श्वसनी शोथ / श्वासनली शोथ [ Bronchitis ] की समस्या क्या है ? इसके बचने के लिए क्या - क्या किया जा सकता है ? What is the problem of bronchitis / bronchitis? What to do to avoid this - what can be done?

श्वसनी शोथ / श्वासनली शोथ [ Bronchitis ] 

श्वसनी शोथ / श्वासनली शोथ [ Bronchitis ] की समस्या क्या है ? इसके बचने के लिए क्या - क्या किया जा सकता है ? What is the problem of bronchitis / bronchitis? What to do to avoid this - what can be done?


अन्य नाम - वायु प्रणाली शोथ , हवा की नलियों की सूजन , अंग्रेजी में ब्रोन्काइटिस । 

रोग का परिचय - श्वासनली के शोथ को बोन्काइटिस कहते हैं । यह रोग अधिकतर बच्चों ” और “ बूढ़ों को अधिक होता है । यह दो प्रकार की होती है,

• तीव्र श्वसनी शोथ ( एक्यूट ब्रोन्काइटिस ) 

• जीर्ण श्वसनी शोथ ( क्रॉनिक ब्रोन्काइटिस )

तीव्र श्वसनी शोथ ( Acute Bronchitis ) -

कम उम्र के बालकों एवं वृद्धों में सामान्य एक अल्पजीवी संक्रमण , सामान्य सर्दी , फ्लू , खसरा एवं अन्य ऊपरी अवस्था में संक्रमण अवरोहित होता है । । 

इसमें वायरस के द्वारा तीव्र श्वसनिका शोथ उत्पन्न हो जाता है । संक्रमण के परिणामस्वरूप बार - बार गले को छीलती सूखी खाँसी उठती रहती है । कभी - कभी हल्का ज्वर भी हो जाता है , गले में मैं - मैं ( wheezing ) एवं सूखे शब्द ( Rhonchi ) होते रहते हैं ।

रोग के प्रमुख कारण -

• वाइरस अथवा जीवाणु द्वारा उत्पन्न वाह्य संक्रमण → 

• नासा विवरों ( Nasal Sinuses ) आदि में पहले से विद्यमान संक्रमण ( Infection ) का नीचे उतर कर श्वसनिकाओं में शोथ उत्पन्न करना ।

• खसरा , फ्लू , सर्दी - जुकाम ( Common Cold ) आदि के समय , इन रोगों के उत्पादक वायरस ट्रेकिया और ‘ श्वसनिकाओं में पहुँच कर तीव्र श्वसनी शोथ उत्पन्न करते हैं । 

यह प्रायः वायरल इन्फेक्शन से ही होती है , पर कभी - कभी सर्दी लगने , बहुत देर तक गीले कपड़े पहिनने , वर्षा में भीगने , अधिक समय तक ओस में रहने आदि से भी सम्भवतः हो सकती है ।

रोग के प्रमुख लक्षणप्रमुख लक्षण - खाँसी तथा झागदार अथवा पूययुक्त कफ , ज्वर की उपस्थिति । 

लक्षण – नाक , मूर्दा , अथवा गले के लक्षणों से प्रारम्भ होता है . 

• साधारणतः जुकाम होता है और गले में पीड़ा होती है ।

• एक - दो दिन में संक्रमण वायुनली अथवा श्वासनली तक । 

• छाती में जकड़न , गले में खरास एवं खाँसी । 

• ज्वर अथवा हल्के प्रकार में ज्वर अधिक नहीं । 

• गला बैठने की आशंका । 

• प्रारम्भ में थोड़ा एवं चिपचिपा कफ , बाद में अधिक मात्रा में और आसानी से निकलता है । । 

• सूखी तीव्र खाँसी । । 

• उरोस्थि के पीछे श्वास प्रणाली शोथ ( Tracheitis ) के कारण दुखन । 

• रोगी के वक्ष में एक प्रकार के खिंचाव की प्रतीति । । → 

• श्वास कष्ट एवं श्वसन क्रिया के साथ खर - खर की ध्वनि । ।

• • कुछ समय व्यतीत होने पर कफ श्लेष्म पुयी ( Mucopurulent ) रूप ग्रहण कर लेता है । कभी - कभी कफ में बहुत थोड़ी मात्रा में रक्त भी मिलता है ।

