खांसी की बीमारी क्या है ? इसके रोकथाम के लिए क्या - क्या कर सकते है आप ? What is cough disease? What can you do for its prevention?

कास [ Cough ] खाँसी 



पर्याय — सामान्य भाषा में - खाँसी , कास , खंग और अंग्रेजी में कफ ।।

परिचय - जिस विकार में रोगी बार - बार खाँसता है , और सूखी खाँसी आती है या गले से बलगम निकलता है , वह कास है ।सामान्य व्यवहार में कास को शुष्क कास तथा आई ( गोली ) कास दो प्रकारों में देखा जा सकता है ।

फुफ्फुस के रोगों का यह सर्व प्रमुख लक्षण है ।श्वास मार्ग में अथवा फुफ्फुसो में स्थित किसी बाह्य पदार्थ , श्वास अवरोधक पदार्थ अथवा क्षोभक Irritating ) पदार्थ को बाहर फेंकने का यह प्रयास है ।।

याद रखिये - कास के साथ कफ ( Sputum ) हो सकता है अथवा नहीं भी हो सकता पहले प्रकार को गीली ( Productive Cough or cough with expectoration ) तथा दूसरे प्रकार को सूखी खाँसी ( Dry or Non - productive cough ) कहते हैं ।

रोग के प्रमुख कारण  >>

मुख , नासिका तथा गले में धूम के प्रवेश करने से या धूल गर्द आदि के उक्त मार्गों में चले जाने से अथवा वायु द्वारा प्रेरित आमरस के मुख की ओर आने से , व्यायाम तथा रूक्ष अन्न सेवन करने से , भोजन के विरुद्ध मार्ग में चले जाने से तथा मलादि तथा छींकों के वेग के अवरोध से कास की उत्पत्ति होती है । 
खाँसी श्वसन तंत्र के रोगों , रक्ताधिक्य , हृदयपात और मध्यावकाश ( Mediastinum ) के अर्बुदों का एक लक्षण होती है ।
प्रमुख लक्षण >>

खाँसी मुख्यतः दो प्रकार की होती -

1 . शुष्क कास - कास में कफ प्रेषक न । होना , बार - बार सूखी खाँसी होना , छाती में दर्द , सिर - शंख - उदर तथा पाश्र्व में शूल , उरोदाह या वक्ष में घुटन , ज्वर , मुख शुष्कता , प्यास की अधिकता , मुंह में कड़वापन , स्वरभेद आदि लक्षम होते हैं । 

2 . उत्पादी अथवा आद्र  कास - कास में बार - बार खाँसी आना , बहुत - सा गाढ़ा । कफ निकलना , मुंह का कफवृत्त रहना , दिन भर आलस्य , शिरःशूल , क्षुधानाश । तथा शरीर में गुरुता आदि लक्षण होते हैं ।

कास एक लक्षण है तथा दूसरी ओर यह स्वंतत्र रोग भी है , क्योंकि दोनों प्रकार की अवस्थायें उत्पन्न होती हैं । अनेक रोगों में काम एक लक्षण या उपद्रव के रूप में मिलता है , और जहाँ यह एक व्याधि के स्वरूप का होगा , वहीं इसके लक्षण अवस्था तथा दोषानुसार रूप आदि भी रहेगा और तदनुरुप इसका निदान - चिकित्सा अभिप्रेत होगी ।

याद रखिये -

-  ग्रसनी शोथ ( Pharyngitis ) , तुण्डिका शोथ ( Tonsilitis ) , स्वरयंत्र शोथ ( Laryngitis ) , श्वसनी विस्फार , श्वरानी शोथ , न्यूमोनिया , काली खांसी फुफ्फुसावरण शोथ आदि विकारों में कास संक्रमण ( Infection ) से होती है । 

-  यान्त्रिक क्षोभ - धूम्रपान , स्वरयंत्र या श्वास प्रणाली में किसी वाद्य पदार्थ ( शल्य - EB ) का फंसना भी कास पैदा करता है । ऐसी खाँसी मध्य स्थानिक ( Mediastinal ) अर्बुद या एन्युरिजम की उपस्थिति में पायी जाती है। 

-  प्रतिवर्त ( Reflex ) - अजीर्ण , उदर कृमि , हदयावरण शोथ , कर्ण रोग गुथ | ( Wax ) , उदर विकार , यकृत विद्रधि आदि से भी कास की उत्पत्ति हो सकती है ।


रोग की पहिचान >>

श्वसन तंत्र के रोगों में कास राबसे पाया जाने वाला लक्षण है । 

-  खाँसने पर कफ का निकलना श्वसनी शोथ ( Bronchitis ) , तमकश्वास ( Asthma ) आदि में देखा जाता है । इस बात का सूचक है कि फुफ्फुस में , श्वसनी ( ब्रान्करा ) या ऊध्र्व श्वसन तंत्र में कहीं कोई विकृति है । 

-  शुष्क कास हो तो यह जानकारी मिलती है कि गले का स्वर तंत्र में कहीं रक्ताधिक्य ( कजेसन - Congestion ) है अथवा फुफ्फुसावरण शोथ है । 

-  फेरिजाइटिस , टांसिल प्रदाह , तीव्र ब्रांकाइटिस , प्लूरिसी , यक्ष्मा की प्रारम्भिक अवस्था आदि में सूखी खाँसी । आती है । कान में मैल तथा बच्चों के पेट के विकार में भी सूखी खाँसी आती है । । 

