" बुरी घटनाओं का गंभीर असर देता है कई व्यक्तियों को जन्म " "Serious impact of bad events gives birth to many people" "Dissociative Identity Dearer"

" बुरी घटनाओं का गंभीर असर देता है कई व्यक्तियों को जन्म " "Serious impact of bad events gives birth to many people" "Dissociative Identity Dearer"
 "Dissociative Identity Dearer"


डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसआर्डर  "

इस समस्या को डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिस्अर्डर के नाम से भी जाना जाता है । यह जटिल मानसिक स्थिति एक से अधिक व्यक्तित्व को सामने लाती है । खास बात यह कि हममें से , अधिकांश बहत माइल्ड स्तर पर जीवन में । कभी - कभार इस स्थिति से गुजरते हैं ।

" बुरी घटनाओं का गंभीर असर देता है कई व्यक्तियों को जन्म "

इस स्थिति का सीधा सा मतलब है किसी व्यक्ति के विचारों , भावनाओं , याददाश्त , प्रतिक्रियाओं और पहचानने की क्षमता में कमी आना । यह स्थिति कई कारणों से पैदा हो सकती है । इसमें बचपन में हुई कोई दुर्घटना , किसी प्रकार की प्रताड़ना आदि भी शामिल हो सकती है । ऐसे में व्यक्ति खुद को सामान्य स्थितियों से अलग कर लेता है तथा एक अलग ही दुनिया में पहुंच जाता है और एक या अधिक व्यक्तित्वों की तरह व्यवहार करने लगता है । इसे और स्पष्टता से कहें तो मान लीजिये किसी व्यक्तिके मन में कोई द्वन्द या तनाव चल रहा है या उसे किसी बात का स्ट्रेस है लेकिन वह इसे सुलझा नहीं पा रहा है । ऐसे में स्ट्रेस के बढ़ने पर वह खुद को कुछ समय के लिए उस स्थिति से अलग कर लेता है और अलग तरह का व्यवहार करने लगता है ।


महिलाएं होती हैं अधिक शिकार -


इस समस्या के शिकार महिला - पुरुष दोनों हो सकते हैं लेकिन महिलाओं की संख्या इसमें अधिक होती है । इसका सीधा सा कारण है हमारे समाज में महिलाओं को अब भी अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता न मिल पाना । यही कारण है कि वे ध्यानाकर्षण के लिए या अपनी बात कहने के लिए कई बार अपने अवचेतन की स्थिति को भुलाकर एक नए व्यक्तित्व के तौर पर सामने आती हैं । कई धार्मिक अवसरों पर महिलाओं में माता का आना या इसी प्रकार का बदलाव , इसी का उदाहरण है । इसके अलावा यदि किसी बच्चे ने अपने परिवार में झगड़े , प्रताड़ना जैसी स्थितियों को देखा है या वह खुद इसका शिकार हुआ है , तो भी उसे यह समस्या हो सकती है ।


इसके लक्षणों में मुख्य है -


  • चलने - बैठने आदि के तरीकों में अंतर आ जाना 
  • आवाजका बदल जाना , सिरदर्द होना 
  • आंखों के आकार में परिवर्तन 
  • बोलने के तरीके या हमेशा बोली जाने वाली भाषा में बदलाव आना


अपनी उम्र या स्थिति से अलग किसी और उम्र के व्यक्ति ( महिला - पुरुष कोई भी ) की तरह व्यवहार करने लगना । कुछ मामलों में तो व्यक्ति खुद को , जानवर समझकर भी व्यवहार करने लग सकता है ,

जरूरी है काउंसिलिंग -

कोई भी मनोवैज्ञानिक स्थिति जब सामान्य से ऊपर पहुंचती है तो समस्या उपजती है । उदाहरण के लिए एंग्जायटी , तनाव आदि सामान्यत : हम सभी को कभी न कभी घेरते हैं लेकिन थोड़ी देर में हम उससे बाहर निकल आते हैं । जब किसी व्यक्ति को उससे बाहर आने के लिए न तो कोई रास्ता सुझाई देता है , न ही मानसिक अवस्था में दु : ख बांटने के लिए कोई व्यक्ति मिलता है । ऐसी स्थिति में समस्याएं शुरू होती हैं । यदि इस समय सही इलाज और काउंसिलिंग मिले । तो व्यक्ति वापस सामान्य अवस्था में आ सकता है । 
ठीक से इलाज न मिलने से समस्याएं गंभीर और कभी कभी जानलेवा रूप भी ले लेती हैं । डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसआर्डर के मामलों में काउंसिलिंग बहुत मायने रखती है । करीब 30 - 50 प्रतिशत मामलों में एंग्जायटी , डिप्रेशन , मूड स्विग्स , स्लीप डिसऑर्डर्स , ईटिंग डिसऑर्डर्स , पैनिक अटैक , आदि भी साथ में उभरते हैं । 
काउंसिलिंग व दवाइयों के साथ जीवनशैली बदलने की सलाह दी जाती है । डॉक्टर की सलाह पर अमल करने से बेहतर नतीजे आते हैं ।

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