" महिलाओं के लिए इसलिए जरुरी है ये टेस्ट ""This test is important for women""Bone Density Test"

" महिलाओं के लिए इसलिए जरुरी है ये टेस्ट ""This test is important for women""Bone Density Test"
Bone Density Test"


" बोन डेनसिटी टेस्ट "

" महिलाओं के लिए इसलिए जरुरी है ये टेस्ट "

महिलाओं में अस्थिक्षरण की समस्या आम है क्योंकि उन्हें हर माहवारी में आयरन और कैल्शियम के लॉसेस होते हैं । 40 साल की उम्र के बाद महिलाओं को बोन डेंसिटी टेस्ट जर कराना चाहिए ताकि हड्डियों का घनत्व नापा जा सके । ऑस्टियोपोरोसिस ( आस्थक्षरण ) की समस्या जितनी जल्दी पकड़ी जा सकेगी , उतनी ही जल्दी महिलाओं का इलाज शुरू हो सकेगा ।

बोन मिनरल टेस्ट जिसे आमतौर पर बोन डेंसिटी टेस्ट भी कहा जाता है उससे महिलाओं की हड्डियों के घनत्व की जानकारी मिलने के साथ ही मालूम हो जाता है कि वे कितनी पतली हो चुकी हैं । पतली और कमजोर हड्डियां बहुत आसानी से टूट जाती हैं । इसे चिकित्सकों ने सायलेंट कंडीशन कहा है जिसमें महिला को पता ही नहीं लगता है कि उसकी हड्डियां इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि वे कभी भी चटख सकती हैं । अगर बोन डेंसिटी टेस्ट शुरू से करते आ रही हों तो निश्चित ही हड्डियों के कमजोर होने की स्थिति से बचा जा सकता है । बोन डेंसिटी टेस्ट से हड्डियों की स्थिति का पता चलता है । यदि न कराएं तो हड्डियां टूटने के बाद ही मालूम पड़ सकेगा ।


कैसे काम करता है यह टेस्ट ?

यह एक पीड़ारहित और बहुत जल्दी हो जाने वाला टेस्ट है । एक्सरे का इस्तेमाल करते हुए इस टेस्ट से हड्डियों का घनत्व और मोटाई का पता लगता है । एक्सरे हड्डियों में कैल्शियम और अन्य खनिजों की उपस्थिति का भी पता लगा लेता है । जितने अधिक खनिज पाए जाएं उतना ही बेहतर होता है । दूसरे अर्थों में कहें तो महिला की हड्डियां घनी एवं मजबूत हैं और उन्हें एकाएक टूटने की कोई आशंका नहीं है । खनिज जितने कम उतने ही अधिक हड्डियों के टूटने के अवसर बढ़ जाते हैं ।


क्या उम्मीद करना चाहिए जांच से ?

आमतौर पर इस टेस्ट में रीढ़ की हड्डी , कूल्हे और बाजुओं की हड्डी की जांच होती है । इन्हीं स्थानों की हड्डियां अक्सर अस्थिक्षरण रोग होने पर टूटती हैं । ।


कौन यह जांच करा सकता है ? 



ऐसी हर महिला जिसे ऑस्टियोपोरोसिस की शिकायत हो । उसे यह जांच जरूर कराना चाहिए । यद्यपि यह उम्रदराज महिलाओं में अधिक पाया जाता है लेकिन पुरुषों को भी यह बीमारी जकड़ सकती है । उम्र बढ़ने के साथ - साथ अस्थिक्षरण की समस्या भी बढ़ती जाती है । 


  1. यदि आपकी उम्र 65 वर्ष या इससे अधिक हो 
  2. रजोनिवृत्ति के बाद 50 वर्ष या इससे अधिक उम्र होने पर
  3. रजोनिवृत्ति हो चुकने के बाद तथा 65 साल से कम उम्र होने पर 
  4. 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को 
  5. अधिक देर तक झुककर काम करने से कूबड़ निकल आई हो , तो
  6. बिना किसी ठोस कारण के लगातार पीठ दर्द हो रहा हो । 
  7. यदि हारमोन्स के स्तर में गिरावट आ गई हो


इसके अलावा किसी खास तरह की दवा खाने के बाद अस्थिक्षरण का प्रकोप झेलने वाली महिलाओं को यह जांच जरूर कराना चाहिए । 


टाइप 2 बोन डेसिटी टेस्ट -

टाइप 2 बोन डेंसिटी टेस्ट में सामान्यत : 15 मिनट लगते हैं । इस टेस्ट के कई वर्गीकरण हैं । 

सेंट्रल डीएक्सए टेस्ट -

इस टेस्ट में रीढ़ और कूल्हे की हड्डियों के घनत्व को नापा जाता है । यह एक महंगी जांच है लेकिन नतीजे अधिक सटीक पाए जाते हैं । इस टेस्ट के दौरान पूरे कपड़े पहने हुए ही मरीज को एक टेबल पर लेटाया , जाता है । मशीन की एक भुजा ऊपर से पूरे शरीर से घूमते हुए एक्सरे का हल्का डोज छोड़ती जाती है । इससे पूरे शरीर के ढांचे की इमेज निकल आती है । इस इमेज को एक्सपर्ट देखकर नतीजे बता देते हैं । 

पैरीरल टेस्ट -

यह जांच हाथों की कलाई , अंगुलियों और एड़ी की हड्डियों का घनत्व नापती । इसमें रीढ़ और कूल्हे की हड्डी की जांच नहीं होती है इसलिए लागत भी कम लगती है । यह जांच एक पोर्टेबल मशीन से भी की जा सकती है इसलिए किसी शिविर में भी ले जाई जा सकती है । इसे एक प्राथमिक जांच भी माना जाता है ताकि अस्थिक्षरण के लक्षण दिखाई देते ही पुष्टि के लिए और अधिक एडवांस टेस्ट कराए जा सकें ।


कब कराए यह जाच ?

यदि आप दृहले से ही अस्थिक्षरण से छुटकारा पाने के लिए कोई दवा ले रही हों तो हर 1 वर्ष में जांच कराएं । अगर आपको अस्थिक्षरण की शिकायत नहीं भी हो और रजोनिवृत्ति हो चुकी हो तब भी हर 2 साल में एक बार बोन डेंसिटी टेस्ट करा लेना चाहिए ।


क्या रखें सावधानियां -



जांच से 24 घंटे पहले से कैल्शियम की गोलियां खाना बंद कर दें । यदि हाल ही में सीटी स्कैनिंग अथवा एमआरआई कराते समय कोई कंट्रास्ट डाई शरीर में डाली हो तो कम से कम एक हफ्ते तक इंतजार करें और उसके बाद जांच के लिए जाएं ।

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