जीभ का कैंसर [ Cancer of Tongue ] होने के कारन , लक्षण , और इसके निदान ? Cancer of the tongue, symptoms, and its diagnosis?

जीभ का कैंसर [ Cancer of Tongue ] 

जीभ का कैंसर [ Cancer of Tongue ]  होने के कारन , लक्षण , और इसके निदान ? Cancer of the tongue, symptoms, and its diagnosis?


जीभ , गाल , जबड़े एवं तालू के कैंसर के लक्षण करीब - करीब एक ही प्रकार के होते हैं । ऐसे कैंसर स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में अधिक मिलते हैं । अधिकतर 35 साल से अधिक आयु वालों को होता है । आजकल तो छोटी अवस्था के लोगों में भी ।


रोग के कारण 

- पहला कारण नुकीले दाँत । ।

- 40 - 60 वर्ष के बीच की अवस्था के पुरुषों में । । 

- मुख में स्वच्छता की कमी प्रबल सहायक कारण । । 

- कभी - कभी दाँतों में कीड़े लग जाने के कारण भी । । 

- सुर्ती , तम्बाकू , रवैनी , सुंघनी , सिगरेट , पाइप इत्यादि का अधिक सेवन । । 

- तम्बाकू के साथ मद्यपान का अधिक सेवन भी एक सहायक कारण । । 

- जिह्वा के कैंसर की उत्पत्ति में पान का अत्यधिक सेवन भी कैंसर में सहायक । 

- जीभ के कैंसर के पूर्व रूप में जीभ की श्वेतशल्कता ( Leukoplakia ) | अधिक जिम्मेदार ।


रोग के लक्षण 

- कैंसर से उत्पन्न विक्षत स्थान पर कुछ वेदना ।

- कैंसर के बढ़ने पर व्रणोत्पत्ति एवं द्वितीयक उपसर्ग ( Secondary infection ) । 

- अत्यधिक लार आना एवं निगलने में कष्ट । । 

- अत्यधिक लाल स्राव कभी - कभी रक्तरंजित भी । 

- स्थानिक वेदना एक प्रमुख लक्षण । । 

- जिह्वापाक एवं मुखपाक ।

- जीभ की क्रियाशीलता शिथिल तथा उसके कारण उत्पन्न वेदना कान के पास तक प्रतीत । 

- बोलने में कठिनाई ।

- जीभ निकालने में कष्ट । 

- मुंह से बदबूदार बास का आना ।


० जीभ के प्रारम्भिक लक्षणों में उक्त स्थान की श्लैष्मिक कला में कुछ न कुछ शोथ हो जाता है । जो आगे चलकर उभार के रूप में प्रकट होता है । इसके साथ - साथ कुछ न कुछ जीभ से रक्त स्राव भी । होता है ।

रोग निदान  

० स्पष्ट लक्षणों के आधार पर । 

० रुग्ण भाग की बायोस्पी परीक्षा । 


जीभ के कैंसर की चिकित्सा 

1 . शल्य चिकित्सा ( Surgical Treatment ) - रुण भाग को काटकर निकाल देने से । । 

2 . विकिरण चिकित्सा ( Radiotherapy ) - इस चिकित्सा में मुख के बाहर से गाल के द्वारा विकिरण पहुँचाते हैं ।  

० एक्स - रे के उच्च वोल्टेज तथा कोबाल्ट चिकित्सा का प्रयोग रोग की बढ़ती हुई । अवस्था में । । 

3 . इण्टरस्टीशियल क्यूरीथिरैपी - इस चिकित्सा के अन्तर्गत रुग्ण भाग में रेडियम सुइयों का प्रवेश कराया जाता है । 

नोट   ० वाह्य विकिरण के साथ - साथ उपरोक्त इण्टरस्टीशियल क्यूरीथिरैपी का प्रयोग जीभ के कैंसर की चिकित्सा में अति उत्तम लाभ पहुंचाता है । 


पथ्यापथ्य चिकित्सा   दूध , घी , चीनी , ताजे फलों का रस , माँस का सूप , आदि का सेवन । यकृत के रोगियों को चावल , मांड़ तथा हरी सब्जियों का सेवन कराना । 

- अधिक मिर्च - मसाले , अधिक नमकीन एवं अम्लीय पदार्थों का सेवन वर्जित है ।

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