दिल धड़कना / हृदय का धड़कना [ Palpitation of Heart ] आखिर किस प्रकार की बीमारी है ? किस प्रकार बचाव कर सकते है ? Heart beat / palpitation of heart What type of ailment is it? How can you protect?

दिल धड़कना / हृदय का धड़कना [ Palpitation of Heart ]



रोग परिचय - पैलपिटेशन , स्पन्दन , धड़कन , हदय का तीव्र एवं बलपूर्वक संकुचन । Abnormally rapid or irregular heart beat which is felt by the patient असामान्य रूप से तीव्र गति का अथवा अनियमित हृदय स्पन्दन जिसे रोगी महसूस करता है ,


रोग के प्रमुख कारण >>

रोगी का कलेजा निम्न कारणों से धड़क सकता है -

शारीरिक ( Physiological ) - व्यायाम , सुख एवं दुख भावावेग , सेक्चुयल इक्साइटमेण्ट । । । 

अतिरिक्त कारण – चाय , काफी । तम्बाकू , मद्य ( शराब ) , कन्सम्पसन । । 

चिन्ता रोग ( Anxiety State ) | 

High out put state - अनीमिया , बेरी - बेरी , अवटुविषाक्तता ( Thyro - toxicosis ) , ए . - वी फिस्चुला आदि।  
औषधि - नाइट्रेट्स , डिजोक्सिन की अधिक मात्रा अथवा इन्सुलिन । । 

हृद अतालता ( कार्डियक इरिथ - मियाज ) – सिस्टोल्स की अधिकता , पैरोक्सीसमल टेकीकार्डिया , आर - टियल फिब्रीलेसन , हार्ट ब्लाक आदि ।  

मिले जुले कारण - हाइपोग्लाइसी | मिया , Pheochromocytoma आदि ।


रोग के प्रमुख लक्षण >> 

-  इसमें रोगी का सामान्य से अधिक दिल धड़कने लगता है । । 

-  धड़कन के साथ बायें कन्धे में दर्द । ।  

-  ह्रदय में धड़कने के तीव्र होने से रोगी को कष्ट होता है । → 

-  आक्रमण के समय हत प्रदेश में कुछ - कुछ । पीड़ा की अनुभूति । । 

-  नाक लाल एवं हृदय में बेचैनी । ।  

-  हृदय धड़कन जिसे रोगी स्वयं सुन सकता है । ।  

-  शिरो भ्रम , कानों में आवाज एवं अति स्वेद । । 

-  रोग होने की स्थिति में ओष्ठ और कनपटियाँ लाल हो जाती हैं । 

-  रोग का हृदय की खराबी से कोई सम्बन्ध नहीं । 

-  रोग का आक्रमण कुछ सेकेण्डों से लेकर 2 - 3 घण्टे तक । । 

-  सिर चकराना । → 

-  रोगी के थोड़ी दूर चलने , सीढ़ियों पर चढ़ने , थोड़ा परिश्रम मात्र से ही दिल धड़कने लगता है । ।  

-  गति 120 बार तक प्रति मिनट रोगावस्था ।

स्नायविक दुर्बलता , बहुत अधिक मानसिक चिन्तन , गुल्म वायु , शोक , सदमा , मासिक धर्म की गड़बड़ी , अधिक स्त्री प्रसंग , तेज अम्ल रोग , अजीर्ण एवं हदय का फैल जाना आदि । कारणों से दिल धड़कने लगता है । 
याद रखिये -
स्वस्थ अवस्था में हृदय शान्त और नियमित रूप से धड़कता है और मनुष्य को उसकी धड़कन सुनाई नहीं देती । परन्तु रोग की अवस्था में गति इतनी अधिक तीव्र हो जाती है कि रोगी को अपने हदय की आवाज अनुभव होती है ।
रोग की पहिचान >> 

-  लक्षणों के आधार पर रोग निदान में कोई कठिनाई नहीं ।  

-  हृदय का जोर - जोर से और जल्दी जल्दी धड़कना , रोग की प्रमुख पहिचान । 

-  यह हृदय के किसी बड़े विकार आलिन्द स्फुरण ( ऑरिकुलर फ्लटर ) , ऑरिकुलर फिबिलेशन एवं पैरा क्सिमल टैरिकार्डिया में होती है । यह एकाएक प्रारम्भ होती है और बन्द भी एकाएक होती है । इनमें हदय के रोग के अन्य लक्षण निश्चित रूप से मिलते हैं । अति विकसन में निरन्तर धड़कन मिल | सकती है । 

