हृदय शूल / एन्जाइना - पेक्टोरिस [ Angina - Pectoris ] रोग का परिचय , कारण , लक्षण , पहचान , परिणाम एव चिकित्सा ? Heart Shool / Angina - Pectoris [Angina - Pectoris] Introduction to Disease, Causes, Symptoms, Identification, Results and Treatment?

हृदय शूल / एन्जाइना - पेक्टोरिस [ Angina - Pectoris ] 

हृदय शूल / एन्जाइना - पेक्टोरिस [ Angina - Pectoris ]  रोग का परिचय , कारण , लक्षण , पहचान , परिणाम एव चिकित्सा ? Heart Shool / Angina - Pectoris [Angina - Pectoris] Introduction to Disease, Causes, Symptoms, Identification, Results and Treatment?


अन्य नाम - हत्शूल , हच्छूल , हृदय का दर्द । 

परिचय - हृदय स्थल पर तीव्र पीड़ा उठती है , बहुत बेचैनी होती है । यह अरक्तता जन्य ( Ischemic ) हृदय रोग है । इसमें कोरोनरी धमनी के सिकुड़ने से हृदय को पर्याप्त रक्त पूर्ति न होने के कारण स्टर्नम हड्डी के नीचे अचानक तेज दर्द उठता है तथा सीना जकड़ने लगता है , भ्रम करने पर दर्द बढ़ जाता है और यह अक्सर बाँयें कन्धे की ओर फैल कर नीचे बाँह में जाता है अथवा ऊपर जबड़े में फैल जाता है । ।


रोग के प्रमुख कारण 

• मध्य उम्र के बाद स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में बीमारी 10 गुणा अधिक । । 
• मस्तिष्क का कार्य करने वालों को अधिक ।

• तीव्र रोग जैसे - इन्फ्लू एन्जा , मलेरिया अथवा आमवातिक ज्वर के उपरान्त उत्पन्न होता है । → 

• उपदंश से सीधा सम्बन्ध । → 

• सर्दी लगना , मानसिक थकान एवं उत्तेजना , अधिक भोजन , अधिक तम्बाकू का सेवन रोग की उत्पत्ति में सहायक । । । 

• शराब पीना , बहुत दिनों तक मानसिक उद्वेग , हृदय रोग , रक्तवाहिनियों के रोग , वृक्क रोग और स्थूलता आदि उत्पादक कारण । । 
• अत्यधिक शारीरिक परिश्रम एवं चिन्ता । । 

• कुछ लोग इसे वंश परम्परागत रोग भी मानते हैं ।


रोग के प्रमुख लक्षण

• इसमें हृदय स्थान में विशेष प्रकार का दर्द होता है जो एकाएक या तो आराम / विश्राम के समय उठता है अथवा रात को सोने के समय उठता है । ।

• पहले एकाएक उठकर क्रमशः धीरे - धीरे कम होता है । । 

• दर्द का अनुभव प्रायः छाती के अगले भाग में । कभी - कभी पिछले और बाएँ भाग में भी । 

• दर्द इतना तीव्र मानो छाती में कोई चीड़ फाड़ कर रहा है । 

• कभी - कभी छाती में जलन । 

• साँस लेने में कष्ट । 

• आँख और नाक से कभी - कभी पानी । । । 

• कभी - कभी मितली अथवा वमन । । → 

• दिल की धड़कन एवं नाड़ी की गति तीव्र । → 

• कभी - कभी हिचकी ।

याद रखिये - 
• दर्द इतना उग्र होता है कि रोगी सिहर उठता है और सोचता है । कि उसकी छाती कई टुकड़ों में विभक्त न हो जाये । 

• रोगी का चेहरा व्याकुल एवं उतावला हो जाता है । त्वचा का रंग पीला पड़ जाता है और पसीना भी अधिक आता है । । 

• हृदय की गति बन्द होकर रोगी की मौत दर्द के दौरे के समय भी हो सकती है और बाद में भी हो सकती है । ।

रोग की पहिचान -

• नाड़ी की तीव्रता एवं रक्त चाप में वृद्धि , दर्द के साथ अफारा आदि लक्षणों से इसे पहिचाना जा सकता है । 

