दद्दाद - रिंगवर्म [ Ringworm ] क्या है ? इसके पर्याय नाम , परिचय , कारण , लक्षण , चिकित्सा ? What is ringworm? Its synonyms name, introduction, reason, symptoms, medicine?

दद्दाद - रिंगवर्म [ Ringworm ] 

दद्दाद - रिंगवर्म [ Ringworm ] क्या है ? इसके पर्याय नाम , परिचय , कारण , लक्षण , चिकित्सा ? What is ringworm? Its synonyms name, introduction, reason, symptoms, medicine?
ringworm

पर्याय नाम

टीनिया ( Tinca ) । ट्राइकोफाइटासिस । 


परिचय - 

एक संसर्गी त्वचा का रोग , गुलाबी रंग के विशल्की सतयुक्त गोल चकत्तों की विशिष्टता से युक्त एवं परिपोषीय कवक के कारण होता है । यह एक विशेष प्रकार का प्रदाहिक रोग है । यह सिर , त्वचा या नाखून में होता है । 

० ० त्वचा , बाल एवं नाखूनों का कवक संक्रमण ( Fungus infection ) । ।

रोग के प्रमुख कारण 

• यह पुरोपजीवी फफूदी ( Fungus ) से होता है । 

सहायक कारण -
• नियमित स्नान न करने से । । 

• पसीना आदि आकर मैल जमा होने से । । 

• फफूदी और मैल रोग उत्पन्न करने में विशेष सहायक । । → 

• यह कई प्रकार का होता है और कई जीवाणुओं ( Fungus ) द्वारा होता है । 

• गरम और आईं आवोहवा . कुपोषण अस्वास्थ्य कर रहन - सहन और इस रोग से पीड़ितों के निकट सम्पर्क में रहने से रोग के होने की सम्भावना बढ़ जाती है ,

• शरीर के जिस भाग में यह रोग होता है । इसी के अनुसार इसके नाम भी अलग - अलग हैं ।


प्रमुख लक्षण 


• पहले कुछ छोटे दाने पैदा होते हैं , उनमें थोड़ा द्रव भी रहता है । । । 

• दानों के ऊपर पपड़ी जमती है । दोनों के चारों ओर उसी प्रकार के दाने निकलते हैं और दानों की एक रिंग बन जाती है । → 

• इनसे घिरा हुआ भाग कुछ मोटा और हल्के रंग का होता है । नये दाने निकल आते हैं और पुराने लुप्त हो जाते हैं । रिंग कुछ बाहर को उभर आती है । यह रिंग्स शरीर के एक अथवा अनेक स्थान पर हो सकती हैं । 

• नाखूनों में दाह होने पर वह सिकुड़ , जाता है , टेढा - मेढ़ा हो जाता है तथा गहरे भूरे या पीले रंग का हो जाता है । रोग नाखून के अन्तिम भाग से प्रारम्भ होकर ऊपर को चढ़ता है । 

• कपाल में दाद होने पर वहाँ का चर्म मोटा हो जाता है और एक चकत्ता सा पड़ जाता है , बाल गिरने लगते हैं । ऐसे अनेक चकत्ते पड़ जाते हैं । 

• हाथ पाँव और तलवों का दाद एक्जीमा के समान होता है ।


नोट 

• भीगे नेकर या अंडरवियर पहनने अथवा शरीर के ऐसे भागों में जो हर समय कपड़े से ढके रहते हैं या नमी रहती है वहाँ यह रोग अधिक होता है ।

• मधुमेही तथा मोटे व्यक्ति में अधिक होता है ।

विशेष प्रकार का डाढ़ी वाला दाद -  • यह आमतौर पर नाई से डाढ़ी बनाने वालों को अधिक होता है । इसमें खुजली होती है तथा गोल चमकत्ते से पड़ जाते हैं और इस दाद की वजह से डाढ़ी बनना कठिन होता है । इसमें भयंकर खुजली चलती रहती है । 

• दाद जो डाढ़ी में होता है गाय , घोड़ा अथवा अन्य पशुओं से आता है वह गले के नीचे तक बुरी तरह से फैलकर रोगी को हलाकान कर देता है । इसमें गोलियाँ सी नजर आती हैं जो क्रमशः सारी डाढ़ी , गाल तथा गले तक फैलकर पूरे चेहरे को विकृत कर देती हैं । चेहरा सूज सा जाता है तथा त्वचा से रक्त स्राव भी होता है ।


