अनार्तव [ एमेनोरीआ - Amenorrhoea ] की समस्या क्यों होती है ? इसका इलाज कैसे संभव है ? Why is the problem of amaranth [amenoria-amenorrhoea]? How is it possible to treat it?

अनार्तव [ एमेनोरीआ - Amenorrhoea ] 

अनार्तव [ एमेनोरीआ - Amenorrhoea ] की समस्या क्यों होती है ? इसका इलाज कैसे संभव है ? Why is the problem of amaranth [amenoria-amenorrhoea]? How is it possible to treat it?


नाम  मासिक धर्म ( रजोस्राव ) की अनुपस्थिति / मासिक धर्म बन्द हो जाना , नष्टार्तव । एमेनोरिह्या - Amenorrhoeal 

परिचय  अनार्तव , मासिक धर्म अथवा आर्तव स्त्राव का अभाव अथवा उसका रुक जाना । स्वस्थ दशा में 28 दिन बाद रजोधर्म ( M . C . ) आता है । इस प्रकार स्त्री की योनि से निकलने वाले मासिक स्राव का न होना या एक बार आरम्भ होकर बंद हो जाना अनार्तव कहलाता है ।


रोग के कारण →

• स्त्री के शरीर में रक्त की कमी  ( अनीमिया )  

• गलत विधियों से सम्पर्क / सम्भोग जिससे गर्भाशय का मुख टेढ़ा या बन्द हो जाये । 

• मासिक धर्म के समय सर्दी लगने से । अथवा भीग जाने से । 

• शीतल भोजन एवं पेय का अधिक प्रयोग । 

• भय , शोक , क्रोध आदि से । । 

गर्भावस्था में मासिक धर्म बंद हो जाता |


रोग के लक्षण →

• मितली / वमन । 

• शरीर में गर्मी की अनुभूति । 

• दर्द एवं कष्ट । 

• हाथ - पैरों में जलन । 

सिर में चक्कर । 1 

• स्तनों में दर्द । 

• कमर , पेट एवं पेडू में दर्द ।  

• निरन्तर आलस्य । 

• कानों में सांय - सांय की आवाज ।


अनार्तव निम्न प्रकार का →

1 . डाइटरी एमेनोरिल्ला या न्यूट्रीशनल एमेनोरिया – प्रतिबन्धित आहार अथवा उपवास करने से वजन घट जाने के साथ मासिक धर्म या अतिस्राव का रुक जाना । 

2 . इमोशनल एमेनोरिया - स्तब्धता , भय अथवा हिस्टीरिया में मासिक धर्म का रुक जाना । 

3 . पैथोलोजिकल एमेनोरिह्मा - किसी आंगिक रोग के कारण होने वाला अनार्तव , विकृतजन्य अनार्तव । । 

4 . फिजियोलोजिकल एमेनोरिह्या - यौवन के पूर्व अतिवस्राव का अभाव तथा गर्भावस्था , दुग्धश्रवण काल में एवं रजोनिवृत्ति के पश्चात् आर्तव - स्राव का रुक जाना जो किसी आंगिक रोग से सम्बन्धित नहीं होता ।

5 . प्राइमरी एमेनोरिया - यौवनारम्भ के पश्चात् अर्थात् 18 वर्ष की आयु के पश्चात् भी मासिक धर्म का न होना , प्राथमिक अनार्तव । । 

6 . सेकेण्डरी एमेनोरिह्या - मासिक धर्म का एक बार यौवनारम्भ पर शुरू होकर बाद में रुक जाना , द्वितीयक अनार्तव । ।


० ० कोई भी लड़की जब युवावस्था में प्रवेश करती है तो वह अवस्था प्यूवर्टी कहलाती है । मासिक धर्म का रक्तस्राव सामान्य जो युवा स्त्रियों को प्यूवर्टी से लेकर 45 वर्ष तक प्रत्येक मास आता है वह मेनसिस ( Menses ) या Mennstruation Cycle ( M . C ) कहलाता है ।


