[ मोतियाबिन्दु कैटारेक्ट - cataract ] रोग के नाम , परिचय , कारण , लक्षण एवं चिन्ह , प्रकार , चिकित्सा ? [Cataract Cataract - Cataract] Name, intro, cause, symptom and sign of disease, type, therapy?

[ मोतियाबिन्दु कैटारेक्ट - Cataract ] 

[ मोतियाबिन्दु कैटारेक्ट - Cataract ]  रोग के नाम , परिचय , कारण , लक्षण एवं चिन्ह , प्रकार , चिकित्सा ? [Cataract Cataract - Cataract] Name, intro, cause, symptom and sign of disease, type, therapy?
cataract 



नाम - सफेद मोतिया । 

परिचय - नेत्र के क्रिस्टलीय लेन्स की अपारदर्शिता जिससे आंशिक अथवा पूर्ण अन्धत्व होता है । यह जन्मजात अथवा वृद्धावस्था , आघात या मधुमेह के कारण हो सकता है ।  

• इस रोग में आँख के लेंस या उसके आवरण या दोनों धुंधले हो जाते हैं और उस पर एक पर्दा सा आ जाता है ।

• आँख के अंदर का स्वच्छ पारदर्शक लेंस जब कठोर और धुंधला हो जाता है तब नेत्र की ज्योति बिल्कुल नष्ट या कम हो जाती है और देखने की क्षमता नष्ट हो जाती है । पहले अंदर और फिर आँख की पुतली में सफेद फली दृष्टिगोचर होती है । वही ' मोतियाबिन्द कहलाता है । 

मोतियाबिन्द भारत में बहुतायत से पाया जाता है । यह रोग साधारणतः 40 वर्ष की अवस्था के बाद उत्पन्न होता है किन्तु किसी भी अवस्था का व्यक्ति इस रोग से आक्रान्त हो सकता है । इस रोग में मोती या लेंस जो पारदर्शक होता है शनैः शनैः धूमिल होकर अपारदर्शक स्थिति को प्राप्त हो जाता है और रोगी को दिखायी देना बन्द हो जाता है ।

मातियाबिन्द के कारण -

• मोतियाबिन्द के बनने का असली कारण अभी तक पता नहीं । 

• रोगी की बढ़ती हुई उम्र , भोजन में मुख्य तत्वों ( प्रोटीन एवं विटामिन्स ) की कमी , तपते हुए सूरज की गर्मी एवं अन्य शारीरिक रोग मोतियाबिन्द में सहायक । । 

• नेत्र में चोट लगना , परितारिका रोमकपिण्ड शोथ , दृष्टिपटल वियोजन आदि अन्य कारण । 

• अल्ट्रा वायलेट चिकित्सा के अधिक प्रयोग से । 

• कुछ जहरीली दवाइयों की गठना हो सकती है । 


मोतियाबिन्द के लक्षण एवं चिन्ह -



• यह रोग एक या दोनों आँखों में शनैः शनैः कई मास या वर्षों में उत्पन्न हो जाता है । । 

• दूष्टि धीरे - धीरे घटती चली जाती है । साथ ही देखने की क्षमता लुप्त होती जाती है । अन्त में एकदम दिखायी नहीं पड़ता है । 

• देखने में प्रत्येक वस्तु बड़ी दिखायी देती है । । 

• बिजली के बल्ब के प्रकाश को देखने पर अन्तर प्रतीत होता है और प्रकाश के चारों ओर नीली - हरी दिखायी देती है । तारों और चाँद को देखने पर एक की बजाय कई दिखायी देते हैं । । 

• कभी - कभी रोगी को नेत्रों के सामने काला स्थिर धब्बा दिखायी देता है ।


मोतियाबिन्द 2 प्रकार का होता है• कोमल तथा • कठोर । । 

कोमल मोतिया - इसका रंग पूर्ण नीला तथा उत्पत्ति बाल्यावस्था से लेकर 35 वर्ष की आयु तक होती है । 

कठोर मोतिया - इसका रंग धुमैला या पीला आभा लिये होता है तथा उत्पत्ति वृद्धावस्था में होती है । 


मोतियाबिन्द की स्थिति 2 प्रकार की -

• मोतियाबिन्द की अपक्व स्थिति ( Immature Cataract ) । 

• मोतियाबिन्द की पक्व अवस्था ( Mature Cataract )

मोतियाबिन्द की अपक्व स्थिति - इस अवस्था में रोगी को कभी - कभी दो - दो आकृतियाँ दिखायी देती हैं । 

• मोतियाबिन्द की पक्व अवस्था जब नेत्र की दृष्टि बिल्कुल मंद हो जाती है और | रोगी को केवल अंधकार और प्रकाश का ही बोध रह जाता है । यही मोतियाबिन्द की शस्त्रकर्म द्वारा निकाल देने की सही अवस्था है ।


कभी - कभी मोतियाबिन्द और सबलवाया साथ - साथ भी -

कभी - कभी यह देखा गया है कि वृद्धावस्था में मोतियाबिन्द एवं सबलवाय नेत्र में एक साथ हो जाते है जाते हैं । ऐसी स्थिति में -

