ऐसी बीमारियों के लिए रामबाण दवा है त्रिफला? क्या-क्या फायदे हैं इसके सेवन से? किस-किस प्रकार उपयोग कर सकते हैं? Triphala medicine for such diseases? What are the advantages of consuming it? What type can you use?

संयमित आहार-विहार के साथ त्रिफला का सेवन करने से कई खतरनाक और गंभीर बीमारियों का इलाज संभव है, इसके सेवन से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, नेत्र रोग, पेट के विकार, मधुमेह (डायबिटीज) मोटापा आदि होने की आशंका खत्म हो जाती है। यह 20 से भी अधिक प्रकार के प्रमेह, विषम ज्वर, सूजन तथा विभिन्न कुष्ठरोग को नष्ट करने में सक्षम है। यह शरीर में हड्डियों, मांसपेशियों, बाल, दांतपाचन संस्थान को भी हष्ट पुष्ट कर बलवान बनाता है। इसका नियमित रूप से सेवन करने भर से शरीर को सक्षम, निरामय एवं फुर्तीला बनाया जा सकता है, और समय से पहले बुढ़ापे को भी दूर रखता है। यह त्रिफला लगभग सभी आयु वर्ग के उपयुक्त है। 
Triphala
triphala

त्रिफला
मुख्य रूप से तीन फलों के मिश्रण से बना होता है। इसमें मुख्य रूप से आयुष्य को स्थिर रखने वाला आंवला तथा शरीर की रक्षा करने वाला हरण व शरीर को निर्मल करने वाला बहेड़ा सम्मिलित है। यह तीनों मिलकर शरीर के सेहत से संबंधित सभी प्रकार के विकारों को खत्म करने की रामबाण दवा के रूप में उपयोग में लाया जाता है।

 आंवला ------------  
Gooseberry
gooseberry
यह पित्त दोषों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। आंवला मुख्य रूप से पेट के अम्ल को संतुलित करने का काम करता है, पाचन को सही तरह से चलाने तथा उसे नियंत्रित करने में मदद करता है। माहवारी के प्रभाव को भी नियंत्रित कर उसे संतुलित रखता है। यह प्रजनन अंगों, फेफड़ों और हृदय के लिए शक्तिशाली टॉनिक के तौर पर उपयोग किया जाता है। आंवला त्वचा संबंधी विकारों को भी नष्ट करता है तथा त्वचा को नमी देकर उसे चमकदार एवं आकर्षक बनाने का भी कार्य बखूबी करता है। संतरे के तुलना में भी 20 गुना ज्यादा विटामिन सी होता है और इस की सबसे खास बात यह है कि इससे उच्च तापमान में भी रखने पर इसके विटामिन के गुण नष्ट नहीं होते।

 हरड़ -------------  
harad
harad
आपने जरूर ध्यान दिया होगा की हरड़ पौधों को अक्सर बुद्ध की हथेली पर दिखाया जाता है, क्योंकि यह अपने आप में ही औषधियों का खजाना है। इसके इसी स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण ही इससे मां के दूध के ही बराबर लाभकारी माना गया है। यह शरीर में वात जैसे दोषो से राहत दिलाता है। हरड़ त्वचा की जलन एवं जख्मों को जल्दी भरने का काम भी करता है। यही नहीं यह ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसे बीमारियों से भी बचाव करने में सक्षम है।

 बहेड़ा ---------- 
Baheda
baheda
यह मुख्य रूप से कफ की समस्याओं के लिए बेहद ही लाभकारी होता है। इसमें प्रमुख रुप से जीवाणुरोधी गुण मौजूद होते हैं। यह बालों को भी पोषण देकर उन्हें जड़ से मजबूत बनाने का कार्य करता है, यही नहीं यह आंखों एवं लिवर को भी पोषण के लिए जरूरी खनिज पदार्थ मुहैया करवाता है।
इन तीनों फलों को चूर्ण बनाकर नियमित रूप से सेवन करने से शरीर को कई प्रकार के रोगों से बचाया जा सकता है। त्रिफला ऐसी ही कुछ दुर्लभ नुस्खो में से एक है जो कि कफ, वात एवं पीत जैसे दोषो को जड़ से खत्म करता है। इसलिए इसे त्रिदोशिक नाम से भी जाना जाता है।

 मुख्य रूप से क्या-क्या गुण पाए जाते हैं? ---------  
What are the main attributes? ---------
what are the main attributes? ---------
- कोलेस्ट्रोल को कम करता है। 

- रक्त संचार को बेहतर कर सुधारता है।


- पाचन दुरुस्त कर रखता है।


- ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने का काम भी बखूबी करता है।