रोग की पहिचान -

नाड़ी - नाड़ी की गति ताप के अनुपात में । 

तापक्रम - सामान्य रोग में ज्वर नहीं अथवा कम । परन्तु तीव्र आक्रमण में 104 से 105 डि . फा . ( 40 से 40 . 50 से . ) तक । । 

स्टेथस परीक्षा - पहले सूखे कफ का सांय - सांय शब्द सुनाई देता है । कफ के ढीले होने पर तर गड़गड़ाहट सुनाई देती है । 

अन्वेषण – रक्त में श्वेत कोशिकाओं ( Leucocytosis ) और बहुरूपी - केन्द्रकों ( Polymorphs ) की वृद्धि निदान के लिये पर्याप्त है । । 

रोग का परिणाम - 

• यह स्वस्थ पुरुषों में कम घातक है किन्तु शिशुओं तथा छोटे बच्चों में श्वासावरोध करके मौत की धमकी देने लगती है । । 

• अधिकांश रोगियों में 5 - 6 दिन के बाद सुधार होने लगता है । 

• यदि उचित चकित्सा की व्यवस्था न की गई तो ब्रान्को - न्यूमोनिया की सम्भावना । ।

• रोग का पूर्वानुमान बच्चों एवं वृद्धों में खराब । । 

• युवा पुरुषों में इम्फाइसीमा के कारण अधिक कष्टप्रद होकर मौत को आमंत्रण ।


आजकल एण्टीबायोटिक्स ' औषधियों के आविष्कार के बाद इस रोग से मृत्यु दर बहुत कम हो गई । केवल उन्हीं रोगियों में यह घातक सिद्ध होती है चिकित्सा ठीक प्रकार से नहीं होती है ।

चिकित्सा विधि -

• ज्वर ' की उपस्थिति में रोगी को पूर्ण विश्राम आवश्यक । । 

• रोगी को शीत से बचायें । → 

• धूम्रपान निषिद्ध । 

• डिहाइड्रेशन को रोकने के लिये अधिक मात्रा में तरल पदार्थ देने चाहिये । 

• बाम सूंघना प्रायः लाभदायक । ।

पथ्य , सहायक एवं आनुषंगिक चिकित्सा -

आहार – दूध , चाय , उबले अंडे , डबल रोटी आदि हल्का आहार एक - दो दिन देना ठीक रहता है । भूख लगने पर चपाती , मूंग की दाल , हरी सब्जियाँ आदि दिये जा सकते हैं । दूध गरम ही दिया जाय । । 

पानी - सदैव गुनगुना अथवा गर्म पानी में नीबू निचोड़ कर पिलावें । 

• • सोते समय सिर के नीचे तकिया अवश्य लगायें । । 

• यदि श्वास कृच्छ हो तो कई ‘ एण्टी हिस्टामीन औषधियाँ ‘ ब्रोन्कियल इन्फ्ले मशन में सहायक होते हैं ।

टि . बेन्जोइन की वाष्प दिन में 2 - 3 बार सूंघना । छाती एवं गले में कष्ट होने पर कपूर युक्त लिनिमेण्ट लगाना उपयुक्त । । 

चिकित्सा निर्देश - प्रारम्भ में ' कोडीन युक्त लिंक्टस ( फेन्सिडिल - Phensc ( ly ) आदि दें तथा बाद में कफ - निस्सारक औषधि दें । निद्रा के लिये गार्डेनिल , ब्रोमाइड मिश्रण आदि दें । ज्वर ' अधिक होने पर एण्टीबायोटिक औषधियाँ । ।