इसके विपरीत स्थानिक , सार्वदैहिक , मानसिक , अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के विकार से उत्पन्न मासिक धर्म का अनुपस्थित होना या पूर्णतया बंद हो जाना जो कि सामान्य शरीर क्रिया विज्ञान ( फिजिॉलॉजी ) के अनुरूप न हो ।

प्राइमरी एमेनोरिल्ला निम्न कारणों से →

• मासिक आघात । 

• भूख न लगना । 

• मानसिक परेशानियों के कारण । 

• पागलपन 

• अवसाद ( डिप्रेशन ) 

• गर्भाशय का छोटा होना यानी इन्फैन्टाइल यूटेरस या उसकी अल्प वृद्धि । 
• डिम्ब ग्रन्थियों का अधूरा विकास । 


सेकेण्डरी एमेनोरिह्या निम्न कारणों से → 

• यक्ष्मा जैसी पुरानी बीमारी । 

• रक्ताल्पता 

• कुपोषण 

• मोटापा


रोग की पहिचान →

• इतिहास ( History ) , रोगिणी की आयु , सर्जिकल इण्टरफेरेन्स , सेकेण्डरी एमेनोरिह्या में मासिक धर्म का इतिहास , फेमिली हिस्टरी ( ट्यूबरकुलोसिस के लिये ) , ट्यूमर के लिये पेट का ऑपरेशन , ओबसट्रेक्टिल हिस्टरी , सेकेण्डरी सेक्स करेक्टर की वृद्धि , यूटेरस का आकार , वेजाइना एवं ओवरी की Abnormality आदि के सम्बन्ध में निरीक्षण एवं खोजकर वास्तविक कारण का पता लगाना चाहिये । ताकि चिकित्सा तदनुसार की जा सके ।


रोग का परिणाम → 

• उचित समय पर उपचार न होने से इससे हिस्टीरिया , बेहोशी , संन्यास , अवसाद , वायु , उदासी , पक्षाघात , आँखों से कम दिखायी देना आदि नाना प्रकार के रोग हो जाते हैं ।

नोट - • रक्तस्राव बंद होने के कई कारण हो सकते हैं जिनका निर्णय स्त्री से बातचीत तथा निरीक्षण द्वारा किया जाता है । सम्भव हो तो ऐसी स्त्री के रक्त की जाँच हीमोग्लोबिन ( Hb % ) , श्वेत कणों की भिन्न - भिन्न संख्या ( D . L . C . ) तथा कुल संख्या ( T . L . C . ) के साथ E . S . R . एवं वक्ष का एक्स - रे ( X - RayChest P . A . View ) अवश्य करालें । 

• यूरिन एनालिसिस ( ग्लाइकोसूरिया ) , ग्लूकोज टोलेरेन्स टेस्ट , वाटर इसक्रीसन • टेस्ट्स , क्यूरेटेज , हिस्टेरोसालीपंगोग्राफी , वेजाइनल स्मीअर , हार्मोनल एसेज , कल्डोस्कोपी । गाइनाकोग्राफी - निदान में विशेष सहायक । ।


चिकित्सा विधि → 

• रोग के मूल कारण की चिकित्सा करें ।

• रागिणी को शान्त रखकर उसे मनोविकारों से बचायें ।

• शीत एवं भीगने से बचावें ।

• मोटी महिलाओं की चिकित्सा ‘ थाइराइड से करें ।

• रक्तवर्धक औषधि चिकित्सा आवश्यक ।


पथ्यापथ्य / सहायक एवं आनुषांगिक चिकित्सा →

• बर्फ और समस्त शीतल , कब्ज करने वाले भोजनों का प्रयोग न करें । पेट और बाकी समस्त शरीर को सर्दी से बचायें । । जल्दी पचने वाले भोजन और गाय का ताजा दूध प्रयोग करें । 

