Saturday, April 27, 2019

" क्या बदलता मौसम आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है ? ""Does changing weather affect your health?"

" क्या बदलता मौसम आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है ? ""Does changing weather affect your health?"
Weather Affects Your Health


" क्या बदलता मौसम आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है ? "

मौसम में एकाएक बदलाव आने से निश्चित ही हरेक के स्वास्थ्य पर । विपरीत प्रभाव पड़ता है । जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता औरों से कमजोर होती है उन्हें इसका सबसे अधिक असर झेलना पड़ता है ।

पाइडमोंट , अमेरिका में , फैमिली फिजिशियन डॉक्टर विकास मोदी का मानना है कि निश्चित ही बदलते मौसम का प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ता है । सच तो यह है कि जब भी मौसम बदलता है और मरीज सामने हो तो उसकी जांच करते समय यह फैक्टर ध्यान में रखना पड़ता है । यह उन मरीजों के लिए भी है । 
जो किसी खास किस्म की बीमारी से पहले से ही ग्रस्त हों । इसमें अस्थमा , सर्दी - जुकाम जैसी बीमारियां भी शामिल हैं । मौसम में बदलाव मूल रूप से हमारे इम्यून सिस्टम में बदलाव कर देता है । हमारा शरीर किसी खास किस्म के मौसम का आदी हो जाता है और जब उसमें तेजी से बदलाव आता है तो शरीर उतनी जल्दी एडजेस्ट नहीं कर पाता है । दुर्भाग्य से कभी - कभी हमारा शरीर मौसम के बदलाव के साथ एडजेस्ट करने में मुश्किल महसूस करता है इससे कुछ बीमारियां उठ खड़ी होती हैं । 


" ऊपरी श्वसन पथ का संक्रमण "

अक्सर देखा गया है कि मौसम बदलते ही लोग अपनी ड्रेसेस बदल देते हैं । मसलन ठंड के विदा होने के साथ ही गर्मियों के कपड़े निकल आते हैं और स्वेटर्स तथा जैकेट्स रख दी जाती हैं । ठंड एकाएक नहीं जाती है और रह रहकर लौट भी आती है । इसलिए सतर्क रहें और पर्याप्त कपड़े
पहनकर ही बाहर निकलें । रात को सोते समय पर्याप्त कपड़े नहीं पहनने से शरीर बदलते तापमान के प्रति एडजेस्ट नहीं कर पाता है और ऊपरी श्वसन पथ में संक्रमण हो जाता है । इसकी वजह से खांसी , सर्दी , जुकाम और फ्लू भी हो सकता है । इसलिए जब भी तापमान लगातार ऊपर और नीचे हो रहा हो तो खुद की सुरक्षा करें , साथ ही घर के बच्चों और बुजुर्गों की भी । ।


" जुकाम और फ्लू "



जैसे - जैसे मौसम बदलता है जुकाम और फ्लू तेजी से महामारी की तरह फैलता है । जो लोग कारखानों में काम करते हैं अथवा स्कूलों , कॉलेजों में पढ़ने जाते हैं वहां एक से दूसरे को फ्लू का संक्रमण लग जाता है । ऐसा ही भीड़ भरे हर स्थान पर होता है जैसे मॉल , रेलवे स्टेशन अथवा बस स्टैंड पर भी आसानी से संक्रमण लग जाता है ।


" ठंडी हवा से भड़कता है - अस्थमा और ब्रोंकाइटिस "

ठंडी हवा के अधिक देर तक संपर्क में रहने से मौसमी अस्थमा या ब्रोंकाइटिस भड़क जाता है । जो लोग पहले से ही इन बीमारियों से जूझ रहे हों उन्हें इन्हेलर वापरना बंद नहीं करना चाहिए ताकि असाध्य खांसी का दौरा न पड़ सके । ठंडी हवा के कारण श्वसन तंत्र सिकुड़ जाता है जिससे प्राणवायु की मात्रा फेफड़ों तक जाना कम हो जाती है । अस्थमा के मरीजों के लिए यह अवस्था बहुत भारी होती है । कई मरीजों को तो पूरी सर्दी के । मौसम में खांसी और छींके चलती रहती हैं । उन्हें मौसम के बदलाव के समय अधिक सावधान रहने की जरूरत है ।


" परागकणों से होने वाली एलर्जी "

ठंड का मौसम बीतने के साथ ही वसंत कदम रखता है और फूल तेजी से परागकणों को हवा में छोड़ने लगते हैं । इसी के कारण उन लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है जिन्हें परागकणों से एलर्जी होती है ।


" असाध्य सायनस और गले का संक्रमण "



शाम अथवा सुबह की ठंडी हवा में कई ऐसे संक्रमण होते हैं जो सायनस को भड़का देते हैं और गले में इंफेक्शन हो जाता है । वायुमंडल उस समय भारी होता है जिससे धूल , धुएं का संक्रमण ऊपर नहीं उठ पाता है और श्वास के साथ फेफड़े में चला जाता है ।

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