आँख दुखना [ कन्जंक्टिवाइटिस - Conjunctivitis ] क्या होता है ? यह हमारे आँखों को किस प्रकार हानि पहुचता है ? और इससे किस प्रकार बचा जा सकता है ? Eye ache [conjunctivitis - conjunctivitis] What happens? How does it harm our eyes? And how can this be avoided?

आँख दुखना [ कन्जंक्टिवाइटिस - Conjunctivitis ]

आँख दुखना [ कन्जंक्टिवाइटिस - Conjunctivitis ] क्या होता है ? यह हमारे आँखों को किस प्रकार हानि पहुचता है ? और इससे किस प्रकार बचा जा सकता है ? Eye ache [conjunctivitis - conjunctivitis] What happens? How does it harm our eyes? And how can this be avoided?


नाम - नेत्र श्लेष्म कला शोथ , नेत्र श्लेष्मला शोथ , आँखों का लाल होना , दुखना , आना या उनसे कीचड़ अथवा मवाद आना । 

• संक्रामक नेत्र रोग अभिष्यंद ( आई फ्लू ) । साधारण भाषा में इसको ‘ आँख आना ' अथवा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भिन्न - भिन्न नामों से पुकारा जाता है । 

परिचय - आँख का दुखना या आँखें आना , आँखों का एक छूत का रोग है । इसमें आँख का सफेद भाग ( दृष्टि पटल ) आर पलकों की भीतरी सतह को ढकने वाली पतली पारदर्शी झिल्ली लाल हो जाती है । यह रोग प्रायः खतरनाक नहीं होता , किन्तु ठीक प्रकार से इलाज करवाने में देरी करने से नेत्र ज्योति पर असर पड़ सकता है ।

रोग के कारण एवं प्रसार  

• यह एक प्रकार के बैक्टीरिया , फफूद या वायरस ( विषाणु ) के कारण होता है । 

• सहायक / गौढ़ अन्य कारण -

• नजला , सुजाक , टॉन्सिल , डिफ्थेरिया , एक्जीमा , कुकरे ' , दमा की एलर्जी , कंठमाला , मौसमी नजला आदि कारणों से भी । । 

• खट्टे - मीठे , तेल - मिर्च , मसालेदार , अम्लीय खाद्य पदार्थ खाने तथा माँस - मछलियों के अधिक सेवन से पित्त विकृत होकर नेत्रों को प्रभावित करता है और नेत्र श्लेष्म कला शोथ का रोग उत्पन्न होता है । 

• अधिक तापयुक्त वातावरण में अधिक समय तक रहने के बाद एकदम शीतल वातावरण में पहुँचने । । 

• धूप में चलने - फिरने के बाद तुरन्त शीतल जल से स्नान । ।

प्रसार — यह रोग दूषित हाथ या उंगलियाँ आँखों में लगाने से , दूषित तौलिया , रूमाल आदि से आँखें पोंछने से और रोगी की अन्य दूषित चीजों के प्रयोग से फैलता है । मक्खियाँ भी एक दूसरे तक रोग पहुँचाने में सहायक हैं । यह रोग धूल , धुवाँ , गंदे पानी में नहाने या रोगी की सुरमा डालने की सलाई का इस्तेमाल करने से या एक ही उंगली द्वारा एक से अधिक बच्चों को काजल लगाने से भी ।

रोग के लक्षण एवं चिन्ह  

• रोग एक आँख या दोनों आँखों में खुजलाहट के साथ प्रारम्भ । 

• आँखें लाल एवं पलकें सूज जाती है ,

• पलकों की श्लेष्मिक कला एकदम लाल । इसमें 

• तीव्र शूल एवं जलन । पलकें खोलना असम्भव और धूप की रोशनी असह्य । ।

• ऐसा लगता है कि आँखों में कोई धूल - मिट्टी , कंकर गिर गई है । रोगी पलकें रगडता है तो पीडा अधिक होती है । 

• नेत्रों से आँसू निकलते रहते हैं ।

• आरम्भ में तीव्र खुजली और फिर खुजलाने से शोथ । ।  

• प्रारम्भ में आँखों से पानी या पतली ‘ कीच - सी निकलती है । इसके बाद आँखों की कोरों में गाढ़ी सी सफेद या पीलापन लिये सफेद कींच सी एकत्रित हो जाती है । 