-  साधारणतः जिस धड़कन की चलते फिरते रोगी प्रायः शिकायत करते हैं वह हृदय रोग जन्य नहीं होती । 

-  अरक्तता में बार - बार दिक्कत करने वाली धड़कन हो सकती है । → 

-  अपचन की धड़कन प्रायः भोजन के बाद होती है । ।

रोग का परिणाम >>

-  जिन्हें यह रोग होता है उन्हें रोग के बार - बार होने की सम्भावना । 

-  विकृति जीवन पर्यन्त रहती है । 

-  धड़कन अधिक होने पर हृदय स्थान पर कुछ पीड़ा , सिर चकराना , कान में शब्द होना , अधिक बेचैनी आदि विकार उपद्रव स्वरूप हो जाते हैं ।


चिकित्सा विधि >> 

-  वास्तविक चिकित्सा कारण को दूर करना है । ।  

-  मनस्ताप को दूर करें । 

-  खान - पान , रहन - सहन परिमित एवं नियमित होना आवश्यक । ।

-  खुली हवा का सेवन । 

-  ‘ नरवाइन टॉनिक की व्यवस्था आवश्यक । 

-  यह धड़कन किसी हृदय रोग के कारण है । तो उसकी समुचित व्यवस्था।

-  चाय , काफी , मद्य सेवन आदि पर प्रतिबन्ध । । 

-  हद्य औषधियों ( Cardiactonia ) की व्यवस्था । D कब्ज न रहे इसकी ओर पूर्ण ध्यान ।  

-  पेट में गैस न बनने पाये ऐसी व्यवस्था ।

पथ्यापथ्य एवं सहायक चिकित्सा >>

 पथ्य - पालक , तोरई , कुल्फा , बकरी के माँस का शोरवा , अरहर एवं मूंग की दाल , नासपाती , सेव , सन्तरा , अंगूर , ककड़ी , खीरा आदि रोगी को सेवन करावें । ।

अपथ्य - लाल मिर्च , तेल , खटाई , गर्म मसाला , चाय , कॉफी , गोभी , आलू , अरबी , उड़द की दाल , गुड़ , तम्बाकू आदि न दें । अधिक मानसिक एवं शारीरिक परिश्रम , अधिक गरिष्ट भोजन एवं उत्तेजक खान पान आदि बंद कर दें ।
सहायक चिकित्सा -

-  पूर्ण विश्राम आवश्यक । 

-  आक्रमण के समय रोगी के गर्म पानी से पैर धुलवायें । 

-  खुली हवा का सेवन ।

इस रोग में दीपक , पाचक , रेचक , रोचक , अफारानाशक तथा हृदय को शक्ति देने वाली औषधियों की व्यवस्था करनी चाहिये ।
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Rx . 

-  प्रा . दो . शाम 

   कै , फैरो - रैडोक्सोन 1 कै . , नित्य भोजन के बाद । । 

-  10 बजे , 2 बजे 

   बी कम्पलेक्स फोर्ट । 1 टिकिया दिन में 2 बार जल से । ।  

-  8 बजे प्रातः , सायं 4 बजे 

   एलिक्जर रूबाटोन 2 चम्मच दिन में 2 बार ।  

-  भोजन के बीच और रात में 

   टे , लोसोडिन ( ब्राउन एण्ड वर्क ) | 1 - 1 टि , जल से । ।


याद रखिये - 

बेल्लरगल ( Bellergal ) नि . ' सैण्डोज ' की 1 - 1 टिकिया या ' कोरामीन ( Coramine ) की 1 - 1 टिकिया अथवा ' कार्डियाजोल 2 - 2 चम्मच दिन में 3 - 4 बार दें ।

मिश्रित औषधि चिकित्सा ( Combination Therapy ) >>

1 . लिवरियन ( रोशे ) 10 मि . ग्रा . की 1 टिकिया , विटामिन बी 50 मि . ग्रा . की 1 टिकिया ।  को पीस कर ऐसी       1 पुड़िया दिन में 3 बार , जल मिला कर दें । 

