अर्धावभेदक / आधासीसी ( मीग्रेन ) Hemicrania or Migraine ] का इलाज कैसे सम्सभ्व है ? इसके परिचय , कारण , लक्षण एव चिकित्सा ? How to treat thalassemia / migraines (migraine) Themicrania or migraine? Its introduction, causes, symptoms and medicines?

अर्धावभेदक / आधासीसी ( मीग्रेन ) Hemicrania or Migraine ] 


अर्धावभेदक / आधासीसी ( मीग्रेन ) Hemicrania or Migraine ] का इलाज कैसे सम्सभ्व है ? इसके परिचय , कारण , लक्षण एव चिकित्सा ? How to treat thalassemia / migraines (migraine) Themicrania or migraine? Its introduction, causes, symptoms and medicines?



नाम - मीग्रेन , सूर्यावर्त्त , आधाशीशी का दर्द ( सामान्य बोलचाल में ) । 

परिचय - बहुधा मितली , वमन एवं दृष्टि की गड़बड़ी के साथ थोड़ी - थोड़ी देर से होने वाले गम्भीर सिर दर्द के दौरे । 

सिर के आधे भाग में होने वाला दर्द जो सुबह सोकर उठने पर अर्थात् सूर्य के निकलने पर शुरू होता है तथा दोपहर तक सबसे अधिक हो जाता है और फिर धीरे - धीरे कम होने लगता है और शाम को सूरज छिप जाने पर पूर्णतया समाप्त हो जाता है,


रोग के प्रमुख कारण -

• रोग पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक । 

• स्त्रियों में इसका सम्बन्ध मासिक धर्म , गर्भावस्था अथवा प्रसव के कुछ महीने में विशेष होता है । । 

• यह रोग पैतृक भी होता है । 

• अधिक मानसिक परिश्रम , पेशाब की बीमारी , दृष्टिदोष , वात , धातु - दोष आदि कारणों से उत्पन्न । । → 

• रूक्ष आहार और अत्यशन । । 

• व्यायाम से उत्पन्न शान्तता ( Fatigue ) एक सहायक कारण है । 

• मानसिक आभास ( Psychological stress ) से भी इस रोग का आक्रमण हो सकता है । । 

• सम्भवतः रक्त विकार , मैथुन की । अधिकता , अपच , कब्ज आदि इसके उत्पन्न करने वाले उत्तरदायी कारण हैं । ।

• चिन्तारोग ( Anxiety ) , रजोनिवृत्त काल , अधिक परिश्रम , उच्च रक्त चाप , सेरीब्रल ट्यूमर , उपवास , धातु दोष , पेशाब की बीमारी , कुछ आहार जैसे ओरेन्ज अथवा चेकलेट इसके प्रेसी पिटेटिंग कारण हैं ।


रोग के प्रमुख लक्षण -

• रोग का आक्रमण अधिकतर मानसिक तनाव से । 

• आक्रमण में कुछ दिनों या महीनों का अंतर रहता है । 

• लक्षण सबसे पहले उस समय प्रकट होने लगते हैं जब वाहिनियों में ‘ उद्वेष्ट होता है । इससे रोगी को - 

- सफेद या रंगीन रोशनी का आभास , धब्बे , एवं काँपती हुई रेखायें दीखती हैं अथवा दृष्टि क्षेत्र में विकार आ जाता है । 

- शरीर के आधे हिस्से में कमजोरी या दोनों हाथों ( Hands ) या मुख के चारों ओर सुन्नता ।

- वेदना आरम्भ में किसी एक स्थान पर होती है फिर आधे सिर में फैल जाती है । वेदना उस ओर भी हो सकती है जिस ओर की आँख की रोशनी में विकार आता है पर दूसरी ओर होना भी सम्भव है । यह रूक्ष एक ओर ही नहीं होती अपितु प्रायः दोनों ओर ( Bilateral ) भी हो जाती है । 