विशेष नैदानिक अनिवार्यतायें -

• लीजन्स बेतरतीब रुप से प्रसारित एवं छोटे - बड़े विभिन्न आकार के । । 

• ये लालिमायुक्त , परतदार , चकत्ते के रूप में , स्वच्छ , मध्य क्षेत्र के चारों ओर कुण्डलाकार होते हैं । 

• कभी - कभी अनेक रिंग्स के रूप में विकसित । ।  

• खुजली अक्सर रात में । । 

• इसमें एक सुनिश्चित किनारा होता है जो अक्सर फफोलों के स्वरूप का होता है ।


दाद की औषधि चिकित्सा

• स्वच्छता की ओर विशेष ध्यान आवश्यक / कच्छे आदि कपड़ों को उबालकर प्रयोग में लाना । । 

• ग्राइसोफल्विन ( Grisaofulvin ) 500 मि . ग्रा . प्रतिदिन आराम होने तक । लगभग 5 - 6 माह तक औषधि सेवन की आवश्यकता होती है । । 

• नाखूनों के दाद में — ' ग्राइसोफल्विन का 3 - 4 महीने तक मुख द्वारा प्रयोग करें । नाखून को तेज चाकू , कैंची अथवा सर्जिकल ब्लेड्स से खुरचकर दिन में कई बार ' कार्बोलिक एसिड प्रयोग किया जा सकता है ।

• सिर के दाद में — बाल साफ कर साबुन की भाग + रेक्टीफाइड स्प्रिट दाद पर लगाकर । साफ करना चाहिये । बाद में दाद पर काडलिवर ऑयल लगा दें । इसे रगडकर लगायें । । अथवा सैलीसिलिक एसिड आयटमेंट 5 % का प्रयोग करें । ‘ डरमा सल्फ का उपयोग प्रशस्त है । 

• लसिकापर्वशोथ , ज्वर आदि की स्थिति में उचित एण्टीबायोटिक । 

• पैर के दाद में पैरों को भली - भाँति धोकर पोंछना चाहिये । तत्पश्चात् ' डिपसैलिक आइन्टमेण्ट ( Dipsalic Oint ) लगावें ।

सावधान - ० बाद को सूती मोजे पहिनायें । नाइलोन तथा प्लास्टिक के जूते कदापि नहीं । 

•• प्रभावित भाग को शुष्क करके ' बी - टेक्स मलहम लगायें । प्रेक्टिस में प्रयोग के लिये 3 % सैलीसिलिक एसिड या 1 टि . एस्प्रीन में वैसलीन 25 ग्राम मिलाकर मलहम तैयार कर लगावें । मल्टीफंगिन ट्यूब या मल्टीफंगिन पाउडर अथवा माइकोडर्म पाउडर लगाया जा सकता है । 

अथवा - 

‘ टीनियाडर्म लोशन या क्रोटोरेक्स लोशन लगायें । तत्पश्चात् मल्टी फंगिन पाउडर । यह एक महँगी चिकित्सा है ।

बाल और नाखूनों की उचित व्यवस्था - - ग्राइसोविन या आइडीफुलविन को 2 - 2 टिकिया प्रातः - सायं 2 - 4 सप्ताह तक दें । यदि नाखून पीले या भूरे रंग के हो गये हों , देखने में अच्छे न लगते हों उन्हें ग्राइसोफल्विन 4 से 6 मास तक देते रहें । साथ में कैल्शियम तथा विटामिन - सी की गोलियाँ भी दें । यह एक महँगी चिकित्सा है ।

•• नया दाद - ' ह्विटफील्ड या आइंटमेण्ट लगाने से चला जाता है । लाभ न मिलने पर ' टीनियाफैक्स ' एक उत्तम मलहम है । एक ही ट्यूब से दाद चला जाता है । 

नोट - ० हथेली , तलुओं और बगलों में होने वाले दाद के लिये यह अति उत्तम मलहम है । 


मलहम कैसे लगायें - 

आक्रमित स्थान को पानी से धोकर दाद के ऊपर जो छिल्के जैसे जम जाते हैं उन्हें गीले कपड़े या खुरदरी चीज से रगड़कर उतार दें । सुबह और रात्रि को मलहम लगा दिया करें ।


•• दाद में सेवन कराने योग्य अपडेट ऐलो . पेटेन्ट टेबलेट / कैप्सूल्स ••

1 . ग्रीसोविन - एफ . पी . ( ग्लिण्डिया ) - 2 - 2 टिकिया दिन में 3 बार दें । 

2 . फंगीसाइड टे . ( Fungicide Tabs . ) नि . - ‘ टोरेण्ट 200 मि . ग्रा . - 1 - 1 टिकिया प्रतिदिन दें ।