-  गीली खाँसी - चिरकारी , खान्काइ टिस , श्वसनी विस्फार ( जांकियेक्टे सिस ) , राजयक्ष्मा , फुफ्फुस की विद्रधि  फुफ्फस कैंसर आदि में आती है । 

-  खाँसी के दौर - श्वास रोग , कुक्कुर खाँसी , इयोसिनोफीलिया , श्वरानी विस्फार , बढ़े हुए राजयक्ष्मा , श्वसन नलिका के कैंसर आदि में आते हैं । → 

-  कमजोर और छोटी - छोटी खाँसी - फुफ्फु सावरण शोथ ( Pleurisy ) में आती है ,इसमें पीड़ा के कारण रोगी जोर से नहीं खाँस पाता । न्यूमोनिया आदि में फुफ्फुसावरण शोथ भी होने पर ऐसी खाँसी आती है । । 

-  हिस्टीरिया की खाँसी जोर से आती है पर उसमें कुछ निकलता नहीं ।

रोग का परिणाम >>

-  वृद्धावस्था में होने वाली सभी प्रकार की खाँसियों को याप्य बताया गया है । 

-  यक्ष्मा जन्य कास क्षीण व्यक्तियों के शरीर का नाश कर देता है । । 

-  बलवान रोगियों में यह कभी साध्य तथा कभी पाध्य होता है । स्वाभाविक खाँसी फेफड़े से निकलने वाले कफ या स्राव को बाहर निकालने के लिये एक प्राकृतिक साधन है , परन्तु जब हम इस साधन का दुरुपयोग करते अर्थात् कफ या ब्राव की अनुपस्थिति में भी खांस - खाँस कर कफ बाहर निकालने की कोशिश करते हैं तो गले में अना वश्यक क्षोभ उत्पन्न हो जाता है और यही क्षोभ दुष्ट खाँसी का मूल कारण होता है । 

नोट - रोगी को यथासम्भव जाँसना नहीं चाहिये । । 

-  अधिक बलगम निकलना आधारभूत अच्छा नहीं होता , क्योंकि यह बढ़ी हुई ब्रोन्काइटिस , एवं यक्ष्मा ( TB ) की ओर ले जाने वाली होती है । दौरे के रूप में उठने वाली खाँसी प्रायः काली खांसी  होती है जिसका विवरण संक्रामक रोग चिकित्सा विभाग के अन्तर्गत दिया गया है ।

चिकित्सा विधि >>

-  मुल कारण की देकर प्रारम्भ में मृदु रेचक ( Luxatives ) तथा पसीना ‘ लाने वाली औषधि दें । 

-  शैया पर पूर्ण विश्राम ( Complete bcd res ) । । 

-  गर्म जगह में रखकर रोगी को शीत बचायें । 

-  पीने के लिये गर्म जल । । । 

-  शाम को सोने से पूर्व कफ निरोधी औषधि | अवश्य दें । → 

-  मूल कारण दूर करने के बाद भी खाँसी न जा रही हो तो उसकी लाक्षणिक चिकित्सा करें । । 

याद रहे - सामान्य रूप से कास की चिकित्सा में रोगी की प्रकृति , बल तथा रोग की अवस्था , दोष तथा भेद के अनुसार अनेक औषधि योगों का प्रयोग किया जाता है । ।

सहायक चिकित्सा >>

-  टि . बेन्जोइन कं , गर्म पानी में उबाल कर उसकी भाप ( Inhalation ) सुंघायें ,

-  विक्स वेपोरब अथवा अन्य बाम अथवा लिण्टैरीबिन्थ की छाती एवं गले पर मालिश । । 

-  नई खाँसी में हल्की गर्म चाय ( अदरक + तुलसी युक्त ) , हल्की कॉफी , गर्म पानी + नीबू का रस या गर्म जल में ग्लूकोज मिलाकर दें । सब्जी का गर्म यूष लाभकारी होता है । । 

-  डिहाइड्रेशन को रोकने के लिये अधिक मात्रा में तरल दें ।

नोट - घूम्रपान निषिद्ध कर दें ,

खाँसी की चिकित्सा में प्रधान बात ध्यान देने की यह है कि रोगी को यथासम्भव खाँसना नहीं चाहिये और यदि गले में सरसराहट हो तो उसको शान्त करने के लिये ' लार घोटकर गले के क्षोभ को शान्त करना चाहिये । अथवा मुँह में लौंग , मुलेठी , मिर्च , मिश्री , मुनक्का , नमक का टुकड़ा अथवा चुसने की कोई गोली विक्स टे . स्ट्रप्सिल्स रख कर चूसना चाहिये ।

विशिष्ट चिकित्सा – औपसर्गिक ( Infectious ) जीवाणुओं के विष से उत्पन्न गले के क्षोभ को शान्त करने के लिये पेनिसिलीन , स्ट्रेप्टोमाइसिन , ओरीप्रिम टेरामाइसीन ( टेट्रासाइक्लीन 500 ) अथवा टैरामाइसीन एस . एफ . ) इत्यादि का प्रयोग आवश्यकतानुसार करना चाहिये । । 

औषधि चिकित्सा - कोडीन फास्फेट ( Codline phosphate ) 15 से 30 मि ग्रा . प्रतिदिन चार घण्टे पर देने से कारा शान्त हो जाती है । या अन्य ' एण्टी - टूशिव एजेण्ट ' ( Anti - tussive agrnt  ) का उपयोग । एस्प्रिन ज्वर उतारने में सहायक है और रोगी को आराम देती है । एण्टीबायोटिक देने से सेकेंड्री  इन्फेक्शन को रोक देती है । 