- वेदना तीव्र एवं प्रस्पन्दन ( Throbbing ) प्रकार की होती है । 

- साथ में वमन , आँखों में चकाचौंध , चेहरा फीका , स्वेदयुक्त और थकान इतनी अधिक होती है कि रोगिणी निढाल होकर अंधेरे कमरे में लेटने के लिये मजबूर हो जाती है ।

याद रखिये -

• आक्रमण कुछ घंटों से कुछ दिनों तक बना रह सकता है और रोगी अपने आप को कमजोर तथा थका हुआ महसूस करता है । । 

• ' हेमीप्लीजिक मीग्रेन ' – नेत्रों में स्थायी विकृति ( अन्धक्षेत्र - Scotoma ) आ सकती है । 

•• रोग का प्रारम्भ और अन्त अर्धावभेदक के रोगियों का व्यक्तित्व प्रायः मनोग्रस्त ( Obsessional ) होता है । रोग का आरम्भ प्रायः बाल्यकाल में ही हो जाता है और यदाकदा वमन होते रहते हैं । युवा होते - होते ये लक्षण अधिक स्पष्ट होने लगते हैं । यह दशा लगभग 60 वर्ष की आयु तक बनी रहती है , फिर स्वतः ही शान्त हो जाती है ।


अर्धावभेदक के रूपान्तर ( Variants ) -

1 . आधार मस्तिष्क धमनी अर्धावभेदक - यह लगभग 30 वर्ष की आयु में प्रारम्भ होता है । इसमें वेदना सिर के पिछले हिस्से में अधिक होती है , दोनों आँखें प्रभावित होती हैं और टांगों में कमजोरी अधिक होती है । 

2 . अर्धागघात अर्धावभेदक ( Hemiplegic Megraine ) — यह अर्धागघात के बाद होता है । और कुछ दिन तक बना रहता है । । 

3 . हिस्टामीन शीर्षार्ति ( Cephalgia ) में - वेदना का आक्रमण प्रतिदिन एक ही समय पर , प्रायः रात के 12 और 3 बजे के बीच होता है । ' कंजक्टाइवा ' में रक्ताधिक्य अधिक होता

4 . आघातजन्य अर्धावभेदक ( Post - traumatic Migraine ) - गेंद आदि की चोट से होने लगता है । इसमें चक्कर आते हैं और कभी - कभी वमन भी होने लगता है । । 

5 . नेत्रपेशीघात अर्धावभेदक ( Ophthalmo - plegic migraine ) - तीव्र वेदना के साथ साथ वर्मपात ( प्टोसिस - Ptosis ) भी होता है जो दौरे के बाद ठीक हो जाता है । ।


नोट केन्द्रीय दृष्टिपटल ( Retinal ) धमनी में उद्वेष्ट होना भयंकर उपद्रव है । । 

याद रखिये मनोभावों को दबाने से माइग्रेन का दौरा हो जाता है ।


रोग को पहिचान -

• रोग के आक्रमण का समय प्रायः निश्चित होता है । सूर्योदय से सूर्यास्त तक क्रमबद्ध सिर में दर्द रहने से इसके पहिचानने में कोई कठिनाई नहीं होती है ।


रोग का परिणाम -

• रोग के दौरे कई दिन , सप्ताह और महीनों के अन्तर से पड़ते रहते हैं । 

• इसकी चिकित्सा कठिन है और चिकित्सा से निश्चित सफलता की आशा करना व्यर्थ है । केवल आराम मिला रहता है । ।


आधाशीशी की चिकित्सा विधि -

• रोग के मूल कारण को दूर करें और उसे । अजीर्ण से बचायें । मलावरोध न रहे । इसकी उचित चिकित्सा करें । दौरे के बाद ‘ शामक दें ।

• दौरे के समय रोगी को अंधेरे में रखें । ।

पथ्यापथ्य एवं सहायक चिकित्सा -

• रोगी को सोडा वाटर और दूध पिलावें । मॅग , जौ , लाल चावल , पुराना घी , परवल , बैगन , करेला , मूली , बथुआ ,चौलाई आदि का सेवन पथ्य हैं । चाय , कॉफी से पूर्णतया परहेज रखें । 