• सुबह - शाम वायु में टहलाने के लिये पराशर्श दें । गर्भ स्ना उत्तम रहता है ।

• • यह अनुभव से देखा गया है कि इस समस्या की चिकित्सा सदैव सफल नहीं होती , क्योंकि अधिकतर स्त्रियों में इसके वास्तविक कारण का पता नहीं लगाया जा सकता है और कुछ दशाओं में यह असाध्य दिखायी देता है जो रोगी की आर्थिक तथा सामाजिक कठिनाइयों के कारण अधिक तथा अन्य कारणों से कम लगता है । 

• ऐसे रोगियों को कुछ मास तक फारल्यूटाल ( Tab . Farlutal - वाल्टर बुशनेल ) की 2 टिकिया प्रतिदिन या ओरगाल्यूटिन ( Orgalutin tab . ) नि . ' इंफार की 1 टिकिया प्रतिदिन 20 दिन तक दें ।

यदि रक्तस्राव हो रहा हो तो रक्तस्राव बंद होने के 5वें दिन से आरम्भ करें । लाभ न मिले तो रोगी को अस्पताल ( महिला चिकित्सालय ) भेज दें । जहाँ रोग के कारणों का पता लगाकर चिकित्सा की जा सके । क्योंकि इस समस्या का सम्बन्ध अन्य तमाम रोगों से होता है ।


अनातेव चिकित्सा - एक विकट समस्या 

• कारण के अनुसार चिकित्सा । । 

• ई . पी . फोर्ट ( E . P . Forte ) 1 टि . दिन में एक बार 3 दिन तक । 

अथवा 

  मेन्स्ट्रोजन 1 गोली दिन में 4 बार 5 दिन तक । 

अथवा 

  ड्रफास्टोन ( Duphaston ) ' डूफार कं — की 1 - 2 टिकिया दिन में 2 बार मासिक स्त्राव के चक्र के 5वें दिन से 25वें दिन तक दें । 

• प्रिमोल्यूट - एन ( Primolut - N जर्मन रेमेडीज ) 1 टि . दिन में 2 बार प्राइमरी एवं सेकण्ड्री एमेनोरिह्या में लगातार 8 - 10 दिन तक दें ।  

•• अनार्तव की चिकित्सा कारणों के अनुसार की जाती है । 

• कुछ सामान्य रोग यथा - थायसिस ( Phthisis ) अथवा डायबिटीज की चिकित्सा आवश्यक ।

• पेल्विक ट्यूबरकुलोसिस की चिकित्सा क्षय निरोधी ' औषधियों से करनी चाहिये । 

• ' एड्रीनल कोर्टीकल एडीनोमा ' अथवा ' एरोनोव्लास्टोमा ’ को ‘ लेप्राटोमी के द्वारा दूर करें । । 

• एनोरेक्सिया नर्वोसा चिकित्सा कठिन । 

• अस्पताल में भर्ती । निरन्तर रोगी का निरीक्षण आवश्यक । 

• गोनेडो - ट्रोफिन थेरापी एवं कभी - कभी क्लोमीफेन ( Clomiphene ) । फिर भी एमेनोरिह्या बनी रहे तो आहार ( Nutrition ) में सुधार आवश्यक,

• मोटापा रोगियों में वजन घटाने के लिये Low Caloric diet आहार । । । 

• एमेनोरिह्या एवं बांझपन ( Infertility ) में -

•• क्लोमीफेन ( Clomiphene ) 50 मि . ग्रा . नित्य ( per day ) 5 दिन तक । यदि 35 दिन तक मासिक स्त्राव ( M . C . ) न आये तो मात्रा बढ़ाते हुए 100 मि . ग्रा . नित्य 5 दिन तक । तत्पश्चात् ( Thence ) 150 मि . ग्रा . प्रतिदिन 5 दिन तक । रोगी को प्रति सप्ताह पर देखते रहें । 