3 . माइकोस्टेरिन टेबलेट ( Mycostatin Tabs . ) - हर प्रकार के दाद में 1 - 1 टि . दिन में 3 बार

4 . निजराल टेबलेट ( Nizral Tbs . ) ‘ इथनॉर200 मि . ग्रा . -  1 टिकिया दिन में 1 बार ।

5 . ग्रीसेक्टिन फोर्ट टेब . ( Grisactin forte Tabs . ) सी . एफ . एल . -  माथा एवं नाखून के दाद में 200 मि . ग्रा . दिन में 3 बार । बच्चों को 10 मि . ग्रा . प्रति किलो शरीर भार के अनुसार ।

6 . फुनाजोल टेबलेट ( Funazole Tabs ) खण्डेलवाल 200 , 400 मि . ग्रा . - 1 टि . नित्य / बच्चों को 3 . 3 से 6 . 6 मि . ग्रा . प्रति किलो शरीर भार के अनुसार दें ।

7 . केटोजोल टेब . ( Ketozole Tabs ) गूफिक  -  योनि के दाद , नाखून के दाद एवं सिर के दाद के लिये 1 - 1 टिकिया दिन में 2 बार 5 दिन तक । अथवा आन . नु . । ।

8 . माइकोराल कैप्सूल ( Mycoral Caps ) प्लेथिको  -  1 - 2 कै . दिन में 2 बार । बच्चों को 1 / 4 1 / 2 मात्रा ।

9 . एम्ब्रोड्रिल कैप्सूल ( Ambodryl Caps ) ‘ पी . डी . कं '  -  1 कै . दिन में 3 बार । बच्चों को इसका सीरप 1 / 2 - 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । ।


•• दाद में लगाने योग्य एलो . पेटेण्ट क्रीम / पाउडर / लोशन

1 . मल्टीफंगिन क्रीम ( Multifungin Cream ) बी . नॉल  - दाद के स्थान को सूती खद्दर के कपड़े से रगड़कर क्रीम आ . नु . लगावें । । 

2 . सरफेज क्रीम ( Surfaz Cream ) ' फ्रेंको - इंडियन  -  पीडित स्थान पर दिन में 2 - 3 बार लगावें ।

3 . टेनोवेट स्किन क्रीम ( Tenovate Skin Cream ) ग्लैक्सो  -  आ . नु . दिन में 1 - 2 बार पीड़ित त्वचा पर लगावें ।

नोट - इसी कम्पनी का टेनोवेट - एम औरटेनोवेट - जी भी क्रीम आती है । 

4 . क्रोटोरेक्स क्रीम ( Crotorex Cream ) ‘ एस . जी . फार्मा ,  - प्रभावित स्थान पर दिन में 2 - 3 बार लगावें । इसका लोशन भी आता है ।

5 . इमिडिल स्किन क्रीम - ' लाइका ' ( Imidil Skin Cream ) - समस्त प्रकार के दर्द में - पीड़ित स्थान पर दिन में 2 - 3 बार लगावें । इसका सोल्यूशन भी आता है ।

6 . डर्मों - क्वीनोल ( Dermo - Quinol - ईस्ट इण्डिया )  -  प्रभावित भाग की त्वचा को साफ कर दिन में 2 - 3 बार लगावें ।

7 . केनडिड क्रीम ( Candid Cream ) ‘ ग्लेनमर्क  -  हर प्रकार के दाद में दिन में 2 - 3 बार लगावें । ।

8 . इमस्केब लोशन ( Emscab Lotion ) एम . एम . लैब्स  -  आ . नु . दिन में 1 - 2 बार लोशन का प्रयोग करें । 

9 . एबजोर्ब पाउडर ( Abzorb Powder ) ‘ क्रोसलेण्ड  -  आ . नु . दिन में 2 - 3 बार पीड़ित चर्म पर छिडकें ।

10 . बेडियोनाल जैल ( Badional Gel - वायर )  -  पीडित त्वचा पर लगावें ।

11 . टिनाडर्म सोल्यूशन ( Tinaderm Solu - tion ) फुलफोर्ड  -  दाद के स्थान पर दिन में 2 - 3 बार लगावें ।

12 . माइकोजेल - एफ क्रीम ( सिपला )  -  दाद के स्थान पर दिन में 2 - 3 बार लगावें ।

नोट - ० नाखून के दाद में इस औषधि को 3 - 4 मास तक लगातार लगायें । 
• इसकी प्लेन क्रीम भी आती है ।

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