छाजन - एक्जीमा [ Eczema ] आखिर किस प्रकार का रोग है ? क्या है इसके पर्याय नाम , परिचय , प्रकोप , कारण , लक्षण , चिकित्सा ? Eczema [Eczema] What type of disease is it? What is its synonym name, introduction, outbreak, cause, symptoms, medicine?

छाजन - एक्जीमा [ Eczema ] 

छाजन - एक्जीमा [ Eczema ] आखिर किस प्रकार का रोग है ? क्या है इसके पर्याय नाम , परिचय , प्रकोप , कारण , लक्षण , चिकित्सा ? Eczema [Eczema] What type of disease is it? What is its synonym name, introduction, outbreak, cause, symptoms, medicine?
eczema


पर्याय नाम

एक्जीमा के पारम्परिक नाम पामा , छाजन , अकौता तथा चम्बल आदि हैं । 

परिचय - 

तवचा की तीव्र अथवा दीर्घकालिक प्रदाहकारी स्थिति , असांसक होती है । यद्यपि द्वितीयक संक्रमण सामान्यतः होता है । स्फुटन पहले फुसियों जैसा दिखायी देता है जो नम हो जाता है एवं अन्ततः पपड़ी बनती हैं । प्रभावित भाग में बहुत जलन होती है एवं अन्य शारीरिक व्यवधान भी उपस्थित हो सकते हैं । इसके कई प्रकार उत्पत्ति में तीव्रग्राही होते हैं । ड्राई एक्जीमा जिसमें प्रभावित क्षेत्र सूखा एवं शल्कीय होता है । वीपिंग एक्जीमा जिसमें सूखने एवं जख्म भरने के पूर्व प्रभावित क्षेत्र से सीरस का निस्सारण होता है ।


प्रकोप - 

इसका प्रकोप त्वचा पर , खाज - खुजली , जलन तथा दर्दयुक्त छोटी - छोटी बारीक सी पंसियों से प्रारम्भ होता है । यही छोटी - छोटी पुंसियाँ या दाने खुजलाते - खुजलाते घाव का रूप धारण कर वृहद आकार ग्रहण कर लेते हैं । इसके फफोलों , पुंसियों आदि पर जीवाणुओं / विषाणुओं और फंगस का घातक आक्रमण भी हो जाता है ।


रोग के प्रधान कारण -



• क्रीम , पाउडर , लिपिस्टिक , केशरंजक द्रव्य , प्लास्टिक के जूते , रबर के जूते , दस्ताने , धातु के बने पदार्थ जैसे घड़ियों के ढक्कन , कानों के कांटे , कृत्रिम धागों से बने वस्त्र , साबुन , कपड़े धोने के पाउडर एवं सल्फा , पेनिसिलीन औषधियों के प्रतिक्रिया स्वरूप कारक हैं ।

• कब्ज तथा पाचन विकार । । । 

• सूर्य का विकरणीय प्रभाव भी । । 

• रक्त - विकार विशेष कारणों में से एक । 

• विशेष प्रकार के जीवाणुओं - विषाणुओं के आक्रमण के फलस्वरूप । । । 

• गठिया , सन्धिवात , आमवात के रोग प्रायः आक्रान्त । । । 

• महिलाओं में मासिक धर्म की गड़बड़ी । । । 

• अत्यधिक सोडा , साबुन , चूने आदि के सम्पर्क में रहने वालों को भी । 

• पसीनायुक्त पहने कपड़ों से शरीर को | रगड़ना , अनुचित खान - पान , आहार विहार , माता के दूध की गड़बड़ी आदि कारणों से । 

• एक स्थान के एक्जीमा के घाव का स्राव बहकर अथवा किसी अनय कारण से किसी अन्य स्वस्थ अंग पर लगने से ।

• बच्चों में पाचन शक्ति की गड़बड़ी तथा आँतों में कृमियों का प्रबल संक्रमण आदि कारणों से । । 

• नाड़ी संस्थान की कमजोरी , मधुमेह , आदि कारणों से । 

••दुर्भाग्यवश अभी तक बहुत से एक्जीमा में यह पता नहीं चलता कि कारण क्या है । साधारणतः ऐसा विश्वास किया जाता है कि यह एलर्जिक प्रतिक्रियाओं के कारण होता है ।