•• ब्रोमोक्रिप्टीन ( Bromocriptine ) 1 टिकिया ( 2 . 5 मि . ग्रा . ) रात सोते समय रोजाना 15 - 7 दिन के बाद 2 टि . रोजाना । 5 से 9 दिन के पश्चात मात्रा बढ़ाते हुए 3 टिकिया रोजाना । प्रोलेक्टिन लेवल नियमित रूप से चैक करें । चिकित्सा अवधि 6 . 9 माह ।


सर्जिकल ट्रीटमेण्ट → ओवरी के ट्यूमर , एड्रीनल कोर्टीकल एडीनोमा एवं स्टेन लेवेन्थल सिण्ड्रोम में आवश्यक । 

नोट  स्टेन लेवेन्थल सिण्ड्रोम की शल्य चिकित्सा उस समय आवश्यक होती है जब मोटापा घटाते हुए प्रेडनीसोलोन अकेले अथवा क्लोमीफेन के साथ 9 - 12 तक करते रहते सफलता नहीं मिलती है ।


एमेनोरिह्या की चिकित्सा का निर्धारण निम्न रूप से ( Base of Treatment ) •

1 . सार्वदैहिक चिकित्सा - इसके अन्तर्गत रोगिणी में उपस्थित रक्त की कमी , यक्ष्मा , मधुमेह , स्थूलता ( मोटापा - Obecity ) आदि को दूर करना चाहिये । उसका सामान्य स्वास्थ्य पौष्टिक आहार द्वारा सुधारना चाहिये । यदि कारण मानसिक हो तो रोगिणी को विश्वास दिलाकर भय , शोक , चिन्ता से मुक्ति दिलाने का प्रयास करें । 

2 . श्रेणि चिकित्सा - यथा हाइमन ( योनि को ढकने वाली झिल्ली ) अथवा डिम्ब ग्रन्थियों में पुटी ( Cyst ) की उपस्थिति में शल्य चिकित्सा करनी चाहिये । यदि अन्तर्गभर्शियकला ( Endometrial membrane ) स्वस्थ और सामान्य न हो तो आखरण  क्रिया ( By Curatte ) द्वारा उसे सामान्य बनाया जा सकता है ।

3 . हार्मोन चिकित्सा - हार्मोन की कमी में इस चिकित्सा से लाभ मिलता है । यदि श्रोणि प्रदेश में कोई विकृति न हो तो हार्मोन चिकित्सा से मासिक स्राव प्रारम्भ हो जाता है । । 

• अनार्तव की चिकित्सा में स्त्री हार्मोन ( ईस्ट्रोजन ) के किसी संश्लिष्ट योग यथा एथिनिल ' ईस्टेडियोल ' का सेवन कुछ समय तक कराया जाता है । यह इन्जेक्शन और टैबलेट के रूप में उपलब्ध रहता है यथा । 

इन्जेक्शन रूप में - ईस्ट्रेडियोल बेन्जोएट ( न्यूटोनोस्टूिल - राउसल ) के नाम से आता है ।

टेबलेट रूप में — ' एथिनिल ईस्ट्रेडियौल ( लाइनोराल - आर्गेनन ) नाम से आती है । इसकी 0 . 05 मि . ग्रा . की 1 - 1 टि . सुबह - शाम 21 दिन तक सेवन करायी जाती है । सेवन बन्द कराने के 3 से 5 दिन के अंदर मासिक स्राव प्रारम्भ हो जाता है ।

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••• कुछ औषधि निर्माताओं ने एथिनिल ईस्ट्रेडियोल + प्रोजेस्ट्रोन अथवा एथीस्टीरोन मिलाकर इन्जेक्शन तथा टेबलेट्स का निर्माण किया है । यथा -
डाईसैकरोन फोर्ट इन्जे . ( निकोलस ) - 1 एम्पुल मांसपेशी में । दूसरा इन्जे . 28 दिन बाद । इस प्रकार 4 - 5 तक प्रति माह 1 इन्जे . पर्याप्त रहता है । प्रायः एक या दो इन्जेक्शनों के बाद मासिक स्राव जारी हो जाता है । 
अथवा - इन्जे . ई . वी . फोर्ट - उपरोक्त इन्जेक्शन की तरह । 

