मूर्छा - वायु / हिस्टीरिया [ Hysteria ] क्या होता है ? किस तरह की बीमारी है ? कैसे उपचार कर सकते है ? what is air / hysteria? What kind of illness? How can I treat?

मूर्छा - वायु / हिस्टीरिया [ Hysteria ]

मूर्छा - वायु / हिस्टीरिया [ Hysteria ] क्या होता है ? किस तरह की बीमारी है ? कैसे उपचार कर सकते है ? what is air / hysteria? What kind of illness? How can I treat?
मूर्छा - वायु / हिस्टीरिया [ Hysteria ]


नाम - वायु गुल्म , योषापस्मार । हिन्दी में मूछ - वायु । अपतंत्रक । 

परिचय - स्नायु तंत्र के आंगिक अथवा जैवी रोग से रहित मानसिक पृथक्करण के फलस्वरूप उत्पन्न दशा जिसमें शारीरिक लक्षण एवं चिन्ह प्रकट होते हैं , संवेदी विघ्नतायें उत्पन्न होती हैं तथा व्यक्तित्व में परिवर्तन हो जाते हैं । यह अधिकतर युवा स्त्रियों में होता है । जिसमें उनका अपनी क्रियाओं एवं आवेगों पर कोई नियंत्रण नहीं रहता । ।

••• हिस्टीरिया की कोई उपयुक्त परिभाषा अभी तक ज्ञात नहीं है तथापि यह समझा जाता है कि हिस्टीरिया वह व्याधि है जिसमें किसी प्रकार की आंगिक व्याधि के बिना ही शारीरिक क्रियाओं में विकार पाया जाता है ।

यह निम्न प्रकार का होता है -

1 . चिंता हिस्टीरिया ( Anxiety Hysteria ) - चिन्ता के दौरे के साथ उत्पन्न होने वाले हिस्टीरियो । 

2 . फिक्सेशन हिस्टीरिया ( Fixation Hysteria ) → किसी आंगिक रोः के रों के साथ होने वाला हिस्टीरिया ।

रोग के प्रधान कारण -

• मानसिक चिंता , शोक , दुख , गुप्त पाप को मन में दबा रखना । 

• भय , प्रेम में निराशा , प्रेम में ईष्र्या आदि मानसिक चोट । 

• महामारी की गड़बड़ी , डिम्बाशय और जरायु के रोग । । 

• अमीर और आराम तलब लड़कियों को अधिक । इसके विपरीत मेहनती और गरीब लड़कियों को कम । → 

• जवानी बीत जाने के बाद विवाह । । । 

• बहुत दिनों से रतिक्रिया न होना ( दाम्पत्य जीवन का अभाव ) । । 

• जिन जवान स्त्रियों की सम्भोग इच्छा तृप्त नहीं होती , उनको अधिकतर हिस्टीरिया रोग होता है । → 

• पारिवारिक कष्ट एवं आकस्मिक मानसिक आघात । 

• गर्भमूलक रोग एवं अजीर्ण रोग । → 

• कहीं - कहीं पति - विद्वेष के कारण ।


रोग के प्रधान लक्षण -

• मूर्छा एवं आक्षेप । मूछ ( Fit ) का होना रोग का प्रधान लक्षण । 

• कंपकंपी आक्षेप ( Convulsions ) एवं दाँत का बैठ जाना । । 

• मानसिक दशा में असामान्य परिवर्तन । 

• पुरुषों में इस रोग से मानसिक विचारों में हीनता एवं दुर्बलता । सामान्य सी बात पर क्रोधित एवं अपने में बेकाबू । । 

• बात करने का विशेष ढंग । । 

• अल्प समय के लिये स्मृतिनाश या पूर्ण दृष्टिनाश का लक्षण । 

• अर्ध - दृष्टिनाश या पूर्ण - दृष्टिनाश का लक्षण सम्भव । । 

• किसी - किसी में गूगेपन का भी लक्षण । 

• वधिरता , शिरःशूल , चुभने वाला भारी दर्द एक या दोनों हाथों में संज्ञा नाश का लक्षण सम्भव । 

• खाते समय गले में अवरोध की प्रतीति । । 

• अन्त में श्वासावरोधक एवं हिचकी ।


नोट -
• 20 - 30 वर्ष की आयु में अधिक तथा बालक और वृद्धों में भी । 

• पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक । एवं अल्प बुद्धि वालों में अधिक । । 