• दर्द के दौरे के बाद प्रायः अधिक मात्रा में पीला पसीना आता है । ।  

• संदेह होने पर विद्युत हल्लेख ( Cardiogramme ) कराना चाहिये । ।

रोग के परिणाम -

रोग का परिणाम क्या होगा बताना नितान्त कठिन है । । 

• प्रायः सहसा मृत्यु और हृद् रोधगलन ( Cradiac infarction ) में से एक का होना प्रायः देखा जाता है । → 

• पहले ही रोग के आक्रमण में मृत्यु हो सकती है । प्रायः 50 % रोगियों की मृत्यु सदा अकस्मात हृदय कार्यावरोध से होती है ,

•• रोगी को मौत सामने खड़ी दिखायी देती है । । → 

•• वक्ष में अत्यन्त पीड़ा अनुभव एवं पीड़ा बायीं भुजा , स्कन्धे की ओर जाती है ? 

•• कई एक को 10 वर्ष तक इसके पुनः पुनः आक्रमण आते रहते हैं । 

•• 40 वर्ष से 50 वर्ष के ऊपर की आयु में हृदय रोग में मरने वाले पुरुष प्रायः इसी रोग में मरते हैं ।


हशूल की चिकित्सा विधि -

• मूल कारण की चिकित्सा आवश्यक । 

• हर सम्भव उपाय द्वारा हृदय के कार्य को करना आवश्यक है । रोगी को चाहिये कि वह वेदना होने के तत्काल ही जहाँ का तहाँ वैसा ही खड़ा रहे अथवा बैठ जाये । प्रायः ऐसा करते ही वेदना शान्त हो जाती । 

• रोगी को 3 चम्मच ब्रांडी तत्काल पिला दें ।

पथ्यापथ्य एवं सहायक चिकित्सा -

• भोजन लघु , अल्प और सुपाच्य होना चाहिये । 

• धूम्र और मदिरा का पान बिल्कुल बंद कर दें और शरीर को भी स्थूल न होने दें । रोगी को गरम रखना चाहिये , क्योंकि ठंड लगने मात्र से यह दर्द हो जाया करता है । 

• दौरे के समय रोगी की गर्दन और छाती की सख्त चीजें हटा दें और कपड़े के बटन हटा दें । रोगी को शुद्ध वायु मिलती रहे । ।


हृदुशूल की औषधि चिकित्सा -

I . तीव्र दौरे की चिकित्सा ( Treatment of actue attack ) 
( 1 ) नाइट्रेट्स ( Nitrates ) - ' ग्लिसरीन ट्राइनाइट्रेट ( Glycerine trinitrate ) 0 . 5 मि . ग्रा . अथवा ' इसोसोरबाइड डाईनाइट्रेट ( Isosorbide dinitrate ) 5 मि . ग्रा . जीभ के नीचे ( Sublingually ) रख कर चूसने से 2 - 5 मिनट में दौरा शान्त हो जाता है । नाइट्रोग्लिसरीन ( एन्जीसिड - Angised ) इसकी रामबाण औषधि है । रोगी को चाहिये कि इस औषधि की गोलियों को सदा अपने पास रक्खें । वेदना के आरम्भ होते ही जीभ के नीचे गोली उसे चूसें अथवा चबाकर मुख में भली प्रकार घुलने दें । 5 - 10 मिनट में वेदना शान्त न हो तो इसकी दूसरी गोली लेनी चाहिए ।

यदि 3 - 4 गोलियाँ लेने पर पीड़ा शान्त न हो तो हृदय अपर्याप्तता ( Coronary insufficiency ) या तीव्र हदपेशीरोध गलन की आशंका करनी चाहिये । । 

( 2 ) निफेडीपीन ( Nifedipine ) - 5 - 10 मि . ग्रा . में आती है । ' निफेलेट ( Nifela ) ( सिपला ) इसकी एक उत्तम पेटेन्ट औषधि है । दौरे के समय जीभ के नीचे रखकर इसका प्रयोग करने से तत्काल प्रभाव होता है । । 