नोट -  प्राथमिक और द्वितीयक प्रकार के अनार्तव ( Primary and Secondary Amenorrhoea ) में लाभकारी । ।

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अथवा • टेबलेट मेन्सट्रोजन ( Tab . Menstrogen ) 5 टिकिया रोजाना 5 दिन तक । 3 - 4 मासिक चक्रों में इसी प्रकार से दें । मासिक स्त्राव जारी होने के बाद इसका क्रम इस प्रकार से -
मासिक धर्म के 5वें दिन से - प्रतिदिन 4 टि . 5 दिन तक लगातार । 

नोट -  5वें दिन M . C . रुके या न रुके टिकिया देना प्रारम्भ कर देना चाहिये । 

• इसी प्रकार 3 - 4 मासिक चक्रों में औषधि के क्रम चलायें । कुछ मास बाद मासिक धर्म नियमित रूप से होने लगेगा ।


•• अनार्तव की चिकित्सा एक विशिष्ट क्रम से - एक चमत्कारी प्रभाव ••

• लाइनोराल ( 0 . 05 मि . ग्रा . टि . नि . आर्गेनन ) | 1 - 1 टि . दिन में 2 बार 25 दिन तक । 16वें दिन से 25वें दिन तक - मैन्स्ट्रोजन । 2 - 2 टिकिया प्रतिदिन । 25वें दिन से दोनों औषधियाँ बन्द । । 

• प्रायः 3 से 5 दिन के अंदर रक्तस्राव प्रारम्भ हो जाता है । 

• अगली बार मासिक स्राव का पहला दिन समझकर 5वें दिन से चाहे रक्त रुके या न रुके उपरोक्त चिकित्सा प्रारम्भ कर देनी चाहिये । 

• इस प्रकार के 4 - 5 कोसों के बाद स्त्री को मासिक नियमित रूप से होने लगता है ।

याद रखिये - यदि गर्भावस्था नहीं है और श्रोणि प्रदेश ( Pelvic region ) में किसी प्रकार की वैकृत अवस्था नहीं है तो उपरोक्त वर्णित चिकित्सा बहुत सफल सिद्ध होती है । साथ ही 4 - 5 मासों में ही मासिक चक्र प्राकृत रूप से स्थापित हो जाते हैं ।

सावधान → • अनार्तव की चिकित्सा करने से पहले स्त्री की गर्भावस्था ( Pregnancy ) परीक्षा अवश्य कर लेनी चाहिये । कहीं स्त्री गर्भवती तो नहीं है जिससे मासिक धर्म बंद हो गया हो । 

• गर्भ परीक्षण ( Pregnancy test ) के लिये मूत्र में मानव कोरिओनिक गोनेडोट्रोफिन नामक हार्मोन्स का पता लगाना चाहिये । यदि मूत्र में यह उपस्थित होता है तो सगर्भावस्था समझी जाती है ।


•• एमेनोरिह्या की चिकित्सा विशेष लक्षणों / विकृतियों के आधार पर ••

• उत्तम भोजन , दोपहर बाद विश्राम , स्वच्छ जल पीने को । । 

• आइरन ( Iron ) की 1 टिकिया रोजाना । ।  

• कृमिनाशक चिकित्सा करें ( Deworming is done ) ।


प्राइमरी एमेनोरिह्या →

• डिफेक्टिव जेनीटेलिया गूप - हाइमन ( Hymen ) की उपस्थिति में हाइमेनोटॉमी ( Hymenotomy ) ' टरनर सिण्ड्रोम की चिकित्सा - ईस्ट्रोजन थेरापी से । चिकित्सा 11 - 12 साल की उम्र में प्रारम्भ । 