1 . शुस्त कांस  - टेब , कोडीन सल्फेट 30 मि . ग्रा , मात्रा - 1 टिकिया दिन में 3 बार । 

अथवा - 

मिट्स लिक्टस कोडीन के . ( Mit ' s Linctus Codinal Co . ) निर्माता - एस्ट्रा - आइडियल, मात्रा - 1 / 2 से 1 चाय का चम्मच दिन में 2 या 3 बार । अथवा - फेंसीडिल लिक्टस ( Phenscdyl Linctus ) । मात्रा - 1 - 2 चम्मच ( 5 - 10 मि . ली . ) दिन में 3 बार । । 

नोट - डैटीगान लिक्टस ( Dctigan linctus ) भी उपरोक्त औषधि की भाँति दिया जा सकता है । 

2 . उत्पादी कास ( Productive Cough ) - इसमें खाँसी के साथ कफ आता है । इस प्रकार की खाँसी में - डाइलोसिन एक्स्पै क्टोरेन्ट ( Dilosyn Expectorant ) मात्रा - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 बार । बालकों को आयु के अनुसार । । अधवा - जीट ( zeat ) एक्सपैक्टोरेन्ट 1 / 4 - 2 चाय चम्मच दिन में 3 बार आयु के अनुसार । 

अथवा - 

चैस्टोन ( Chestone ) सीरप 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । ।

कास की लक्षणों के अनुसार चिकित्सा >>

संवेदनशील खाँसी ( Irritable Cough )  -   एण्टामीन एक्सपेक्टोरेण्ट ( Chemage ) वयस्क - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 या 4 बार, बालक - 6 से 12 वर्ष दिन में 3 - 4 बार - 12 चम्मच दिन में 3 या 4 बार । । 

अथवा 

कार्डियाजोल - डिकोडिड ( Cardiazol dicodid ) नि . बोरिंगरनौल वयस्क - 10 से 20 बूंद दिन में 2 या 3 बार । शिशु - 4 से 12 माह - 1 से 3 ड्राप 3 बार । छोटे बालक - 2 - 5 ड्राप 3 बार । । 

समस्त प्रकार की खाँसी में  -  नॉस्कोपेक्स ( Noscopex ) नि . निकोलस - मात्रा - 1 चम्मच दिन में 3 बार । बालक - 1 / 4 - 1 / 2 चम्मच 3 बार । । 

अथवा 

सेल्वीगोन ( Selvigon ) नि . जर्मन रेमेडीज 

मात्रा - 1 - 2 डूंगी दिन में 3 बार । इसका ड्रॉप्स भी आता है ।

मात्रा - 15 से 25 बूंद दिन में 3 बार । । बालक - 8 - 10 बूंद । । 

अथवा - 

टिक्सीलिक्स कफलिक्ट , नि . ‘ एम . बी . ' 

मात्रा - 1 / 2 - 2 चम्मच दिन में 3 बार । यः बालकों के लिये श्रेष्ठ औषधि है । । 

अथवा - टोसेक्स इम्प्रूव्ड नि . साराभाई 

मात्रा - 1 चम्मच दिन में 3 बार । । 

बलगमी  खाँसी - पिरीटोन एक्सपेक्टोरेण्ट ( ग्लैक्सो ) ,मात्रा - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 या 4 बार आयु के अनुसार । 

अथवा - 

प्रोटूसा प्लस ( Protussa Plus ) नि . बूट्स ,मात्रा - 10 से 15 मि . ली . ( 2 से 3 चम्मच ) दिन में 3 बार । । 

सावधान – गर्भावस्था के प्रथम 3 माह तथा पैरालिटिक इलियस में प्रयोग वर्जित । 

अथवा - 

जीट ( Zeet ) एक्सपेक्टोरेण्ट नि . एलेम्बिक, मात्रा - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । ।

अथवा - 

डेलीटस - पी लिक्वड ( Deletus - P liquid ) नि . - ' निकोलस,

मात्रा - बालक 10 वर्ष से ऊपर और वयस्क में 2 चम्मच दिन में 3 बार बालक 5 साल से नीचे 1 चम्मच दिन में 4 बार । 


शुष्क कास ( Dry Cough ) - डेलीटस - डी ( Deletus - D ) नि . निकोलस ' मात्रा - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 बार । 

अथवा 

डेटीगोन लिंक्स ( Detigon linctus ) बेयरमात्रा - 1 - 2 चम्मच । बालक - 1 / 2 - 1 चम्मच दिन में 3 बार । । अथवा ' लेसट्रस - ला ( Lastuss - La ) नि . FDC . मात्रा - 2चम्मच दिन में 2 बार । यह सूखी तथा बलगम रहित खाँसी में उत्कृष्ट औषधि है । 60 मि . ली . की शीशी 23 रुपया 50 पैसे में ।

शुष्क , काली खाँसी - इओसिनो फीलिया जनित खाँसी -  टस्प्रेस ( Tuspress ) नि . ' इंडोको ' । मात्रा - 2 से 4 चम्मच प्रति 6 से 8 घंटे पर ।
बालक - 1 मि . ग्रा . । प्रति कि . भार पर नित्य 3 - 4 विभाजित मात्रा में । । 
सावधान – गर्भावस्था के प्रथम 3 माह में निषिद्ध । 

सर्दी - जुकाम से उत्पन्न कास में - ‘ टुक्सीन ' ( Tuxync ) नि . ' फ्रेन्को इंडियन मात्रा - 1 टि . प्रति 4 - 6 घंटे पर । 

