Saturday, June 1, 2019

दन्तशूल / दाँत का दर्द [ टूथ - एच - Tooth Ache ] आखिर क्यों हो जाता है ? क्या है इसके पर्याय , परिचय , कारण , चिकित्सा , लक्षण ? Dental / Toothache [Tooth - H - Tooth Ache] Why is it finally? What is its synonyms, intro, reason, medicine, symptoms?

दन्तशूल / दाँत का दर्द [ टूथ - एच - Tooth Ache ] 

दन्तशूल / दाँत का दर्द [ टूथ - एच - Tooth Ache ] आखिर क्यों हो जाता है ? क्या है इसके पर्याय , परिचय , कारण , चिकित्सा , लक्षण ? Dental / Toothache [Tooth - H - Tooth Ache] Why is it finally? What is its synonyms, intro, reason, medicine, symptoms?
tooth ache


पर्याय - 

टूथ - एच , दाँत का दर्द । ओडोन्टाल्जिया ( Odontalgia ) , ओडोनटोडाइनिया ( ( Odonlodynia ) , पेन इन ए टूथ ( Pain in a tgo [ h ) , दात में दर्द होना । 


परिचय -

दात में पीड़ा होना एक आम सी शिकायत न ई है । किन्तु ऐसी पीड़ा का कोई एक कारण नहीं होता बल्कि भिन्न कारण हो सकते हैं । आज दंतशूल प्राइवेट जनरल अक्टस में वह अधिक देखने को मिलता है । 


रोग के प्रमुख कारण 



• दंतशूल का सबसे बड़ा कारण दाँत या डाढ़ का खोखला होना या कीड़ा लगना कहलाता है । जिसे कैरीज रोग कहते हैं । । 

• दाँत की जड़ों में मैल एवं उस मैल में जीवाणु पैदा हो जाने के कारण । एक या 2 - 3 दाँतों में भीषण दर्द ( Pain ) । 

• दाँतों की सफाई न करने से । → 

• दाँत और मसूड़ों में शोथ या गलन होने से जड़ के पास कुछ जगह खाली हो जाती है । बाट में खाते - पीते समय दाँत पर दबाव पड़ने से पीड़ा होती हैं ।  
• ठंडे और गरम पानी से भी दाँतों में पीड़ा । → 

• पायरिया के कारण दाँत खराब होने से । → 

• पीड़ा - दाँत में सुराख उत्पन्न होने से भी । 

• दाँत टूट जाने से भी शूल ।

• मुख में भयंकर चोट लगने से । 


सम्भावित लक्षण – 



• दाँत में पीड़ा होना इसका एक प्रमुख लक्षण है । 

• कभी - कभी दंतशूल के साथ - साथ मसूडों में भी सुजन । जिसका कारण दाँत के अंदर पीप एकत्र होकर मसूड़ों तक को इन्फेक्शन हो जाता है । इस दशा में बहुत तीव्र स्वरूप का शूल होता है एवं चेहरे पर भी लालिमा एवं सूजन दिखायी देती है । 

• हिलने - डुलने एवं गति करने से शूल में वृद्धि । 

नोट - इस रोग में दाँत एवं मसूड़ों में रह - रहकर भयंकर पीड़ा होती है ।



•• दंतशूल की पेटेन्ट औषधि चिकित्सा → 

• एनाल्जेसिक + एण्टी - इन्फ्लामेटरीड्रग्स ( यथा - ब्रुफेन ) । । 

• सूजन समाप्त होने पर दाँत को निकाल दें । 

• दाँत में सुराख होने पर सुराख की सफाई कर ‘ क्रियोजोट या कार्बोलिक एसिड अथवा अमृतधारा की फरेरी रख दें । अभाव में हींग का भी प्रयोग किया जा सकता है । पीडा शान्त हो जाने के बाद सूराख को मसाले से भरवाया जा सकता है । । 

• यदि पायरिया की शिकायत हो तो उसकी चिकित्सा करें । → 

• सूजन होने पर किसी भी ' सल्फा या एण्टीबायोटिक औषधि का प्रयोग करें ।

नोट - ० दांतों के शूल को नष्ट करने के लिये दाँतों पर लगाने और खाने की औषधियाँ सेवन करायी जाती हैं । साथ ही कारण की चिकित्सा । । → 

• यदि मधुमेह हो तो साथ में इसकी भी चिकित्सा करें । 

• अजीर्ण या कब्ज के कारण होने वाले दर्द में पेट की सफाई करें ।


•• दर्दनाशक तथा सूजन के लिये ब्रुफेन ( Ibuprofen tab . ) 200 , 400 एवं 600 मि . ग्रा . के रूप में शरीर भार के अनुसार दिन में 2 या 3 बार दें । अथवा ऑक्साल्जिन ( Oxalgia ) की 1 - 1 टिकिया हर 4 घण्टे पर दें । यदि रोगी मुख द्वारा औषधि ले सके तो बैक्ट्रिम ( Bactrim ) अथवा ओरीप्रिम ( Oriprim ) की 1 - 1 टिकिया दिन में 2 बार 5 दिन तक दें । अथवा इन्जेक्शन क्रिस - 4 ( Crys - 4 - साराभाई ) टेस्ट करके प्रतिदिन माँस में लगावें ।