• नेत्रों से स्राव पूय युक्त , डिस्चार्ज पस पूर्ण या जलीय । 

• नेत्रों में लाली सतही ऊपर ही ऊपर ( सुपरफीसियल ) होती है ।


रोग की पहिचान → 

• लक्षणों के आधार पर रोग निदान बहुत आसान । । 

 नेत्रों की सूजन , आँखें लाल , पीड़ा , आँखों से पानी आना एवं करकराहट ( आँखों में कोई वस्तु पडने का आभास ) प्रकाश सहन न होना आदि विशिष्ट चिन्ह एवं लक्षण रोग निदान में सहायक ।


रोग का परिणाम  

• नेत्र का भीतरी दबाव , उसका आकार , पुतलियों की प्रतिक्रिया आदि अप्रभावित रहते हैं । 

• रोग का समय पर उपचार न करने से पलक सूजकर प्रायः बन्द हो जाती है जिसके परिणामस्वरूप स्वच्छ पटल ( कार्निया ) पर अंत - चरण ( Infiltration ) होने लगता है जो बढ़कर स्वच्छपटल पर घाव कर देता है जिससे रोगी शैशव अवस्था में ही अन्धा हो जाता है ।


• नेत्र श्लेष्म कला शोथ की चिकित्सा - व्यवस्था 

• रोगी को धूल एवं धूप से बचायें । 

• नेत्रों की स्वच्छता का विशेष ध्यान । दिन में 3 बार गर्म नार्मल सैलाइन से आँखें साफ करना । अथवा बोरिक एसिड पाउडर बहुत हल्के गरम जल में घोलकर नेत्रों की सफाई । 

• आँखें धोने के बाद एण्टीबायोटिक डूप्स लोक्यूला ( सल्फासिटामाइड 10 % ) , क्लोरोमाइसिटीन ड्रॉप्स 3 - 3 घण्टे से डालें । । 

• रोग की गम्भीरता के अनुसार एण्टीबायोटिक । 

• रक्ताधिक्य नाशक ड्राप्स यथा टेट्रा हाइड्रोजोलीन आई ड्रॉप्स ( व्हीशिन ) नेफाजोलीन ( क्लियिराइन आई ड्रॉप्स ) दिन में 3 - 4 बार डालें ।

• सोते समय 1 % टेट्रासाइक्लीन अथवा आक्सीटेट्रासाइक्लीन / निओस्पोरिन / सोफामाइसिन कोई सा मरहम लगावें । 

• यदि स्वच्छपटल ( Cornea ) मार्जिनल अल्सर से प्रभावित हो गई हो तो एट्रोपीन सल्फ 1 % ड्रॉप्स दिन में 2 बार डालें । 

० पैड का प्रयोग ( गर्म रखने के लिये ) न करें । ० स्टेरॉइड्स का प्रयोग उचित नहीं ।

सावधान• आँखों का विशेष ध्यान रखें । नेत्र पीड़ा होने पर लापरवाही करने से आँखें आ सकती हैं । अतएव सावधानी पूर्वक उपचार अवश्य करें । 
• नेत्र सम्बन्धी रोग अधिक होने पर डाक्टर की सलाह पर उपचार करें । इस सम्बन्ध में लापरवाही न करें । वृद्धावस्था में नेत्र रोग घातक हो सकता है ।


• रोग एवं लक्षणों के अनुसार चिकित्सा 

1 . तीव्र रोग में ( Acute Conjun ctivitis )  • गर्म व नार्मल सैलाइन से आँख की सफाई । तत्पश्चात्

• क्लोम्फेनिकाल ( 0 . 5 % ) 2 बूंद अथवा 1 % का आयन्टमेंट प्रति 3 घण्टे पर । अथवा जेण्टामाइसिन ( 3 % ) के 1 - 3आई ड्रॉप्स अथवा मरहम ( 0 . 3 % ) दिन में 3 - 4 बार ।

2 . एलजी से उत्पन्न रोग में ( In Allergic conjunetivitis )  • कोर्टी - कोस्टेराइड्स आई डूप्स का विधिवत् प्रयोग । 