- आँखों पर अधिक जोर न डालें । 

- माथे पर अधिक शीतल अथवा अधिक गर्म पट्टी बाँधे ।


आधाशीशी की औषधि चिकित्सा → 

• पूर्ण विश्राम ( Comlete Rest ) । । ॥ 

• वेदना शमन के लिये - वेदनाहर एस्प्रिन आदि दें । 

• ‘ फीनोबारवीटोन या ' क्लोरपिजीन ( स्टेमेटिल - Stemetil ) को देते रहने से आक्रमण को रोकने में सहायता मिलती है । 

• लाभ न मिलने पर - इरगोटामीन टारट्रेट ( Ergotamine Tartrate ) दें । इसे 2 मि . ग्रा . की मात्रा में जीभ के नीचे रखकर चूसने को दें । अथवा इसका S / C इन्जेक्शन दें । इसे गर्भावस्था में न दें ।


•• चिकित्सा में कारणों को दूर करने का भी यत्न करना चाहिये और साथ में मानसिक उपचार भी आवश्यक है । 

नोट - साधारण रोग में ' एस्प्रिन ' को अकेले अथवा कोडीन और पैरासिटामोल के साथ देना चाहिये ।


Rx

- प्रति 1 / 2 घण्टे पर 3 मात्रा -

वेसोग्रेन ( Vasograin ) केडिला 1 - 1 टिकिया जल से । । । 

- प्रातः 8 बजे , सायं 6 बजे -

स्टेमेटिल ( Stemetil ) 5 मि . ग्रा . की 1 टिकिया जल से । । 

- 9 बजे प्रातः एवं सायं 7 बजे -

सेरिडोन ( Seridon ) रोशे 1 टि , जल से । । 

- दिन में 1 बार - इस्जीपायरीन ( Esgipyrin ) 3 मि . ली . माँस में । । 

- सिर पर  -  ' यूथेरिया अथवा अमृतांजन बाम को सिर पर मलें ।


•• विशेष लक्षण के आधाशीशी की लक्षणों के अनुसार चिकित्सा ••

1 . साधारण दर्द में कैफगोट ( Caferot ) अथवा मिगरिल ( Migri ! ) 1 - 1 टिकिया प्रति 1 घण्टे के अंतर पर दिन में 3 - 4 बार दें । ।

2 . जी मिचलाना एवं वमन टेबलेट स्टेमेटिल 5 मि . ग्रा . का 1 टि . अगटामीन टाटेंट की पहली मात्रा के साथ दें । 

नोट - कुछ रोगी ऐसे भी हैं , जिन्हें वमन होने पर आधाशीशी का दर्द कम हो जाता है , उन्हें वमन निरोधी औषधि देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है ।
3 . रोकथाम अथवा दो आक्रमणों के मध्य की चिकित्सा  फीनोबाटोन की 1 टिकिया , वेसोग्रेन या आर्गेटामिन टाटेंट 1 मि . ग्रा . की 1 टि . लें । ऐसी 1 मात्रा दिन में 1 बार दें ।

नोट - यह तीव्र स्वरूप की गम्भीर अवस्था में उपयुक्त रहता है । ।

4 . दौरे से बचाव के लिये  ' अर्गोटामीन टाटेंट का 0 . 25 मि . ग्रा . का माँस में इन्जेक्शन लगायें ।

5 . सांतर अर्धकपारी ( Status Mig - raine )  इन्जे , गाइनर्जन 1 मि . ली . , इन्जे , स्टेमेटिल 1 मि . ली . , इन्जे . एनाल्जिन 1 मि . ली . । तीनों को मिलाकर माँस में लगावें । ।

नोट
इसमें शामक चिकित्सा + अर्गोटामीन से तत्काल लाभ मिलता है । ।इसमें मानसिक उपचार तथा अस्पताल में रोगी को भर्ती करा देने से कष्ट दूर हो जाता है ,