• विधवा एवं परित्यक्ता स्त्रियों में अधिक । 

• सांस्कृतिक कारक - रूढ़िवादी , विकासशील , सम्पन्न परिवार की स्त्रियों में अधिक । । 

• अशान्त बचपन , परस्पर सम्बन्धों का सामान्य न होना , टूटी हुई गृहस्थी आदि भी हिस्टीरया के कारण हैं ।


याद रखिये - हिस्टीरिया के रोगी को प्रतिकूल परिस्थितियाँ कुछ समय प्रतीत होती हैं । 

•• हिस्टीरिया का दौरा - एक विशेष लक्षण -

• दौरा पड़ने से पूर्व रोगिणी को आभास हो जाता है कि रोग का उसे हमला होने वाला है । इसलिये अनेक महिलायें आक्रमण से पूर्व सावधान होकर कस - कर कपड़े पहन लेती हैं । 

• रोगिणी को बेहोश होने से पूर्व कभी - कभी ऐसा लगता है कि उसके पेट से गले तक कुछ चढ़ता हुआ ( गोला ) सा प्रतीत हो रहा है । । 

• मुट्ठियाँ बँध जाती हैं और उसका शरीर धनुष के आकार का टेढ़ा हो जाता है । वह अपने हाथ - पैरों को इधर - उघर पटकती है । साँस से आवाज आती है । वह कभी हँसती है तो कभी रोती है । कभी - कभी चुपचाप पड़ी रहती है तो कभी नाराज होने लगती है । दौरा समाप्त होने पर पेशाब अधिक आता है । 

•• शेष लक्षण एक दृष्टि में - 

• प्रायः स्वभाव चिड़चिड़ा । कभी हँसना तो कभी रोना । कभी | जरा - जरा सी बातों पर अप्रसन्न । 

• विपरीत बात पर पुनः दौरा प्रारम्भ । 

• रोगिणी का चेहरा तमतमा जाता है । । । 

• मूच्र्छा अर्धमूछ । 

• कबूतर के समान घुर - घुर की आवाज । अथवा शब्द । । ।

• बेहोशी में भी आँखें खुली या अधखुली । । 

• श्वास - प्रश्वास में कठिनाई । । 

• बार - बार कम्पन एवं स्वेद । → 

• अंगों की जड़ता एवं ऐंठन ।


••• हिस्टीरिया का प्रधान लक्षण मूर्छा या बेहोशी का दौरा है । यह दौरा 24 घंटे से लेकर 48 घंटे तक निरन्तर होता देखा गया है । ।


 नोट - बहुत से रोगियों में बार - बार और जल्दी - जल्दी दौरा होता है । ऐसी अवस्था में होश में आते ही कुछ समय बाद रोगी फिर मूर्छित हो जाता है ।

रोग की पहिचान -

• हिस्टीरिया रोग का खास ऐसा कोई निश्चित लक्षण नहीं है जिससे रोग की पहिचान बिना संदेह हो सके । किसी को कोई लक्षण होता है तो किसी को कोई । । एक रोगी में जो लक्षण होते हैं वे दूसरे में । बिलकुल भिन्न प्रकार के होते हैं ।

रोग का परिणाम -

साधारणतः रोगी ठीक हो जाते हैं पर निम्नलिखित की उपस्थिति में कठिनाई आती है -

• बौद्धिक दृष्टि से कमजोर । । 

• विकलांगता की उपस्थिति । 

• परिस्थितियाँ अनुकूल होने पर ठीक होने की सम्भावना । ।  

• रोग पुनः भी हो सकता है । ।

फिर भी – दौरे के समय रोगी का चेहरा तमतमा जाता है । गले में कोई वस्तु चढती हुई प्रतीत होती है , पेट में गोला सा उठने लगता है । इन लक्षणों के आधार पर इसे पहिचाना जा सकता है ,