• एण्टीहिस्टामीन - यथा - क्लोरफेनिरा - माइन 4 - 8 मि . ग्रा . दिन में 3 - 4 बार ओरली ( मुख द्वारा ) । 

• गम्भीर अवस्था में कोर्टी - कोस्टेराइड्स मुख से । 

3 . धुवाँ और धूल में निरन्तर रहने वालों में क्रानिक कंजक्टि वाइटिस  जिन्कोसल्फा ड्रॉप्स ( Zincosulpha drops - ' बैल ' ) तथा प्राटोबोरिक ( Protoboric - Bell ) एवं एण्ड्री आई ड्रॉप्स ( Andre Eye drops ) - किसी एक का प्रयोग करें ।

4 . बच्चों की आँख में कंजक टाइवा में लाल रंग की शोथ से घिरे सफेद दाने से होने पर  बेटनेसोलआई ड्राप्स , कौम्बीशन मरहम ( Combison ) का प्रयोग करें ।

नोट - इसे ' सब - कंजक्टाइवल हेमरेज भी कहते हैं । 

5 . आँख की पारदर्शक झिल्ली के नीचे रक्त इकट्ठा होने पर ( चोट आदि लगने )  साधारण दशा में कोई हानि नहीं । ठंडे पानी या बरफ से तुरन्त ढकने से दबाने से लाभ होता है । आँखों में ऑप्टिसोल ( Optisol - स्टेडमेड कं ) ड्रॉप्स की 1 - 2 बूंदें डालने से अथवा क्लियरीन ( Clearine ) नि . ओप्टेक्स के ड्राप्स से लाभ होता है ।

नोट - रोगी को समझा दें कि घबरायें नहीं , कुछ दिन बार धीरे - धीरे ठीक हो जाती हैं ।


• कंजंक्टिवाइटिस की चिकित्सा इस प्रकार से भी  

० ० इसकी चिकित्सा आँखों को गर्म नार्मल सैलाइन अथवा स्वच्छ जल अथवा गर्म बोरिक एसिड के घोल के साथ धोकर साफ करना तथा ऐसी औषधि ( ड्राप्स ) का प्रयोग करना है जिसमें केवल एण्टीबायोटिक औषधि हो । जैसे — प्रेडनीसोलोन , डेक्सा तथा बीटामीथासोन न हो , क्योंवि . इनके प्रयोग से नेत्र की प्रतिरक्षण शक्ति कम हो जाती है तथा जीवाणुओं का प्रकोप भी बढ़ जाता है ।

ड्राप्स यथा -

• जेण्टीसिन ( Genticin - निकोलस ) । 

• नियोस्पोरिन ( Neosporin - बैल्कम ) 

• वानमाइसिटिन ( Vanmycetin - F . D . C . ) । 

आँखों के मरहम ( Ophthalmic Ointment ) यथा - 

• टैमाइसीन - Pfizer Co . ) 

• निओस्पोरिन आयष्टमेण्ट ( Neosporin Ointment ) ' नि . वैल्कम ,

• सोफामाइसिन ( Soframycin ) रसिले । । 

• पाइलोर ( Pychlor ) ब्लूशील्ड,


संक्रमण निरोधी ( एण्टी - इन्फेक्टिव ) औषधियाँ 

1 . एल्बूसिड ( Albucid ) - निकोलस ' 10 % , 20 % , 30 % ड्रॉप्स । → 1 - 2 बूंद प्रति 6 घण्टे पर ( मरहम रात्रि के समय ) ।

2 . एण्ड्री आई ड्रॉप्स ( Andre - eye drops ) - ‘ एण्ड्री ' →  2 - 3 ड्रॉप्स दिन में 3 - 4 बार प्रत्येक आँख में डालें ।

3 . सैलूमाइड ( Cellumide - FDC ) → 1 - 2 बूंद दिन में 3 - 4 बार । 

4 . सिफ़ान आई ड्रॉप्स ( Cifran eye drops ) रैनबैक्सी ' ( 10 ml 18 . 50 रुपये का ) →  आँख के बैक्टीरियल इन्फैक्शन में 2 - 3 बूंद दिन में 2 - 3 बार डालें । 