6 . मानसिक कारणों से उत्पन्न सिर दर्द में  सीक्वल ( Siquil ) ' स्क्विब की 1 - 1 टि . दिन में 2 बार जल से दें । । 

7 . आर्तत कालिक अर्धावभेदक  आर्तव से 1 सप्ताह पहले ‘ प्रोजेस्टरोन 5 मि . ली . माँस में तीसरे दिन 2 - 3 बार तक लगायें । अथवा - इथीस्टेरोन ( Ethisterone ) 30 मि . ग्रा . दैनिक मात्रा में 4 - 5 दिन तक मुख द्वारा दें । ।


अर्धावभेदक की मिश्रित औषधि चिकित्सा -

1. कैफरगोट ( सैण्डोज ) 2 टिकिया , वेसोग्रेन ( कैडिला ) 1 टिकिया । ऐसी 1 मात्रा पीड़ा प्रारम्भ होते ही दें । 

2 . बेटेनॉल ( M . M . Labs ) 10 मि . ग्रा . 2 टि . , मिग्रिल ( बी . डब्लू - B . W ) 1 टिकिया ; न्यू - रोबिऑन प्लेन ( मर्क ) 1 टिकिया । ऐसी 1 मात्रा भोजन के बाद दें । 

3 . मिग्रानिल ( इनगा ) 1 टिकिया , सीलिन ( ग्लैक्सो ) 500 मि . ग्रा . की 1 / 2 टिकिया । ऐसी एक मात्रा सूर्योदय से पूर्व जल से दें ।आवश्यकतानुसार शाम को भी दिया जा सकता है । 

4 . कैफरगोट 1 टिकिया , सीलिन 100 मि . ग्रा . को 1 टिकिया , नोवाल्जिन 1 टिकिया , सेरीडॉन 1 / 2 टिकिया को पीस कर पुड़िया बनालें । ऐसी 1 - 1 पुड़िया प्रतः सायं जल से दें ।

5 . कैफरगोट ( सैण्डोज ) 2 टिकिया , वायसोग्रेन ( कैडिला ) 1 टिकिया , ब्रोमोलीन सीरप ( A . FD . Co . ) 2 चम्मच लें । ऐसी 1 - 1 मात्रा पीड़ा प्रारम्भ होते ही दें । 

6 . सिवाल्जिन कम्पोजीटम 1 टिकिया , ओस्टोकैल्सियम 1 टिकिया , सीलिन 100 मि . ग्रा . की 1 टि . , मेक्राबिन 2 चम्मच लें । ऐसी 1 - 1 मात्रा दिन में 2 बार रोग आक्रमण से पूर्व दें । 

नोट - इसके साथ न्यूरोट्रासेण्टीन की 1 टि. भी मिलाई जा सकती है ।


चिकित्सकों द्वारा अनुभूत -

• आधाशीशी के तीव्र शूल में ' वेलाफोलीन 1 / 2 मि . ली . + गाइनर्जिन को मिलाकर सूचीवेध के रूप में दे सकते हैं । 

• फेनरगान ( रोन - पुलेन्क ) 1 टि . , इण्डेराल ( ए . सी . सी . आई . ) 10 मि . ग्रा . की 1 टि . , केफरगोट ( सैण्डोज ) 1 टिकिया । 1 मात्रा है । ऐसी एक मात्रा बहुत प्रातः और एक मात्रा रात के समय जल से दें । 


आधाशीशी का दर्द और उससे उत्पन्न कै , मितली एवं बेचैनी का निवारण होता है ।

•• अर्धावभेदक में सेवन कराने योग्य अपडेट ऐलो . पेटेण्ट टेबलेट / कैप्सूल  ••

1 . बीटास्पान ( Betaspan ) ' S . K . E ' 40 , 80 मि . ग्रा . कै .  -  80 मि . ग्रा . नित्य । आ . नु . बढ़ाते हुए 240 मि . ग्रा . नित्य । आधाशीशी के बचाव हेतु । - 2 टिकिया दिन में 3 बार । कोरोनरी हार्ट डिजीज में प्रयोग न करें ।