चिकित्सा विधि -

• रोगी को अलग रखें और उससे किसी को भी मिलने नहीं देना चाहिये । ।

• मानसिक तनाव को दूर करें । निद्राकर द्रव्य भी उपयोगी । । 

• रोग का मूल कारण जानकर चिकित्सा उसी अनुसार करें । 

• कामवासना की अतृप्ति से रोग हुआ हो तो उसकी पूर्ति का प्रबन्ध आवश्यक है । । 

• मन्दाग्नि के कारण रोग हुआ हो तो उसकी चिकित्सा होनी चाहिये । । 

• अधिकांश स्त्रियों को यह बीमारी अतिरज , अल्पज आदि नाना प्रकार के ऋतुदोषों के कारण ही होती है , इसलिये इसमें ऐसी औषधि की व्यवस्था करनी चाहिये जिससे ऋतु स्वाभाविक हो । यदि श्वेत प्रदर हो तो उसकी चिकित्सा करे -

• दौरे के समय रोगिणी के चेहरे पर हल्के छींटे देने चाहिये । ।


पथ्यापथ्य , आनुषांगिक एवं सहायक चिकित्सा -

पथ्य - हल्का और बलकारक भोजन देना चाहिये । दूध में चीनी की जगह शहद डालना लाभदायक है । दिमाग को स्वस्थ रखने के लिये वीररस प्रधान कथा और बड़े लोगों का जीवन चरित्र पढ़ना चाहिये । फलों का खाना लाभदायक है । सुबह स्वच्छ वायु में भ्रमण करना चाहिये । 

• साधारणतः मूल कारण को देख कर ही खाने - पीने की चीजें देनी चाहिये । कमजोरी की दशा में पौष्टिक पदार्थ । 

• मासिक धर्म रुकने की दशा में तीक्ष्ण और रेचक पदार्थ अच्छे रहते हैं । 

अपथ्य - चाय , कॉफी वगैरह उत्तेजक पदार्थ और शराब , अफीम आदि किसी भी तरह का मादक द्रव्य व्यहार करना मना है । 

आनुषांगिक एवं सहायक चिकित्सा - इस बीमारी में रोगिणी को अक्सर कब्ज रहता है , किन्तु यदि पेट साफ रहे तो रोगिणी शीघ्र अच्छी हो जाती है इसलिये जुलाब देकर पेट साफ रक्खा जाय ।

नोट - वास्तविक उपचार मनःचिकित्सा ( Psychotherapy ) है , इसमें आश्वासन , समझाना , उत्सीहत करना , सामूहिक ( Group ) उपचार , मनोविश्लेषण ( Analytic ) विधियाँ आदि किये जाते हैं । दौरे के समय होश में लाने का यत्न करें ।

आवश्यक सुझाव -

• हिस्टीरिया की रोगिणी की मानसिक अवस्था बहुत ही गड़बड़ा जाती है इसलिये उससे कड़वी बातें करना या ऐसा व्यवहार करना जिससे उसके मन में कष्ट हो बिलकुल मना है । → 

• ठंडी जगह में रहना , ठंडे पानी से नहाना , पके फल , पपीता , बेल आदि खाना , मट्ठा , कोमल डाभ का पानी और साग , सब्जी खाना इस बीमारी में लाभदायक है । गर्म मसालेदार चीजें और वायुवर्धक भोजन की इसमें सख्त मनाही है । 

••• रोगिणी का पति पास में रहना चाहिये । मासिक धर्म को नियमित रखना खास आवश्यक है । कटि स्नान का प्रयोग लाभदायक है ।

• हिस्टीरिया की औषधि चिकित्सा -

• रोगिणी को अलग शान्त वातावरण में विशेष सहानुभूति के साथ रखें । । 
• प्लेसीबो ( Placebo ) थेरापी - कुछ आयरन के योग अथवा डिस्टिल्ड वाटर का माँसपेशीपत इन्जेक्शन । । 

• क्लोरप्रोमेजीन ( Chlorpromazine ) 50 मि . ग्रा . दिन में 3 बार 2 - 3 दिन तक । अथवा डायजीपाम 10 मि . ग्रा . माँसपेशीगत । ।

• निद्राकर योग ( Hypnosis ) यथा फीनोवाटोन , सोनेरिल आदि । → 

• साइकोथेरेपी ( Psychotherapy ) मनःचिकित्सा । समझाना , बुझाना , सम्मोहन अथवा मनोविश्लेषणात्मक उपाय । । 