सुव्यवस्थित चिकित्सा ( Medical Treatment ) एक दृष्टि में -

• सूखी खाँसी की स्थिति में → लिक्टस कोडीन 1 चम्मच X दिन में 3 बार।
बलगमी खाँसी ( Productive Cough ) में → वेनाड्रिल एक्सपेक्टोरेन्ट ' या जीट एक्स पेक्टोरेन्ट 1 चम्मच दिन में 3 बार । 

• गम्भीर तथा कम्पलीकेटिड केस में → ' एम्पीसिलीन या ' अनोक्सीसिलीन ' 250 500 मि . ग्रा . दिन में 4 बार । । 

• ज्वर और दर्द ( Pain ) के लिए । → ‘ एण्टीपायरेटिक्स ( क्रोसिन ) अथवा एनाल्जेसिक्स ( डिस्प्रिन ) । ।


सुविस्तृत ऐलो . पेटेन्टट मेडिसिनल चिकित्सा -

• प्रतिजीवी औषधियाँ ( एण्टीबायोटिक्स ) - संक्रमण को रोकने के लिये कोई एक औषधि -

कैप्सूल ऐम्पीसिलिन 250 मि . प्रा . मात्रा - 1 कैप्सूल प्रति 6 घण्टे पर । ।


अथवा -

ओरीप्रिम डी . एस . ( Oriprim D . S . ) मात्रा - 1 टिकिया प्रातः सायं 12 घण्टे के अंतर पर । । 


                                                अथवा -

कैप्सूल टेट्रासाइक्लीन 250 मि . ग्रा . मात्रा - 1 कैप्सूल , प्रति 6 घण्टे पर । 

• • ज्वर होने पर -

टे . पैरासिटामोल व्या . नाम - कॉलपौल , मेंटासिन , टे . क्रोसिन आदि । मात्रा - 1 टिकिया , दिन में 2 बार । । 
• बालकों के लिये पैरासीटामोल का सिरप । 
• फेब्रक्स प्लस ' नि . ' इंडोको ' एक उत्कृष्ट औषधि ।

• • खाँसी - सूखी खाँसी ( Unproductive Cough ) की स्थिति में -फेन्सिडिल कफ लिंक्टस ( Phensedyl Cough Linctus ) मात्रा - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 बार । । 


अथवा 

‘ प्रोटूसा ' कफ सिरप ( Protussa Cough Syrup ) 
मात्रा - शिशुओं में - 1 / 2 चाय चम्मच X प्रति 6 घंटे पर । । 
• 2 से 5 वर्ष के बालक - 1 चाय चम्मच X प्रति 6 घंटे पर । । 
• 5 से 12 वर्ष के बालक - 2 चाय चम्मच X प्रति 6 घंटे पर । 
• 12 से ऊपर और वयस्क - 3 चाय चम्मच X प्रति 6 घंटे पर । ।

बलगमी खाँसी होने पर -

बेनाड्रिल एक्सपेक्टोरेण्ट ( Benadryl Expectoran ) 
मात्रा - 1 चाय चम्मच ( 5 मि . ली . ) दिन में 3 बार । 


अथवा 

एविल एक्सपेक्टोरेण्ट ( Avil Expectorant ) 
मात्रा - 1 चाय चम्मच , दिन में 3 बार । ।

• • सूखी और बलगमी दोनों प्रकार की मिली - जुली खाँसी में • •

चेस्टोन कफ सीरप 2 चाय चम्मच ( 10 मि . ली . ) 
डैटीगौन कफ सीरप 2 चाय चम्मच ( 10 मि . ली . ) एक मात्रा , दिन में 3 या 4 बार । । 
• सांय - सांय ( Wheeze ) की उपस्थिति में -
टे , सालबूटामोल । टे . अस्थालिन 
मात्रा - 1 टिकिया , दिन में 3 बार । । अथवा अस्थालिन सीरप ( बालकों में )
मात्रा - 1 - 2 चाय चम्मच , दिन में 3 बार । अथवा कौलीफाइलिन सिरप फोर्ट ( Choliphylline Syrup Fortc ) 
मात्रा - 1 - 2 चाय चम्मच , दिन में 3 बार । ( विशेषकर बच्चों में उपयुक्त )

