5 घातक पानी से फैलने वाले रोग ?5 Diseases that spread from lethal water?

शुद्ध पेयजल की कमी के कारण देश में लगभग हर साल जल से होने वाले रोगों के कारण यानी तकरीबन 80% मौतें होती है। विकासशील देशों में शुद्ध पेयजल की कमी एक आम समस्या हमेशा से ही रही है। बारिश में समस्या और भी ज्यादा उग्र हो जाती है क्योंकि पेयजल पाइप लाइनों में बारिश का गंदा पानी आ कर मिल जाता है और पानी को दूषित करता है। यह समस्या शहरी और ग्रामीण इलाकों में लगभग समान ही है। हर साल बारिश की शुरुआत में कई लोग कुछ जानी पहचानी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं इनमें से पांच ऐसे बीमारी है जो सामान्य तो है पर घातक भी है।

 मलेरिया।  
Malaria.
Malaria.

यह मच्छरों द्वारा ( प्लाज्मोडियम परजीवी ) के कारण फैलता है। यह मच्छर आमतौर पर घरों के आसपास रुके हुए पानी में पनपते हैं, यूं कहें कि वही फलते फूलते हैं। मलेरिया सामान्य तौर पर छोटे बच्चों को ही अपना निशाना बनाता है। इसमें सबसे प्रमुख लक्षण है बुखार के साथ पूरे बदन में कपकपी उसके साथ तेज ठंड लगना, सिर में दर्द बने रहना तथा उल्टियां होना शामिल है। कई बार इन लक्षणों के साथ एनीमिया यानी रक्त में लौह कणों कि कमी भी इसी समस्या से होती है। संक्रमण लगने के बाद लगभग सामान्य तौर पर 14 से 15 दिन के उपरांत अपना लक्षण प्रकट करते हैं इसीलिए समस्या का इलाज बिना समय गवाएं होना चाहिए।

 डायरिया। 
Diarrhea
Diarrhea

यह बीमारी लगभग हर आयु वर्ग के हो सकती है। लेकिन यह सबसे ज्यादा 5 साल से कम उम्र के बच्चों में बहुत आम है। डायरिया के रोकथाम शुद्ध पेय की उपलब्धि से सुनिश्चित की जा सकती है। इस रोग का मुख्य कारण संक्रमित भोजन या फिर संक्रमित पेयजल पीने के कारण होता है तथा यह रोग दो हफ्तों से ज्यादा टाइम के लिए भी बना रह सकता है। इसके के प्रमुख लक्षण में चक्कर आना, पेट में मरोड़ के साथ दस्त होना, बार बार बेहोशी जैसी स्थिति, त्वचा का रंग पीला पड़ जाना, पेशाब की मात्रा में कमी आना एवं खून का रिसना भी प्रमुख है। कुछ कुछ मामलों में तो मल के साथ रक्त का भी आना शामिल है।

 कॉलरा 
Cholera
Cholera


इस बीमारी से हर साल कई लोगों की जान जाती है। अगर सही से इलाज नहीं हुआ तो मरीज कुछ घंटे के अंदर ही दम तोड़ देता है। इस बीमारी के ज्यादातर मामले संक्रमित पेयजल पीने के कारण देखी गई है। इस बीमारी के कारण मरीज को पानी जैसे दस्त होना शुरू हो जाता है तथा बुखार भी संभव है हो जाए। यह वयस्कों तथा बच्चों दोनों में ही होता है।

 जापानीज एन्सेफेलाइटिस । 
Japanese encephalitis
Japanese encephalitis

यह भी जल के द्वारा ही फैलने वाला रोग है। जो एक खास किस्म के मच्छरों द्वारा फैलाया जाता है। यह मच्छर पानी से भरे चावल के खेतों में प्रजनन करता है इसलिए प्रकोप चावल की खेती करने वाले इलाकों में ज्यादा होती है। इसका प्रकोप मच्छरों पर अधिक होता है तथा इलाज के अभाव में मौत भी हो सकती है। इसमें मरीज को तेज बुखार के साथ ही उल्टियां भी शुरू हो जाती है। गंभीर मामलों में यहां तक देखा गया है कि मरीज को तेज सिर दर्द के साथ बेहोशी की स्थिति भी आ जाती है तथा कई बार तो मरीज कोमा में चला जाता है तथा अंततः मौत हो जाती है।

 फाइलेरियासिस । 
Filariasis
filariasis

गंदी नालियों तथा सीवर लाइन के आसपास रहने वालों को यह बीमारी होती है। इसका कारण एक परजीवी है जोकि इस बीमारी का जनक है। एक खास तरह के मच्छर के शरीर में फाइलेरियल नेमा टॉड  नामक किड़े रहते हैं। इस मच्छर के काटने से यह कीड़े इंसानों के शरीर के अंदर चले जाते हैं तथा वहां धीरे-धीरे अपना जनसंख्या वृद्धि करना शुरू कर देते हैं। इसी के कारण मस्तिष्क ज्वर भी होता है फाइलेरियासिस की वजह से मरीज अंधे तक हो जाते हैं तथा उनकी त्वचा पर तेजी से धब्बे उभरने शुरू हो जाते हैं और यहां सब से ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह बीमारी ज्यादातर कृषि से संबंधित आबादी वाली जगहों पर ही पाई गई है।

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