Thursday, March 28, 2019

इंफ्लूएंजा [ Influenza ] रोग के परिचय , रोग के कारण , रोग के लक्षण , रोग के पहचान एव चिकित्सा ? Influenza [Influenza] Introduction to Disease, Due to Disease, Symptoms of Disease, Disease Identification and Medical?

इंफ्लूएंजा [ Influenza ] 

इंफ्लूएंजा [ Influenza ] रोग के परिचय , रोग के कारण , रोग के लक्षण , रोग के पहचान  एव चिकित्सा ? Influenza [Influenza] Introduction to Disease, Due to Disease, Symptoms of Disease, Disease Identification and Medical?
इंफ्लूएंजा [ Influenza ] 


अन्य नाम – श्लैष्मिक ज्वर , दुष्ट प्रतिश्याय , फ्लू । 

रोग परिचय – एक तीव्र संक्रमणकारी रोग , जो इन्फ्लु एन्ज । विषाणु ए , जो गम्भीर व्यापक रोग का कारण होता है अथवा इन्फ्लु एन्जा विषाणु B , जो छोटे उद्रेक ( Outbreaks ) के कारण होता है , के द्वारा उत्पन्न होता है , ऊपरी श्वसन क्षेत्र का प्रदाह जो ज्वर , सिर दर्द , पीठ एवं हाथ - पैरों में पीड़ा , क्षुधाक्षय एवं कभी - कभी मतली एवं वमन उत्पन्न करता है , ज्वर 2 से 3 दिन में कम हो जाता है , - थकावट की अनुभूति एवं कुछ मानसिक अवसाद पीछे छोड़ जाता हैं ।

रोग के मुख्य कारण -

• यह रोग जाड़ों में अधिक । → 

• बैसिलस इन्फ्लूएन्जा नामक जीवाणु द्वारा । । 

• यह रोग दूषित वस्त्रों एवं वायु से फैलता I इस रोग के जीवाणु थूक ( Saliva ) में उपस्थित रहते हैं । 

नोट — इसका कारण एक प्रकार का विषाणु होते हुए भी उपद्रवों के लिये हीमोलिटिक स्ट्रेप्टोकोकस अथवा स्ट्रेप्टोकोकस ओरियस उत्तरदायी हैं ।


रोग के प्रधान लक्षण -

• रोग का संचय काल 1 से 3 दिन का । 

• ज्वर 102 से 104 डि . फा . ( 39 - - 40° । से . ) तक । 

• आँखों एवं सिर में दर्द , बदन में दर्द एवं खासी । 

• आँखों में पानी और कुछ लाली । । 

• गले में खराश एवं छींक का आना । 

• अरति ( Malaise ) एवं दुर्बलता बहुत अधिक । । 

• जिह्वा मलावृत्त । 

• मुंह का स्वाद फीका एवं चिपचिपा । । 

• नाड़ी भरी हुई एवं तापक्रम के अनुपात में मंद । 

• तीव्र प्रकार के रोग में कष्ट श्वास ,

• छाती में पीड़ा , श्यावता ( Cyanosis ) , एवं झागयुक्त रक्तनिष्ठीवन ( कफ में रक्त ) तथा 2 - 3 दिन में मृत्यु । 

• पाचक तन्त्र के प्रभावित होने से अतिसार एवं वमन । → 

• रोग में सर्वाधिक दुर्बलता जिसके ठीक होने में अधिक समय लगता है ।  

• उपद्रव स्वरूप स्वरयंत्र शोथ , श्वसनी शोथ एवं न्यूमोनिया । ।


रोग की पहिचान -

• लक्षणों के आधार पर निदान आसान । । 

• पहला लक्षण ज्वर एवं पीड़ा , खाँसी  जुकाम नहीं । खाँसी छोटी और सूखी । 

• ज्वरयुक्त प्रदाह की खाँसी के आवेग , कफयुक्त , गले की खराश निरन्तर , सिर दर्द एवं बेचैनी , छाती में दर्द आदि लक्षणों से पहिचान आसान । । 

• कफ परीक्षण में जीवाणु की प्राप्ति ।


रोग का परिणाम → 

• 1 % रोगियों की मृत्यु । फुफ्फुसीय लक्षणों के उत्पन्न होने पर मृत्यु सर्वाधिक । 

• ठीक होने के बाद भी खाँसी , दुर्बलता और अरुचि काफी दिन तक । 

• उपद्रवों में - - मध्य कर्ण शोथ , ब्रान्काइटिस , न्यूमोनिया , हाथ - पैरों में दुर्बलता , हृक्षिप्रता ( Tachycardia ) या मंदता , धडकन , गस के दौरे , कष्ट श्वास आदि हो सकते हैं ।


