संक्रमण का गले के नीचे नहीं उतरने देते यह टॉन्सिल्स ? ( The tonsils do not let the transition down the throat? )


" मुंह के जरिए गले से होते हुए कई तरह के संक्रमण एवं बीमारियां शरीर में प्रवेश करते रहते हैं इन्हें रोकने के लिए गले में टॉन्सिल्स मौजूद होते हैं जो द्वारपाल की तरह हानिकारक वायरस या बैक्टीरिया ओं को अंदर जाने से पहले ही रोक लेते हैं बैक्टीरिया और टांसिल के बीच में जीतने के लिए जो संघर्ष होता है इसी कारण आपने देखा होगा कि कई बार टॉन्सिल्स शूज जाते हैं। "


लक्षण पहचान कर इलाज करें >>
- गले में दर्द के साथ कुछ अटकने जैसा एहसास होता है,
- टॉन्सिल्स का लाल हो जाना,
- गले में दर्द भरे छाले होना,
- टॉन्सिल्स के ऊपर पी ली है सफेद परत का जमा होने लगना,
- गले में खराश तथा आवाज का बंद हो जाना,
- सिर दर्द,
- कानों में दर्द,
- भूख कम लगना,
- सांसों में बदबू,
- गर्दन या जबड़े की ग्रंथियां की सूजन,


बच्चों के मामले में टांसिल सूजने पर यह वयस्कों की तरफ प्रक्रिया नहीं होती बहुत मामलों में या उससे कहीं भिन्न होती है
आखिर क्या वजह है इस संक्रमण का? >>



टॉन्सिल्स में सूजन आमतौर पर मुंह के जरिए पहुंचने वाले स्ट्रैप्टॉकोक्कस नामक बैक्टीरिया की वजह से होता है, इसके कारण गला खराशने लगता है चुकी यह रोग प्रतिरोधक प्रणाली के पहले पहरेदार हैं इसलिए सबसे पहले बैक्टीरिया का सामना इन्हीं से होता है, 
स्कूल जाने वाले बच्चों में अपने दोस्तों के नजदीक संपर्क में रहने के कारण बार-बार टांसिल सूजने की शिकायत हो सकती है, 

वैसे स्कूली बच्चों में टांसिल के संक्रमण होने के और भी कई कारण हो सकते हैं। बहुत छोटे बच्चों में लगता रोने, चिड़चिड़ाने या लार बहाने जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं। कई मामलों में तो गला इतना सूज सकता है कि सांस लेने में भी तकलीफ हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना ही सही रहता है।

क्या हो सकती हैं जटिलताएं >>



- सांस लेने में मुश्किलें उत्पन्न होना
- टांसिल के आसपास के टिशु में संक्रमण फैलना और वहां पस पड़ जाना
- नींद में सांस रुक रुक कर आना
- तथा घबराहट जैसी स्थिति बने रहना

कैसे कर सकते हैं बचाव? >>



टॉन्सिल्स हमेशा वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण के संपर्क में आने के कारण ही होता है इसलिए सबसे अच्छा और सुरक्षित तरीका यह होगा कि व्यक्तिगत साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए बच्चों के मामले में बच्चों को जितना हो सके हाइजीनिक एवं साफ-सुथरे माहौल में खेलने कूदने तथा अन्य किसी कार्य के लिए भेजना ही सही रहता है

- खाना खाने से पहले या टॉयलेट से आने के बाद साबुन को अच्छी तरह से हाथ के चारों ओर को साफ पानी से धोने की आदत बनाएं।

- टॉन्सिल्स के हो जाने के बाद बच्चे का टूथब्रश बदल दें

- स्कूल में उन्हें अपना खाना पीना, पानी की बोतल या अन्य चम्मच वगैरह शेयर करने से मना करें।

- बच्चे को रूमाल में छींक ने व खासने की आदत लगाएं।

- खासने वह छींक ने के बाद तुरंत हाथ धोने के लिए कहें।

कैसे हो सकता है निदान? >>



बच्चे के गले में रोशनी करने वाला किसी उपकरण को डालकर डॉक्टर टांसिल की गठान ओं का मुआयना करते हैं। डॉक्टर स्थिति के अनुसार कान अथवा नाक की भी जांच कर सकते हैं। गले में हाथ की सहायता से सूजी हुई गठान ओं को महसूस करते हैं तथा स्टेट स्कोप से बच्चे की सांसो की आवाज सुनते हैं। जिससे कि इस संक्रमण के स्थिति व कारण का सही से जायजा लिया जा सके।

थ्रोट स्वैब >>



एक कीटाणु रहित कॉटन की स्वैग लगाकर गले से निकलने वाले पदार्थों का सैंपल लेते हैं इस स्वेब से स्ट्रैप्टॉकोक्कस नामक बैक्टीरिया की जांच होती है। बच्चे की कंपलीट ब्लड काउंट नामक जांच भी होती है, रिपोर्ट पॉजिटिव आने के पश्चात बच्चे का एंटीबायोटिक से इलाज शुरू किया जाता है।

कैसे होता है इलाज? >>



बच्चे को यदि वायरस का संक्रमण हो तो उसे एंटीबायोटिक्स नहीं दी जाती है बच्चे को घर पर ही सावधानी रखते हुए रेस्ट कराया जाता है इस तरह वह 7 से 10 दिनों के बीच ठीक हो जाते हैं बच्चे को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ किए जाते हैं ताकि गला तर रहे और डिहाइड्रेशन की स्थिति ना आए।
यदि बच्चे को बैक्टीरिया की वजह से संक्रमण हुआ है और टांसिल से सूज गए हैं तो एंटीबायोटिक दवाइयों से इलाज शुरू होता है बच्चे को एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स कराना चाहिए।

सर्जरी >>



किसी-किसी केस में यदि बच्चे को बार-बार गले में सूजन आ रही हो तथा टांसिल भी बार-बार सूज रहे हो तथा सांस लेने में भी बहुत दिक्कते आ रही हो तो ऐसी स्थिति में डॉक्टरों द्वारा सर्जरी कर टॉन्सिल्स को ही निकाल दिया जाता है, लेकिन मोस्ट केस में यह दवाइयों से ही ठीक कर लिया जाता है।

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