II . एन्जाइनल अटैक से बचाव ( Prevention of anginal attack ) -
( 1 ) मोडीफिकेशन आफ लाइफ स्टाइल - Precipitating Factors से दूर रहें । गुस्सा और सोच - विचार का पूर्णतः त्याग । । 

( 2 ) विश्राम एवं व्यायाम ( Rest and Exercise ) - शैया पर विश्राम सदैव आवश्यक । नहीं । ऐसे व्यायाम न करें जो दर्द को उत्पन्न करें । ।

( 3 ) ट्रांक्विलाइजर ( Tranquillisers ) - अनिद्रा की स्थिति में डायजीपाम 5 - 10 मि . ग्रा . विभाजित मात्रा में । । 

( 4 ) कोरोनरी वैसोडाइलेटर्स ( Coronary Vasodilators ) - ( अ ) नाइट्रेट - इसोसोरबाइड डाइनाइट्रेट 5 मि . ग्रा . 6 - 8 घण्टे पर जीभ के नीचे उत्तम प्रभावी ( For Best effect ) । 

विशेष लाभ के लिये - 2 % नाइट्रेटग्लिसरीन आइन्टेमण्ट बाँह अथवा छाती पर ।

( ब ) कैल्शियम एण्टागोनिस्ट ड्रग्स - निफेडीपीन 10 मि . ग्रा . अथवा वेरापामिल ( Verapamil ) जो केलाप्टिन ( Calaptin ) ‘ बोहरिंगर मेनहेम 40 मि . ग्रा . और 80 मि . ग्रा . डुगीज के रूप में आती है उत्तम पेटेन्ट औषधि है । इसे 80 मि . ग्रा . की मात्रा में दिन में 4 बार देने से एन्जाइना का निराकरण होता है । 

( 5 ) बीटाब्लोकर्स ( Beta Blockers ) - यह हृदय की आक्सीजन की आवश्यकता को दूर करती है और हृदय की गति को कम करती है । इसके लिये प्रोप्रानोलोल ( Propranolol ) अथवा आक्सप्रीनोलोल ( Oxprenolol ) 40 मि . ग्रा . प्रति 6 से 8 घंटे पर । ' इन्डेराल ( I . C . I ) , कार्डियोलोंग ( Cardiolong ) ' सोल कैप्सूल इसके पेटेण्ट योग है । ।

सावधान - कार्डियक फेल्योर एवं ' अस्थमा ' ( ब्रोन्कियल ) की स्थति में इनका प्रयोग न करें । ऐसी स्थति में ‘ एटीनोलोल ' ( Atenolol ) अथवा ' मेटोप्रोलोल ' कम मात्रा में ( 50 मि . ग्रा . / नित्य ) प्रयोग प्रशस्त है । ।  

( 6 ) रिस्क फेक्टर पर कंट्रोल ( Control ofRisk Factors ) - यदि कोई हों तो उसे दूर करें । ‘ उच्च रक्त चाप ( H . B . P ) , ' डायबिटीज एवं ‘ हाइपर लिपीडेमिया की आवश्यकतानुसार चिकित्सा करें । 

( 7 ) शल्य चिकित्सा ( Surgery ) - 3 - 6 माह तक नियमित कठोरता के साथ चिकित्सा करें । फिर भी एन्जाइना का रोग चलता रहे तब ‘ एन्जियोप्लास्टी ' अथवा ' कोरोनरी बाईपास सर्जरी के बारे में विचार करें ।


•• हृद शूल की लक्षणों के अनुसार चिकित्सा ••

1 . हुशूल की अतितीव्रास्था में →  एट्रोपीन 1 / 100 ग्रेन और माफिया 4 1 / 4 ग्रेन । का इन्जेक्शन चर्म में लगायें ।

2 . हृद शूल के साथ पेट के फूले होने    ब्राण्डी 6 चम्मच पिलावें । अथवा कोई सी । एण्टासिड टेबलेट - 1 - 2 सेवन करावें ।

