इसलिए बहुत ही जरूरी हो जाता है खून में प्लेटलेट्स की मात्रा मेंटेन रखना? So it becomes very important to keep the amount of platelets in the blood?

प्लेटलेट्स हमारे शरीर में रक्तस्राव को रोकने में बहुत ही महत्वपूर्ण है भूमिका निभाता है तथा चोट जैसी स्थिति में प्लेटलेट्स कोलेजन नामक द्रव के साथ मिलकर रक्त के प्रवाह को शरीर के बाहर आने से रोकता है, जो कि खून की क्षति को बचा कर मनुष्य की जान बचाता है।
So it becomes very important to keep the amount of platelets in the blood?
So it becomes very important to keep the amount of platelets in the blood?
हमारे रक्त में बहुत ऐसी छोटी-छोटी महत्वपूर्ण इकाइयां होती हैं जो कि हमारे शरीर को सुचारु रुप से चलाने में मददगार होती हैं इसी कड़ी में एक नाम आता है प्लेटलेट्स। जो
की छोटी-छोटी अनियमित आकार की कोशिकाएं होती हैं। एक सामान्य स्वस्थ शरीर में लगभग 5 से 6 लीटर के आसपास खून होता है और इसी खून में सफेद रक्त कणिका और लाल रक्त कणिकाओं के अलावा प्लेटलेट्स भी काफी बड़ी मात्रा में खून में उपस्थित होता है।

 शरीर में क्या भूमिका निभाता है यह प्लेटलेट्स?---------- 
What role does this plate play in the body?
What role does this platelet play in the body?
यह हमारे शरीर में होने वाले रक्त स्राव को रोकने के लिए बहुत ही जरूरी होता है। अक्सर आपने देखा होगा कि शरीर के किसी हिस्से पर कोई चोट लग जाने के बाद खून कुछ देर बाद स्वतः ही निकलना बंद हो जाता है और वहां खून का थक्का बन जाता है, ऐसा प्लेटलेट्स के कारण ही होता है। यह प्लेटलेट्स कोशिकाएं कोलेजन नामक द्रव के साथ मिलकर चोट के हिस्से पर एक अस्थाई दीवार बना देती हैं जिससे खून का बहाव रुक जाता है, और थ्रामबोपिटिन नामक हार्मोन हमारे शरीर में इन प्लेटलेट्स की मात्रा को संतुलित रखने में मदद करते हैं।

 प्लेटलेट्स की संख्या में कमी होना?--------- 
Decrease in the number of platelets?
Decrease in the number of platelets?
कुछ ऐसी खास बीमारी एवं परिस्थितियां जिसके हो जाने पर इन प्लेटलेट्स की मात्रा में कमी देखा जा सकता है, इस स्थिति को हम चिकित्सकीय विज्ञान में थाम्ब्रोसायटोपेनिया नाम से भी जाना जाता है। अगर इन प्लेटलेट्स की संख्या लगातार कम होती रहे और यह संख्या घटकर 30000 से कम रह जाए तो ऐसी स्थिति में शरीर के अंदरूनी हिस्सों में रक्त स्त्राव का खतरा बढ़ जाता है।
चिकनगुनिया, डेंगू, मलेरिया जैसे अन्य कई खतरनाक बीमारी जो कि प्लेटलेट्स की मात्रा को कम करती हैं। तथा कुछ विशेष दवाइयां, कीमोथैरेपी एवं कैंसर के कुछ विशेष प्रकार जिससे कि इन प्लेटलेट्स को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। और एक अन्य दूसरा कारण - अत्यधिक शराब के सेवन से भी इन प्लेटलेट्स की मात्रा सामान्य से कम हो सकते हैं।
 कब पड़ सकती है ट्रांसफ्यूजन की जरूरत?-------- 
When can the need of transfusion?
When can the need of transfusion?
आमतौर पर लोगों में यही भ्रम होता है कि किसी खतरनाक यह जानलेवा बीमारी जैसे डेंगू और चिकनगुनिया के होने पर फौरन ही प्लेटलेट्स की बोतल चढ़वा लेनी चाहिए नहीं तो जान का खतरा हो सकता है, लेकिन यह बात आधी सच्ची आधी झूठी है- क्योंकि मरीज को प्लेटलेट्स की जरूरत तभी होती है जब उसके रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा 10,000 से नीचे आ गई है तो ऐसी स्थिति में प्लेटलेट्स चढ़ाना जरूरी हो जाता है। सामान्य स्थिति में एक यूनिट खून से लगभग 5000 प्लेटलेट्स आसानी से प्राप्त हो जाता है, जो 1 से 2 दिन के बीच में यह प्लेटलेट्स रक्त में दोबारा बनना शुरू हो जाता है।