2 . ‘ धी ( Dhe ) टेबलेट नि . ' इनगा  -  1 - 2 टिकिया दिन में 3 बार । कोरोनरी हार्ट डिजीज में प्रयोग न करें । । 

3 . डिहाइडरगोट ( Dehydergot ) ‘ सैण्डोज   -  3 - 10 टिकिया नित्य जल से । 10 टिकिया । 

सावधान - कोरोनरी हार्ट डिजीज , उच्च रक्त चाप , गर्भावस्था तथा दूध पिलाने की अवस्था ( Lactation ) में इसका प्रयोग न करें । 

4 . इरगोफेन ( Ergophen ) इनगा  -  3 - 4 टि . नित्य । बचाव हेतु 1 टिकिया दिन में 3 बार 6 - 8 सप्ताह तक । 

सावधान - ग्लूकोमा हृदय , वृक्क एवं यकृत विकारों में प्रयोग न करें । 

5 . इण्डेराल ( Inderal ) आई . सी . आई . 40 80 मि . ग्रा . टे . -  1 टि , दिन में 3 बार । प्रति सप्ताह 60 - 160 मि . ग्रा . बढ़ाते हुए दें ।

सावधान - ' हार्ट ब्लॉक की स्थिति में प्रयोग न करें । ।

6 . मिग्रेनिल ( Migranil ) ' इनगा  -  2टि . जीभ के नीचे प्रति 1 / 2 घण्टे पर , जब तक पूर्ण आराम न मिल जावे । प्रति दिन 6 टिकिया से अधिक नहीं । बालक 3 से 9 साल वयस्क की 1 / 4 मात्रा । 10 - - 14 साल वालों को 1 / 2 मात्रा दें ।


सावधान - कोरोनरी , पेरीफेरल , वेस्कुलर डिजीज , एन्जाइना पेक्टोरिस , हाइपरटेन्सन , ग्लाइकोमा , गर्भावस्था , दूध पिलाने की अवस्था , सेप्सिस , मूत्र की रुकावट , यकृत एवं मूत्र सम्बन्धी Impairment में प्रयोग न करें ।


7 . नोमीग्रेन ( Nomigrain ) ' टोरेन्ट5 मि . ग्रा . कै .  -  20 मि . ग्रा . दिन में 1 बार प्रातः प्रथम 15 दिन । तत्पश्चात घटाकर 10 मि . ग्रा . नित्य यदि आवश्यक हो । बालक एवं 40 किलो वजन से नीचे का रोगी 5 मि . ग्रा . नित्य ।

सावधान - ‘ पारकिन्स रोगी में इसका व्यवहार न करें । ।

8 . फ्लूनाराइजीन ( Flunarizine ) ' FD . C '  -  1 टि . दिन में एक या दो बार । ।

सावधान - गर्भावस्था तथा दूध पिलाने की अवस्था में इसका प्रयोग न करें ।
9 . वेगानिन ( Veganin ) वार्नर हिन्दुस्तान  -  1 - 2 टि . भोजनोपरान्त दिन में 4 बार । ।

10 . सिस्ट्राल - सी ( Systral - C ) खण्डेल - वाल ।  -  1 - 2 टि . दिन में 3 - 4 बार 4 - 4 घंटे पर दें ।

11 . केफरगट ( Cafergot ) ' सैण्डोज  -  दर्द होते ही न . 1 की 2 टि , जल से दें ।

12 . केफरगट क्यू ( Cafergot Q ) ‘ सैण्डोज  -  नं . 2 की 2 टि . चबायें । 1 / 2 घण्टे में लाभ न हो तो 1 - 1 टि . आधे - आधे घंटे में दें । 6 टिकिया से अधिक न दें ।

13 . डाईहायरगोट ( Dihydergot ) ‘ सैण्डोज  -  दर्द का दौरा रोकने के लिये 1 - 3 टिकिया नित्य दें ।

