इन सावधानियों से बच सकती है जान - Life can be avoided by these precautions -

बीमार होने के बाद डॉक्टर की दी हुई सलाह या दवाएं मरीज को ठीक करती हैं । यदि उनकी दी हुई सलाहों पर अमल न करें और दी गई दवाओं को अपने मन से फेर बदल करते हुए खाएं तो ठीक होने के बजाए जान जा सकती है । सावधानी रखेंगे तो मरीज भी ठीक हो सकेगा और जान भी बच जाएगी । 

Life can be avoided by these precautions -

इन सावधानियों से बच सकती है जान -

हमेशा हर डॉक्टर हमारे रोग के अनुसार उपचार करते हैं , वह हमें ठीक करने के लिए दवाएं और अन्य सलाहें देते हैं । अगर दवाओं से रोग ठीक नहीं हो तो सर्जरी आदि कराने का सुझाव देते हैं । लेकिन ये सब इतना आसान भी नहीं है । डायग्नोसिस , दवाएं लेने व उनका सेवन करने और सर्जरी के दौरान या बाद में हुई गड़बड़ियां न केवल बीमारी को बढ़ा देती हैं बल्कि कई बार जानलेवा भी हो सकती हैं ।

हर दवा का होता है साइड इफेक्ट -

दवाओं का शरीर पर या तो इफेक्ट होता है या साइड इफेक्ट । अगर सही दवाएं सही मात्रा और समय पर ली जाएं तो उनका शरीर पर उपचारात्मक प्रभाव होता है । अगर दवाओं का जरूरी मात्रा से अधिक सेवन किया जाए तो इसका विषैला प्रभाव होता है । अलग - अलग दवाओं के ओवरडोज के अलग - अलग प्रभाव होते हैं । जैसे एंटी बॉयोटिक का अधिक मात्रा में सेवन करें तो डायरिया हो जाता है । 

दर्द निवारक गोलियों के लंबे समय तक सेवन से एसिडिटी , गैस , उल्टियां , और बदहजमी की समस्या हो जाती है । कई बार लगातार सेवन से अल्सर बन जाता है , जिससे खून की उल्टियां होती हैं । कई मरीजों की किडनियां दर्द निवारक गोलियों से खराब तक हो जाती हैं ।

शुगर को करे हर हाल में नियंत्रित -

शुगर की दवाई का कम डोज लेने या न लेने से शुगर बढ़ सकती है जो खतरनाक हो सकता है । अगर अधिक डोज लिया है तो शरीर में शुगर का स्तर अत्यधिक कम हो जाता है । जिसके कारण अत्यधिक पसीना आना , कमजोरी महसूस होना , बहुत भूख प्यास लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं । ऐसे में मरीज को ऐसा लगता है जैसे उसके शरीर में जान ही नहीं रह गई है । कई बार ऐसा होता है कि डायबिटीज के रोगी दवाई ले लेते हैं और भोजन खाना भूल जाते हैं या बहुत देर बाद खाना खाते हैं उससे भी इसी प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं ।

ब्लड प्रेशर को कभी बढ़ने और लो न होने दें -

अगर ब्लड प्रेशर की दवाईयां नियमित समय और उचित मात्रा में न लीं तो सिरदर्द , चक्कर आना , बेन स्ट्रोक और नाक से खून आने की समस्या हो सकती है । कई लोगों को सही मात्रा में दवाओं का सेवन करने पर भी कुछ साइड इफेक्ट्स में जाते हैं । अलग - अलग दवाओं के लिए ये लक्षण अलग - अलग हो सकते हैं । वैसे डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन के साथ लिख कर देते हैं । मरीज को समझाते हैं कि अगर फलां इवा के सेवन से फलां साइड दिई में जो अपने सपर्क करें | जैसे पेन किलर के सही मात्रा में सेवन से भी कई लोगों ने एसिडिटी और गैस की समस्या हो जाती है ।

गफलत में न खाएं कई दवा -

कुछ दवाओं के एक से नाम होते हैं तो छ का उच्चारण एक जैसा होता है । यह गड़बड़ी अक्सर डॉक्टरों से फ़ोन पर पूछी गई दवाओं के नामों के कारण होती है । कई बार नौसिखिए मेडिकल स्टोर वाले भी दवा के नाम को ठीक प्रकार से नहीं पढ़ पाते हैं और गलत दवा दे देते हैं । कई बार लोग डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन नहीं लेकर जाते और वैसे ही बोलकर दवा ले लेते हैं जो गलत भी निकल सकती है । ऐसे में किसी और बीमारी के लिए कोई और दवा खाने में आ जाती है और यह बहुत खतरनाक और घातक हो सकता है । अगर आपने या आपके परिवार में । किसी ने गलत दवा खा ली है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें ।


सर्जरी से जुड़ी सावधानियां -

सर्जरी सफल हो गई है तो भी पूरी सावधानी रखने की जरूरत है ताकि मरीज जल्दी रिकवर होकर सामान्य जीवन व्यतीत कर सके । सर्जरी के बाद हल्का खाना खाएं क्योंकि अगर उल्टी होगी तो जोर पड़ेगा और टांके टूट जाएगें विशेषकर जब पेट की सर्जरी हुई हो । ऑपरेशन के बाद भारी वजन उठाने से भी बचना चाहिए । अगर ऑपरेशन वाले स्थान पर कुछ असहजता महसूस हो रही हो तो सर्जन से इस बारे में खुलकर चर्चा करें ।


डायग्नोसिस से जुड़ी जरूरी बातें -

अगर डायग्नोसिस और टेस्ट सही नहीं हैं तो गड़बड़ी हो सकती है , कई बार छोटी लैब में जांच करवाने से रिपोर्ट सही नहीं आती है । जिससे उपचार भी गलत दिशा में चलता है । जो मरीज के लिए काफी परेशानी का कारण हो सकता है । कई बार यह विसंगति घातक हो सकती है । 

गलत डायग्नोसिस के कारण पीड़ित को जो बीमारी है उसका इलाज ही नहीं हो पाता है और वह उन दवाओं का सेवन करता है जिसकी उसे जरूरत ही नहीं है । जो अंतत : उसके लिए टॉक्सिन का कार्य करती हैं । कई बार यह भी होता है कि एक ही डायग्नोसिस के बाद उपचार प्रारंभ कर दिया जाता है जिसके कारण भी पूरी बीमारी का पता नहीं चल पाता और सही इलाज नहीं हो पाता है ।


सेकंड ओपिनियन जरूर लें -

कई बार ऐसा होता है कि जांचे वगैरह सब ठीक हैं उपचार भी शुरू हो गया है लेकिन मरीज ठीक नहीं हो रहा है । ऐसी स्थिति में दूसरे डॉक्टर से परामर्श करने में देर न लगाएं ताकि पता चल सके कि उपचार सही दिशा में चल रहा है या नहीं । मरीज का उपचार सही तरीके से हो इसलिए दूसरे डॉक्टर से संपर्क करने में न हिचकिचाएं । 

चिकित्सक पर भरोसा अपनी जगह ठीक है लेकिन अंतत : मरीज का ठीक होना प्राथमिकता पर है । अगर पहले डॉक्टर और दूसरे डॉक्टर के ओपिनियन लगभग 80 प्रतिशत समान हैं तो 20 प्रतिशत का अंतर नुकसान नहीं कर सकता है । अगर दोनों के ओपिनियन में अधिक अंतर है तो थर्ड ओपिनियन की आवश्यकता भी पड़ सकती है ।

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