••• टिंचर बेंजोइन को , की वाष्प ( Inhalation ) लेने की विधि

4 मि . ली . टि . बेंजोइनको . 1 / 2 लिटर उबलते पानी में डाल कर तथा सिर को किसी तौलिये से ढक कर जल से उठती भाप को श्वास द्वारा अंदर खींचना चाहिये । । 

- बोन्काइटिस की लक्षणों के अनुसार चिकित्सा -

एलर्जिक ब्रोन्काइटिस -  ' साल्माप्लोन ( Salmaplon ) नि . ' खंडेल वाल 1 - 2 टिकिया आवश्यकतानुसार । । 

अति गाढ़े कफ की स्थिति में  -  ‘ सीरप कैल्सीड्रीन ' नि . ' एब्बोट । बालक - 1 / 4 - 1 / 2 चम्मच दिन में प्रति 4 घण्टे पर । । 

नई ब्रोन्काइटिस - खाँसी में - ‘ एम्पीसिलीन ' या ' टेट्रासाइक्लोन 500 मि . ग्रा , 1 - 1 कैप्सूल दिन में 3 बार 5 दिन तक । 
साथ में - 
मारे क्स ( Marax ) नि , ' फाइजर । कै . दिन में 2 से 4 बार । अथवा ' एविल 5 ( ) की 1 - 1 टि . । ।

••• ब्रोन्काइटिस की मिश्रित औषधि चिकित्सा ( Combination Therapy ) •••

निम्न के कॉम्बीनेशन थेरॉपी ” तमाम चिकित्सकों के अनुभव पर कसौटी में खरी उतरने के पश्चात चिकित्सा क्षेत्र में धूम मचा रही है । 

1 . नई ब्रोन्काइटिस ( Acute Bronchites ) में - ' पिरीटोन ' 1 टिकिया , ' सीलिन 500 मि . ग्रा . की 1 टि , । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार । साथ ही ' एम्पीसिलीन ' या ' एमोक्सीसिलीन का 1 - 1 कै . दिन में 2 या 3 बार दें । अथवा - ' फेन्सिडिल ' लिंक्टस ( M . B ) 3 चम्मच , रैलीसिडीन ( रैलीज कं . ) 2 टिकिया गोली पीस कर लिक्टस में मिला लें । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार । बच्चों को 1 / 4 - 1 / 3 मात्रा ।
साथ ही - एक्रोमाइसीन या टैरामाइसीन कैप्सूल । 

2 . पीला - गाढ़ा कफ की स्थिति में ( In stage of Mucopurulent ) - ‘ सेप्ट्रान ' या ' बैक्ट्रिम ( Septran or  Bactrim ) की 1 टिकियो दिन में 4 बार दें । साथ ही – रोंसलिन ( रैनवैक्सी ) 1 कै . दिन में 4 बार 7 दिन तक । 
3 . ब्रोन्काइटिस का पेटेन्ट इलाज - रोगी को प्रथम ' एक्रोमाइसीन कै . दें । तत्पश्चात ‘ सीलिन 500 मि . ग्रा . की 1 टि . , क्रोसिन 1 / 2 टिकिया , ' पिरीटोन 1 टि . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार3 दिन तक देने से अवश्य लाभ ।

Rx 

दिन में एक या दो बार - बिस्ट्रेपेन ( Bistrepen ) ' एलेम्बिक 1 / 2 - 1 ग्राम का इन्जे . मॉस में नित्य । । 
• प्रा . दो . सा . - रॉसलिन ( रैनवैक्सी ) 500 - 1 कै . दिन में 3 बार - साथ में - ओरीप्रिम डी . एस . 1 / 2 टि . दिन में 3 बार । । 

• प्रति 4 घण्टे पर - फ्रेन्सेडिल कफ लिंक्टस - 2 चम्मच । । → 

• नं . 2 के साथ - ‘ वाइसोलोन ( Wysolone ) वीथ 1 टिकिया दिन में 3 बार । । 
• छाती पर लिनीमेण्ट कैम्फर की मालिश ।