2 . लेनोक्सिन 1 टिकिया + प्रिसकोपेन ( सीवा ) आधी टिकिया + बेलाडीनल रिटार्ड | ( सैण्डोज ) 1 टिकिया ।           ऐसी मात्रा दिन में 3 बार दें ।

दिल धड़कने की लक्षणों के अनुसार चिकित्सा : >>

1 . अजीर्ण के कारण दिल धड़कना -  ‘ लोसोडिन ( ब्राउन एण्ड वर्क ) की 1 - 2 टिकिया भोजन के बीच एवं रात में सोते समय । 24 घण्टे में 20 गोली से अधिक नहीं । यह एक नवीन औषधि है । अथवा इनजार ( Enjar ) नि . ' वाल्टर बुशनैल की 1 - 2 गोली भोजन के मध्य या भोजन के बाद दे ,

2 . चिन्ता एवं मानसिक तनाव से उत्पन्न दिल धड़कने में -  टे . ' डायजीपाम ' या ' इण्डेराल ' ( Inderal I . C . I . Co . ) की 1 - 2 गोली दिन में 2 या 3 बार । । 

3 . अति रक्तदाब से उत्पन्न दिल धड़कने में -  टे . ' एसीटेन ' ( बोकहार्डट ) 250 मि . ग्रा . की 1 गोली दिन में 3 बार दें । अथवा एंजियोप्रिल ( Tab . Angiopril ) ' टोरेण्ट ' की । टिकिया दिन में 2 - 3 बार अथवा कैल्सीगार्ड ( टोरेण्ट ) 1 - 2 कै . प्रति 6 - 8 घंटे पर दें । । 

4 . रोग के आक्रमण काल में -  तत्काल ' कोरामीन ड्राप 15 - 20 बूंद जल में मिला कर दें । अथवा इसका इन्जेक्शन 2 मि . ली . की मात्रा में ILM . नित्य लगावें । अथवा ' लेनोक्सिन ( वरोज वेल्कम ) 2 मि . ली . को 10 मि . ली . ' नार्मल सैलाइन में मिलाकर I / V धीरे - धीरे दें । अथवा ‘ डेक्स्ट्रोज25 % - 50 मि . ली . की मात्रा में I / V धीरे - धीरे प्रति 12 घण्टे पर पूर्ण आराम होने तक दें ।

5 . धड़कन की अधिकता -   ' डेरीफायलीन डिजाक्सिन ' ( जर्मन रेमेडीज ) 1 टिकिया दिन में 3 बार 5 दिन तक । तत्पश्चात 1 गोली दिन में 2 बार दें । ।

6 . पेट में गैस बनने के कारण दिल की धड़कनें -  प्रिसकोफेन ( PresCophen ) ' सीवा गायगी ' की 1 टिकिया दिन में 3 - 4 बार दें । अथवा अन्य कोई गैसहर औषधि ।

7 . अधिक वीर्यनाश से उत्पन्न रोग -  स्फीमेन फोर्ट 2 टिकिया + फ्लेजिल 1 | टिकिया दोनों को मिलाकर ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 - 3 बार दें । ऊपर से ' विटाहेक्स्ट 2 चम्मच जल में मिलाकर भोजन के बाद दें । हो सके तो 1 कै . ' रेविटाल ' नित्य 20 दिन तक लें । 

8 . नाड़ी संस्थान की दुर्बलता अथवा कार्डियक वीकनेस -  बेलगल ( Bellergal ) ‘ सैन्डोज 1 गोली दिन में 3 बार दें । साथ में कोरामीन ' 2 मि . ली . / M अथवा I / V रोजाना लगायें ।

9 . रोग के आक्रमण के समय यह उपाय काम में लायें -  तत्काल कोरामीन15 - 20 बूंद शीतल जल में डालकर दें । साथ ही स्प्रिट अमोनिया एरोमेट50 मि . ली . जल में मिलाकर दें ।

हृदय धड़कन में दी जाने वाली ऐलो . पेटेन्ट टेबलेट / कैपसूल >>

1 . निफेड्रीन टेबलेट ( Nifedrine Tab . ) ( एस . जी . फार्म ) -  1 - 2 टिकिया दिन में 2 या 3 बार । ।

