ग्लोकोमा [ Glaucoma ] रोग के नाम , परिचय , कारण , लक्षण , निदान , परिणाम , प्रकार , चिकित्सा ? Glaucoma [Glaucoma] Name of disease, intake, cause, symptoms, diagnosis, results, type, therapy?

ग्लोकोमा [ Glaucoma ] 

ग्लोकोमा [ Glaucoma ] रोग के नाम , परिचय , कारण , लक्षण , निदान , परिणाम , प्रकार , चिकित्सा ? Glaucoma [Glaucoma] Name of disease, intake, cause, symptoms, diagnosis, results, type, therapy?
glaucoma



नाम - अधिमथ , नेत्र पौड़ा ( Extreme Pain in Eves ) । इसे सामान्य बोलचाल में सबलबाय ' भी कहते हैं । कोई - कोई इसे ' कालापाना ' भी कहते हैं । 

परिचय - बढ़ा हुआ आन्तरनैत्रिक दबाव । ग्लोकोमा का प्रमुख चिन्ह नेत्र में तनाव में वृद्धि है । जिससे दूष्टि तंत्रिका तन्तु एवं दृष्टि तंत्रिका पर अनावश्यक दबाव पड़ने से दूष्टि मंद हो जाती है । नेत्र का सामान्य तनाव ( Normal intra0cular pressure ) लगभग 15 से 20 मिलीमीटर पारा ( mmHg ) के बराबर होता है । जब यह सामान्य से बढ़कर नेत्र के कोमल भागों पर दबाव डालता है तो रोग के लक्षण पैदा होने लगते हैं । इसे ' काला मोतिया ' भी कहते हैं ।


रोग के सामान्य कारण 



• अधिकतर 40 साल की आयु के बाद होता है । वास्तविक कारण अज्ञात । । 
• नेत्र में नेत्रोद का अधिक मात्रा में बनना । । 

• नेत्रों से नेत्रोद का यथेष्ट मात्रा में बाहर की ओर न निकलना । यह कारण अधिक महत्व का है । 

• चोट , खरोंच , ऑप्टिक - नर्व की विकृति आदि अनेक कारणों से आँखों में जब दीर्घकाल तक दर्द रहता है तब ग्लोकोमा हो जाता है ।


रोग के सामान्य लक्षण 



• नेत्रों में पीड़ा एवं स्पर्शा - सहायता ( टेन्डरनेस ) । । 

• आधे सिर में भयंकर दर्द । । 

• कुछ ही घंटों में रोगी ( Acute Stage ) को धुंधला दिखायी देने की शिकायत कर सकता है एवं चमकदार रोशनी के चारों ओर इन्द्रधनुष या प्रभामण्डल दिखायी देने लगता है । 

• धीरे - धीरे दृष्टि कम होती जाती है । । 

• आँखों में रक्ताधिक्य अधिक महत्वपूर्ण । । 

• कार्निया पर धुंधलापन । । 

• आँख की पुतली अनियमित रूप से चौड़ी हो जाती है । एवं कभी - कभी खड़े आकार में अण्डाकार हो जाती है । 

• पुतलियों पर प्रकाश की प्रतिक्रिया नहीं । । 


रोग निदान → 

• प्रारम्भिक अवस्था में ग्लोकोमा का निदान बहुत कठिन है । किन्तु यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रति वर्ष सावधानी के रूप में अपने नेत्रों की परीक्षा यदि नेत्र विशेषज्ञ द्वारा सदैव कराता रहे तो इसका निदान सहज है । 

• 35 वर्ष की अवस्था के बाद इस प्रकार की परीक्षा कराते रहना अनिवार्य है।


रोग का परिणाम 


• रोग की उचित चिकित्सा न करने से दृष्टि मन्द पड़कर अन्त में स्थायी अंधापन उत्पन्न हो जाता है ।

नोट - सभी ऐसे व्यक्तियों को जिनके चश्मे के नम्बर में शीघ्र परिवर्तन होता हो , आध मस्तिष्क में पीड़ा बनी रहती हो तथा दीपक के चारों ओर रंगीन घेरे दिखायी देते हों , विशेष रूप से ग्लोकोमा को ध्यान में रखकर अपने नेत्रों की परीक्षा करानी चाहिये ।

० नेत्र की परीक्षा रेटीनोस्कोप ' , सेल्फ लमीनस डाइरेक्ट आफ्थेल्मोस्कोप से की जाती है । ' ओकुलर प्रेशर की माप Schiotz Tonometer से की जाती है । 

•• ग्लोकोमा के प्रकार ( Kinds of Glaucoma ) ••

प्राइमरी ग्लोकोमा - वह जो किसी अन्य रोग के बिना पाया जाता है । प्रौढ़ों में यह आंशिक अथवा पूर्ण अन्धत्व का सामान्य कारण है । 

क्लोज्ड एन्गल ग्लोकोमा वह जो निकास कोण की नैसर्गिक त्रुटि के कारण होता है । एवं प्राथमिक अथवा द्वितीयक हो सकता है । यह पीड़ा एवं दृष्टि के धुंधलेपन के कारण तीव्र अथवा पीडा नहीं होने पर दीर्घकालीन हो सकता है । जिसमें दृष्टि का लोप धीमे - धीमे होता है ।

ओपेन एन्गल ग्लोकोमा दीर्घकालिक प्राथमिक ग्लोकोमा जिसमें कोण खुला हुआ रहता है किन्तु निकासी धीमे - धीमे समाप्त हो जाती है । 4 . 