याद रखिये - सामान्य रूप से यह रोग 1 सप्ताह के बाद कम हो जाता है अथवा बिल्कुल ठीक । हो जाता है । रोग के बढ़ जाने पर फेफड़े , आमाशय अथवा स्नायुमण्डल के किसी भी यंत्र के प्रभावित होने का भय रहता है ।


चिकित्सा विधि -

• रोगी को स्वच्छ हवादार , गर्म कमरे में गर्म कपड़ा उढाकर रखें । 

• रोगी को पूर्ण विश्राम दें । 

• पीड़ा के लिये दर्द निवारक औषधि दें । 

• खाँसी के लिये कोई सा कफ लिंग्टस । । 

• उपद्रवों के लिये एण्टीबायोटिक ।


पथ्यापथ्य एवं आनुषांगिक चिकित्सा -

• गरम दूध , साबूदाना , बाल , मिश्री , मीठा सन्तरा , अंगूर , केला , वेदाना , अनार एवं गरम जल का सेवन पथ्य है । आनुषांगिक चिकित्सा में टिंचर बेन्जोइन कं की गर्म जल में वाष्प सुंघाना ।

इन्फ्लुएन्जा की औषधि चिकित्सा -

• इसकी कोई विशिष्ट चिकित्सा नहीं । → 

• पीड़ा के लिये एस्प्रिन , ए . पी . सी . , कोडोपायरीन , डिस्प्रिन अथवा फेबरेक्स प्लस ( Febrex Plus ) का उपयोग । । 

• खाँसी के लिये - कोई कफ लिंक्टस ( फेन्सिडिल - रोन पुलेक कं ) आदि दें । 
• उपद्रवों के लिये उपयुक्त एण्टीबायोटिक पेनिसिलीन । एम्पीसिलीन ।  क्लोक्सासिलिन । टेट्रासाइक्लीन । अथवा कोई ब्राड स्पेक्ट्रम एण्टीबायोटिक । 

• सल्फा ड्रग्स । कोट्री - मोक्साजोल आदि उचित मात्रा में । ।


अनुभूत चिकित्सा के एक झलक -

• फबरेक्स प्लस 1 टिकिया , स्पाज्मो . प्रोक्सीवोन 1 कै . , सीलिन 500 मि . ग्रा . की 1 / 2 टिकिया , क्रोसिन सीरप 1 - 2 चम्मच । ऐसी । मात्रा जल के साथ प्रति 4 घण्टे पर दें । 

• कोडोपायरिन 1 टिकिया , बेटनीलॉन 1 टिकिया , कैप्रामीन 1 टिकिया , जैक्टिरिन ( Zactirin - वाईथ कं ) 1 टिकिया , सीलिन 100 मि . ग्रा . की 1 टिकिया , सीरप वसा का 1 छोटा चम्मच । ऐसी 1 - 1 मात्रा दिन में 3 बार लें ।


•• इन्फ्लु एन्जा में सेवन कराने योग्य अपडेट ऐलो . पेटेन्ट टेबलेट / कै .

1 . सैरीडोन ( Saridon ) ( रोशे कं )  -  1 - 2 टि . दिन में 4 बार । 

2 . माइक्रोपायरीन ( Micropyrin ) शेरिंग कं '  -  2 - 2 टिकिया प्रति 4 घण्टे पर दें ।

3 . मेजोरॉल फार चिल्ड्रेन . ( डेज कं )  -  बच्चों को 1 - 2 टि . प्रति 4 घण्टे पर दें ।

4 . पाटमिन ( Patmin ) रेप्टाकोस  -  1 - 2 टिकिया दिन में 4 बार । ।

5 . फेबरेक्स प्लस ( Febrex Plus ) इंडोको  -   1 - 2 टिकिया प्रति 4 घण्टे पर दें । 

6 . निओ - फेब्रिन ( Neo - Febrin ) ' निओ फामी  -  1 - 2 टिकिया दिन में 4 बार । 

7 . एस्कोल्ड स्पेन्स्यूल ( स्मिथ क्लिन )   -  12 साल से अधिक आयु वालों को 1 - 1 कै . दिन में 3 - 4 बार दें ।

8 . कोसाविल ( Cosavil ) ' होचेस्ट  -   1 - 2 टिकिया दिन में 3 - 4 बार दें ।

    
•• इन्फ्लू एन्जा में सेवन कराने योग्य अपडेट ऐलो . पेटेन्ट पेय / सीरप ••

1 . एम्पीसिलीन ड्राई सीरप ( कई कम्पनियाँ बनाती है )  -  1 - 2 चम्मच दिन में 3 बार दें ।