3 . दौरे के बाद स्थायी लाभ के लिये → पेरीट्रेट ( Peritrate ) वार्नर ' या ' रोनीकोल Ronicol ) की 1 - 2 टिकिया दिन में 3 बार सेवन करावें । 

4 . दौरे को दबाये रखने के लिये  ‘ रोनीकोल ' ( रोश कं ) 50 मि . ग्रा . की 1 - 2 टिकिया दिन में 3 बार दें । अथवा कोरामीन एड्रीनोसील ( सीबा ) की 1 - 1 टिकिया भोजनोपरान्त दें । 

5 . हमला होने से बचाव के लिये अथवा यात्रा करते समय → ' ट्रिनीटूिनी या ‘ एन्जीसिड की 1 टि . लें । अथवा कोडोपायरीन2 टिकिया लें ।

6 . बचाव के लिये यह उपाय भी काम में ला सकते हैं  कार्कीलेट ( B . W . Co . ) 10 मि . ग्रा . की 1 टिकिया , लिबरियम ( रोश ) 10 मि . ग्रा . की 1 टिकिया - दोनों को मिलाकर दौरे से पहले जल से दें ।

7 . अचानक आक्रमण होने पर → ‘ एन्जेसिड ' ( वरोजवेल्कम ) की 1 या 2 टिकिया । जीभ के नीचे रख कर चुसवायें । एवं ' एंमिल नाइट्रेट का कैप्सूल रूमाल में तोड़कर सुंघायें ।



 ••• एड्रेनलीन , इफेड्रीन , थाईरायड औषधियों के प्रयोग से यदि हृद् शूल का आक्रमण होता हो तो इन्हें प्रयुक्त न करें ।

एन्जाइना पेक्टोरिस से सम्बन्धित निम्नलिखित में से कोई विकृति हो सकती है जिसकी उपयुक्त चिकित्सा की जानी चाहिए → 

• प्रवेगी हृद - क्षिप्रता ( Paroxysmal Tachycardia ) । → 

• आक्सीजन की कमी ( Hypoxia ) । । 

• ब्लड प्रेसर का बहुत नीचे गिरना ( Acute fall of Blood Pressure ) । । 

• धूम्रपान रोग का कारण हो तो उसे त्याग दें । । 

• तीव्र रक्तस्राव से अनीमिया की स्थिति उत्पन्न । → 

• हाइपोग्लाइसीमिया ( Hypoglycemia ) ऐसा मधुमेह में सम्भव ।


••• हृद शूल की मिश्रित औषधि चिकित्सा ( Combination Therapy ) ••• 

1 . पैरीट्रेट एस . ए . ( वार्नर ) 1 टिकिया , गाडैनल 30 मि . ग्रा . की 1 टिकिया दोनों को पीस कर 1 पुड़िया बनालें । ऐसी 1 पुड़िया तत्काल दौरे के समय दें । 12 घण्टे बाद पुनः खाली पेट जल से । 

2 . एन्जीसिड 1 टिकिया , वेटानॉल ( M . M . Labs . ) 10 मि . ग्रा . की 1 टि . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 या 3 बार जल से दें । । 

3 . आईसोप्टिन ( बी नॉल ) 1 टिकिया + आइसोरडिल ( जी मैनर्स ) 1 टिकिया । दोनों को पीस कर एक पुड़िया बना लें । ऐसी 1 पुड़िया प्रति घण्टे पर जल से दें । 

सावधान - ‘ ग्लाइकोमा के रोगी में इसका प्रयोग न करें । ।

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Rx . 

दौरे के समय ( During attack ) 

• नाइट्रोग्लसरीन - 1 टिकिया जीभ के नीचे । । 

• एमिल नाइट्रेट पर्लस - तोड़कर रूमाल में सुंघायें । 

प्रा . दो . शा . - 

• सोबट्रेट - दिन में 3 बार मुख से अथवा जीभ के नीचे ( Sublingually ) , पेरीट्रेट 1 टि . नित्य । । 

