गुहेरी [ स्टाई - Stye ] होर्डिओलम रोग के नाम , परिचय , कारण , लक्ष्ण , चिकित्सा ? Guhaari [Styi] Stye - Name, intro, cause, symptom, therapy, of Hordial disease?

गुहेरी [ स्टाई - Stye ] होर्डिओलम 

गुहेरी [ स्टाई - Stye ] होर्डिओलम रोग के नाम , परिचय , कारण , लक्ष्ण , चिकित्सा ? Guhaari [Styi] Stye - Name, intro, cause, symptom, therapy, of Hordial disease?
stye



नाम -

अंजनहारी , गुहाजनी । अंग्रेजी में इस्टर्नल होर्डिओलम ( External Hordeolum ) । अन्जना , पलक के नीचे फुन्सी , नेत्रबरौनियों की तैल ग्रन्थियों का प्रदाह । । 


परिचय - 

Stye is on acute inflammation of one of zeiss gla nds , usually ending in subburation ,

नेत्र की पलकों के किनारे पर दाने या लाल रंग की एक या अधिक फुन्सियाँ हो जाती हैं जिसे गुहेरी स्टाई - Stye ) कहते हैं । इसे क्षेत्रीय भाषाओं में विभिन्न नामों से पुकारा जाता है । इसके छने पर दखन तथा नेत्र में बहुत अधिक दर्द का आभास होता है । तीन - चार दिन के बाद उसमें पीप पडले स्वयं फट जाती है । कभी - कभी कई गुहेरियाँ एक साथ निकल आती हैं ।


रोग के कारण -



• कब्ज ( कॉन्स्टीपेशन - Constipation ) कामवासनात्मक विचारों की अधिकता । 

• नवयुवक एवं क्वयुवतियों की आँखों में स्टेफिलोकोकस जीवाणु संक्रमण से । 

• विटामिन ए और डी का अभाव । । 

• अजीर्ण एवं दृष्टि की कमजोरी । → 

• दूषित जल से नेत्र धोने या गंदे हाथों के सम्पर्क से भी । 

• धूप और अधिक सर्दी , उष्ण , खट्टे मीठे . तेल - मिर्च और अधिक मसालों के खाद्य पदार्थ अधिक सेवन करने से  भी ।



रोग के लक्ष्ण -




• तीव्र पी एवं कठोरता ( Acute pain and tenderness ) । । 

• पलक के किनारे एक विशेष प्रकार पाइन्ट ( Aparticular point on the lid margin ) । ।

• प्रारम्भ में पलक के किनारे कड़ी और मुलायम स्थानीय सूजन । । 

• सम्पूर्ण पलक के मार्जिन पर द्रव जन्य शोथ । । 

 सिलिया के आधार के निकट एबिसस का पाइन्ट बनता है । 

• पीप निकल जाने के बाद पीड़ा शान्त ।


विशिष्ट कारण ( Special or Main Causes )  -  • यह स्टेफाइलोकोकाई द्रारा उत्पन्न होती है । 

• यह झुंड ( Crops ) में निकलती हैं । एक के बाद अनेक । ऐसा विचार है कि जन व्यक्तियों में स्टेफाइलोकोकाई के प्रति निम्न क्षमता ( Low Resistance ) होती है उनमें अधिक निकलती है । 

• दुर्बल व्यक्तियों में अधिक कामन हैं । 

• इनके निकलने में अस्वच्छता अधिक सहायक ।


याद रहे संक्रमण से नेत्र के पलकों में छोटी सी कील के बराबर सूजी हुई तथा लाल फुसी निकलती है । इसमें कम या अधिक पीड़ा तथा जलन होती है । कुछ ही दिनों में पक जाती है । फुन्सी के समान कील के शिखर पर पीला चिन्ह दीख पड़ता है जो पीप पड़ने का सांकेतिक चिन्ह है । पीप पड़ने के बाद वह स्वतः फट जाती है ।

• इससे रोगी को बहुत पीड़ा होती है क्योंकि गुहरी पलकों के किनारे निकलती है । इसलिये पलक खोलते - बन्द करते समय अधिक पीड़ा होना स्वाभाविक है ।


गुहेरी की औषधि चिकित्सा -

• गुहेरी निकलने पर पहले हलके गरम ( कुनकुने ) जल में बोरीक पाउडर मिलाकर नेत्रों को साफ करें । तत्पश्चात् -

• गुलाब जल नेत्रों में डालें । इससे जलन और पीड़ा कम होती है । 

नोट - कपड़े या रुई की गद्दी बनाकर उसे मामूली गरम करके सेंक करना चाहिये । । 

• यदि पहले से ही उसमें पीप पड़ गई हो तो उसके बीच के बाल को इस प्रकार चिमटी से पकड़कर खींचे कि उसके अंदर की सारी वस्तु बाहर निकल आयें । तत्पश्चात् -

• निओस्पोरिन अथवा टैरामाइसीन आफ्थेल्मिक आयटमेण्ट लगायें । । 

• व्रॉडिसिलीन ( Broadicilin - अल्केम ) 500 मि . ग्रा . एवं बच्चों को 250 मि . ग्रा . का इन्जेक्शन गहरे मॉस में नित्य लगावें । ।

• घाव पर रात सोते समय सोफामाइसीन आफ्थेल्मिक आयन्टमेण्ट । ।  

• खाने के लिये रॉशिलीन ( Roscilin - रैनवैक्सी ) 250 मि . ग्रा . का 1 कै . हर 8 घण्टे पर दें । शिशुओं को पीडियाट्रिक ड्राप्स 125 मि . ग्रा . प्रति 12 घण्टे पर । 

नोट -  अभाव में कै . टैरामाइसीन / कै . रेस्टेक्लीन 250 मि . ग्रा . ( 1 - 1 कै . ) दिन में 2 - 3 बार 5 दिन तक दे सकते हैं । 

• यदि स्टाई बार - बार हो जाती हो तो नेत्र के परीक्षण के लिये रोगी को नेत्र विशेषज्ञ के पास भेज दें ।


•• गुहेरी में प्रयुक्त विशिष्ट व्यवस्थापत्र

Rx 

• एम्पीसिलीन कैप्सूल 500 मि . ग्रा . - 1 कै . दिन में 3 बार x 5 दिन तक मात्र । । 

• वेनमाइसेटिन आई ड्रॉप्स ( Vanmycetin Eye drops ) – दिन में 5 बार 15 दिन तक । 

• क्लोरोमाइसेटिन ( Chloromycetin ) एप्लीकेप - रात सोते समय प्रभावित आँख में लगावें । x 15 दिन तक । 

• सुप्राडिन टेबलेट ( Supradin Tabs ) - मल्टी विटामिन्स 1 टिकिया नित्य 15 दिन तक । 

• सिकाई ( Foementation ) x दिन में 2 बार 5 दिन तक । 


कुछ लोग गुहेरी की चिकित्सा इस प्रकार से भी करते हैं । -

• हाट कम्प्रेश ( गर्म सेक ) दिन में 2 - 3 बार । 

• इन्जेक्शन क्रिस्टेलाइन पेनिसिलीन - 500 , 000 ( 5 लाख ) यूनिट x प्रतिदिन 4 - 5 दिन तक । → 

• बैक्ट्रिम डी . एस . - 1 टि , दिन में 3 बार 6 दिन तक । 

• यदि पीप ( Pus ) बन गया हो तो पीप को दबाकर निकाल दें । अथवा चाकू से चीरा लगाकर पीप को निकालकर पलक को साफ कर कोई सा एण्टीबायोटिक आफ्थेल्मिक मरहम लगावें । ।

Previous
Next Post »