रोग के प्रधान लक्षण -



• फुसियों में तीव्र खाजयुक्त जलन एवं वेदना । 

• फुसियों का रंग लाल होता है और रोगी खुजला - खुजलाकर बेहाल हो उठता है । और वही छोटी - छोटी फंसियाँ घाव का रूप ले लेती है । → 

• घाव से सफेद या पीले रंग का स्राव निकलता है ।

• रोग के अधिक विस्तृत होने पर रोगी का स्वास्थ्य तेजी से नीचे गिर जाता है एवं ज्वर की उपस्थिति । 

• तीव्रावस्था में त्वचा में लाली , शोफ ( इडीमा ) , छोटे - छोटे फफोले बनना , पानी रिसना , पानी टपकना एवं खुरंट जमना ये लक्षण मिलते हैं । 

• विस्फोट के स्वस्थ हो जाने पर त्वचा पर अवशेष के रूप में दाग रह जाता है । । 

• रोग पुराना पड़ने पर त्वचा मोटी एवं कठोर हो जाती है ।

••• बाह्य त्वचा का एक नवीन या जीर्ण शोथज रोग जिसमें पहले त्वचा लाल होती है और उसमें खुजली होती है तथा छोटी - छोटी पिटकायें ( फुसियाँ निकल आती है एवं जल स्फोट बन जाते हैं जो शीघ्र ही फूट जाते हैं जिससे त्वचा की सतह पर सीरम बहने लगता है । जो बाद में सूख कर पपड़ी बन जाता है इसे ' शुष्क ' छाजन कहते हैं । जब वाह्य त्वचा की सूजन जल स्फोटों के बनने से पूर्व गल जाती है तो इसे स्रावी छाजन कहते हैं ।


••• एक्जीमा की विशिष्ट औषधि चिकित्सा ••• 

एतदर्थ दो प्रकार से औषधि प्रयोग की जाती है । 


  1. स्थानिक औषधि प्रयोग 
  2. मुख द्वारा औषधि सेवन  


1 . स्थानिक प्रयोग के लिये → • केलामिना ( Calamina ) , स्टीरायड्स , पोटेशियम परमैगेनेट ( 1 : 8000 ) का । घोल उपयुक्त है । । 

• द्वितीयक संक्रमण को रोकने के लिये - एण्टीहिस्टामीन का प्रयोग । । अथवा एविल का प्रयोग करें । 1 गोली दिन में 3 बार दें ।

एक्जीमा की तरल अवस्था में ( Weeping Eezema ) - प्रारम्भ में 1 लीटर पानी में 125 मि . ग्रा . पोटाशियम परमैंगनेट घोल कर दिन में 2 बार इसमें कपड़े को तर करके 10 मिनट तक रोजाना प्रभावित स्थान पर रखना चाहिये । इस अवस्था में 1 % फेनोलयुक्त कैलामीन लोशन दिन में 4 - 5 बार लगावें । अथवा बेटनोवेट क्रीम ( Betnovate cream ) या सौफराडेक्स ( Sofradex ) क्रीम लगाना चाहिये । यह एक बहुत महंगी दवा है ।

• संक्रमण का संदेह होने पर — ' वायोफार्म क्रीम । डर्मोक्वीनाल आइन्टमेण्ट लगाना चाहिये । इसके लिये नियोमाइसीन मरहम अधिक उपयोगी है । । 

2 . मुख द्वारा सेवन के लिये -

• ‘ एण्टीबायोटिक्स ' दे सकते हैं । जैसे ' एम्पिसिलीन 250 मि . ग्रा , दिन में 4 बार,

• फीनोबार्बिटोन ( Phenobarbitone ) 30 मि . ग्रा . दिन में 2 बार दें । । 

• पुराने रोग में ‘ फ्लूकोर्ट मरहम या साधारण ' जिक मरहम लगावें । । 

• अति विस्तृत रोग में पूर्ण विश्राम । । 


••• छाजन में सेवन कराने योग्य अपटूडेट एलोपैथिक पेटेन्ट टेबलेट / कै ,•••

1 . एण्टीस्टीन ( Antistine tabs . ) ' सीबा  -  1 - 1 टिकिया दिन में 2 - 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें ।