••• हिस्टीरिया के दौरे के समय चिकित्सा -

• लाइकर अमेनिया फोर्ट अथवा स्प्रिट अमोनिया स्ट्रांग सँघायें । 

• होश में लाने के तत्काल बाद - हींग + बेलेरियन मिक्श्च र की 1 मात्रा दें । 
• तत्पश्चात 1 / 2 घण्टे बाद - टेबलेट गार्डिनल 1 टि , दें ।


••• हिस्टीरिया के दौरे के पश्चात की चिकित्सा -

• टेबलेट इक्वानिल ( Tab . Equanil ) ' वीथ  - 1 - 1 टिकिया दिन में 2 बार प्रातः सायं जल से । । 


अथवा

• इलिग्जिर ब्रोमोवाल ( Elixir Bromoval ) ' सिपला - 1 - 1 चम्मच दिन में 3 बार । । 


अथवा

• इलिग्जिर ब्रोमोवेलिन ( इण्डियन हैल्थ ) - 1 - 1 चम्मच दिन में 3 बार । ।


हिस्टीरिया की लक्षणों के अनुसार अनुभूत चिकित्सा -

1 . कै और मीतली  -  ‘ एवोमिन या ' लगॅक्टिल की 10 मि . ग्रा . वाली टिकिया दिन में 3 बार दें ।

2 . भूख न लगना  -  ‘ बेरिन 10 मि . ग्रा की 1 / 2 टि . दिन में 2 बार दूध के साथ दें । तत्काल बाद ‘ एटारेक्स की 1 - 1 टि . दिन में 2 बार दें । । 

3 . पाचन क्रिया में गड़बड़ी , पेट फूलना एवं गैस का बनना  -  ' केम डइजेस्टोन ( Chem digeston ) केमो फार्मा की2 - 2चम्मच थोडे जल में मिला कर भोजन के तुरन्त बाद दें । 

4 . उदर अथवा वृक्कशूल युक्तरोग  -  ‘ बुस्कोपान कम्पोजीटम की 1 टिकिया दिन में 1 या 2 बार । । ' 

5 . हिस्टीरिया में नींद न आने पर  -  वेस्पारेक्स ( Vesparax ) अथवा ' प्लेसीनाल की 1 टिकिया सोते समय दें ।

6 . हिस्टीरिया में आधे सिर का दर्द   -  नोवाल्जिन 1 टिकिया , एटारेक्सन 1 टिकिया । दोनों को एक साथ जल के साथ दें । 

7 . हिचकी की स्थिति में  -  ‘ लार्गेक्टिल अथवा ' न्यो - ओक्टीनम ' की 1 - 1 टि , दिन में 3 बार दें । । 

8 . हिस्टीरिया में उत्तेजना अथवा गगलपन जैसी स्थिति  -  ‘ इलिग्जिर सरपाब्रोम ( बंगाल इम्युनिटी ) 2 - 2 चम्मच दिन में 2 बार दें । साथ ही लोर्गक्टिल की 1 टिकिया दिन में 1 बार और रात में सोते
समय दें । 
• यदि रोगी दवा खाने में असमर्थ हो तो ' लार्गेक्टिल की सुई माँस में लगावें

9 . चिड़चिड़ापन , वहम एवं शारी - रिक विकार  -   ' एनाटेन्सोल ( स्क्विब ) की 1 टि . दिन में 2 बारदें । अथवा ' एटारेक्स ' की 1 टि . दिन में 2 बार दें ।

10 . हिस्टीरिया में मूत्र रुक जाने पर  -  तत्काल कैथेटर से मूत्र करायें एवं ‘ इक्वानिल की 1 - 1 टिकिया दिन में 2 बार दें । ।

11 . अशक्त , दुर्बलता , शक्तिहीनता एवं लो ब्लड प्रेशर  -   ' टोनियाजाल की 1 - 1 चम्मच दिन में 2 बार दें अथवा ' कोरामीन दें ।

12 . पक्षाघात जैसी स्थिति में  -  ‘ सेरिन ( थीराप्यूटिक फार्मा ) अथवा एक्वी प्लॉन ( Equiplon ) खण्डेलवाल की 1 - 1 टि . दिन में 2 बार दें । अथवा बेरिन की 1 टिकिया दिन में 3 बार दें ।


नोट - पक्षाघात जैसे लक्षण मिलने पर इन्जे . विनर्वा ( रोशे ) का 2 मि . ली . की मात्र में माँस में लगायें ।