अथवा - 

सोल्विन ऐक्सपेक्टोरेण्ट ( Solvin Exp . ) मैक्सिन 1 टि . दिन में 3 - 4 बार । इसका लिक्विड भी आता है । । 

अथवा - 

सुथेक्स ( Soothex ) नि . - ‘ बिनमे डिकेअर ' । मात्रा - 1 - 2 टि . दिन में 3 या 4 बार । इसका कफ फार्मूला भी लिक्विड रूप में आता है । 

ब्रोन्काइटिस , टी . बी . , दमा अथवा इओसिनोफीलिया जनित कास -  ‘ एलेक्स कफ फार्मूला ( Alex Cough Formula ) नि . - ‘ लाइका, मात्रा - वयस्क एवं 12 साल से ऊपर के बालक - 2 चम्मच । । बालक 6 से 12 साल - 1 चम्मच । प्रत्येक दिन में 3 - 4 बार । ।

अथवा - 

बिडानजेन ( BilanzCn ) ' विडल शायर मात्रा - 1 - 2 टि . दिन में 3 - 4 बार । । यह फोर्ट रूप में भी आती है । । 

अलर्जी से उत्पन्न कास में - ' एविल एक्सपैक्टोरेण्ट ( Avil Expecto . ) ,मात्रा - 2 चम्मच दिन में 2 - 3 बार / बालक - आयु के अनुसार । ।

अथवा -

 ' डिफलिन एक्सपैक्टोरेण्ट ' ( Dilin Expecto . ) नि . डीफार्मा । मात्रा - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । 

अथवा -

 लुपीहिस्ट ' ( Lupihis ) नि . ' लूपिन , मात्रा - 1 / 2 - 1 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । । 

बलगम युक्त अति गोली खाँसी - फैसेडिल एक्सपैक्टोरेण्ट ' ( Phensedyl Ex pecto . ) नि . ' रोन पोलेन्क ( M . B . ) । । मात्रा - वयस्क एवं 10 साल से ऊपर के बालक 1 - 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । बालक - आधी मात्रा । यह ' कफ लिकट्स रूप में भी उपलब्ध है । । 

अथवा -

 ' प्रोटूसा प्लस ( Protussa Plus ) नि . - बूट्स । मात्रा - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 बार । ।

बोन्काइटिस , नेजल कंजेसन , जुकाम , धूम्रपान जनित कास - सोल्विन एक्सपैक्टोरेण्ट नि . . ' मैक्सिन 1 टि , दिन में 3 - 4 बार । इसका लिक्विड भी आता है । 

जीर्ण कास पल्मो - कॉड ( सी एवं जी ) नि . ' स्टेडमेड ,मात्रा - 2 - 4 चम्मच दिन में 4 बार । 

सावधान - मधुमेह के रोगी में प्रयोग न करें ।

शुष्कं कास ( Dry Cough ) >>

Rx . 

-  प्रा . दो . शा . 
   कार्डियाजोल डिकोडिड ( बोहरिगर ) 10 - 20 बूंद / गर्भावस्था में निषिद्ध । । 

-  10 बजे , 2 बजे -
   टसप्रेस ( Tuspress ) नि , ' इंडेको 2 चम्मच X दिन में 2 बार । | 

-  सायं 4 बजे एवं सोते समय - 
   लेसटूस - ला ( FD . C . ) 2 - 2 चम्मच । 

-  दिन में 1 या 2 बार -
   ' विक्स वेपोरब की छाती पर मालिश । ।
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बलगमी कास ( Productive Cough ) >>

Rx . 

-  प्रा . दो . शा . 
  फंसेडिल एक्सपैक्टोरैण्ट ( रोन पोलेन्क ) 1 - 2 | चम्मच X दिन 3 बार । 

-  10 बजे , 2 बजे , 7 बजे सायं -
   बाइकारेक्स ( Bricarex ) एक्सपैक्टोरेन्ट नि . ' एस्ट्रा - आइडियल 1 - 2 चम्मच दिन में 3 बार ।

-  दिन में 2 बार -
   टैरामाइसीन एस . एफ . ( फीजर क ) 1 - 1 कै . जल के साथ । 

-  उपरोक्त कै . के साथ - 
   टे . डेक्सामेधाजोन ( डेकाडून ) | 1 टि . दिन में 2 बार जल से । 

नोट - यदि कफ अधिक बन रहा हो तो साथ में ' वाटर बरीज कं . ' रेड लेबुल 2 - 2 चम्मच अवश्य लें ।
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शर्दी - जुकाम जनित कास >>

Rx . 

-  प्रा . दो . सायं -
   फेनेक्स प्लस ( Febrex Plus ) ' इंडेकों 1 टि . चाय अथवा गुनगुने जल के साथ । । → 

-  साथ में ' - 
   वायसोलोन ' ( Wysolone ) 1 टि . उपरोक्त औषधि के साथ ।  

-  10 बजे , 12 बजे - 
   सोलिन - 500 ( Celin - 500 ) ग्लैक्सो 1 / 2 टि . जल के साथ । । 

-  दिन में 3 बार - 
    रेसप्रेन ( Respren ) ' इथनोर 1 - 2 टि चाय अथवा गुनगुने जल के साथ । 

-  दिन में 1 या 2 बार - 
   टि , बेन्जोइन का बफारा ।

नोट - बफारा ( Inhalation ) के स्थान पर - नेसीवियोन ( Nasivion ) ' मर्क ' , नेजालिन ( Nazalin ) ' वैल कं . ' अथवा डिस्ट्रान नेजल ड्राप की 3 - 4 बूंदें नाक में दिन में 2 - 3 बार डाली जा सकती हैं ।

अस्थमा एवं इओसिनोफीलिया जनित कास >>

Rx . 