2 . नेटकार्डिन ( Netcardine ) ( ग्रीफोन )  -  100 - 300 मि . ग्रा . नित्य / बालकों में 25 से 100 मि . ग्रा . नित्य । ।
सावधान - ' हार्ट ब्लाक की अवस्था में वर्जित । ।

3 . सीडो - कोरोडिल ( Sedo - Corodil ) ( वाण्डर )  -  1 - 2 गोली दिन में 3 बार भोजन के बाद । । 

     -  यह मानसिक तनाव , चिन्ता - नर्वस पाल्पिटेशन में उपयोगी है । । 

4 . वेलीडोल ( ValidolXजीमर ) -  1 - 2 गोली दिन में 3 - 4 बार । । 

5 . पर्सेण्टिन ( Persantin ) ( जर्मन रेमेडीज )  -  2 गोली दिन में 2 बार भोजन से पूर्व । ।

6 . कोरबीटा - 40 डी ( Corbeta - 40D ) ( साराभाई )  -  1 - 2 टिकिया दिन में 2 या 3 बार । टे . कोरबीटा - 80 भी आती है । मात्रा 1 टि , दिन । में 2 बार । । 

7 . डिजोक्सिन ( Digoxin ) ( गुर्को फार्मा ) -  1 - 1 गोली अवस्थानुसार । 

8 . सेडिलेनिड ( Cedilanid ) सैण्डोज  -  1 - 1 गोली दिन में 3 बार । ।

9 . सेडोनाल ( Sedonal ) ( ईस्ट इण्डिया ) -  1 - 2 गोली दिन में 3 बार । ।

10 . प्रिस्कोफेन ( Priscophen )  -  1 - 1 गोली दिन में 3 - 4 बार । । 

11 . टे . एसीटेन ( Tab . Aceten ) ( वोक - । हार्डट )  -  250 मि . ग्रा . की 1 टिकिया दिन में 2 या 3 बार । । 

12 . एन्जियोप्रिल ( टोरेन्ट ) 12 . 5 और 50 मि . ग्रा . टि .  -  1 टिकिया दिन में 2 - 3 बार / इनीसियल डोज 6 . 25 मि . ग्रा . / नवीनतम औषधि । । 

13 . टे . एटेन ( Tab . Aten ( कोप्रान )  -  50 - 100 मि . ग्रा . नित्य 1 मात्रा । ‘ एन्जाइना पेक्टोरिस में भी लाभकारी । । 

14 . बीटाकार्ड ( Betacard ) टोरेण्ट )  -  50 मि . ग्रा . दिन में केवल 1 बार । ।

15 . कैल्सीगार्ड ( Calcigard ) ( टोरेण्ट )  -   1 - 2 कै . प्रति 6 - 8 घण्टे पर । अधिक लाभ के लिये इसे जीभ के नीचे रक्खें । यह 5 और 10 मि . ग्रा . कै . में उपलब्ध है । ।


हृदय धड़कने में सेवन करने योग्य ऐलो . पेटेण्ट पेय / सीरप  >>

1 . कोरमिड ( Cormid ) स्टैण्डर्ड  -  10 - 20 बूंद रोगानुसार । 

2 . कोरवासिम्टोन ( Corvacymton ) ( कुक्स )  -  10 - 20 बूंद जल में डाल कर ।

3 . कोजेन ( Cornigen ) ' हैक्टस  -   5 - 10 बूंद जल में मिलाकर । 

4 . हार्जालान ( सिप्ला )  -  1 - 2 चम्मच फलों के रस से । ।



हृदय धड़कन में लगाने योग्य सुप्रसिद्ध ऐलो . पेटेण्ट इन्जेक्शन >>

1 . कैल्सीब्रोनेट ( CalcibronateXसैण्डोज )  -  5 मि . ली . मॉस में अथवा 10 मि . ली . नस में लगावें । । 

2 . विटामिन बी , ( FD . C . )  -  पुराने रोग में 1 मि . ली . माँस में अथवा सबकट या आई . बी . प्रतिदन लगायें । ।



व्यवस्था संक्षेप में --  Propranolol 10 - 40 mg 3 - 4 times daily orally , or disopyramide , 300 mg . 12 hourly orally .
-  Management of underlying cause , if any .
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