कहीं चुंबन से तो नहीं लगा है यह संक्रमण -This transition is not felt by kissing somewhere - "Kissing disease - mononucleosis"

कहीं चुंबन से तो नहीं लगा है यह संक्रमण  -This transition is not felt by kissing somewhere - "Kissing disease - mononucleosis"
"Kissing disease - mononucleosis"

" किसिंग डिसीज - मोनोन्यूक्लियोसिस "

कहीं चुंबन से तो नहीं लगा है यह संक्रमण  -

चुंबन से मोनोन्यूक्लियोसिस नामक संक्रमण लग सकता है । जिससे फ्लू जैसे लक्षण शरीर में प्रकट होते हैं । इस बीमारी के लक्षण चुंबन लेने के 4 से 6 हफ्तों बाद सामने आते हैं ।

चुम्बन के कारण लगने वाला संक्रमण 4 आमतौर पर एप्सटेन - बार वायरस के कारण फैलता है लेकिन दूसरे वायरसों के कारण भी मोनोन्यूक्लियोसिस हो सकता है । हर बार संक्रमण होने पर फ्लू के लक्षण सामने आएं यह जरूरी नहीं है । कई बार छोटे बच्चों को यह संक्रमण लगता है लेकिन उनमें बीमारी के लक्षण बहुत ही कम अथवा कई बार कुछ भी लक्षण प्रकट नहीं होते ।


क्या हो सकते हैं लक्षण -

मरीज को सामान्य से अधिक थकान महसूस होती है । उसे हल्का बुखार बना रहता है और गले में खराश महसूस होती है । गले , कांख और जांघों के जोड़ों पर स्थित लसिका ग्रंथि ( लिंफ नोड्स ) में सूजन आने लगती है । शरीर में सूजन और दर्द महसूस होता है । टॉसिल्स सूज जाते हैं और सिरदर्द होता है । शरीर की त्वचा पर रैशेस उभर आते हैं ।


कौन हैं इसकी जोखिम पर -

मोनोन्यूक्लियोसिस नामक समस्या किसी को भी हो सकती है । टीनएजर्स में इसके लक्षण बहुत गंभीर होकर सामने आते हैं । अन्य उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं ।

4 से 7 दिन में होता है प्रकट -

यह वायरस अपने फुल फॉर्म में प्रकट होने के लिए 4 से 7 दिन का समय लेता है । इस अवधि के बाद लक्षण सामने आने पर ही पता चलता है । मरीज के लिंफ नोड्स , टॉसिल्स , स्प्लीन और लिवर में सूजन की जांच से भी बीमारी का पता लग सकता है । मरीज के ब्लड टेस्ट से भी इस वायरस की जानकारी मिल जाती है ।


कैसे लगता है यह वायरस -

जिस व्यक्ति को पहले से मोनोन्यूक्लियोसिस नामक संक्रमण हो उसके थुक में यह वायरस रहता है । ऐसे लोगों के साथ चुंबन ही नहीं बल्कि उनके जूठे । कप , चम्मच या अन्य खाने का सामान शेअर करने से भी वायरस ट्रांसफर हो सकता है । इसी तरह संक्रमित मरीज के खून और वीर्य में भी यह वायरस मौजूद रहता है जो संपर्क में आने वाले किसी व्यक्ति को भी संक्रमित कर सकता है ।


क्या है इलाज ?

इस वायरस को परास्त करने में किसी तरह की एंटीबायोटिक्स अथवा एंटी वायरल दवा सक्षम नहीं है । मरीज को लक्षणों के आधार पर इलाज कराना चाहिए । इसमें मरीज को सिरदर्द , बुखार या शरीर में दर्द हो रहा हो तो दर्द निवारक गोलियां दी जा सकती हैं । संक्रमित होने पर छोटे बच्चों को कभी भी एस्प्रीन न दें क्योंकि उससे लिवर डैमेज हो सकता है ।


क्या करे ?

जिस तरह फ्लू के मरीजों का इलाज होता है वैसे । ही सावधानियां रखते हुए । मोनोन्यूक्लियोसिस नामक संक्रमण का भी सामना करें । मरीज को हमेशा हायड्रेटेड रखें । ठंडी आइसक्रीम जैसे खाद्य पदार्थों से मरीज के गले को राहत मिल सकती है । मरीज को कुनकुने नमकीन पानी से कुल्ले करने की भी । सलाह दी जाती है । खूब आराम करने के साथ - साथ उसे पर्याप्त मात्रा में फ्लुइड भी लेने को कहा जाता है ।


क्या रखें सावधानी -

मोनोन्यूक्लियोसिस का कोई वैक्सीन या टीका नहीं है । इसलिए किसी भी बीमार रिश्तेदार के गाल पर अथवा हाथ पर चुंबन न करें । मरीज से यथा संभव दूरी बना कर रखें । खुद के हाथ नियमित रूप से धोते रहें । चाय के कप , चम्मच अथवा अन्य फूड आइटम्स किसी के साथ भी शेअर न करें । याद रखें कि मोनोन्यूक्लियोसिस वायरस से लिवर में सूजन आ सकती है और पीलिया भी हो सकता है । बहुत कम मामलों में देखा गया है कि मरीज को मायोकाइटिस यानी हार्ट की मांसपेशी की सूजन इस वायरस से हो जाती है । कई बार टॉसिल्स इतने सूज जाते हैं कि गले के नीचे पानी तक गुटकना मुश्किल हो जाता है ।

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