नोट - सूखी और गीली मिश्रित खाँसी की स्थिति में - चेस्टोन 1 चम्मच + डैटीगोन 1 चम्मच मिलाकर दिन में 3 बार दें । 

- हरीसन्स प्रिंसिपल आफ इण्टरनल मेडिसिन के अनुसार -

Rx

• टेट्रासाइक्लीन अथवा एम्पीसिलीन - 7 - 10 दिन तक । साथ ही → 

• ब्रान्कोडायलेटर्स - थियोफाइलीन ( Thephyllin Methylxanthine x ओरली । । अथवा - गुदामार्ग से या सूचीवेध के रूप में । । 

• हाइपर सेक्रीसन ' ( अतिस्राव ) के रोगी में ब्रान्को - पल्मोनरी ड्रेनिज की जा सकती है । Pastural Drainage भी लाभकारी है । 

• ‘ हाइपोक्सीमिया की गम्भीर अवस्था में ‘ आक्सीजन थेरापी ' पर विचार करना चाहिये । ।

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•• तीव्र ब्रोन्काइटिस में प्रयुक्त ऐलो . पेटेन्ट टेबलेट / कैप्सूल्स ••

• ब्रोन्कोप्लस ( Bronkoplus ) ( विडल शावयर ) - 1 - 2 टिकिया दिन में 3 - 4 बार । सीरप भी आता है । 

• इटो - सालवीटोल ( Eto . Salbetol ) ( FDC ) - 1 - 2 टिकिया दिन में 3 - 4 बार । । 
सावधान - पेप्टिक अल्सर , एन्जाइना पेक्टोरिस के रोगी में वर्जित । ।

• सालकोम्ब - हेट ( Salcomb - Het ) ( आनंद ) - 1 - 2 टिकिया दिन में 3 - 4 बार ।

• सालमाप्लोन ( Salmaplon ) ( खण्डेलवाल ) - 1 - 2 टि . दिन में 3 - 4 बार । बालक आयु के अनुसार । 
सावधान - गर्भावस्था के प्रथम तीन माह में प्रयोग वर्जित ।

• थियो - एस्थालिन ( Theo - Asthalin ) ( सिप्ला ) -  1 टिकिया दिन में 3 बार । । 

• वेण्ट ( Vent ) ( कोप्रान ) - 1 - 2 टिकिया दिन में 3 बार । इसकी फोर्ट टिकिया भी आती है । वेण्ट लिक्विड भी उपलब्ध । । 

• ब्रोमहेक्सीन ( Bromhexine ) ( विडल शावय ) - 1 - 2 टिकिया दिन में 3 या 4 बार । इसका सीरप भी आता है ।
सावधान - गर्भावस्था की तिमाही में प्रयोग न करें ।

• मूकोडाइन ( Mucodyne ) ( Elder ) - 2 कै . दिन में 3 बार । बाद को घटा कर 1 कै . दिन में 3 बार पूर्ण लाभ मिलने तक । 
नोट - यह एक उत्कृष्ट औषधि है । इसका सीरप भी आता है । 

• ब्रोपोलिन 250 / 500 ( प्रोटेक ) - 1 कै . प्रति 8 घण्टे पर सीरप भी आता है ।

• सायनोमाइसीन 100 ( Cynomycin - 100 ) ( लीडले ) - 1 - 2 कै . दिन में 2 या 3 बार 4 दिन तक ।

• टसक्यू ( Tusq ) ( ब्लू क्रास ) - 1 टिकिया दिन में 4 बार 10 टि . ग्यारह रुपये की आती हैं । इसका सीरप भी आता है ।


