ब्रोन्किएक्टैसिस / श्वसनीविस्फार [ Bronchiectasis ] की समस्या क्या है ? क्या है कारण , लक्षण , रोग की पहचान , एव रोग के परिणाम ? किस प्रकार इलाज कर सकते है ? What is the problem of bronchiectasis / bronchiectasis? What is the cause, symptoms, disease detection, and the consequences of the disease? How can you cure?

ब्रोन्किएक्टैसिस / श्वसनीविस्फार [ Bronchiectasis ] 

ब्रोन्किएक्टैसिस / श्वसनीविस्फार [ Bronchiectasis ] की समस्या क्या है ? क्या है कारण , लक्षण , रोग की पहचान , एव रोग के परिणाम ? किस प्रकार इलाज कर सकते है ? What is the problem of bronchiectasis / bronchiectasis? What is the cause, symptoms, disease detection, and the consequences of the disease? How can you cure?


परिचय - एक या एक से अधिक श्वास नलिओं का जीर्ण विस्फारण तथा साथ ही द्वितीय संक्रमण ( Seondary infection ) ।

रोग के कारण -
• रोग किसी भी अवस्था में । पर 30 से 40 वर्ष के पुरुषों को अधिक । 

• अन्य रोगों जिनमें तत्वीभवन होता है , के कारण उत्पन्न होता है ।

• रोमांतिका , काली खाँसी , न्यूमोनिया ( जो पूर्ण रूप से ठीक न हुआ हो ) , श्वसनलीका अवरोध , दुर्दम अवुद , जीर्ण यक्ष्मा रोग , एन्यूरिज्म , सिफलिसी संकीर्णता , इम्पाइमा आदि रोग इसके उत्पादक कारण है ,


रोग के लक्षण -
• दौरे के साथ काँस एवं कफ भी । 

• कफ प्रारम्भ में थोड़ी मात्रा में बाद को अधिक मात्रा में अता है । 

• कफ एवं श्वास में बदबू कफ में गन्ध विभिन्न प्रकार के जीवाणुओं के द्वारा होती है । 

• अनेक बार मुख से रक्त भी आता है ।  

• ब्रान्को न्यूमोनिया आदि होकर कष्ट श्वास भी । 

• दुर्बलता , आलस्य , ज्वर , भूख की कमी आदि लक्षण रोग की स्थिति एवं अन्य संक्रमणों के अनुसार कम या अधिक ।


रोग की पहिचान
• परीक्षा करने पर दोनों फेंफड़ों के निचले भाग में रुक्ष खरखराहट एवं रॉन्काई की आवाज । । 

• अंगुलियों का क्लीबंग , खाँसी के साथ खून का आना एवं नाखून ऊपर उठ जाते है ,

• करवट बदलते समय कफ में वृद्धि । । 

• थूक अधिक देर तक रखा रहने पर तीन परतों में विभाजित । 1 . तलपट 2 , तरल 3 . झाग । 

• एक्स - रे में ब्रान्कोग्राफी से सही निदान । ।


रोग का परिणाम
• प्रारंभिक अवस्था में रोग ठीक हो जाता है , पर बढ़ी हुई अवस्था में इसको रोक पाना भी असम्भव होता है । । 

• व्रान्को न्यूमोनियाँ , फुफ्फुसगेन्ग्रीन तथा फुफ्फु स विद्रधि ( Lungs Absecss ) एवं पायमियो और रक्तस्त्राव ( घातक स्वरूप का ) इसके उपद्रव हैं । ।


श्वसनी विस्फार की चिकित्सा व्यवस्था 

• बिस्तर पर आराम ( Bed Rest ) । । 

• धूल , धुवाँ एवं घाँस से बचें । । 

• शुष्क एवं गर्म वातावरण में निवास । । 

• स्त्रावों को निकालने के लिये खाँसना एवं छाती को ठोंकना । इससे कफ निकलता है । 

• कफ को ढीला करने वाले द्रव्य यथा — ' एसिटाइल सिस्टीन को एपरोसौल के द्वारा देने से कफ पिघलने लगता है । पोस्चूरल ड्रेनिज के पूर्व गर्म पेय लेने से गाढ़ा कफ पतला करने में सहायता मिलती है ।

• ब्राडस्पेक्ट्रम एण्टीवायोटिक्स - यथा ' एम्पीसिलीन 500 मि . ग्रा . दिन में 4 बार । अथवा सेप्ट्रान या वैक्ट्रिम 2 टिकिया दिन में 2 बार । । 

• एक्सपेक्टोरेण्ट यथा ' फेन्सेडिल कफलिंक्टस / जीट एक्सपेक्टोरेण्ट । 

• क्रियोजोट अथवा टि . वेन्जोइन का भपारा दिन में कई बार । 

• पर्याप्त पोषण दें ।

नोट - कुछ समय चिकित्सा करने के उपरान्त रोग नियंत्रित हो जाने पर यदि उसका विस्तार अधिक नहीं है तो फेंफड़े के विकृत भाग को काटकर निकाल देने से रोग का निर्मूलन हो जाता है ।

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