-   प्रा . दो . सा .
    टे , सोल्विन एक्सपैक्टोरेण्ट 1 टि . 
    टे . वेटनोसोल 1 टि . 
    टे , युनीकावीजान 1 टि , → 

-  10 बजे , 2 बजे , 8 बजे रात - 
   वेनाड्रिल कैप्सूल - 1 कै , जल से । 

-  दिन में 3 बार एवं रात सोते समय । 
   एलेक्स कफ फार्मूला ( नि , लाइका ) 2 | चमच ।  

-  आवश्यकतानुसार - 
   ग्राइलिंक्टस - बी . एम - ( Grilinctus - BM ) 

नोट - अस्थमा के रोगी ' वाटरबरीज कं , रेड लेबुल तथा टेड्राल एस . ए . भी । आवश्यकतानुसार ले सकते हैं ।

 याद रखिये - ‘ फेन्सेडिल ' 5 - 10 मि . ली . दिन में 3 बार एलर्जी से पैदा खाँसी तथा दमे की खाँसी में उपयोगी है । इसी प्रकार ' वेनाड्रिल कफ एक्सपेक्टोरेण्ट ' ( पी . डी . ) श्वास रोग और उत्तेजना से पैदा खाँसी में उपयोगी है


अलर्जी / श्वास रोग अथवा इओसिनोफीलिया से उत्पन्न कास में डी . सी . अथवा स्ट्रेप्टोमाइसिन + पैकाल्विट इन्ज . सम्मिलित रूप में ( I . M ) देना अति लाभकारी है । कोर्स - 10 इन्जेक्शन पर्याप्त ।


कम्बीनेशन थेरापी >>

 Rx -

- चेस्टोन सिरप ( सिप्ला ) 1 / 2 चम्मच ) 1 मात्रा 
- सोवेण्टोल एक्सपेक्टारेण्ट ( नोल ) 1 चम्मच } 1 मात्रा 
- जेफ्रोल कपेसिरप ( रोन - पोलेन्क ) 1 चम्मच ऐसी 1 मात्रा ४ दिन में 3 या 4 बार । 

Rx - 

- बेनाड्रिल एक्सपेक्टोरेण्ट ( पी . डी . ) 1 चम्मच ) 1 मात्रा
- पेक्टामोल लिक्टस ( एलेनवरीज ) 1 चम्मच ) 1 मात्रा | ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार | 

नोट - समस्त प्रकार की खाँसी में उपयोगी । । 

Rx - 

- चेस्टोन सीरप ( सिप्ला ) 1 चमच ) 1 मात्रा
- डेटीगॉन लिक्टस ( वायर ) 15 बूंद | 1 मात्रा ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार । 

विशेष - यह योग समस्त प्रकार की खाँसी की रामबाण औषधि है । । 

Rx -

- वाटर बरीज कम्पाउण्ड रैड लेबुल 1 चम्मच 1 मात्रा 
- न्योगाडीन एलिक्जिर । 1 चम्मच | 1 मात्रा 
- अमिलकल ( फ्रेंको इंडियन ) 1 चम्मच ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार । । 

विशेष ज्ञातव्य - सर्दी - जुकाम , खाँसी , पुरानी खाँसी , टी बी की खाँसी , फेफड़ों के दुर्बल होने से उत्पन्न खाँसी एवं बलगमी खांसी ( Productive cough ) की उपयुक्त मिश्रित औषधि है ।

Rx -

- कोरेक्स कफ सीरप 5 मि . ली . 1चम्मच 
- टोसेक्स इम्प्रूव्ड सौरप ( साराभाई ) 1 चम्मच 
- 5 मि . ली . ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार । ।

नोट - समस्त प्रकार की सूखी तथा ऐंठन युक्त खाँसी में उत्कृष्ट । 

Rx -

- टेट्रासाइक्लीन कैप्सूल 500 मि . ग्रा , 1 कै .  
- वायसोलोन 1 टि .
- सोल्विन एक्सपेक्टोरेण्ट 1 टि .
- सीलिन 500 मि . ग्रा , 1 / 2 टि . 
- ओरीप्रिम डी . एस . 1 / 2 टि . | मात्रा ( दोनों एक सी ही ) ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार । 

नोट - यह औपसक कास ( Infectious cough ) का उत्कृष्ट योग है । जिसे हमने अनेक रोगियों पर शत - प्रतिशत लाभकारी पाया है ।

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कास में प्रयोग आने वाली सुप्रसिद्ध अपटूडेट ऐलो . पेटेन्ट टेबलेट्स >>

1 . विड़ानजेन ( Bidazen ) ( नि . विडलशायर )  -  1 - 2 टिकिया दिन में 3 बार । ' सायनूसाइटिस ' , ' मध्य कर्णशोथ ' , ' पल्मोनरी टयूबरकुलोसिस ' एवं ' ब्रान्कियल अस्थमा में । । इसकी 10 टिकिया 27 रुपये की आती हैं । इसकी फोर्ट टिकिया 10 मि . ग्रा . की पचास रुपया 40 पैसे की 10 टिकिया आती हैं । 

2 , विसोलवोन ( Bisolvon ) ( जर्मन रेमेडीज ) 4mg . tuab . -  16 मि . ग्रा . दिन में 3 - 4 बार । इसका सीरप भी ' Bisolvon Expectorant ' के नाम से आता है । 