सेकेण्डरी ग्लोकोमा वह जो किसी नेत्र रोग के आन्तर नेत्रिक दबाव बढ़ने से जटिल हो जाने के कारण होता है ।


•• ग्लोकोमा / सबलवाय की चिकित्सा ••

• शीघ्र से शीघ्र नेत्र विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दें । ताकि अंधेपन से बचा जा सके । → 

• पाइलोकापन 4 % ( पाइलोकार - F . D . C ) को दिन में 5 - 6 बार डालें । 
• एसीटोजोलामाइड ( डायामोक्स - Diamox ) 500 मि . ग्रा . टिकिया । ऐसी 1 टिकिया । तत्काल दें एवं 250 मि . ग्रा . 6 - 6 घण्टे से इण्ट्रा - आकुलर टेन्शन को कम करने हेतु ग्लोकोमा के सभी मरीजों में दें । → 

• मेनीटोल आई . वी . दें । अथवा ग्लिसरोल मुख द्वारा ।

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•• ग्लोकोमा की विशेष चिकित्सा -

एक्यूट ग्लाइकोमा -
Rx

• गैरासोन आई ड्रॉप्स ( Garasone eye drops ) ( गैरामाइसीन , डेक्सामेथासोन ) दिन में 6 बार 3 दिन तक । 

• डायामोक्स टैबलेट ( Diamox Tab ) 2 टिकिया । तत्पश्चात् 1 टिकिया प्रति 6 घण्टे पर3 दिन तक । । 

• पाइलोकार 2 % ड्रॉप्स ४ दिन में 4 बार 3 दिन तक । चिकित्सा प्रारम्भ कर , बाद को किसी नेत्र चिकित्सालय के लिये रोगी को रेफर ( Refer ) कर देना चाहिये । ( यह एक इमरजेन्सी की स्थिति है ) ।

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( 1 ) ओपिन एन्गल अथवा सिम्पल ग्लोकोमा की चिकित्सा ( Treatment of 0pen Angle 0 Simple Glaucoma ) -

Rx

• मेडिकल चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य टेन्शन को कण्ट्रोल करना है । एवं  

• शल्य चिकित्सा आखिरी प्रयास ( Last resort ) । 

• टिमोलोल मेलिएट ( Timolol Maleate ) 0 . 25 % अथवा 0 . 5 % ड्रॉप्स दिन में 2 बार । । 

• डिपीवायलिल इपीनेफ्रीन ( Dipivalyl epinephrine ) 0 . 1 % ड्रॉप्स x दिन में 2 बार । । → 

• पाइलोकार्पोन ( Pilocarpine ) 2 % ड्रॉप्स दिन में 2 - 4 बार ।

•• यदि टिमोलोल असफल हो जाये तब ‘ डिपीवायलिल इपीनेफ्रीन ड्राप्स मिलाकर डालें । यदि टेन्शन कण्ट्रोल करने में यह भी फेल हो जाये तो कार्बोनिक एनहाइड्रेज ( Carbonic anhydrase ) मिलायें । एवं शल्य चिकित्सा की योजना बनावें । 

नोट - इसमें ट्रेवेकुलेक्टॉमी अथवा Schics Operation किये जाते हैं ।  

( 2 ) क्लोज्ड अथवा नेरो - एन्गल ग्लोकोमा ( Closed or Narrow Angle ( Glaucoma ) -

Rx  

• पाइलोकार्पोन नाइट्रेट 2 % अथवाएजरीनसल्फ0 . 5 से 1 % दिन में 3 बार डालें । 

• फेल होने पर ऑपरेशन । 

• ऑपरेशन से पूर्व उपद्रवों को इस प्रकार कण्ट्रोल करें -

• दर्द तथा शान्ति के लिये - एनाल्जेसिक ( Analgesics ) दें । । 

• पाइलोकापन 20 % ड्रॉप्स – माइओसिस पैदा करने के लिये । ( To produce Miosis ) ,

• डायामोक्स टैबलेट - 2 टि . तत्काल । तत्पश्चात् 1 टि . हर 6 घण्टे पर । 

• आई . वी . मेनीटोल ( Mannitol ) बहुत प्रभावकारी ।  

• बेसोमोटर फेनोमेनोन दूर करने के लिये — सिस्टेमिक एवं लोकल स्टेराइड्स दिन में 2 या 3 बार दें ।

•• एक बार टेन्शन नीचे आने और कंजेशन दूर हो जाने पर गोनियोस्कोपी करें तत्पश्चात् तद्नुसार ऑपरेशन की व्यवस्था । 
( 3 ) इन्फेन्टाइल ग्लोकोमा ( Infantib Glaucoma ) -

• एकमात्र शल्य चिकित्सा ( Treatment is surgical ) । 

• मेडिकल चिकित्सा ओपरेशन पूर्व सहायक । → 

• गोनियोटोमी केवल टेन्शन को 70 - 80 % केसिस में कण्ट्रोल करता है ।

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