शीतपित्त / पित्ती ऑर्टिकैअरिया - [ Urticarial ] किस प्रकार की बीमारी है ? इसके पर्याय नाम , परिचय , कारण , लक्षण , चिकित्सा ? Hip Articaria - [Urticarial] What Type Of Illness? Its synonyms name, introduction, reason, symptoms, medicine?

शीतपित्त / पित्ती ऑर्टिकैअरिया - [ Urticarial ]

शीतपित्त / पित्ती ऑर्टिकैअरिया - [ Urticarial ] किस प्रकार की बीमारी है ? इसके पर्याय नाम , परिचय , कारण , लक्षण , चिकित्सा ? Hip Articaria - [Urticarial] What Type Of Illness? Its synonyms name, introduction, reason, symptoms, medicine?
Urticarial


पर्याय नाम

हीवेज ( Hives ) , नैटल रैस ( Nattle Rash ) , पित्ती , शीतपित्त , अर्टिकैरिआ , छपाकी , जुड़ीपित्ती , जुल्लपित्ती आदि नामों से । 


परिचय

एक तीव्र अथवा दीर्घकालिक त्वचीय अवस्था जो चकत्तों के बार - बार निकलने एवं अत्यधिक जलन ( Irritation ) उत्पन्न करने के लक्षणों से युक्त होती है । यह स्थिति सम्भवतः कुछ खाद्य - पदार्थों के प्रति अत्यन्त संवेदनशीलता के कारण होती है । 


दूसरे शब्दों में

आर्टिकैरिया – कुछ भोजन , औषधियों , संक्रमण अथवा मानसिक दबाव के कारण होने वाली त्वचा की एक वाहिकीय प्रतिक्रिया जिसमें कुछ देर के लिये स्फोट प्रकट होते । हैं । जिसमें खुजली आती है ।

० ० यह त्वचा पर एकाएक उभरने वाले चकत्ते होते हैं । वर्ण कुछ लालिमा लिये , विविध आकार एवं आकृति के प्रायः एक दूसरे से मिल जाने वाले तीव्र कण्डूयुक्त होते हैं । प्रायः वयस्कों को होता है ।

रोग के प्रमुख कारण -





• पाचन विकार की गड़बड़ी । 

• कुछ केसिस ठंड लगकर भी । । 

• अजीर्ण , पेट के विकार , अग्निमांद्य , 

• मन्दाग्नि , कब्ज आदि कारणों से । 

• महिलाओं में गर्भाशयिक विकारों के परिणामस्वरूप । → 

• वात रोग , किसी विशेष प्रकार के जहरीले कीड़े , बरैया , मधुमक्खी , मच्छर , खटमल आदि के काटने के फलस्वरूप भी होता है ।

• भोजन अथवा औषधि से होने वाली एलर्जी से ।


रोग के प्रमुख लक्षण -



• शरीर पर एकाएक लाल चकत्तों का उभरना । 

• चकत्तों में तीव्र खुजली । ।

• चकत्ते उभरते ही माथा , सिर , कान तथा चेहरे का अधिकांश भाग कुछ सूज सा जाना । । 

• कभी - कभी साथ में ज्वर भी । → 

• जी मिचलाना , वमन एवं बेचैनी भी । → 

• कुछ घंटों - मिनटों अथवा कुछ दिनों तक रहने के बाद चकत्ते लोप हो जाते हैं ।

• बच्चों की पित्तियों में कभी - कभी पानी भी आ जाता है ।


याद रखिये

• लक्षण तीव्र रूप के होते हैं । । 

• साथ में ज्वर , वमन , अतिसार भी हो सकते हैं । 

• न्यूनाधिक समय में स्वयं शान्त । । 

•कभी - कभी पित्तियाँ बराबर कई दिन अथवा सप्ताहों तक बनी रहती हैं । 
• समूहों में निकलती हैं । पहले की ठीक हो जाती हैं और नई निकल आती हैं ।

• इनका आकार छोटा बिन्दु के समान से लेकर बहुत बड़ा तक हो सकता है। 

• अधिक से अधिक कण्डूयुक्त एवं खुजलाने से संख्या और आकार में वृद्धि।

• परस्पर मिलकर बड़ा आकार ग्रहण करने की प्रवृत्ति । कभी - कभी तो इनसे शरीर का सारा अंग ही भर जाता है । 

