दिल के रोगियों के लिए नया उपचार -New treatment for heart patients - "Anti Aging Therapy"

दिल के रोगियों के लिए नया उपचार -New treatment for heart patients - "Anti Aging Therapy"
"Anti Aging Therapy"

" एंटी एजिंग थैरेपी "

दिल के रोगियों के मन में हमेशा से यह प्रश्न उठता रहा है कि क्या कोई ऐसी थैरेपी है जिसके इस्तेमाल के बाद दिल के रोग का जोखिम कम हो सके । एंटी एजिंग थैरेपी वह समाधान प्रस्तुत करती है । इसके जरिए दिल के दौरे के लिए जिम्मेदार उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है ।

दिल के रोगियों के लिए नया उपचार -

एक सर्वेक्षण के अनुसार भारतीय शहरों में रहने वाले हर चार वयस्कों में से एक उच्च रक्तचाप का शिकार पाया गया है । हमारा दिल लगातार रक्त वाहिकाओं के जरिए शरीर के विभिन्न हिस्सों को खून सप्लाई करता है । खून के बहाव का दबाव वाहिका की दीवार पर पड़ता है । इसी दबाव के माप को रक्तचाप कहते हैं । जब यह दबाव एक निश्चित मात्रा से अधिक हो जाता है तो इसे हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप कहा जाता है ।


कसरत के स्थान पर योग साधना -

उच्च रक्तचाप के रोगियों को कसरत के स्थान पर आयुर्वेद और योग साधना की भी सलाह दी जाती है । प्राणायाम व कुछ अन्य योगासन रोगियों को राहत पहुंचाते हैं । बहरहाल उपचार की पद्धति चाहे जो हो , अगर आप यह स्वीकार करना सीख लें कि आप हर चीज पर नियंत्रण नहीं कर सकते , कि आप सिर्फ खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढाल सकते हैं तो आपका तनाव आधा रह जाएगा । और ऐसा करके आप अपने रक्तचाप को काबू में रख सकेंगे ।


यह केवल उच्चवर्ग की बीमारी नहीं -

सबसे पहली गलतफहमी यह है कि उच्च रक्तचाप केवल उच्चवर्ग के उम्रदराज लोगों को ही होता हैं । आंकड़े बताते हैं कि आजकल युवा और बच्चे भी बड़ी संख्या में उच्च रक्तचाप का शिकार हो रहे हैं । दूसरा मिथक यह है कि केवल दवाइयां खाकर ही उच्च रक्तचाप को ठीक किया जा सकता है । सच तो यह है कि सिर्फ दवाइयां ही इसका इलाज नहीं है । दवाइयां केवल अस्थाई रूप से रक्तचाप कम कर देती हैं परंतु इससे पूर्ण रूप से छुटकारा नहीं दिला पातीं । 
यदि आप उच्च रक्तचाप से निजात पाना चाहते हैं तो आपको अपनी जीवनशैली में परिवर्तन करना होगा । किसी अच्छे डॉक्टर की उचित सलाह से नियमित रूप से दवाइयां तो लें ही , परंतु इसके साथ ही व्यायाम करना व रोज 30 - 45 मिनट पैदल चलना आवश्यक है । यदि आपका वजन ज्यादा है तो उसे कम करें । मोटे व्यक्तियों में उच्च रक्तचाप का खतरा दो से पांच गुना तक ज्यादा होता है । 
अपने खानपान का समय व्यवस्थित करें । भोजन में चिकनाई । कम करें । रेशेदार फल और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें । संतरे जैसे फल , अंकुरित गेहूं , समुद्री भोजन आदि खाएं जिनमें एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं । प्रतिदिन के भोजन में नमक की मात्रा 6 ग्राम से ज्यादा कदापि न हो , इसका ध्यान रखें । सिगरेट व शराब को उच्च रक्तचाप के रोगी स्वयं के लिए जहर समान समझें ।


चुपचाप हमला करता है हाई ब्लड प्रेशर -

प्रारंभिक और मध्यम स्तर तक बढ़े हुए रक्तचाप के आमतौर पर कोई खास लक्षण व्यक्ति में नजर नहीं आते । इसी कारण इसे ' साइलेंट किलर ' की संज्ञा भी दी जाती है । यदि लक्षणों पर गौर करें तो बार - बार होने वाला सिरदर्द , धुंधला दिखाई देना , नींद न आना , चक्कर आना आदि उच्च रक्तचाप के गुप्त संकेत हो सकते हैं । उच्च रक्तचाप के कारण हृदय और गुर्दा रोग , मस्तिष्क आघात ( ब्रेन स्ट्रोक ) आंखों को क्षति पहुंचना जैसे गंभीर परिणाम हो सकते हैं ।


नया है यह वैकल्पिक उपचार -

दिल के रोगियों के लिए अब एसीटी प्रक्रिया नया वैकल्पिक उपचार है , जिसमें रक्त धमनियों में हुई ब्लॉकेज ( रुकावट ) खोलने का काम सफलतापूर्वक किया जाता है । इस उपचार में एक रोगी को तीस बार तक ग्लूकोज में दवाएं मिलाकर ड्रिप दी जाती है , जिसमें लगभग तीन घंटे का समय हर बार लगता है । इसमें रोगी , की न तो चीर - फाड़ होती है , दूसरा फायदा रोगी को । अस्पताल में भर्ती भी नहीं होना होता और तीन घंटे के उपचार के बाद रोगी खुद घर जा सकता है । उपचार के तीन घंटे के दौरान वह आराम भी कर सकता है । दवी पी सकता है और बैठे - बैठे अपना अन्य काम कर सकता है । इस एसीटी प्रक्रिया से दिल के रोगियों को काफी राहत मिलती है ।


रोग की गंभीरता के आधार पर इलाज -

रक्त शुद्धिकरण प्रक्रिया के लिए एसीटी , रोगी के रोग की स्थिति को देखकर लगाई जाती है । आम तौर पर सप्ताह में दो या तीन ड्रिप लगाई जाती है । जब रोगी को एसीटी की ड्रिप दी जाती है तो दवाई प्रत्यक्ष रूप से रक्त में मिलकर अवांछित धातु , खनिज और धमनी की अन्य रुकावटों को सरलता से दूर कर देती है । यह थैरेपी बुढ़ापे के दुष्प्रभावों से भी हमें बचाती है । इस शुद्धिकरणं से न केवल दिल की नलिकाओं में जमा हुए कोलेस्ट्रॉल को हटाया जाता है , बल्कि मस्तिष्क सहित शरीर के किसी भी अंग की रक्त धमनियों की रुकावट दूर की जा सकती है ।

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