5 . सिपलोक्स आई ड्रॉप्स ( Ciplox Eye drops ) - ‘ सिपला ' 5 मि . ली . 12 . 75 रुपये का आता है । → आँख के बैक्टीरियल इन्फैक्शन में प्रभावित आँख में 2 - 3 बूंद दिन में 2 - 3 बार डालें ।

6 . सिप्रोबिड आई ड्रॉप्स ( Ciprobid eye drops ) - कैडिला → आँख के बैक्टीरियल इन्फैक्शन में 2 - 3 बूंद दिन में 2 - 3 बार डालें । 

7 . क्लियरिन ( Clearine ) - ओपटेक्स → ओकुलर इन्फ्ले मेशन में 2 बूंद दिन में 3 - 4 बार डालें ।

8 . जेण्टीसिन आई डूप्स ( Genticyn eye | | drops ) ' निकोलस । → आँख के बैक्टीरियल इन्फेक्शन में 1 - 3 बूंद दिन में 3 - 4 बार डालें ।

9 . लोकुला ( Locula ) ' ईस्ट इंडिया 10 % , 20 % , 30 % → आँख के सल्फोनामाइड सेन्सिटिव इन्फेकेशन में 1 - 2 बूंद हर घण्टे पर डालें ।

10 . लैरामाइसीन आई / ईअर ड्रॉप्स ( Lyramycin Eye / Ear drops ) ' लाइका → आँख और पलकों के बैक्टीरियल इन्फेक्शन में 2 - 4 बूद दिन में 3 - 4 बार डालें ।

11 . मोइसोल आई ड्रॉप्स ( Moisol Eye drops ) | एफ . डी . सी . ( 10 ml8 . 20 रुपये का ) → 1 - 2 बूंद प्रभावित आँख में दिन में 2 - 4 बार डालें ।

12 . नोरबाक्टिन आई ड्रॉप्स ( Norbactin Eye drops ) रैनवैक्सी । → 1 - 2 ड्रॉप्स प्रति 4 घण्टे पर । गम्भीर रोग में 2 बूंद हर घण्टे पर डालें । 

13 . नोरफ्लोक्स आई ड्राप्स ( Norflox Eye | drops ) सिपला → 1 - 2 बूंद प्रति 4 घण्टे पर । गम्भीर अवस्था में 12 बूंद हर घण्टे पर डालें ।

14 . नोरमेक्स आई / ईअर डूप्स ( Normax1 Eye / Ear drops ) इपका → 3 बूंद दिन में 3 बार डालें । गम्भीर इन्फेक्शन में 2 बूंद हर घण्टे पर । 

15 . ओप्टीसोल ( Optisol ) ' स्टेडमेड → 1 - 2 बूंद हर 6 घण्टे पर डालें ।

16 . ओरीप्रिम - पी आई ( Oriprim - P Eye कडिला → 1 - 2 बूंद दिन में 3 - 4 बार अथवा आ . नु . । ।

17 . विजिन आई ड्रॉप्स ( Visine Eye drops फाइजर ' । → 1 - 2 बूंद प्रत्येक आँख में दिन में 2 - 3 बार डालें ।

सावधान - २ ग्लोकोमा की स्थिति में प्रयोग न करें ।


• श्लेष्मकला शोथ में लगाने योग्य नेत्र के मरहम 

1 . एलसाइक्लिन आई आयण्टमेण्ट ( Alcyclin eye oint ) एलेम्बिक ' → आँख के संक्रमण में 2 - 3 बार लगावें ।

2 . क्लोरोमाइसिटिन एप्लीकेप्स ( पी . डी . ) → वैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस में एक एप्लीकेप काटकर आँख में लगावें ।

नोट - ० एलजक रिएक्शन की स्थिति में प्रयोग निषेध । । 

3 . हरपे क्स ऑथेल्मिक ( Herpex Ophthalmic ) टोरेण्ट  → दिन में 3 - 4 बार लगावें ।

4 . ओक्सी टेट्रासाइक्लीन आई ( Oxytetra - | cycline Eye ) नि . फाईजर → दिन में 3 - 4 बार लगावें ।