इसमें संक्रमण निरोधी औषधियाँ यथा एलबर्सिलिन ( होचेस्ट ) , एम्पीसिलीन के अन्य टेबलेट एवं कैप्सूल , टेट्रासाइक्लीन ' टेबलेट एवं कैप्सूल , एमोक्सीसिलिन कैप्सूल्स , सेफेलेक्सिन कैप्सूल्स ( Cephalexin Cap . ) एरीप्रोपाइसीन टेबलेट आदि का उपयोग किया जाता है । 
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•• सेवन करने योग्य अपडेट ऐलो . पेटेन्ट सीरप / पेय / लिक्विड ••

• एलेक्स कफ फार्मूला ( Alex Cough Formula ) ( लाइका ) - 1 चम्मच दिन में 3 या 4 बार । बालक 1 - 5 साल 1 / 4 चम्मच , 6 - 12 साल 1 / 2 चम्मच । 12 साल से ऊपर 1 चम्मच । ।

• ब्रोन्कीन जी एक्सपेक्टोरेण्ट ( BronkeneGExpectorant ) ( एस जी फार्मा ) -  2 - 3 चम्मच दिन में 3 बार । बालक 1 / 2 - 2 चम्मच दिन में 3 बार । ।

• ब्रोक्सीनोल ( Broxynol ) ( इथनॉर ) - 2 चम्मच , बालक 1 / 2 से 1 चम्मच दिन में 3 या 4 बार ।

• कोरेक्स ( Corex ) ( फाइजर ) - 1 चम्मच दिन में 4 बार । बालक आयु के अनुसार । ।

• डेलीटस - ए ( Delitus - A ) ( निकोलस ) - 2 चम्मच दिन में 3 बार । बालक 1 चम्मच दिन में 3 बार । गर्भावस्था के प्रथम तिमाही में नहीं ।

• इफीड्रक्स ( Ephedrex ) ( एलेम्बिक ) -   1 - 2 चम्मच शिशु एवं बालक - 1 / 4 से 1 चम्मच दिन में 3 बार ।

• इक्सोप्लोन ( Exiplon ) ( खण्डेलवाल )  - 1 चम्मच दिन में 4 बार । 

• मूकोडाइन सीरप ( Mucodyne Syrup ) ( इल्डर )  -  3 चम्मच दिन में 3 बार । बाद को मात्रा घटा कर 2 चम्मच दिन में 3 बार । बालक आयु के अनुसार ।

• टसक्यू - एक्स लिक्विड ( Tusq - X liquid ) ( ब्लू क्रास )  -  1 - 2 चम्मच दिन में 3 बार । बच्चों के लिये " टसक्यू - पी लिक्विड ’ आता है । 

• जेफ्रोल ( Zephrol ) ( रोन पोलेन्क ) - 1 चम्मच प्रति 4 घण्टे पर । । सावधान - उच्च रक्तचाप ( Hypertension ) के रोगी में प्रयोग न करें ।

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•• तीव्र ब्रोन्काइटिस में लगाने योग्य सुप्रसिद्ध ऐलो . पेटेन्ट इन्जेक्शन ••

• फोर्टम ( Fortum ) ( ग्लैक्सो - पल्सर ) - 1 ग्राम नस में ( गम्भीर अवस्था में 2 ग्राम ) 8 - 12 घण्टे पर । शिशुओं और बालकों के लिये 250 और 500 मि . ग्रा . की वायल में । 

• एम्पोलिन ( Ampilin ) ( लाइका ) - 500 मि . ग्रा . से 1 ग्राम । बालकों में 25 - 50 मि . ग्रा . / किलो भार पर विभाजित मात्रा में ।

• एम्पीलोक्स ( Ampilox ) ( वायोकेम ) - 500 मि . ग्रा . से 1 ग्राम का इन्जेक्शन । बालक 1 माह से 2 साल 125 मि . ग्रा . , 2 से 10 साल 250 मि . ग्रा . से 1 ग्राम माँसपेशीगत या नस में प्रति 6 घण्टे पर । । 

 नोट - इसमें एम्पीसिलीन 250 मि . ग्रा . + क्लोक्सीसिलिन 250 मि . ग्रा . रहता है । ।
•• बच्चों के लिये “ एम्पीलोक्स पेडियाट्रिक ’ अलग से आता है ।