• इण्डोक्राइनोपेथिक गुप - हाइपोथेलामस , पिट्यूटी , थाइरायड , एड्रीनल , एवं पेन्क्रियाज सम्बन्धी इणक्राइन विकार की चिकित्सा हेतु रोगी को इण्डोक्राइनोलॉजिस्ट के पास रेफर कर देना चाहिये । ओवरी के ट्यूमर की चिकित्सा शल्य क्रिया द्वारा । पोलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज की चिकित्सा - सेकेण्ड्री एमेनोरिह्या के अन्तर्गत करें ।

औषधि अनार्तव ( Drug Amenorrhoea ) की चिकित्सा - औषधि बन्द करने से । एनोरेक्सिया नर्वोसा को रोगिणी को अस्पताल में भर्ती करा दें एवं उचित आहार व्यवस्थज्ञ । । इन्सुलिन एवं लागेक्टिल नित्य दें । शरीर भार बढ़कर मॅसिस ( Menses ) चालू । । 

• सिस्टेमिक ट्रीटमेण्ट - अनीमिया एवं यक्ष्मा ( T . B . ) की चिकित्सा करें । 


सेकेण्डरी एमेनोरिह्या →

ड्रग एमेनोरिह्या की चिकित्सा - औषधि बंद करने से । 
इण्डोमेट्रियल ट्यूबरकुलोसिस - कीमोथेरापी चिकित्सा । । 

• इण्डोक्राइनोपेथिक गुप - उपरोक्त अनुसार । रसिस्टेण्ट ओवरी सिण्ड्रोम की चिकित्सा गोनेडोट्रोफिन थेरापी से । ।

• पोलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज ( PCOD ) - टैबलेट प्रेडनीसोलोन 10 मि . ग्रा , रात को सोते समय 6 माह तक । लाभ न मिलने पर कण्ट्रासेप्टिव पिल ( ओवरल - Ovral ) माह में 3 सप्ताह 6 से 12 माह तक । 

• साधारण ( Mild ) PCOD ( With delayed heavy menses ) के लिये फारल्टाले । ( Farlutal ) 10 मि . ग्रा . रोजाना माह में 10 दिन । 6 चक्रों तक । 

• पी . सी . ओ . डी . के साथ बांझपन ( For PCOD with infertility ) टैबलेट प्रेडनीसोलोन 10 मि . ग्रा . रात सोते समय 6 माह तक । लाभ न मिलने पर कण्ट्रासेप्टिव पिल ( ओवरल Ovral ) माह में 3 सप्ताह 6 से 12 माह तक । । । 

• साधारण ( Mild ) PCOD ( with delayed heavy mendes ) के लिये फारलूटाल ( Farlutal ) 10 मि . ग्रा . रोजाना माह में 10 दिन । 6 चक्रों तक ।

• पी . सी . ओ . डी . के साथ बांझपन ( For PCOD with infertility ) - युवतियों में , प्रेडनीसोलोन थेरापी 6 - 12 माह तक । 

• अल्टरनेटिव थेरापी - क्लोमीफेन थेरापी ( Clomiphen therapy ) 50 मि . ग्रा . मुख द्वारा 5 दिन तक । प्रतिमाह के हिसाब से 100 मि . ग्रा . , 150 मि . ग्रा . अथवा 200 मि . ग्रा . बढ़ाते हुए । 

ईस्ट्रोजन - प्रोजेस्टोन रिप्लेसमेण्ट थेरापी - 

• इथीनिल ईस्ट्राडिओल ( Ethinyl Oestradiol ) -

1 टिकिया ( 0 . 05 मि . ग्रा . ) 2 रात सोते समय रोजाना 20 दिन तक । साथ में ( Combined with ) टैबलेट फारलूटाल ( Farlutal ) 10 मि . ग्रा . अथवा डूफास्टोन ( Duphaston ) 15 मि . ग्रा . रोजाना साल में अन्तिम 7 दिन । 6 कोसों तक ( 3 माह ) । 

