" गलत अवधारणाओं से पाएं मुक्ति और कराएं जांच ""Get rid of the wrong concepts and investigate""Radiological Test"

" गलत अवधारणाओं से पाएं मुक्ति और कराएं जांच ""Get rid of the wrong concepts and investigate""Radiological Test"
"Radiological Test"

" रेडियोलॉजिकल टेस्ट "

" गलत अवधारणाओं से पाएं मुक्ति और कराएं जांच "

25 से 35 आयु वर्ग के युवाओं के मन में यह गलत अवधारणा है कि इस उम्र में मधुमेह , थायराइड अथवा कोलेस्ट्रॉल । बढ़ने जैसी कोई समस्या नहीं होती है । तो बेवजह जांचें क्यों कराएं ?

आज को युवा आरामतलब जीवनशैली में गहरे तक धंसा हुआ है । वह लंबे समय तक बैठने , खराब आहार , अत्यधिक तनाव झेलने के कारण कई तरह की बीमारियों से घिर रहा है । कई युवाओं में गर्भाशय ग्रीवा की समस्याओं , पीठ के निचले हिस्से में दर्द और शरीर के अन्य जोड़ों में सूजन के साथ दर्द रहने की शिकायत सामने आ रही है । 

22 से 35 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में एक गलत धारणा है कि इस आयु वर्ग में मधुमेह , थायराइड , कोलेस्ट्रॉल आदि नहीं होता , क्योंकि दिखाई नहीं देता है । सभी परीक्षणों को कराने पर पता चलता है कि उनके द्वारा दिए गए तर्क पूरी तरह से थोथे हैं । कुछ बीमारियां ऐसी भी होती हैं , जो प्रारंभिक अवस्था में होने के कारण कोई लक्षण नहीं दिखा पाती हैं । इसीलिए सभी को लगातार चेकअप के लिए । डॉक्टर के पास नियमित रूप से जाना चाहिए , क्योंकि यह अनिवार्य नहीं है कि आप दुबले हैं , तो आपका कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य ही होगा । 



भ्रम :- कुछ लोगों का मानना है कि रक्त परीक्षण बीमारों का होना चाहिए और उन्हें रक्त परीक्षण की आवश्यकता नहीं है । 

तथ्य :- कुछ बीमारियां ऐसी भी हैं , जो प्रारंभिक अवस्था में होते हुए कोई लक्षण नहीं दिखा सकती हैं और यदि जांच कराते हैं तो ही उनका पता चलता है ।

भ्रम :- ऐसा मानना है कि कुछ बीमारी या स्थिति जैसे । मधुमेह , थायराइड या कोलेस्ट्रॉल बुजुर्गों के लिए हैं । 

तथ्य :- 25 से 35 वर्ष की आयु के लोगों में कराए गए कई परीक्षणों से पता चला कि सभी की रिपोटर्स ठीक नहीं थी । आरामतलब जीवनशैली , खराब आहार का सेवन , ऑफिस में अधिक तनाव आदि के साथ जीवन जीने के कारण शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है । जिस उम्र में सर्वांग स्वस्थ रहना चाहिए युवा उस उम्र में बीमार हो रहे हैं ।

भ्रम :- शुगर न निकले इसके लिए मधुमेह की जांच से एक रात पहले चीनी न खाएं । 

तथ्य :- मधुमेह एक धीरे - धीरे विकसित होने वाली बीमारी है और सच तो यही है कि इसका रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि के साथ कोई लेना - देना नहीं है । यदि आप परीक्षण से पहले मीठे का सेवन करते हैं तो परीक्षण के परिणाम केवल रक्त में उच्च ग्लूकोज स्तर को इंगित करेंगे ।

भ्रम :- कम उम्र के बच्चों को केवल एक अच्छा आहार चाहिए । और उससे ही उन्हें पौष्टिक तत्वों की पूर्ति हो जाती है । उनकी जीवनशैली भी सही दिशा में होती है , इसलिए ऐसा माना जाता है कि उन बच्चों । में विटामिन डी की कमी नहीं होनी चाहिए । 

तथ्य :- सच यही है कि विटामिन की कमी सबसे आम समस्याओं में से एक है । और उम्र से संबंधित नहीं है । 80 - 90 प्रतिशत से अधिक लोगों को विटामिन डी की कमी है ।

भ्रम :- सभी क्लिनिकल इमेजिंग विधियों में विकिरण और एक्स - रे शामिल हैं जो कि इन दिनों विशेष रूप से गर्भवती । महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं । 

तथ्य :- हालांकि यह सच है कि एक्स - रे , सीटी स्कैन , कैथीटेराइजेशन और मैमोग्राफी जैसे कुछ इमेजिंग तरीकों में विकिरण शामिल है , लेकिन सच तो यही है कि अल्ट्रासाउंड और एमआरआई स्कैन जैसे अन्य तरीके विकिरण मुक्त हैं । जब भ्रूण के अंग विकसित हो रहे हों तब गर्भ में विकिरण हानिकारक हो सकते हैं । हालांकि आपातकालीन परिस्थितियों । में स्कैन के समय आवश्यक सावधानी बरती जा सकती हैं ।

भ्रम :- सभी रेडियोलॉजिक डायग्नोसिस में रेडिएशंस होते हैं और इसीलिए स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं । 

तथ्य :- सभी रेडियोलॉजिकल मशीनें एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसे रेडिएशंस के सिद्धांत पर काम नहीं करती हैं । इसलिए हर रेडियोलॉजिकल जांच को संदेह की नजर । । से देखना ठीक नहीं होता है । रेडियोलॉजिस्ट वैसे भी गर्भवती महिला की जांचों के समय सावधानी बरतते हैं ।

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