14 . डोलोरिण्डोन ( Dolorindon ) ' इण्डोन  -  1 - 1 टि . दिन में 3 - 4 बार प्रति 4 घंटे पर । 

15 . बेल्लरगल ( Bellergal ) ' सैण्डोज  -  2 - 2 टि . दिन में 3 बार ।

16 . बेल्लरगल रिटर्ड ‘ सैण्डोज कं . '   -  1 - 1 टि , दिन में 3 बार तक 4 - 4 घंटे बाद । । 

17 . एवाफोर्टान ( Avafortan ) अस्ट्रावर्क  -  1 - 2 टि . दिन में 3 बार तक 4 - 6 घंटे पर । । 

18 . पैथोडीन हाइड्रोक्लोराइड  -  तेज दर्द में 100 मि . ग्रा . की 1 टिकिया 1 बार में दें । ।


 •• आधाशीशी में सेवन कराने योग्य अपटूडेट ऐलोपैथिक पेटेण्ट पेय ••

1 . ब्रामोलीन ( Bromolin ) ( ए . एफ . डॉ . ) -  2 - 4 चम्मच दिन में 2 या 3 बार दे । ।

2 . सिस्ट्राल इलिक्सिर ( खण्डेलवाल )  -  बच्चों को 1 / 4 से 2 चम्मच आयु के अनुसार 4 बार दें ।

3 . इलिक्जिर वैलेरियन ब्रोम ( एलेम्बिक )  -  2 - 2 चम्मच बराबर जल के साथ दिन में 2 - 3 बार भोजन के बाद दें ।

  
•• आधाशीशी में लगाने योग्य अपटूडेट ऐलोपैथिक पेटेण्ट इन्जेक्शन ••

1 . धी ( Dhe ) इनगा  -  1 एम्पुल Parenterally दिन में 2 बार ।

सावधान - कोरोनरी हार्ट डिजीज , उच्च रक्त दाब , गर्भावस्था , दूध पिलाने की अवस्था एवं कार्डियक फेल्योर की अवस्था में प्रयोग न करें ।

2 . डाइहाईडरगोट ( Dihydergot ) सैण्डोज  -  दौरे के समय 1 मि . ली . माँस में लगावें । दर्द दूर न होने पर डेड घण्टे बाद पुनः लगा सकते हैं ।

3 . इस्जीपायरीन ( Isgipvrin ) गायगी -  3 मि . ली . का इन्जे . कूल्हे के माँस में लगावें । कुल 10 इन्जेक्शन पर्याप्त ।

4 . ओप्टीन्यूरोन ( Optineuron ) “ लूपिन  -  3 मि . ली . माँस में लगावें । कुल 10 इन्जे . पर्याप्त होते हैं । एक दिन छोड़कर दें 

5 . सिस्ट्राल ( Systral ) खण्डेलवाल  -  1 - 1 एम्पुल दिन में 2 - 3 बार तक माँस में लगावें । ।

6 . स्टेमेटिल ( Stemetil ) ' रोन - पोलेन्क ( M . B . पुराना नाम )  -  1 मि . ली . का एम्पुलं की सुई गहरे माँस में लगावें ।

7 . ट्राईरेडिसोल - एच ( Triredisol - H ) ' M . S . D .  -  500 - 1000 मि . ग्रा . प्रति मिलीलीटर शक्ति का 1 / 2 से 1 मिलीलीटर नित्य गहरे माँस में लगावें । 

8 . रोनिकोल ( Ronicol ) ' रोशे ,  -  तेज दर्द में 1 एम्पुल का इन्जे . नस में ( I / V ) नित्य लगावें ।

9 . एवाफोर्टान ( Avafortan ) अस्ट्रावर्क  -   2 - 6 मि . ली . रोग के अनुसार माँस में लगावें । 

10 . इर्गोमेट्रिन ( Ergometrine ) ' एलेन   -  1 एम्पुल की सुई माँस में लगावें । ।