Rx -

• प्रा . सा . दिन में 2 बार -
- मिल्टान ( कार्टर वालेस - 200 मि . ग्रा . की 1 टी. 
- गार्डीनल ( रोन - पुलेन्क ) 1 टि . 
- बेरिन 100 मि . ग्रा . ( ग्लैक्सो ) 1 / 2 टि . 
- ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार जल से । । 

• दिन के 10 बजे एवं रात के 8 बजे -
- टे . इक्वानिल ( वीथ ) 1 टि . दिन में 2 बार जल से । । 

• दिन में 2 बार भोजन के 1 / 2 घंटे बाद -
- ' टोनियाजोल - 2 - 2 चम्मच दिन में 2 बार । । 

• दिन में 1 बार सोते समय -
- एनाटेन्सोल ( साराभाई ) 1 टिकिया जल से दें ।

याद रखिये - किसी - किसी रोगी में ल्यूकोटोमी ' ( Leucotomy ) का आपरेशन किया जाता है । साथ ही सफलता आपरेशन के तत्काल बाद दिखायी देने लगती है और किसी - किसी में सफलता आपरेशन के महीनों बाद दिखायी देती है । 

नोट - दोनों ही अवस्थाओं में मनश्चिकित्सा ( Psychotherapy ) करना अपेक्षित है ।

••• हिस्टीरिया की मिश्रित औषधि चिकित्सा ( Combination Therapy ) चिकित्सों द्वारा अनुभूत -

1 . इप्सोलिन ( कैडिला ) 1 / 2 टिकिया , डाइलैण्टिन ( पी . डी . ) 1 कै . , इलिक्जिर वैलेरियन ब्रोम 1 छोटी चम्मच । । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार भोजन के बाद जल से । । 

2 . ' डाइलेण्टिन - पी ( पी . डी . ) 1 / 2 कै . मेजीटोल 1 टिकिया , सोडियम वालप्रोएट ( एकिट एण्ड कोमन ) 1 / 2 टिकिया , जेरोण्टिन ( Zarontin ) सीरप 1 / 2 चम्मच । 1 मात्रा । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 - 3 बार देने से सब प्रकार के हिस्टीरिया रोग में लाभ होता है । । 
नोट - दौरा आते समय देने से दौरा तत्काल शान्त हो जाता है ।

3 . इप्टोइन ( बूट्स ) 1 टिकिया , इप्सोलिन ( केडिला ) 1 / 2 टिकिया , वायडेलिन सीरप ( एब्वोट ) 2 चम्मच । 1 मात्रा । ऐसी 1 - 1 मात्रा दिन में 2 बार खाना खाने के बाद दें । 

4 . मेजीटोल 1 टिकिया , मेसैन्टोइन ( सेण्डोज ) 1 / 2 टिकिया , रूब्राप्लेक्स इलिक्जिर 1 चम्मच , इलिक्जिर वैलेरियन ब्रोम 1 चम्मच । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार भोजन के बाद दे ,

5 . माइसोलिन 1 टिकिया , बी कम्पलेक्स ( ग्लैक्सो ) 1 टिकिया , इलिक्जिर वैलेरियन ब्रोम 1 चम्मच लें । ऐसी एक मात्रा दिन में 2 बार दें ।


••• हिस्टीरिया में सेवन कराने योग्य अपडेट ऐलो . पेटेन्ट टेबलेट -

1 . वेस्पारेक्स ( Vesparax ) यूनिकेम  -  दौरा पड़ते ही 1 से 2 टिकिया जल से दें ।

2 . सोनर्गान ( Sonergan ) ' रोन पुलेक ।  -  दौरा पडते ही 1 - 2 टिकिया ताजे जल से दें ।

3 . लार्गेक्टिल ( Largactil ) ' रोन पुलेंक  -  दौरा पड़ते ही 1 टि . ( 50 mg ) जल से । ।

4 . सोनेरिल ( Soneryl ) ' रोन पुलेंक  -  रोग की तीव्रता में ताजे जल से 1 टिकिया । ।