3 . ब्रोमोसिल ( Brorm0SII ) ( सलें )  -  1 टिकिया दिन में 3 बार । इसका सीरप भी आता है । गाढ़ा बलगम आने की स्थिति में । 

4 . सिनारिल ( Cinar ) ( थेमिस फार्मास्युटिकल्स )   -  1 टि . दिन में 6 - 8 घंटे पर । यह लिक्विड और सीरप में भी आता है । सर्दी - जुकाम युक्त कास में लाभकारी । 

5 . कोन्टेक सी सी ( Contact C C ) ( इस्केएफ )  -  1 टिकिया दिन में 4 बार । नजला - जुकाम से सम्बन्धित कास में । । 

6 . डेलीटस ( Delitus ( निकोलस )   -   1 टिकिया दिन में 3 बार ।

7 . रालसीदिन Ruicidin ) ( रेलिस ) -  । - 2 टिकिया । तत्पश्चात 1 टि , प्रति 6 घण्टे पर । जुकाम से सम्बन्धित कास में । ।

8 . सेल्वीगोन ( Selvigon ) ( जर्मन | रेमेडीज ) -  1 टि . दिन में 3 बार । ड्राप और सीरप में भी उपलब्ध । 

9 . सोल्विन एक्सप . ( Solvin Expec torant ) ( पेक्सिन )  -  1टि . दिन में 3 बार । लिक्विड भी आता है । नेजल कंजेसन ' , ' ब्रोन्कियोलाइटिस , जुकाम , सायनुसाइटिस एवं धूम्रपान से सम्बन्धित लिक्विड - 2 चम्मच दिन में 4 बार । । 

10 . सूथेक्स ( Soothex ) ( बिन मेडी - केअर )  -  1 - 2 टि . दिन में 4 बार । नेजल कंजेसन , जुकाम , सायनूसाइटिस , लैरिन्जाइटिस , फैरिन्जाइटिस से सम्बंधित कास में । ।
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कास में प्रयुक्त अप्टूडेट ऐलो . पेटेण्ट पेय / सीरप >>

1 , एलेक्स कफ फार्मूला ( Alex Cough Formula ) ( लाइका ) -  2 चम्मच । बालक 1 / 4 से 1 चम्मच दिन में 4 बार । दमा , इओसिनोफीलिया तथा टी . बी . जनित कास  में । 

2 . एविल एक्सपेक्टोरेण्ट ( Avil Expectorant ) ( होचस्ट ) -  डेड  - 2 चम्मच दिन में 4 बार । बालक आधी मात्रा । अलर्जी युक्त कास में ।

3 . एस्थालिन एक्सपेक्टो . ( Asthalin Expctorant ) ( सिप्ला )  -  2 से 4 चम्मच । बालक 1 से 2 चम्मच । । प्रत्येक को दिन में 3 बार । ब्रोन्कियल अस्थमा जनित कास में । ।

4 , बेनाड्रिल कफ फार्मूला ( Benadryl Cough Formula ) ( पी . डी . )  -  1 - 2 चम्मच प्रति 2 - 3 घण्टे पर | बालक 1 / 2 चम्मच प्रति 3 घंटे पर । पल्मोनरी कंजेसन एवं कास में । । 

5 . बिसोलपेण्ट ( Bisolpent ) ( जर्मन रेमेडीज )  -  2 चम्मच दिन में 4 बार । बालक 1 चम्मच । अस्थमा , बोन्किाएक्टीलेसिस तथा क्रानिक ऑब्सट्रक्टिव ब्रोन्काइटिस में । 100 मि ली . की शीशी पच्चीस रुपया ग्यारह पेसे में आती है । ।

6 . बाइसोल्वोन ( Bisolvon ) ( जर्मन रेमेडीज )  -  5 से 10 साल की उम्र तक 1 चम्मच 4 बार तथा साल से कम - 1 चम्मच दिन में 2 बार । 

7 . ब्रो - जेडेक्स ( Br0 - Zedex ( वोक्हार्ड )  -  2 चम्मच दिन में 3 बार । ब्रोन्काइटिस , ब्रोन्कियल अस्थमा , इम्फाइसीमा , ब्रोन्कि एक्टिएसिस जनित कास में । । 

8 . ब्रोमेनिल ( Bromenyl ) ( एस्ट्रा - आइडियल )  -   2 से 3 चम्मच दिन में 4 बार । बालक 1 / 2 चम्मच ।
सावधान - 3 साल तक के बच्चों में न दें ।

9 . ब्रोमहेक्सिन ( Bromhexine ) ( मेक्सिन )  -  5 से 10 साल तक 1 चम्मच दिन में 4 बार । 5 साल के बीच 1 चम्मच दिन में 2 बार । ब्रोन्काइटिस ' एवं गाढे बलगम की स्थिति में ।

10 . कार्डियाजोल - डिकोडिड ( Car : diazol - Dicodid ) ( बोहृन्गेर एम ) - 10 - 20 ड्राप दिन में 2 - 3 बार । शिशु ( 4 12माह ) 1 - 3 ड्राप । बालकों में उम्र के अनुसार कई ड्राप । ।पुष्ट सूखी तथा आकर्षी कास में । 

11 . क्लिस्टिन ( Clistin ) ( इथनॉर )  -  1 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । 

12 , कोरेक्स ( Corex ) ( फाइजर ) । -  1 चम्मच प्रति ( 6 घंटे पर । बालक आयु के अनुसार । लाक्षणिक कास में । ।