प्रा . 8 बजे , रात सोते समय  -

• केलम्पोज - 1 टिकिया जल से । । 

दिन के 10 बजे , 4 बजे , 8 बजे रात -

• इण्डेराल 40 मि . ग्रा . टेबलेट जल से । । 

• इण्डेराल का प्रयोग लेफ्ट वेण्ट्रीकुल फेल्योर एवं ब्रो . अस्थमा में नहीं ।


अन्य सहायक कार्य → 

• धूम्रपान का प्रयोग बंद । । 

• आहार और व्यायाम के द्वारा मोटापा कम करें । । 

• हाइपरलिपेडेमिया के लिये - एट्रोमिड - एस . 2 टि . दिन में 3 बार । । 

• नियमित बढ़ाते हुए व्यायाम । ।  

• अनीमिया चिकित्सा एवं उच्च रक्त चाप एवं डायबिटीज कंट्रोल आवश्यक । ।

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रसिस्टेन्ट एन्जाइना - → 

• प्रा . दो . शा .  →  ' इसोप्टिन - 1 टिकिया जल से । 1 

• दिन के 8 बजे , 2 बजे , 8 बजे रात → लिडामेन - 2 टिकिया जल से 3 बार । 

• दिन में 3 बार  →  कै . एडालेट - 1 कै . जल से दिन में 3 बार । → 

• रात सोते समय  →  नाइट्रोविड आयंटमेण्ट 2 % - 2 - 3 त्वचा पर


नाक्टरनैल ( Nocturnal ) - एन्जायना में - यदि रोगी ने बुरे स्वप्न देखे हो तो - 

• ‘ डायजीपाम15 मि . ग्रा . की 1 टिकिया रात सोते समय । । 

• लेनोक्सिन की टिकिया 2 बार अथवा आ . नु . । । → 

• इसीडेंक्स या लासिक्स - 1 टिकिया आ . नु . ।

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वेरीएण्ट एन्जाइना में 

1 . • कोरोनरी एन्जियोग्राफी के लिये निर्देश कर दें । 

• ' निफेडीपीन 10 मि . ग्रा . की टिकिया - 1 - 1 - 1 . 3 बार । । 

• सोरबीट्रेटयाइसोर्डिल ' 10 मि . ग्रा . की 1 - 1 टिकिया दिन में 4 बार । । ( If repeated episodes of spasm but no obstructive lesions ) 

नोट - बी - व्लोकर्स का प्रयोग नहीं । 

2 . कोरोनरी बाईपास सर्जरी अथवा एन्जियोप्लास्टी । ( N . B . - If coronary atheroscle rotic obstruction and repeated episodes of coronary spasm ) .

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••• हद शूल में सेवन कराने योग्य अपडेट ऐलो . पेटेन्ट रिसेण्ट । मेडिसिन्स •••

टेबलेट्स -

1 . एल्टोल ( Altol ) ( इंडोको ) - 50 - 100 मि . ग्रा दिन में 1 या 2 बार । हार्ट ब्लाक , कार्डियक फेल्योर , हृदय जन्य शॉक में वर्जित । 

2 . एन्जीसिड ( Angised ) ( वैल्कम )  -  तीव्र दौरे में 0 . 5 मि . ग्रा . की टिकिया प्रति 3 मिनट पर । ।

3 . एन्जीजेम ( Angizem ) ( सनफार्मा )  -   1 टिकिया दिन में 3 - 4 बार भोजन से पूर्व ।

4 . एटकार्डिल ( Atcardil ) ( सनफार्मा ) -   बचाव हेतु - 50 - 100 मि . ग्रा . की 1 टिकिया नित्य । । 

5 . एटीकोर ( Atecor ) ( बिनमेडिकेअर )  -  50 - 100 मि . ग्रा . की 1 टि . नित्य । हार्ट ब्लाक कार्डियक फेल्योर एवं दुग्धावस्था में वजित । ।

6 . बीटाकार्ड ( Betacard ) ( टोरेण्ट )  -  50 - 100 मि . ग्रा . की 1 टि . नित्य । । 

7 . बीटालाक ( Betaloc ) ( एस्ट्रा - आइडियल )  -  100 - 200 मि . ग्रा . विभाजित मात्रा में प्रातः सायं ।