 आखिर किस प्रकार है डेंगू जानलेवा?-------- 
After all, what kind of dengue is dead?
after all, what kind of dengue is dead?
डेंगू के मच्छर (मादा एडीज मच्छर) यह शरीर के मांसपेशी हिस्सों को छोड़कर यह शरीर में उपस्थित रक्त प्रभावित करने वाले नसों को अपना टारगेट बनाती है और वही काटती हैं जिस कारण रक्त में वायरस का प्रभाव (संक्रमण) तेजी से फैलने लगता है और ऐसी स्थिति उत्पन्न करता है जिससे कि रक्त में उपस्थित पानी अलग होना शुरू हो जाता है जिससे प्लेटलेट्स की मात्रा तेजी से कम होना शुरू हो जाता है।

जब यह संख्या बहुत ज्यादा मात्रा में घट जाती है तो ऐसी स्थिति में खून के थक्का बनने की समान प्रक्रिया बंद हो जाता है और खून का थक्का नहीं बन पाता तो ऐसी स्थिति में प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत आ जाती है इसलिए आपने सामान्य तौर पर देखा होगा मरीज में डेंगू की पुष्टि हो जाने पर चिकित्सक उसे नियमित रूप से ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते है, जिससे की प्लेटलेट्स की लेवल पर नजर रखा जा सके। जब यह संक्रमण शरीर में कुछ ज्यादा ही गंभीर रूप से फैल जाता है तो ऐसी स्थिति में प्लेटलेट्स की मात्रा में तेजी से गिरावट होता है और मरीज के जान को भी खतरा हो सकता है?

 क्या खाने से बढ़ सकता है खून में प्लेटलेट्स की मात्रा?----------- 
What can increase the amount of platelets in the blood?
what can increase the amount of platelets in the blood?
फोलिक एसिड एवं विटामिन बी12 दोनों ऐसे पोषक तत्व हैं जो कि रक्त को शुद्ध एवं उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाने का काम करते हैं लेकिन हमारे शरीर की संरचना ऐसी नहीं है कि यह इन पोषक तत्वों की मात्रा को अपने शरीर में संग्रह करके रख सके इसलिए इसे किसी न किसी आहार के रूप में नियमित रूप से लेना आवश्यक हो जाता है- बिन्स, कीवी, पालक, खट्टे फलों एवं फ्रूट्स में फोलेट अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है एवं दूध, अंडे, मटन एवं पनीर जैसे खाद्य पदार्थों में विटामिन बी12 की अधिक मात्रा में पाया जाता है।

इसके पश्चात मौसम के बदलाव के अनुरूप ही मौसमी फल, हरी सब्जियां, चीकू, ब्रोकली, आंवला, काजू और विटामिंस अपने भोजन के प्लेट में शामिल करना चाहिए।इसमे सब से ध्यान देने वाली बात की कुछ खास किस्म के दर्द निवारक दवा है जैसे- एस्प्रिन और इबुप्रोफेनए प्लेटलेट्स के उत्पादन एवं उनकी सही तरीके से कार्य करने की प्रणाली को प्रभावित करते हैं इसलिए किसी विशेष परिस्थिति की स्थिति में अपने किसी डॉक्टर से इस विषय में जरूर सलाह ले ले। ऐसे ही किसी दर्द निवारक दवाई का सेवन बिल्कुल भी ना करें?

 जब प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य से अधिक हो जाए?------ 
When the number of platelets exceeds normal?
when the number of platelets exceeds normal?
ऐसी परिस्थिति को चिकित्सा विज्ञान में थ्रामबोसाईटोटिश के नाम से भी जाना जाता है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त में जरूरत से ज्यादा मात्रा में प्लेटलेट्स बनना शुरू हो जाते हैं, जिसके परिणाम स्वरुप खून सामान्य में से ज्यादा गाढ़ा हो जाता है और खून कि थक्का बनने की सामान्य प्रक्रिया कुछ ज्यादा ही जल्दी बनना शुरू हो जाता है और यह शरीर के अंदर ही थक्का बनाना शुरु कर देता है जिसके कारण ऐसी स्थिति में हार्टअटैक, किडनी के फेल होना तथा लकवा मार जाने की स्थिति भी आ सकती है।

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