13 . कोस्कोपिन लिन्क्ट स ( Cosc0 - | pin Linctus ) ( बायोलोजिकल ईवन्स )  -  2 - 4 चम्मच प्रति 2 - 3 घंटे पर । कोस्कोपिन प्लस एवं B . R भी उपलब्ध । । 

14 . कोसोम ( Cosome ) ( मर्क )  -  1 से 3 चम्मच दिन में 4 - 5 बार ।

15 . सेसलिन ( Saslin ) ( सलें ) | -  1 - 2 चम्मच दिन में 4 बार । । 

16 , डेकॉस ( Deucos ) ( आई . डी . पी . एल . )  -  1 - 2 चम्मच 3 - 4 बार । बालक आयु के अनुसार । 

17 , डेलीटस ए ( Delitus A ) ( निको लस ) - 2 - 4 चम्मच दिन में 3 बार । बालक आयु के अनुसार । दमा की खाँसी में ।

18 . डेलीटस डी ( Delitus D ) ( निको लस )  -  सूखी खाँसी में - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 बार ।

19 , डेलीटस पी ( Delitus P ) ( निको लस )  -   बलगमी खाँसी में - 3 चम्मच दिन में 3 बार । बालक - 1 - 2 चम्मच दिन में 4 बार । ।

20 . डेटीगाँन लिंक्स ( Detigon Linctus ) ( बायर ) । -  शुष्क एवं आकर्षित कास में - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 बार । बालक - 1 / 2 - 1 चम्मच दिन में 3 बार । 

21 . डिफलिन एक्सपेक्टोरेन्ट ( Dylin Expectorant ) ( डी फार्मा )  -   अलर्जिक कास में - 1 - 2 चम्मच दिन में 2 - 3 बार । । 

22 , इक्सप्लोन ( Exiplon ) ( खण्डेल - वाल )  -  जुकाम युक्त कास में - 1 चम्मच दिन में 4 बार । ।

23 . ग्लाइकॉफ ( Glycop ( रेप्टाकोस )  -  क्रानिक ब्रान्काइटिस , लैरिन्जाइटिस युक्त कास में - 1 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । 

24 . ग्राइलिस्टस ( Grilinctus ) ( फ्रेन्को इंडियन ) ।  -  लाक्षणिक एवं जुकामी कास में - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । 

25 . लाससा - ला ( Lastussa - LA ) ( FD . c )  -  सूखी खाँसी में - 2 चम्मच दिन में 2 बार । 60 मि . ली . की शीशी तेइस रुपया पचास पैसे में आती है । । 

26 . लूपीहिस्ट ( Lupihist ) ( लूपिन )  -  अलर्जी युक्त कास में - 1 / 2 - 1 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । ।

27 . मिस लिंक्टस कोडोन कं , ( Mits Linctus Codeinal co . ) ( Asia - IDL )  -   सूखी खाँसी में - 1 / 2 - 1 चम्मच दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार । 

28 . कॅसेडिल एक्सपेक्टोरेन्ट ( Phen - sedy Expectorant ) ( Rhone - Poulenc )  -  गीली बलगमी कास में - 1 - 2 चम्मच । । बालक - 1 / 2 से 1 चम्मच दिन में 3 बार । । 

29 . दुसा प्लस ( Protussa Plus )  -  गोली खाँसी में - 2 - 3 चम्मच दिन में 3 बार । ।

30 . सोल्विन । एक्सपेक्टोरेण्ट | ( Solvin Expectorant ) ( पेक्सिन ) -  धूम्रपान , सर्दी वाली कास एवं ब्रान्काइटिस की कास में - 2 चम्मच दिन में 3 बार । बालक - 1 / 2 - 1 चम्मच । 

31 . सूथेक्स कफ फार्मूला ( Soothex Cough Formula ) ( बिनमेडि - केअर )  -  12 साल से ऊपर 1 - 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । बच्चों को आधी मात्रा । जुकाम से सम्बन्धित कास में । । 

32 . टरपेक्ट एक्सेपेक्टोरेण्ट ( Terpect Expectorant ) ( थेपिस )  -   ब्रोन्काइटिस , इम्फाइतीमा एवं ब्रोन्कि एटेसिस जन्य कास में 1 - 2 चम्मच दिन में 3 बार । बालक आधी मात्रा । ।

33 . टिक्सीलिक्स ( Tixylix ) ( रोन पुलेन्क )  -  सर्दी - जुकाम , कुक्कुर खाँसी जनित कास में बालक 1 - 2 साल 1 / 2 - 1 चम्मच । 3 से 5 साल चम्मच , 6 से 10 साल 1 - 2 चम्मच दिन में 2 या 3 बार । ।

34 . टस्पेल एक्सपेक्टोरेण्ट ( Tuspel Expectorant ) ( इंडोको )  -  ब्रोन्काइटिस , ब्रोन्कियल अस्थमा जनित कास में - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 बार । 

35 . टसप्रेस ( Tuspress ) ( इंडोको ) -   सूखी खाँसी , कुक्कुर खाँसी , टोपिकल इओसिनोफीलिया जनित कास में 2 - 4 चम्मच प्रति 6 से 8 घण्टे पर । बालक आयु के अनुसार । । 

36 . वेन्ट्रोलिन एक्सपैकोरेण्ट ( Ventrolin Expectorant ) ( ग्लैक्सो )  -  ब्रान्कोस्पाज्म , क्रानिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज में - 2 चम्मच दिन में 3- 4 बार । ।

37 . जीट एक्सपेक्टोरेण्ट ( Zeet Exp - | ectorant )  -  बलगमी खाँसी में - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । ।