8 . बीटाटोप ( Betatrop ) ( सन )  -  1 कै . नित्य । ‘ हर्ट ब्लाक , ‘ कार्डियक फेल्योर में नहीं । 

9 . केलाप्टिन ( Calaptin ) ( बोहरिन्गर - एम )  -  1 - 1 टिकिया दिन में 3 बार । 

10 . कार्कीलेट ( Cardilate ( वैल्कम ) - चिकित्सा एवं बचाव 5 मि . ग्रा . टि . जीभ के नीचे अथवा 10 मि . ग्रा . टि . ओरली दिन में 3 बार ।

11 . सिप्लार ( Ciplar ) ( सिप्ला ) 10 , 40 और 80 mg . Tab . - 20 - 80 मि . ग्रा . दिन में 3 बार । ।

12 . क्लीनियम ( Clinium ) इथनार  -  प्रथम सप्ताह 1 टि . नित्य । द्वितीय सप्ताह 1 टि . दिन में 2 बार । तृतीय सप्ताह 1 टि . दिन में 3 बार । गर्भावस्था में प्रयोग वर्जित । । 

13 . कोरबीटा ( Corbeta ) ( साराभाई ) - लिट्रेचर के अनुसार ।

14 . कोरमेलियान ( Cormelian ) खंडेल - वाल  -  1 / 2 टि . दिन में 3 बार । आवश्यकतानुसार 1 टि . दिन में 3 बार । 

15 . डिलटाइम - एस . आर ( Diltime - SR ) ( एलीडेक )  -  क्रानिक एन्जायना । लिटरेचर के अनुसार ।

16 . डिलजेम ( Dilzem ) टोरेण्ट कं . -   1 टिकिया दिन में 4 बार भोजन से पूर्व इसकी S . R . टिकिया भी आती है

17 . डी . टी . एम . ( DTM ) ( बायोकेम लेबो . )  -  1 टिकिया दिन में 3 - 4 बार भोजन से पूर्व ।

18 . डायनास्प्रिन ( Dynasprin ) ( USV )  -  1 - 1टि . दिन में 3 बार भोजन से 1 घण्टे पूर्व । । 

19 . फ्लेवेडोन ( Flavedon ) 20 mg ( सर्दिया कं . ) -  1 टिकिया दिन में 3 बार भोजन के साथ । 

20 , हर्टज ( Herteze ) ( लाइका ) -  40 - 80 मि . ग्रा . दिन में 3 बार ।

21 . इल्डामेन - ( Ildamen ) ( जर्मन रेमेडीज )  -   2 टिकिया दिन में 3 बार भोजन के साथ ।

22 . इण्डेराल ( Inderal ) ( आई . सी . आई . ) -  40 मि . ग्रा . टि . दिन में 2 - 3 बार । ।

23 . इज्मो - 20 , ( Esmo - 20 ) ( बोहरिंगर - एम )  -  1 - 2 टिकिया दिन में 2 - 3 बार भोजन के वाद ।

24 . इसोप्टिन 40 , 80 ( जर्मनरेमेडीज ) - 80 मि . ग्रा . की 1 - 2 टिकिया दिन में 3 बार ।

25 . लोनोल ( Lonol ) ( खण्डेलवाल ) - 50 - 100 मि . ग्रा . की टिकिया नित्य । ।

26 . मेटोलार ( Metolar ) ( सिप्ला ) -  100 - 400 मि . ग्रा . रोजाना । । 

27 . मोनोसोर्बट्रट ( Monosorbitrate ) - ( निकोलस )  -  बचाव हेतु - 1 टि . दिन में 2 - 3 बार भोजनोपरान्त । ।

28 . मोनोट्रेट ( Monotrate ) ( सनफार्मा ) -  1 - 1 टि . दिन में 2 - 3 बार भोजनोपरान्त । ।

29 . मोनोट्रेट ओ . डी . ( Monotrate - OD ) ( सन फार्मा )  -  1 टि . नित्य भोजनोपरान्त 2 या 3 बार । । 

