस में प्रति 12 घण्टे पर । कुल 5 इन्जे . तक ।
  

--- मुखपाक में देने योग्य पेटेन्ट पेय एवं सीरप --- 


1. बीकोसूल्स सीरप ( Becosules Syrup ) ( फाइजर )  5 मि . ली . ( 1 चम्मच ) नित्य ।

2. बेप्लेक्स एलिक्सिर ( Beplex Elixir ) ( एंगलो फ्रेंच )  2 चम्मच -दिन में 2 बार 5-10 दिन तक ।


3. बीप्लेक्स फोर्ट इलेक्सिर ( Beplex Forte Elixir )  2 चम्मच दिन में 2 या 3 बार ।

  --- मुखपाक की लाक्षणिक चिकित्सा ---


1. अलसरेटिव स्टोमेटाइटिस ( व्रण- युक्त मुखपाक ) → मेट्रोनिडाजोल 400 मि . ग्रा . दिन में 3 बार 5 से 7 दिन तक ।

तीव्र अवस्था में →  पेनसिलीन / 500 mg  5 दिन तक ।

नोट - तीव्र अवस्था के नियंत्रण होने पर दंत - चिकित्सा आवश्यक है

2. फंगस द्वारा बच्चों में श्रुस रूप का मुखपाक  जेन्शन वायोलेट से मुख को दिन में 3-4 बार पेन्ट करें । अथवा- ' निस्टेटिन टे . मुख में पर्याप्त समय तक रक्खें । दिन में 4 बार 4 दिन तक । अथवा ' माईकोस्टेटिन टेबलेट ग्लिसरीन में घोल कर लगावें । निस्टेटिन टेबलेट 500,000 यूनिट की 1 टे . दिन में 3 बार 1 सप्ताह तक दें । 

अथवा -

' निस्टेटिन पेसरी दिन में 3 बार चूसें । 

अथवा

' निस्टेटिन सस्पेन्सन प्रति 4-6 घण्टे पर ।

नोट - इससे मुख के घाव शीघ्र भरते हैं । साथ ही बालक को विटामिन्स युक्त दवाईया दें । खाने के बाद मुख अवश्य साफ करें ।


3. एप्थस अलसरेशन  250 मि . ग्रा . टेट्रासाइक्लीन 10 मि . ली . जल में घोल कर घावों पर 2 मिनट तक दिन में 4 बार लगायें । साथ ही- ' हाइड्रो - कार्टीजोन हेमीसक्सीनेट लोजेन्जेज 2-5 मि.ग्रा . दिन में 3 बार रोग की प्रारम्भिक अवस्था में दें । अथवा- ' इफकोर्लिन पैलेट ( ग्लैक्सो फार्मा ) 2.5 मि . ग्रा . की ओरल पैलेट दिन में 3-4 बार मुख में डाल कर चूसें । 'टेबलेट क्रोसिन -1 टेबलेट दिन में 3 बार दें । साथ ही - ट्रानीक्यूलाइजर का आवश्यक मात्रा में प्रयोग ।

4. यदि महिलाओं में मासिक धर्म के पूर्व बार - बार अल्सर निकलते हों तो →  टे . ' लाइनोरल 1 गोली नित्य दें ।

5. एलर्जी से उत्पन्न मुखपाक में  टेबलेट कैडिस्टिन ( कैंडिला ) 1 टेबलेट , ' प्रेडनीसोलोन 1 टेबलेट- दोनों को मिलाकर दिन में 2 बार दें । एवं ' वैराल्गन फोर्ट सीरप 45 मि . ली . भोजन के बाद 2 बार पिलावें । साथ ही - ट्रिमेप्राजीन टारट्रेट मधु में मिलाकर फुरेरी से जीभ पर दिन में 2-3 बार पेण्ट करें । 

6. विटामिन बी की कमी से उत्पन्न मुखपाक  ' बीकोजाइम - सी फोर्ट ( रोश ) 1 टेबलेट , पैलोनिन ( ग्लैक्सो फार्मा ) 1 टेबलेट , दोनों मिलाकर ऐसी 1 खुराक दिन में 2 बार दें । भोजन के बाद - ' विटाहैक्स्ट 2 चम्मच बराबर जल के साथ दिन में 2 बार पिलावें । साथ ही - बोरो - ग्लिसरीन मुख एवं जीभ पर फुरेरी से लगावें ।

7. रोग की तीब्रावस्था में  बिस्ट्रेपेन ( Bistrepen ) - निर्माता - ' एलेम्बिक ' या पी . पी . एफ . ( p . P.F ) या प्रोनापेन ( Pronapen ) का एक इन्जे . मांस में प्रति 24 घण्टे पर लगावें ।

---- मिश्रित चिकित्सा ( Combination Therapy ) ---



1. वीटावाइट फोर्ट  1 कैप्सूल , सीलिन 100 एम. जी. की 1 टेबलेट , ऐसी 1-1 टेबलेट एवं कै . दिन में 3 बार दें । साथ ही -

2. एक्रोमाइसीन ट्रोची 2-2 या 3-3 घण्टे पर मुख में रखकर चुसवायें । 

--- मुखपाक की अनुभूत चिकित्सा --- 


1 . ' बीकोजाइम - सी फोर्ट 1 टेबलेट , निकोटिनामाइड 1 टेबलेट । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3-4 बार दें । साथ ही - पुमिलेट ( Pumilet ) (निर्माता - ' बंगाल केमिकल) 1 लोजेन्ज या ' इफकोर्लिन पैलेट (नि . एलनवरीज) की 1 पैलेट मुख में रखकर प्रति 6 घण्टे पर चुसवाते रहें । 


2. ' हाइड्रोकार्टीजोन सोडियम सक्सीनेट ' 2.5 मि . ली . , स्ट्रेप्सिल्स 1 लाजेन्जिज मिलाकर पीस लें । तत्पश्चात इसे प्रति 3 घण्टे पर चुसवाते रहें । साथ ही- “ steradent Powder " 5-7 ग्राम हल्का गर्म जल 75-200 मि . ली . में घोल कर प्रति आधे घण्टे पर कुल्ला करावें । ' एम्पीसिलीन 250-500 मि.ग्रा . मांस में हर 12 घण्टे बाद इन्जेक्शन रूप में दें । 

याद रखिये- यह अनुभूत योग- ' एप्थस अलसर ' में विशेष उपयोगी पाया गया है ।

 

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