38 . जेफ्रोल ( Zephrol ) ( रोन पुलेन्क )  -  ब्रोन्काइटिस , अस्थमा , काली खाँसी जनित कास में - 1 चम्मच प्रति 4 घण्टे पर । 

सावधान - उच्च रक्तचाप के रोगी में प्रयोग वर्जित । ।

39 . एसकोरिल एक्सपेक्टोरेण्ट ( Asc : oril Expectorant ) ( ग्लीनमार्क )  -  ब्रोन्काइटिस , सर्दी जुकाम , अस्थमा , पल्मोनरी टी . बी . जनित कास में - 2 से 4 चम्मच दिन में 3 बार । बालक अवस्था नुसार । । 

40 , नयोगाडीन एस . जी . एक्सपेक्टोरेण्ट ( रेटाकोस ) ।  -   क्रानिक ब्रोन्काइटिस , फेफड़ों के रोग जनित कास में - 3 - 6 चम्मच दिन में 2 बार भोजन से पूर्व । । 

41 . फार्मा कम्पाउण्ड ( Pharma Compound ) ( P & B . Lab ) -  बार - बार होने वाला जुकाम एवं कास में - 3 चम्मच दिन में 3 बार । बालक आधी  मात्रा , 1450 मि . ली . चौंतीस रुपये का आता है ,

42 . पोलरामाइन एक्सपेकोरेण्ट ( Pol - aramine Expectorant ) ( फुल - | फोर्ड )  -  अलर्जी जन्य कास , जुकाम जनित कास में - 1 चम्मच दिन में 3 4 बार ! बालक आयु के अनुसार । 

43 . सोवेन्टोल एक्सपेक्टोरेण्ट ( Sov - entol Expectorant ) ( वोहरिंगर )  -  सर्दी , जुकाम , दमा जन्य कास में - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । बालक आयु के अनुसार । ।

44 . जेडीन - डी एम ( Zadine DM ) | ( फुलफोर्ड )  -  1 चम्मच दिन में 3 - 4 बार । बालक आयु के अनुसार । सावधान - शिशुओं में प्रयोग वर्जित । । 

45 . ब्रोन्कीन - जी एक्सपेक्टोरेण्ट ( Bronkine - G Expectorant ) ( एस . जी . ) -  2 से 3 चम्मच दिन में 3 बार । बच्चों को / 2 - 2 चम्मच दिन में 2 - 3 बार । 

सावधान - अति रक्त दाब , अबटु अति | क्रियता एवं हृदयगत मन्दता में प्रयोग न करें ।

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कास में देने योग्य ऐलो . सुप्रसिद्ध पेटेन्ट इन्जेक्शन >>

1 . डाइक्रिस्टिसिन - एस ( Dicrysti - cin - S ) ( साराभाई )  -  बच्चों को पेडिएट्रिक तथा वयस्कों को 1 / 2 - 1 ग्राम माँस में प्रतिदिन 1 या 2 बार इन्जेक्शन लगायें । सावधान – पेनिसिलीन की एलर्जी में प्रयोग वर्जित । 

2 . कैल्सियम सैण्डोज ( सैण्डोज )  -  5 से 10 मि . ली . की नस में चौथे दिन सुई लगावें । 

3 . फाइसेप्टोन ( Physertone ) ( वैल्कम )  -  तेज खाँसी में 10 मि . ग्रा . का एक एम्पुल लगावें । । 

4 . स्पास्मिण्डोन ( Spasmindon ) नि . ' इण्डोन । -  बहुत तेज खाँसी में - 1 - 2 मि . ली . माँस में लगावें ।


चिकित्सकों द्वारा अनुभव सिद्ध योग >>

' मार्फीन सल्फेट 1 / 3 ग्रेन , एट्रोपिन सल्फेट 1 / 200 ग्रेन को 16 बूंद डिस्टिल्ड वाटर में मिलाकर इन्जेक्शन देने से कष्टदायक खांसी भी तत्काल दूर हो जाती है ।

-  वेनाड्रिल एक्सपेक्टोरेट ( पी . डी . ) 1 चम्मच ( 5 मि . ली . ) 

   ब्रोन्की सीरप | ( विडल सायर ) 1 च - मच । ) 1 मात्रो | ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार देने से कफ ढीला होकर सूखी खाँसी दूर होती है और कफ बाहर निकल जाता है ।

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-  एपोक्सीलीन सीरप ( विडल सावयर ) 1 चम्मच ( 5 मि . ली . ) | 
  
   कोरेक्स कफ सीरप ( फाइजर ) 1 चम्मच ( 5 मि . ली . ) 1 मात्रा । ऐसी । मात्रा दिन में 2 बार । सुखी खांसी में लाभकारी । 

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-  डायलोसीन एक्सपेक्टोरेण्ट ( एलेनवरीज ) 1 चम्मच ( 5 मि . ली . ) ) 

   वाडीसिलीन सीरप ( एल्केम ) | चम्मच ( 5 मि . ली . ) ] 1 मात्र ऐसी 1  मात्रा प्रति , घण्टे पर । शुष्क कारा में लाभकारी । 

याद रखिये - - पुरानी खामो , टी बी को खासी तथा फेफड़े की कमजोरी से उत्पन्न खाँसी एवं नजला - जुकाम की खाँसी में ' वाटर वरीज कम्पाउण्ड रेड लेवल एक उत्तम औषधि है । 



मात्रा - 1 - 2 चम्मच दिन में 3 बार । ।
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