11 . लार्गेक्टिल ( Largectel ) ' रोन - पुलेन्क  -  1 मि . ली . ( 25 मि . ग्रा . ) की सुई माँस में लगावें । ।

12 . एट्रोपीन ( Atropine )  -  1 एम्पुल का इन्जे . चर्म में लगावें । ।

13 . पेथीडीन हाइड्रोक्लोराइड ( बी . आई . ) या ‘ बरोज वेल्कम  -  तेज दर्द में 1 एम्पुल की सुई माँस या नस में लगावें ।


घबड़ायें नहीं — इस इन्जे . के लगाने के बाद बहुत नींद आती है , थोड़ी सी मूच्र्छा एवं बेहोशी रहती है ।

•• आधाशीशी के तीव्र दर्द में तात्कालिक व्यवस्था पत्र ••

Rx

तत्काल पूर्ण विश्राम -

• दिन में 1 बार  इन्जे , इजीपायरीन ( Inj . Isgipyrin ) ' गायगी 3 मि . ली . कूल्हे के माँस में । D 

• प्रा . दो . शा . → इण्डेराल ( Indcral ) I . C . I . की 80 मि . ग्रा . टि . , 1 टि , जल से दिन में 3 बार । 2 

• दिन के 10 बजे एवं 2 बजे  फ्लूनाराइजीन ( Flunarizine ) एफ . डी . सी . , 1 टिकिया 2 बार । गर्भावस्था एवं दूध पिलाने की अवस्था में नहीं । 

• दिन में 1 बार  ट्रिप्टोमर ( Ptriplomer ) 1 टि . ( 10 मि . ग्रा . ) 

• नं . 4 के साथ  एनाफोन - 1 टि , दिन में 2 बार । ।

नोट - साथ में अमृतांजन ' अथवा अन्य कोई बाम माथे पर लगावें । । 


•• आधाशीशी के दर्द से बचने के लिये 

• बीटास्पान ( Betaspan ) S . K . F की 40 या 80 मि . ग्रा . का कैप्सूल नित्य दें । धीरे - धीरे मात्रा बढ़ाते हुए 240 मि . ग्रा . नित्य तक दे सकते हैं।

• • Acute Attacks - Acute attacks of migraine may be treated with Asprin or Paracetamol . Branded preparations may contain ' Metoclopramide to increase the absorption of the analgesic and to control the Nausea and Vomiting which often accompany the severe headache in migraine . 


नोट  -  
• कैल्शियम ग्लूकोनेट तथा विटामिन लेते रहें । 

• घृत , तेल आदि से बने आहारों व माँस , चाय , कॉफी का सेवन न करें । 

• नमक कम लिया जाय ।

•• आधाशीशी के तीव्र शूल में ' पेथीडीन अथवा इन्जे . पेण्टाजोसिन ( Inj . Pentazocin ) लाभकारी होता है । 

नोट - एमीट्रिप्टोलीन ' ( Amitriptyline ) 10 - 60 मि . ग्रा . एक केवल मात्रा रात के समय ( Single night dose ) देने से अच्छा लाभ ( कभी - कभी ) मिलता है । ।


•• आधाशीशी की व्यवस्था एक दृष्टि में •• 

• Avoidance of factors and foods which precipitate the attack . E 

• ASprin 600 - 900 mg every 4 hours Orally , Paracitamol , 0 . 5 - 1 g . every 4 - 6 hours orally , or dihydrocodeine , 30 mg every 4 - 6 hours Orally , for mild cases . n 

• Phenobarbitone , 15 - 30 mg 2 - 3 times daily orally , or diazepam 3 - 15 mg | daily orally , is also helpful . 

• Ergotamine tartrate , 1 - 2 mg orally or sublingually and repeated after 1 / 2 - 1 hours or 0 . 36 mg acrosol inhalation and repeated after 5 minutes .

• Propranolol 40 mg2 - 4 times dailyorally , Pizotifen 1 . 5mg daily as a single or 3 divided dosase orally , or Metnysergide 1 - 2mg 2 - 3 times daily oral ly , for prophylactic use .

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