- लीवर की कार्य क्षमता बढ़ाता है।


- इसमें एंटीबैक्टीरियल तथा एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जिससे शरीर में जमा कफ को बाहर निकालने में यह मददगार साबित होता है।


-त्वचा की जलन को भी शांत करता है।


 किस प्रकार तैयार कर सकते हैं त्रिफला का चूर्ण? ------ 
How to prepare triphala powder? ------
how to prepare triphala powder? ------
सुखा देसी आंवला एवं बड़ी हरड़ तथा बहेड़ा लेकर इस की गुठली को अच्छी तरह से मिला दे और तीनों फलों को समान समान मात्रा में लेकर बारीक एवं महीन पीस लें। इसे अच्छी तरह से साफ करके (आप इसे साफ करने के लिए कपड़े को छन्नी के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं) इसे किसी कांच की शीशी में भरकर रख लें।

 किस प्रकार प्रयोग करें? ---------- 

 आंखों को धोना -----  

एक चम्मच त्रिफला का चूर्ण रात को किसी बर्तन या कटोरी पानी लेकर उसे पानी में भिगोकर रखें और सुबह उस पानी को किसी साफ कपड़े से छानकर उस पानी से आंखों को धोएं। यह पानी आंखों के लिए बहुत ही लाभकारी है इसके प्रयोग से आंखें स्वस्थ व दृष्टि साफ होती है तथा आंखों में किसी प्रकार की जलन व लालिमा को दूर कर आंखों में किसी भी प्रकार की तकलीफ को दूर करता है।

- त्रिफला को गाय के घीशहद में मिलाकर ( याद रहे इसमें घी की मात्रा अधिक एवं शहद की मात्रा को कम रखना है ) इसे कुछ - कुछ मात्रा में नियमित रूप से सेवन करने से दृष्टि साफ होता है।

 कुल्ला करना ----- 

त्रिफला के चूर्ण को रात भर पानी में भिगोकर रखें तथा सुबह ब्रश या मंजन करने के बाद इससे थोड़ी देर के लिए मुंह में भरकर रखें फिर कुछ समय पश्चात इसे बाहर निकाल दें, इससे दांत मसूड़े स्वस्थ वह मजबूत बनते हैं तथा यह मजबूती वृद्धावस्था तक मजबूत बने रहते हैं। इसे माउथ फ्रेशनर की तरह भी यूज़ किया जा सकता है जो मुंह की दुर्गंधछाले को खत्म करता है।

- त्रिफला को हल्के गुनगुने काढ़े शहद मिलाकर नियमित रूप से पीने से मोटापा में कमी आता है। इसके अलावा इस त्रिफला के काढ़े से शरीर के किसी भी हिस्से में हुए जख्म को धोने से एलोपैथिक - एंटीसेप्टिक की आवश्यकता भी नहीं पड़ती और जख्म जल्दी भरता है।

- संतुलित आहार विहार के साथ इसका नियमित रूप से प्रयोग करने से कांच बिंदु - दृष्टि दोष, मोतियाबिंद तथा नेत्र के अन्य रोग होने की संभावना नहीं के बराबर हो जाती है।

- मूत्र संबंधित विकारो के लिए भी एवं मधुमेह में भी फायदेमंद है। त्रिफला को रात को हल्के गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से कब्ज की शिकायत खत्म हो जाती है।

 कितने मात्रा में लें ? ------------  
How much quantity?
how much quantity?
- 2 से 4 ग्राम त्रिफला के चूर्ण को दोपहर को खाना खाने के बाद तथा रात को हल्के गुनगुने पानी के साथ लें।

- एक शोध से यह पता चला है कि त्रिफला का सेवन रेडियोधर्मी रेडिएशन के प्रभाव से शरीर को बचाता है। एक प्रयोग में तो यह भी देखा गया त्रिफला के खुराक लेने से गामा किरणों के रेडिएशन प्रभाव को भी शरीर में कम किया जा सकता है। इसीलिए त्रिफला चूर्ण को आयुर्वेद के दुनिया में इसे एक अमूल्य अनमोल उपहार के रूप में दर्जा दिया गया है।

 क्या सावधानियां है जरूरी ? --------- 
What precautions are necessary?
what precautions are necessary?
दुर्बल तथा गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा अभी तत्काल हुए बुखार में भी इसे सेवन नहीं करना चाहिए, अगर त्रिफला चूर्ण का उपयोग आपको दूध के साथ करना हो तो दूध और त्रिफला चूर्ण के बीच 2 से 3 घंटे का अंतर जरूर मेंटेन करें।
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