• गले में पित्तियाँ होने पर श्वासावरोध ।


नोटरोग पुराना होने पर जीवन भर साथ नहीं छोड़ता है । 


•• शीतपित्त की औषधि चिकित्सा ••

रोग भोजन या औषधि खाने से तो नहीं हुआ है पता लगाकर तद्नुसार चिकित्सा करें । 

एण्टी - हिस्टैमिन चिकित्सा उपयोगी । यथा - एविल 1 टिकिया दिन में 3 बार 5 दिन तक । अथवा मेब्रिल की 2 टिकिया दिन में 2 बार दें । 

दौरों की तीव्रता में कॉर्टीकोस्टेरॉइड्स दें । लेकिन अधिक पुराने रोगियों में उपयोगी नहीं । । 

पेट की सफाई आवश्यक । । । प्रेरिएक्टिन की 1 टिकिया दिन में 3 - 4 बार दें ।

लगाने के लिये - ‘ सायनिस्टामिन क्रीम ' अथवा ' सिस्ट्राल क्रीम चकत्तों पर दिन में 3 - 4 बार मलें । 

श्वासावरोध की स्थिति में

• एड्रीनलीन का प्रयोग । 

• एविल 50 की 1 टि . + वेटनिलान 1 टि . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार जल से दें । 

•• आजकल पराने शीतपित्त का एक कारण आँतों के पैरासाइटस ( कीडों ) को भी समझा जाता है । अतः ऐसी संदिग्ध अवस्था में रोगी को एक कोर्स ऐसी एण्टी - हेलमिन्थक औषधियों को भी देना चाहिये ।


•• पित्ती में सेवन कराने योग्य अपडेट एलो . पेटेन्ट टेबलेट •• 

1 . हिस्टालौंग टेबलेट ( Histalong tabs ) स्टेनजन  -  1 टिकिया दिन में 1 बार । तीव्रावस्था में 30 मि . ग्रा . प्रतिदिन । 

2 . एसेमिज टेबलेट ( Acemiz tab ) लूपिन 10 मि . ग्रा . की टिकिया  -  1 टिकिया भोजन से पूर्व दें । तीव्रावस्था में 30 मि . ग्रा . की 1 टिकया दिन में 1 बार दें ।

नोट - ० इसका सस्पेन्शन भी आता है । गर्भावस्था तथा संवेदनशीलता में न दें ।

3 . एसीपैक्स टेब . ( Acipax tabs - वाईथ )  -  10 मि . ग्रा . की 1 टि . दिन में 1 बार दें । 6 से 12 साल तक के बच्चों को 5 मि . ग्रा . दें । टिकिया खाली पेट दें । 

4 . एलेरजोल टेब . ( Alerzole tabs - थेमिस )  -  10 मि . ग्रा . दिन में 1 बार खाने से पूर्व खाली पेट । तीव्रावस्था में 30 मि . ग्रा . 7 से 10 दिन तक दें ।

5 . पोलरामाइन टेबलेट ( Polaramine tabs )  -  1 - 1 टि . दिन में 3 - 4 बार । 12 साल से कम आयु के बच्चों को 1 / 2 टि . एवं नन्हें शिशुओं को 1 / 4 टि . । ।

नोट - इसका सस्पेन्शन भी आता है । 

6 . एस्टे लौंग टेबलेट ( Astelong tabs - टोरेण्ट )  -  1 टि . दिन में 1 बार / तीव्रावस्था में 2 - 3 टिकिया । 

• सस्पेन्शन भी आता है । 

7 . जोटर टेबलेट ( Zoter tabs )  -  60 मि . ग्रा . दिन में 2 बार । बच्चों को आधी मात्रा ।


•• पित्ती में लगाने योग्य सुप्रसिद्ध एलो . पेटेन्ट इन्जेक्शन ••

1 . एविल इन्जे . ( Avil Inj . - होचेस्ट )  -  2 मि . ली . मांस में दिन में 2 - 3 बार दें ।

2 . एडेनालीन इन्जे . ( Adrenaline Inj . )  -  माँस में आ . नु . लगावें । 

3 . कैल्शियम सैण्डोज ( Calcium Sandoze ) सैण्डोज कं  -  10 मि . ली . आई . वी . धीरे - धीरे । 

4 . कैल्शियम ग्लूकोनेट  -  पुराने रोग में 10 % का 10 मि . ली . नस में सुई लगावें ।


•• पित्ती में लगाने के लिये वाह्य औषधि ••

• केलाड्रिल लोशन ( Caladryl lotion ) पी . डी .  -   पीड़ित त्वचा पर आ . नु . लगावें । 

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