• एरिस्टोसिलिन ( Aristocillin )  ( एरिस्टो )  -  500 - 1000 मि . ग्रा . का इन्जेक्श न रोग - की गम्भीरता के अनुसार । ।

• अगमेन्टिन रेमेडीज ) ( Augmentin ) ( जर्मन )  -  1 - 2 ग्राम ( 1 - 2 वायल ) माँसपेशीगत । नस में अथवा इन्फ्यु जन रूप में । 1 वायल साठ रुपये की आती है ।

• एजोलिन ( Azolin ) ( वायोकेम ) - 500 मि . ग्रा . से 1 ग्राम की सुई माँस में प्रति 6 - 12 घण्टे पर । बालक 20 - 50 मि . ग्रा . । किलो प्रति 6 - 8 घंटे पर । ।

• बेक्सिन ( Baxin ) ( लाइका ) - 1 - 2 वायल दिन में 3 बार । 

• बायोसिलिन ( Biocilin ) ( वायोकेम ) -  आवश्यकतानुसार एक वायल की सुई माँस में यह 100 , 250 , 500 मि . ग्रा . एवं 1 ग्राम के वायल में उपलब्ध । सीरप , ड्रॉप्स भी आते हैं । 

• बिस्ट्रेपेन ( Bestrepen ) ( एलेम्बिक )  - 1 - 2 डोज माँसपेशीगत । फोर्ट भी आता है । बालकों के लिये ‘ बिस्ट्रेपेन पेडियाट्रिक । ।

• सेफेक्सोन मांसपेशीगत ( Cefaxone I . ML ) ( लूपिन ) - 1 - 2 ग्राम I . M / I . V . दिन में 1 बार । । 

• जेण्टारिल ( Gentaril ) ( एल्केम ) - 1 वायल का इन्जे . माँस में । बालकों को आयु के अनुसार ।

• लिन्कोसिन ( Lincocin ) ( वैलेसी ) - 600 मि . ग्रा . माँस में प्रति 12 - 24 घण्टे पर अथवा I / Vइन्फ्यू जन 8 से 12 घण्टे पर बालक आयु एवं भार के अनुसार ।

• मेगापेन ( Megapen ) ( एरिस्टो ) - 1 वायल की सुई प्रति 4 - 6 घण्टे पर । ।
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•• प्रयोग आने वाली अन्य रिसेन्ट मेडिसिन ••
•• एण्टीबायोटिक + अन्य सम्मिलित योग ••

1 . पाराक्सिन कै . ( Paraxin Cap ) ( वोहरिंगर ) - 250 - 500 मि . ग्रा . कै . प्रति 3 धण्टे पर । डेंगी और सीरप भी आता है । । 

2 . रेसपीमोक्स ( Respimox ) ( ट्राई - डोस ) - 1 कै . दिन में 3 बार । बढ़ाकर 2कै . दिन में 3 बार 16 कै . 12 रुपया 50 पैसे के आते हैं । नोट - यह एमोक्सीसिलिन और ब्रोमहे क्सिन का योग है । जीर्ण ब्रोन्काइटिस में भी उपयोगी । 

3 . लामोक्सी बी एक्स ( Lamoxy BX ) ( लाइका ) - 1 कै . दिन में 3 बार । गम्भीर अवस्था में 2 कै . दिन में 3 बार ।

4 . केडीफाइलेट ( Cadiphylate ) ( केडिला )  -  1 - 2 कै . दिन में 2 - 3 बार । इलेक्सिर भी आता है । । 

5 . इटोफाइलेट ( Etophylate ) ( मार्टिन हेरिस ) -  2 - 4 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । बालक 1 - 2 चम्मच ।

6 . ग्राइलिंक्टस - बी एम ( Grilinctus - BM ) ( फ्रेंकों - इंडियन ) -  1 - 2चम्मच दिन में 3 बार । इसकी टिकिया भी आती है ।



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