केनियोवर्टेबल जंक्शन - " सर्जरी से ठीक हो सकती है यह जन्मजात खराबी " Canoerectable junction - "this congenital malfunction can be cured by surgery"

केनियोवर्टेबल जंक्शन - " सर्जरी से ठीक हो सकती है यह जन्मजात खराबी  " Canoerectable junction - "this congenital malfunction can be cured by surgery"
Canoerectable junction -

केनियोवर्टेबल जंक्शन -

" सर्जरी से ठीक हो सकती है यह जन्मजात खराबी  "

मेरूदंड में खराबी की जन्मजात समस्या ( नियोवर्टेबल जंक्शन ) हमारे देश में बहुत आम है । खोपड़ी का आधार बनाने वाली दो हड्ड्यिां किसी वजह से खराब हो जाती हैं । इसे सर्जरी से ठीक किया जा सकता है ।

क्रेनियोवर्टेब्रल जंक्शन ( सीवीजे ) में खराबी की समस्या भारत में काफी सामान्य है । सीवीजे क्षेत्र में खोपड़ी का आधार तैयार करने वाली ऑसीपिटल बोन और मेरूदंड की शुरूआती दो हड्डियां होती है । यह हड्डियां गर्दन में होती है और इन्हें एटलस तथा एक्सिस कहते है । ऑसीपिटल बोन के निचले हिस्से के बड़े खुले क्षेत्र को प्रभावित करने वाली खराबी सबसे ज्यादा चिंताजनक होती है , क्योंकि खोपडी की जड़ , कुछ नसें और रक्त नलिकाएं इसी खुले हिस्से से होकर गुजरती है ।

सीवीजे के सामान्य जन्मजात विकार कई हैं । जैसे - एटलस एसीमिलेशन यानी एटलस और ऑसीपिटल बोन का आपस में मिल जाना , एटलस हाइपोप्लेसिया यानी मेरूदंड के कुछ हिस्सों का गायब होना और जन्मजात मिश्रण , स्पाइना बिफिडा यानी मेरूदंड या इसकी कवरिंग का पूर्ण विकास न होना आदि । इन विकृतियों के कारण एटलस और एक्सिस हड्डियों के बीच अस्थिरता रहती है ।

हालांकि ये विकृतियां बाद में किसी चोट , ट्रॉमा या किसी अन्य विकार के कारण भी आ सकती हैं । इसके अलावा दुर्लभ मामलों में सीवीजे क्षेत्र में कोई ट्यूमर भी ऐसी विकृति पैदा कर सकता है । ये ट्यूमर गर्दन की हड्डियों तक फैल जाएं तो मेरूदंड की पहली दो हड्डियां इधर - उधर हो सकती है ।

लचीला होता है मेरूदंड -

मस्तिष्क की जड़ का निचला हिस्सा और  मेरुदंड लचील होते है और यहां इन पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है । इसके कारण हर मरीज में अलग तरह के लक्षण नजर आ सकते है और स्वास्थ्य सम्बन्धी गम्भीर समस्या पैदा । हो सकती हैं । इसके कारण मरीज को बहुत हद तक अपंगता का अनुभव हो सकता है । अंगों में लकवा , गर्दन में दर्द और सिरदर्द की । शिकायत हो सकती है । 

मेरूदंड या मस्तिष्क के सबसे निचले हिस्से में प्रभाव पड़ता है , तो मरीज को कोई भी स्पंदन महसूस करने में दिक्कत हो सकती है , दर्द हो सकता है , उसकी मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और चक्कर आने तथा नजर कमजोर होने की शिकायत भी  हो सकती है । इसके अलावा हाथ और पैर के समन्वय में परेशानी , पैरों में सूनापन , पीठ में दर्द या कड़ापन जैसे लक्षण भी नजर आ सकते है । लक्षण समाप्त करने या स्थाई अपंगता से बचने के लिए सीवीजे का त्वरित निदान और उपचार जरूरी है ।


देर न करें उपचार में -

उपचार में किसी भी तरह की देरी स्थाई अपंगता का कारण बन सकती है । रोग की पहचान शारीरिक जांच , एमआरआई , सीटी स्कैन तथा एक्सरे आदि से की जा सकती है । सीवीजे विकृति का सर्जरी से उपचार हो सकता है । विशेषज्ञों का कहना है कि उपचार का मुख्य उद्देश्य स्थिरता लाना और मेरूदंड के अस्थिर हिस्सों को मजबूत बना कर किसी भी न्यूरोलॉजिकल चोट से मरीज को बचाना होता है । 

सर्जरी के तहत अपने स्थान से हटी हड्डियों को कम करना ,क्रेनियोवर्टेबल नसों का दबाव कम करना और सीवीजे क्षेत्र में फ्यूजन जैसे काम किए । जाते है । सर्जरी जनरल एनिस्थिसिया में की जाती है और सर्जरी के तुरंत बाद मरीज को आईसीयू में भेजा जाता है । इसके बाद कुछ दिन तक मरीज की स्थिति पर नजर रखी । जाती है और अस्पताल में कुछ दिन रूकने के बाद मरीज दो माह में पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है ।

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