नोट - मासिक धर्म वापिस न आने पर पुनः कोर्स दोहरायें । ।


अनातेव में सेवन कराने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेन्ट टैबलेट 

1 . ० फोरलूटाल ( Farlutal ) ' वाल्टर वुशनैल10 मि . ग्रा . टै. → 1 टिकिया रोजाना 5 - 10 दिन तक । 2 से 3 चक्रों तक । 

     ० सेकेण्डरी एमे नोरिह्या , अनियमित गर्भाशयगत् रक्तस्राव में । । 10 टिकिया 51 . 08 रुपये की । → 1 टिकिया रोजाना 5 - 10 दिन तक । 2 से 3 चक्रों तक । 

2 . लाइनोराल ( Lynoral ) इन्फार 0 . 05 मि . ग्रा . टि . → 1 टि . रोजाना 25 दिन तक । 16वें से 25वें दिन तक साथ में प्रोजेस्टेरोन । 10 टि . 9 . 50 रुपये की । 

सावधान - ० गर्भावस्था में वर्जित । । 

3 . ओर्गालूटिन ( Orgaluten ) इन्फार । →  1 टि , रोजाना 20 दिन तक । मासिक के 5वें दिन से । 10 टि , 10 रुपये की । 

4 . ओवराल ( Oral - वीथ ) 21 टि . 16 . 56 रुपये की । → अनयिमित मासिक धर्म में विवरण - पत्र के अनुसार । । 

5 . प्राइमोलूट - एन ( Primolut - N ) जर्मन रेमेडीज 5 मि . ग्रा . टे . 10 टि . 28 . 89 रुपये में । गर्भावस्था में निषेध । । → दीर्घकालिक प्राइमरी एवं सेकेण्डरी एमेनोरिह्या में विवरण - पत्र के अनुसार । 

6 . प्रोक्टीनाल ( Proctinal ) ‘ विडल शायर 2 . 5 मि . ग्रा . की टि . । । 10 टिकिया 100 . 11 रुपये की । → यह Bromocriptine है । 1 टि . दिन में 2 - 3 बार भोजन के साथ । 1 टि . से प्रारम्भ कर सप्ताह के अंदर श्रीराप्यूटिक डोज पर आ जायें । चिकित्सा अवधि 6 माह से अधिक नहीं ।


7 . सेरोक्रिप्टिन ( Serocriptin ) , सीरम इण्स्टीट्यूट 2 . 5 मि . ग्रा . टैबलेट 2X5 रुपये 97 . 92 →  ब्रोमोक्रिप्टीन है । मात्रा एवं चिकित्सा अवधि उपरोक्त अनुसार । 

• बांझपन में भी उपयोगी । ‘ गेलेक्टोरिया । की भी उपयुक्त औषधि ।


••• अनार्तव में लगाने योग्य सुप्रसिद्ध ऐलो . इन्जेक्शन •••

1 . लुट - स्टोन फोर्ट ( Lut - Estrone forte ) मक → 1 मि . ली . के एक एम्पुल का सप्ताह में एक बार माँस में लगावें । 

2 . ई . पी . फोर्ट ( E . P . forte ) ' यूनिकेम ' → 1 मि . ली . माँस में । आ . नु . 3 इन्जे . 3 दिन में । 

3 . ओस्टेरोन ( Osterone ) लायका → 1 मि . ली . का प्रतिदिन 4 - 5 दिन तक माँस में इन्जेक्शन लगावें । । 

सावधान - गर्भावस्था में निषध । । 

4 . मेन्स्ट्रोजेन ( Menstrogen ) इन्फार → 1 मि . ली . माँस में 2 दिन । तीव्र अवस्था में इसका फोर्ट इन्जेक्शन लगावें । टि . भी आती है । 1 टि . प्रतिदिन 34 मासिक चक्र तक दी जाती है ।


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