2 . चेस्टोन ( Cheston ) ' सिपला कं '  -  1 - 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार दें ।

3 . फेन्सेडिल कफ लिक्टस ( रोन - पुलेंक )  -  1 - 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार दें । 

4 . सोवेण्टोल एक्स्पेक्टोरेण्ट ( नोल )  -  1 - 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार दें ।

5 . पाटमिन ( Patmin ) रेप्टाकोस  -  बच्चों को 1 / 2 से 2 छोटे चम्मच आयु के अनुसार दें । 

6 . प्रियाटन कफ सीरप ( बोहरिंगर नोल )  -  1 - 2 छोटे चम्मच दिन में 3 - 4 बार दें ।

   
नोट - सेरीडोन 1 टिकिया , सीलिन 500 मि . ग्रा . की 1 टिकिया , फेबरेक्स प्लस 1 टिकिया । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार दें । 


०० इन्फ्लुएन्जा में लगाने योग्य अपडेट ऐलो . पेटेण्ट इन्जेक्शन ००

1 . पेनिसिलीन ( Penicillin )  -  5 लाख यूनिट की सुई माँस में प्रति 4 घण्टे पर लगावें ।

2 . बेटनीसोल ( Betmisol ) ' ग्लैक्सो  -  1 - 5 मि . ली . माँस में । 

3 . स्ट्रेप्टो - पेनिसिलीन ( StreptoPenicillin )  -  हर 12 घण्टे पर 1 इन्जेक्शन माँस में लगावें ।

4 . स्टेक्लीन - एस ( Steclin - S ) ' साराभाई  -  1 मि . ली . माँस में नित्य लगावें । 

5 . एम्पीसिलीन 500 मि . ग्रा .  -  1 इन्जेक्शन माँस में नित्य ।

6 . नोवाल्जिन ( Novalgin ) होचेस्ट  -  दर्द की स्थिति में 2 से 5 मि . ली . मॉस में लगावें ।

7 . पेनिसिलीन - जी क्रिस्टेलाइन ( ग्लैक्सो )  -  50 हजार यूनिट का 1 इन्जेक्शन माँस में नित्य अथवा प्रति 4 घण्टे पर रोगानुसार ।

8 . इस्जीपायरीन ( Isgipyrin ) गायगी  -  2 - 5 मि . ली . माँस में लगावें । ।

9 . कार्डियाजोल ( Cardiazol ) ' नोल  -  दिल को ताकत देने के लिये 1 मि . ली . की सुई माँस या नस में लगावें ।


•• कुछ रोगियों में श्वास कृच्छ्रता , श्यावता एवं अधिक बेचैनी की स्थिति में चिकित्सक निम्न चिकित्सा की सिफारिश करते हैं -

एट्रोपीन सल्फे 1 / 100 ग्रेन + स्ट्रिक्न सल्फेट 1 / 32 ग्रेन मिलाकर 8 - 8 घण्टे बाद माँस में । अथवा कोरामीन टेबलेट , ड्रॉप्स या इन्जेक्शन रूप में । । 

• इन्फ्लूएन्जा की लाक्षणिक चिकित्सा •

1 . तीव्र स्वरूप के नये रोग  -  ' टेट्रासाइक्लीन ' 250 मि . ग्रा . का 1 कै . । प्रेडनीसोलोन 5 मि . ग्रा . की 1 टिकिया , सीलिन 100 मि . ग्रा . की 1 टिकिया । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार दें ।


2 . फ्लू में ' मस्तिष्कावरण, शोथ  -  इम्बासिटीन ( Embacitin ) नि . रोन - पुलेक के 1 - 2 कैप्सूल दिन में 2 बार 5 दिन तक दें ।

3 साथ में अनिद्रा  -  सोनेरिल ( Soneryl - रोन - पुलेंक ) अथवा डायजीपाम की 1 1 टि , रात सोते समय दें । ।

4 . रोग के पश्चात् की दुर्बलता  -  ईस्टर्न सीरप / मीनाडेक्स सीरप / विटाहैक्स्ट अथवा अन्य कोई उपयुक्त टॉनिक ।

   
•• इस्जीपायरीन 1 टिकिया , इल्कोसिन 1 टिकिया , एविल 1 / 2 टिकिया , सीलिन 500 मि . गा . की 1 / 2 टिकिया , रोसलिन 250 मि . ग्रा . का 1 कै . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 या 3 बार रोगानुसार दें ।

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