30 . नियोकोर ( Neocor ) ( निओ - फार्मा ) -  लिट्रेचर के अनुसार ।

31 . निफेडीन ( Nifedine ) ( एस . जी . फार्मा )  -  चिकित्सा । बचाव - 10 - 20 मि . ग्रा . की टि . 3 बार । 

32 . निफीलेट रिटार्ड ( Nifelat retard ) ( सिप्ला ) -  1 टिकिया दिन में 2 बार । ।

33 . पेरीट्रेट ( Peritrate ) ( वार्नर )  -   10 - 20 मि . ग्रा . दिन में 3 - 4 बार । 

34 . पेरीट्रेट एस . ए . ( Peritrate S . A . ) -  1 टि . दिन में 2 - 3 बार खाली पेट । ।

35 . प्रेसोलार ( Presolar ) ( सिप्ला ) -  1 कै . / टे . नित्य । अथवा आवश्यकतानुसार ।

36 . सेक्ट्राल ( Sectral ) ( रोन - पोलेन्क ) -  200 मि . ग्रा . दिन में 2 बार । बालकों में नहीं । 

37 . सोरबीट्रेट - एम . बी . ( Sorbitrate M , । B . ) ( निकोलस ) -  चिकित्सा । बचाव - 5 - 10 मि . ग्रा . जीभ के नीचे ।

38 . सोटागार्ड ( Sotagard ) ( ग्लैक्सो )  -  120 - 360 मि . ग्रा . / रोजाना ।

39 . टेनोलोल ( Tenolol ) ( इपका )  -  50 - 100 मि . ग्रा . नित्य केवल एक मात्रा । 

40 . टेनोर्मिन / टेनोर्मिन LS , 25 , 50 ( I . C . I )  -  50 - 100 मि . ग्रा . नित्य । बालकों में नहीं ।

41 . थ्रोम्बोस्प्रिन ( Thrombosprin ) ( सन - फार्मा )  -   1 टिकिया दिन में 3 बार भोजन से 1 घंटे पूर्व । पेप्टिक अल्सर तथा गर्भावस्था के प्रथम 3 माह में इसका प्रयोग न करें ।

42 . वेसोप्टेन ( Vasopten ) ( टोरेण्ट ) -  80 - 120 मि . ग्रा . टिकिया प्रति 6 - 8 घंटे पर ।

43 . वेरामिल ( Veramil ) ( थेमिस केमि - कल्स )  -  40 - 80 मि . ग्रा . दिन में 3 बार । 

44 . विस्केन ( Visken ) ( सैण्डोज ) - 5 - 30 मि . ग्रा . नित्य विवरण पत्र अनुसार ।

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•• हद् शूल में सेवन कराने योग्य अपूटडेट ऐलो . पेटेन्ट कैप्सूल ••

1 . एन्जीस्पान - टी . आर ( Angispan - TR ) ( लाइका ) - 1 - 1 कैप्सूल दिन में 2 - 3 बार / इसका S . R . कै . भी आता है । ।

2 . बीटास्पान ( Betaspan ) ( SKF )  -  80 मि . ग्रा . का कै . नित्य ।

3 . बीटाटोप ( Betatrop ) ( सन )  -  1 कै . नित्य । बढ़ाते हुए 2 कै . नित्य , गर्भावस्था की तिमाही , हार्ट फेल्योर ' एवं ' हार्ट ब्लाक में पूर्णतया निषेध । । 

4 . कैल्सीगार्ड ( Calcigard ) ( टोरेण्ट ) -  ‘ कोरोनरी हार्ट डिजीज़ ' से उत्पन्न रोग में 1 - 2कै . दिन में 3 बार । 

5 . काडपिन ( Cardipin ) ( इण्टास )  -  ‘ कोरोनरी हार्ट डिजीज से उत्पन्न एन्जाइना में 1 2 कै . दिन में 3 बार । 

6 . काडूल्स ( Cardules ) ( निकोलस )  -  1 - 2 कै . दिन में तीन बार  इसका रिटार्ड कै . भी आता है ।

7 . मायोगार्ड ( Myogard ) 5 mg . cap . ( सलें कं . ) - 10 - 20 मि . ग्रा . दिन में 3 बार । छोटों को 5 मि . ग्रा . दिन में 3 बार ।