• जब दर्द शान्त हो जाये तथा सूजन दूर हो जाये तो रोगी के दाँत को स्थायी रूप से निकाले जाने के लिये ' दन्त चिकित्सक के पास अवश्य भेज दें । अन्यथा यह दशा किसी भी समय पुनः हो सकती है । 


•• दंतशूल में सेवन कराने योग्य अपटूडेट एलोपैथिक पेटेन्ट टेबलेट ••

1 . आइबुजेसिक प्लस ( Ibugesic Plus ) ' सिपला '  -  1 टिकिया दिन में 3 बार दें ।

सावधान - अति सुग्राही रोगियों तथा पेप्टिक अल्सर एवं गर्भावस्था में प्रयोग न करे ,

2 . फोटजेसिक ( Fortagesic ) ‘ बिनमेडिकेअर '  -  1 - 2 टिकिया दिन में 3 - 4 बार दर्द के समय दें ।

सावधान - ० अति सुग्राही रोगियों तथा गर्भावस्था में प्रयोग निषेध । । 

० सेवन काल में कोई वाहन न चलायें । 

3 . अल्गाफेन ( Algaphane ) वी . नॉल  -  1 - 2 टिकिया दिन में 2 या 3 बार ।

4 . फोरासेट ( Foracet - रैनबक्सी )  -  दर्द होते ही 1 - 2 टि . दिन में 2 बार ।

5 . डिस्प्रिन ( Disprin ) ' रेकिट एण्ड कॉलमैन  -   2 टिकिया आवश्यकतानुसार ।

6 . एवाफोन / एनाफोर्टेन  -  साधारण दर्द में 1 - 2 टि . दिन में 2 - 3 बार । । भयंकर दर्द की स्थिति में 3 मि . ली . का धीरे - धीरे शिरा या माँस में इन्जेक्शन लगायें ।


  
•• दंतशूल में लगाने योग्य सुप्रसिद्ध एलो . पेटेन्ट इन्जेक्शन ••

1 . स्ट्रेप्टो - पेनिसिलीन ( Strepto - penicillin )  -  1 / 2 - 1 ग्राम माँस में ( डिस्टिल्ड वाटर में घोलकर ) नित्य लगावें ।

2 . पे थीडीन हाइड्रोक्लोराइड ( Pethidine Hydrochloride )  -  0 - 100 मि . ग्रा . ( प्रति सी . सी . ) की सुई माँस में लगावें ।

3 . फाइसेप्टोन ( Physeptone ) बरोज - वेल्कम  - 1 / 2 - 1 मि . ली . माँस या नस में लगावें । ।  

4 . सिबाल्जिन ( Cibalgin - सीबा )  -  एम्पुल की सुई माँस में आ . नु , लगावें । ।

5 . नोवोकेन ( Novocain ) होचेस्ट  -  30 मि . ली . वायल में से 1 - 2 मि . ली . औषधि दर्द वाले दाँत के मसूड़े में लगावें । ।


नोट - भयंकर एवं गम्भीर दर्द में फोर्टविन ( Fortwin - रैनबक्सी ) का 1 मि . ली . का माँस या शिरा में इन्जेक्शन धीरे - धीरे लगावें । 


कीड़े से उत्पन्न दंतशूल में - - 

• कार्बोलिक एसिड 25 ग्राम , कपूर 25 ग्राम - दोनों को मिलाकर एक शीशी में धूप में रख दें । पिघल कर औषधि तैयार । इस औषधि में फरेरी तर कर ( निचोड़कर ) दाँत के घोघले में रखें ।


दंतशूल की उत्कृष्ट औषधि -

• कपूर 10 ग्राम , लौंग का तेल ( Cloves Oil ) 5 ग्राम , कार्बोलिक एसिड 10 ग्राम , थाइमोल 10 ग्राम , मेन्थाल 10 ग्राम । सब एकत्र कर शीशी में रख लें और मजबूत डाट लगा दें । इसे आ . नु . दर्द के समय लगावें । । 

नोट — अमृतधारा ( ठाकुरदास ) एवं दर दांत ( वैद्यनाथ एवं डाबर ) के ऐसे ही उत्पादन हैं । 


कीड़े मारने वाला तीक्ष्ण तेल -

• क्रियोजोट 10 ग्राम , कार्बोलिक एसिड 10 ग्राम , कपूर 10 ग्राम , लौंग का तेल 10 ग्राम । सभी द्रव्य एक शीशी में भरकर और डाट बंद करके धूप में रख दीजिये मिश्रण तैयार हो जावेगा ।


अनुभूत योग -

• क्रोसिन 1 टि . . लार्गेक्टिल ( रोन पोलेन्क ) 25 मि . ग्रा . की 1 टि , और सीलिन 500 मि . ग्रा . की 1 / 2 टि . । ऐसी एक मात्रा दाँत दर्द के समय हर 4 – 6 घण्टे पर अथवा आ . नु . दे ,

• बच्चों के दाँत के दर्द में क्रोसिन सीरप 1 / 4 - (1)1/4 चम्मच आयु के अनुसार दिन में 4 बार ,

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