• ऐसे रोगी दृष्टिमंदता के साथ - साथ मस्तिष्क में पीड़ा का भी अनुभव करते हैं । 

• दृष्टि अधिक शीघ्रता से गिरती जाती है । 

• समय से चिकित्सा न करने पर मोतियाबिन्द के पकने के पूर्व ही दृष्टि तंत्रिका ( Optic | Nerve ) के क्षीण होने से दृष्टि का ह्रास हो जाता है । 

याद रखिये - 
काला मोतिया ( ग्लोकोमा ) - नेत्रगोलकों पर बढ़े हुए दबाव के कारण पैदा हुई स्थिति को लोकोमा , काला मोतिया या नीला मोतिया कहते हैं । सामान्य नेत्रों में जलद्रव पाया जाता है जो नेत्रों में बेरोकटोक चक्कर काटता रहता है । दबाव के सामान्य सीमा में रहने पर ही यह जलद्रव नेत्रों की आकृति व सीमा को बनाये रखता है । यदि किसी कारणवश छोटी नलिकायें , जिनसे द्रव बाहर निकलता है , बन्द हो जायें तो दबाव बढ़ जाता है । वह बढ़ा हुआ दबाव नेत्र के उन नाजुक हिस्सों को नष्ट कर सकता है , जो कि नेत्र के सामान्य कारणों के लिये उत्तरदायी हैं । 


सावधान - काला मोतिया और मोतियाबिन्द अलग - अलग हैं । दोनों की दशायें अलग हैं । पर30 वर्ष की आयु के बाद ही दोनों होते हैं इसीलिये भूल होती है । 


मोतियाबिन्द लक्षण एक दृष्टि में -

• रोग आमतौर पर वृद्धावस्था में । । 

• क्रमशः पीड़ाविहीन दृष्टिनाश । ।

• रोग के विकास काल में एक के दो दिखना । । । 

• एक वस्तु कई दिखायी देती हैं । । 

• सामान्यतः एक लेंस प्रभावित । । 

• बाद में दोनों आँखों में अपारदर्शकता पूर्वतः ( आपेसिटी ) विकिसत हो सकती है । 

लेंस का रंग भूरा - सफेद हो जाता है ।


•• मोतियाबिन्द की चिकित्सा → 



• इसकी कोई प्रभावशाली औषधि चिकित्सा नहीं ।  

• जब मोतियाबिन्द पक जाय तब ऑपरेशन ही एकमात्र चिकित्सा है । । 

• डिटेचमेण्ट आफ रेटिना । 

नोट - मोतियाबिन्द का ऑपरेशन के अलावा और उपचार नहीं है । अतएव योग्य डाक्टर से ऑपरेशन कराकर इससे छुटकारा पायें ।


निम्न औषधियों से प्रारम्भ में कुछ आंशिक लाभ मिल सकता है  -

1 . सिनेरिया मेरिटीमा ( होम्योपैथिक औषधि ) - 1 - 2 बूद दिन में 2 - 3 बार आँख में डालें ।

नोट - यह औषधि रोग के प्रारम्भ में लाभ पहुँचाती है । इससे मोतिया उतर जाता है और ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ती है । 

2 . एट्रोपीन ( Atropine )  -  रोगग्रस्त आँख में डालने से पुतली फैलकर किसी सीमा तक दृष्टि साफ रहती है । 

3 . फाइब्रोलाइसिन ( Fibrolycin - मर्क )  -  2 - 3 बूंद रोजाना 3 बार आँख में डालें ।

4 . कैटेलिन ( Catalin ) विलशायर ।  -  1 टिकिया 15 मि . ली . घोलक के साथ आती है । टिकिया को घोलक में घोलकर 1 - 2 बूंद की मात्रा में हर 4 - 5 घण्टे पर डालें ।

नोट - रोग की प्रारम्भिक अवस्था में लाभ पहुँचाती है ।


कुछ तथ्य कुछ सुझाव -

• मोतियाबिन्द के रोगी को आरम्भ से ही योग्य नेत्र विशेषज्ञ के पास जाकर अपने नेत्रों की जाँच करा लेनी चाहिये ।

• यदि मोतियाबिन्द पका नहीं है तो उसे 2 - 3 माह के अन्तर से नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेते रहना चाहिये । । 

• इसका ऑपरेशन बहुत ही आसान है । इस ऑपरेशन में अपारदर्शक मोती को बाहर निकाल दिया जाता है जिससे प्रकाश पुनः दृष्टिपटल तक पहुँचने लगता है । । 

• मोतियाबिन्द का ऑपरेशन किसी भी ऋतु में किया जा सकता है किन्तु जाड़े के ऋतु में रोगी बड़े आराम से चित्त लेट सकता है । इसीलिये इस ऋतु में अधिक संख्या में रोगी ऑपरेशन कराने के लिये विभिन्न नेत्र चिकित्सालयों में भर्ती होते हैं । 

नोट - ० केटालिन आई ड्रॉप्स ( Catalin eye drops ) दिन में 4 बार 2 माह तक डालें । केस को आई हॉस्पिटल के लिये रेफर कर देना चाहिये । →

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