8 . निफेलाट ( Nifelat ) ( सिपला ) -  1 टिकिया दिन में 3 बार । अधिक से अधिक 80 मि . ग्रा . नित्य ।

9 . नाइट्रोमैक रिटार्ड ( Nitromack Retard ) ( बायोकेम )  -  1 - 2 कै . प्रति 12 घण्टे पर । । 

10 . टीनोफेड ( Tenofed ) ( इपका )  -  1 कै . प्रतिदिन अथवा आवश्यकतानुसार ।

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•• हृद् शूल में सेवन कराने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेन्ट इन्जे . ••

1 . बीटालॉक ( Betaloc ) ( एस्ट्रा - आइ - डियल )  -  10 - 15 मि . ग्रा . । । 

2 . केलाप्टिन ( Calaptin ) ( बोहरिंगर - एम )  -  5 - 10 मि . ग्रा . ( 2 - 4 मि . ली . ) आई . वी . धीरे - धीरे । 

3 . इल्डामेन ( Eldamen ) ( जर्मन रेमेडीज )  -  2 मि . ली . आई . वी . 1 - 2 मिनट में नित्य 1 - 2 सप्ताह तक । अधिक से अधिक 3 बार । दौरे के समय - 4 मि . ली . दिन में 2 - 3 बार आई . वी . । ।

4 . मिल्लीसरोल ( Millisrol ) ( खण्डेल - वाल )  -  विवरण पत्र के अनुसार । । 

5 . निट्रोमेक ( Nitromack ) ( वायोकेम ) -  विवरण पत्र के अनुसार । । 

6 . रोनिकोल ( Ronicol ) ( रोशे ) - एक एम्पुल का इन्जेक्शन चर्म में लगावें । साथ ही इसकी 2 - 2 टिकिया भी खिलावें । ।

नोट - इससे हृदय की माँसपेशियों की धमिनयाँ फैल जाती हैं जिससे दर्द में तत्काल आरामा आ जाता है ।

7 . एवाफोर्टान ( Avafortan ) ( अस्ट्राबर्क ) - 2 से 6 मि . ली . रोगानुसार मॉस में लगावें ।

8 . पेथीडीन हाइड्रोक्लोराइड  -  तेज दर्द में 100 मि . ग्रा . की एक सुई मॉस में लगावें । 

9 . मिनाफाइलिन ( Minaphillin ) ( F D . C . के . )  -  1 या 2 मिली . दिन में 2 - 3 बार माँस या नसमें लगावें । ।

नोट - 1 डेक्स्ट्रोज में मिलाकर आई . वी . धीरे - धीरे दे सकते हैं । अथवा 1 बार - बार आवश्यकतानुसार ।

10 . ट्राइओलेण्ड्रेन ( Triolandren ) नि . ‘ सीबा - गायगी  - पुरुषों के दिल के दौरे में 100 से 250 मि . ग्रा . के 1 मि . ली . की सुई कूल्हे के मॉस में ।

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••• एन्जाइना पेक्टोरिस व्यवस्था संक्षेप में

• Avoidance of provocating factors . 

• Glyceryl trinitrate , 500 meg placed high - up between upper lip and gum or 400 - 800 megaerosol spray onto or under tongue and close the mouth immediately or 2 . 6 - 6 . 4 mg 2 - 3 times daily orally . 

• Isosorbide dinitrate , 5 - 10 mg . Sublingually every2 - 4 hours or 10 mg 3 times dailyorally increasing upto 30 mg4 times daily , in cases where long acting nitrate needed .  

• Beta - Blocker , e . g . propranolol , 20 mg every6 hours orally with progres sive increments till benefit is achieved .




• Calcium antagonist , e . g . Nifedipine 10 - 20 mg3 times daily orally or verapamil 120 - 240 mg3 - 4 times daily orally , following acute manage ment and in all other cases . 

• Beta Blocker in association with calcium antagonist in cases of unstable angina . 

• Coronary artery bypass grafting or coronary angioplasty in some cases .

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