5 . विस्टारिल ( Vistaril ) ' फाइजर  -  1 - 2 टिकिया दिन में 3 - 4 बार । ।

6 . निम्बुटॉल ( Nimbutal ) एल्वोट  -  1 कै . रोग की तेजी के अनुसार दें । । 

7 . सैन्सेडाल ( Cencedal ‘ रोन पुलेंक  -  60 मि . ग्रा , की 1 टिकिया दिन में 3 - 4 बार ।

नोट - ट्रिडिओन ( एब्वोट ) 1 कै . जेरोटीन ( पी . डी . ) 10 मि . ली . , एनाटेन्सोल । ( साराभाई ) 1 टिकिया । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार दें । । 


••• हिस्टीरिया में सेवन कराने योग्य अपडेट ऐलो . पेटेन्ट सीरप ०

1 . विस्टारिल ( Vistaril ) फीजर कं .  -  2 - 4 चम्मच हर खाने के बाद दें । ।

2 . डाइलेण्टीन ( Dilantin ) पी . डी .  -  1 / 4 - 1 चम्मच रोगानुसार दिन में 3 - 4 बार दें । 

3 . जेरोटीन ( Zarontin ) पी . डी .  -  1 / 2 - 2 चम्मच दिन में 2 - 3 बार रोगानुसार ।

4 . इलिक्जिर ब्रोमो वेलेरियन ( बी ईवान्स )  -  3 - 4 चम्मच हर खाने के बाद । 3 - 4 बार तक दे,

5 . इलिक्जिर ब्रोमोवाल ( सिपला )  -  1 - 2 चम्मच दिन में 2 बार चावलों के धोवन के साथ ।

6 . ब्रोमो बेलीरेंट ( ग्लोकोनेट कं . )  -  1 - 2 चम्मच दिन में 1 या 2 बार जल मिला कर दे ,

7 . इलिक्सिर बेलेरियन ब्रोम ( नि . ऐलेम्बिक )  -  1 - 2 चम्मच दिन में 2 या 3 बार दें ।
  

••• हिस्टीरिया में लगाने योग्य सुप्रसिद्ध ऐलो . पेटेण्ट इन्जेक्शन -

1 . सीक्विल ( Siquil ) ' साराभाई   -  1 - 3 मि . ग्रा . नस में धीरे - धीरे सुई लगायें । अथवा 5 से 10 मि . ग्रा . की एक सुई माँस में लगायें ।

2 . इस्कैजीन ( Eskazine ) S . K . F  -  1 मि . ली . की सुई नस में धीरे - धीरे लगायें ।

3 . कैल्सिबियोन ( Calcibion ) ' सिपला  -  5 - 10 मि . ली . की एक सुई नस ( I / V ) में लगायें ।

4 . कैल्सीब्रोनेट ( Calcibronate ) सेण्डोज  -  10 मि . ली की एक सुई नस में 3 दिन छोड़ कर दें ।

5 . इप्सोलिन ( Epsolin ) ' केडिला  -  250 - 500 मि . ग्रा . की सुई नस में धीरे - धीरे लगायें ।

6 . वैलियम ( Valium ) ' रोशे कं .  -  हिस्टीरिया के लगातार दौरे में 0 . 15 से 0 . 25 मि . ली . शरीर भार के अनुसार नस या माँस में लगावें । 1 / 2 - 1 घंटे में पुनः दोहरायें । ।

     
सावधान -

• गर्भावस्था में अति सावधानी के साथ लगायें । 

• इस औषधि में कोई दूसरी औषधि न मिलायें । । 

• मायस्थेनिया ग्रोविस , ग्लाइकोमा आदि में न लगायें ।


अनुभूत चिकित्सा - एक झलक -

• ल्यूमीनाल ( बेयर ) 1 टिकिया , सर्पासिल ( सीबा - गायगी ) 1 टिकिया , बाराडेज ( पी . डी . ) 1 टिकिया , ब्रोमोवैलेरियन इलिक्सर 1 चम्मच । हिस्टीरिया का आक्रमण होते ही इसकी 1 मात्रा देते ही तत्काल लाभ मिल जाता है । 

• विटाहैक्स्ट ( होचेस्ट ) 1 चम्मच , गेरोइन ( रोन - पुलेंक ) 1 / 2 टिकिया , इलिक्जर वैलेरियन ब्रोम 1 चम्मच । ऐसी 1 - 1 मात्रा दिन में 2 - 3 बार दें ।

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