2 . ग्रीसोविन - एफ - पी . टेबलेट ( Grisovin F . P . Tabs ) ग्लैक्सों  -  2 - 2 टिकिया दिन में 2 - 3 बार अथवा आ . नु . दें । ।

3 . फोरिस्टाल टैब . ( Foristal tabs ) सीबा गायगी  -  1 - 2 टिकिया दिन में 2 - 3 बार ।

4 . हिजटूिल कैपसूल ( Histryl Caps ) ‘ एस्कायेफ  -  एलर्जी वाले एक्जीमा में 1 - 1 कै . दिन में 2 बार । इसका सीरप भी आता है ।

5 . इंसीडल टैबलेट ( Incidal Tabs ) वायर  -  1 - 2 टिकिया दिन में 3 बार ।

6 . पोलरामाइन टैबलेटस ( Polaramine Tabs ) फुलफोर्ड कं '  - वयस्कों तथा 12 साल तक के बड़े बच्चों को एलजीजन्य एक्जीमा में 1 / 2 - 1 टि . दिन में 2 - 3 बार दें । नन्हें शिशुओं को 1 / 4 टि . । इसका पीडियाट्रिक सीरप भी आता है ,

7 . टरफेड टैबलेट ( Terfed tab ) ' सिपला  -  वयस्कों और 12 साल तक के बड़े बच्चों को 60 मि . ग्रा . दिन में 2 बार दें । 6 से 12 साल के बीच के बच्चों को 30 मि . ग्रा . दिन में 2 बार दें । इसका पीडियाट्रिक सीरप भी आता है ।

      

•• छाजन में लगाने योग्य ऐलो . पेटेण्ट क्रीम / लोशन / आइंटमेण्ट ••

1 . कोटारिल - एच क्रीम ( Cotaryl - H  Cream F . D . C )  - रोगग्रस्त त्वचा पर दिन में 2 - 3 बार लगावें ।

2 . टेनोवेट स्किन क्रीम ( Tenovate Skin Cream ) ग्लैकसो  -  प्रभावित भाग पर दिन में 1 - 2 बार लगावें । 

3 . यूरेक्स क्रीम ( EuraxCream ) गायगी  -  आ . नु . प्रभावित त्वचा पर लगावें ।

4 . बेटनोवेट क्रीम ( Betnovate Cream ) लीण्डिया  -  प्रभावित त्वचा पर दिन में 2 - 3 बार लगावें । ।

5 . जेन्टीसिन - एच . सी . क्रीम ( निकोलस )  -  आक्रान्त त्वचा पर दिन में 2 - 3 बार लगावें ।

6 . डिप्रोजे ण्टा क्रीम ( Diprogenta ) ‘ फुलफर्ड  -  रोगग्रस्त त्वचा पर 2 - 3 बार लगावें ।

7 . डेक्सीक्विन आइंटमेण्ट ( कैडिला )  -  रुग्ण त्वचा पर आ . नु . लगावें । 

नोट - यह एक उत्तम औषधि है । 

8 . एक्जोलिन स्किन आइंटमेण्ट ( Eczolin Skin Oint ) एशियन कं  -  रोगग्रस्त त्वचा पर दिन में 2 - 3 बार लगावें ।

9 . डेरोबिन स्क्रिन आयंटमेण्ट ( Derobin Skin Oint ) एलेनूबरीज  -  आक्रान्त त्वचा पर दिन में 2 - 3 बार लगावें ।

    
नोट - एक्जेबरोल इंजेक्शन ( Eezebrol Inj . - जुगत ) 10 मि . ली . 


याद रहे - 

• खारिश को कम करने के लिये ‘ एण्टीहिस्टामिन औषधि जैसे - एविल सी . पी . एम . , फोरिस्टाल आदि दें । 

• रोगी की आर्थिक दशा में अनुसार ' डिपसे लिंक , ‘ लूसीक्रीम ' , ' सोफ्राडेक्स अथवा बेटनोवेट सी या बेटनोवेट - एन का प्रयोग करें । 

• यदि इन्फेक्शन हो , तो विल्को 17 - 21 क्रीम अथवा अन्य कोई एण्टीबायोटिक क्रीम लगाना चाहिये ।

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