5 . सोफ्रामाइसिन आफ्थेल्मिक आयन्टमेण्ट ( Soframycin Ophthalmic Oint . ) रसिल कं  →  2 - 3 बार लगावें । रात सोते समय अवश्य दें । इसका ड्राप्स भी आता है 

6 . निओ - स्पोरिन आयन्टमेन्ट → दिन में 1 - 2 बार अथवा रात सोते समय आँख में लगावें ।

याद रहे — यह रोग नवजात शिशु को भी हो जाता है । अतः सावधानी के तौर पर यदि नेत्रों में एक प्रतिशत सिलवर नाइट्रेट या पेनिसिलिन की बूंदें ( 1 : 1000 ) यूनिट प्रति मिलीलीटर डाल दी जाय तो उत्तम होता है ।

रोकथाम – निम्न उपायों से रोग से बचा जा सकता है 

• साफ रहना एवं सफाई के प्रति सावधानी बरतना । । 

• दूसरे के कपड़ों को साथ न मिलायें । 

• रूमाल , तौलिया आदि को नियमित रूप से साफ करें एवं दूसरों के प्रयोग में लायें । 

• घर के सभी के लिये एक सुरमा - सलाई का उपयोग न करें । 

• भीड़ - भाड़ से बच कर रहें । । 

• आँखों में काजल न डालें । 

• आँखें नित्य ठंडे और साफ पानी से धोयें ।


• कीचड़युक्त श्लेष्म कला शोथ की चिकित्सा व्यवस्था Treatment of Muco - purulent Conjunctivitis ) 

Rx 

• निओस्पोरिन आई ड्रॉप्स ( Neosporin Eye drops ) - 2 - 2 बूंद प्रति 2 घण्टे पर 7 दिन तक । 

• निओस्पोरिन आई आयन्टमेंट - दिन में 2 बार 7 दिन तक । 

• बैक्ट्रिम डी . एस . ( Bactrim D . S . ) - 1 टिकिया दिन में 2 बार 5 दिन तक ।


नवजात शिशुओं का रोग → 

• आँख को नार्मल सैलाइन से धोये । । 

• पेनिसिलीन ड्रॉप्स ( 20000 यूनिट प्रति शीशी c . c . ) अथवा अन्य कोई एण्टीबायोटिक ड्रॉप्स या आयटमेण्ट । 

• सिस्टेमिक एण्टीबायोटिक ( Systeric Antibiotic ) 

• एट्रोपीन आई ड्रॉप्स ( Atropine Eye drops )


• डिफ्थीरिया जन्य श्लेष्म कला शोथ ( Diphtheritic Conjunctivitis ) 

Rx 

• पेनिसिलीन ड्रॉप्स 15000 यूनिट्स प्रति सी . सी . प्रति 1 / 2 घण्टे पर । एवं | एण्टीथिस्थेरेटिक सीरम प्रति 1 घण्टे पर । । 

• आयटमेण्ट पेनिसिलिन अथवा सोफ्रामाइसिन आई आइण्टमेण्ट लगावें । । 

सिस्टेपिक• इन्जे . क्रिस्टेलाइन पेनिसिलीन 10 लाख यूनिट प्रति 8 घण्टे पर ।  

• एण्टी - डिफ्थेरोटिक सीरम इन्जे . 6 लाख यूनिट । प्रति 12 घण्टे पर दोहरायें । । 

• सहायक चिकित्सा के रूप में - फ्लूड्स एवं विटामिन्स । । 

• तापक्रम को पैरासिटामोल से कण्ट्रोल करें ।


• क्रानिक कंजंक्टिवाइटिस की चिकित्सा व्यवस्था  

• कारण की चिकित्सा । 

• जलन पैदा करने वाली वस्तुओं से दूर रहें ( Avoid irritants ) Goggles का प्रयोग लाभकर । । 

• जिंक सल्फेट अथवा सिल्वर नाइट्रेट का पेण्ट करें । 

• पलकों की मालिश कर स्राव को बाहर करें । 

• संक्रमण के लिये एण्टीबायोटिक्स – एक छोटा कोर्स । 

• अपर रेस्पाइरेटरी - संक्रमण की चिकित्सा । 

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