" युवाओं में बढ़ रही है यह बीमारी " कोलोन कैंसर - "The disease is growing in youth" Cologne cancer -

   
" युवाओं में बढ़ रही है यह बीमारी " कोलोन कैंसर - "The disease is growing in youth" Cologne cancer -
Cologne cancer

कोलोन कैंसर -

अनियमित जीवनशैली और बिगड़े हुए खानपान के कारण युवाओं में कोलोन कैंसर के केसेस बढ़ रहे हैं । आमतौर पर यह बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी लेकिन अब परिदृश्य में तेजी से बदलाव आता हुआ देखा जा रहा है ।

" युवाओं में बढ़ रही है यह बीमारी "

40 वर्षीय अरुण कुमार डायबिटीज से पीड़ित हैं । रेक्टम में रक्तस्राव की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किए गए थे । चिकित्सकीय जांच के बाद पाया गया कि मरीज को एडवांस स्टेज का कोलोन कैंसर है । कई अन्य जटिलताओं के चलते मरीज को उपचार शुरू करने से पहले करीब 40 दिनों तक गहन चिकित्सा कक्ष ( आईसीयू ) में हालत स्थिर होने तक रखा गया । उन्हें कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी देने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई थी लेकिन बुखार , ठंड और सांस लेने में परेशानी की वजह से 15 दिन के भीतर उन्हें दोबारा अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा ।

कार्डियो जांच से पता चला कि उनके हृदय की पंपिंग की शक्ति काफी कम है - यह 60 फीसदी के औसत के मुकाबले महज 30 फीसदी ही थी । उनकी ऑक्सीजन आपूर्ति भी काफी कम थी और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत थी । किडनी फंक्शन टेस्ट से अन्य अनियमितताओं का पता चला और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट ने फेफड़ों में सूजन , फ्लूइड और लिवर का आकार बढ़ने के बारे में खुलासा किया । इसके अलावा संक्रमण और गॉल ब्लैडर व बाइल डक्ट में भी स्टोन ( पथरी ) की शिकायत पाई गई । एंडोस्कोपिक प्रक्रिया के माध्यम से पथरी निकालने के बाद स्टेंटिंग की गई । संक्रमण नियंत्रित होने और मरीज की हालत स्थिर होने के बाद उनकी लैप्रोस्कोपिक कैंसर सर्जरी की गई । 


युवाओं में बढ़ता कोलोन कैंसर -

दुनियाभर के साथ ही भारत में भी कैंसर हर रूप में बढ़ रहा है । महिला और पुरुष में डाइग्नोज होने वाले सामान्य कैंसर में कोलोन कैंसर का स्थान तीसरा है । एक स्वस्थ वयस्क में चालीस साल की उम्र से कोलोन कैंसर की स्क्रीनिंग हो सकती है । व्यापक सावधानी , शुरुआत में ही जानकारी और उचित ट्रीटमेंट के साथ ही जीवनशैली में थोड़ा सा परिवर्तन , जैसे आदर्श बॉडी वेट बनाये रखना और हाई फाइबर फूड्स के साथ कोलोन कैंसर को नियंत्रित किया जा सकता है । 

कोलोन कैंसर आमतौर पर उम्र के पचासवें या साठवें दशक में ज्यादा पाया जाता है लेकिन वर्तमान शोध सिद्ध करते हैं कि यह तेजी से युवाओं में उनके बीस से तीसवें दशक में ही नजर आने लगा है और यह खतरनाक बीमारी उन्हें बुरी तरह प्रभावित कर रही है ।

 चौंकाने वाली बात यह है कि कोलोन कैंसर से पीड़ित हर तीसरे मरीज की उम्र चालीस या उससे कम होती है । लेकिन अच्छी खबर यह है । कि एक बार पता चल जाने के बाद कोलोन और रेक्टम कैंसर मैनेजमेंट टीम द्वारा प्रॉपर ट्रीटमेंट प्लानिंग के साथ सकारात्मक और आशातीत परिणाम सामने आते हैं ।


क्या है सावधानी और इलाज -

कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षणों में थकान , कमजोरी , छोटी सॉस , आंतों में परिवर्तन , डायरिया या कब्ज , मल में रक्त आना , वजन कम होना , पेट में दर्द , कैम्प या ब्लॉटिंग आदि शामिल हैं । ऐसे में व्यक्ति को अपने फैमिली फिजिशियन , गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट , डाइजेस्टिव सिस्टम डिस्ऑर्डर मैनेजमेंट में फिजिशियन या फिर कोलोन और रेक्टल सर्जन , जैसी योग्यता रखने वाले विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए । 

कोलोन कैंसर को ठीक करने के लिए शुरुआत में ही इसका पता चलना जरूरी है । आधुनिक टार्गटेड थेरेपी के अन्तर्गत ' विवेकपूर्ण ढंग से प्लान्ड सर्जरी और कीमों रेडियोथेरेपी से मरीज के ठीक होने के अवसर काफी बढ़ गए हैं ।

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