क्या आपके शरीर से हद से ज्यादा पसीना आता है? क्या आप पसीने से आने वाले दुर्गंध से भी परेशान हैं? आखिर क्यों आता है पसीना? और कैसे निजात पा सकते हैं हम इस पसीने की दुर्गंध से? Does your body sweat more than the limit? Are you also troubled by the odor coming from sweat? Why comes sweat after all? And how can we get rid of this odor of sweat?

सामान्य से अधिक पसीना निकलने को चिकित्सीय भाषा में हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं। यह एक बहुत ही बड़ी समस्या है जिसमें चेहरे, कांख एवं शरीर के अन्य अवयवों से बहुत पसीना निकलता है। कई के मरीज तो ऐसे भी होते हैं जिनके तलवों एवं हथेलियों से भी पसीना निकलने की शिकायत बनी रहती है। शरीर से पसीना निकलना यह कोई समस्या नहीं है यह शरीर के काम करने का नियम है। लेकिन फिर भी इससे कारण मरीज को लोगों एवं समाज में काफी शर्मिंदगी उठानी पड़ती है।

Does your body sweat more than the limit? Are you also troubled by the odor coming from sweat? Why comes sweat after all? And how can we get rid of this odor of sweat?

सामान्य से अधिक मात्रा में पसीना निकलने से कई के मरीजों को कई प्रकार के समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे मरीज जिनके हाथों में से पसीना निकलने की शिकायत रहती है वे ठीक तरह से अपनी रोजमर्रा के कार्यों को भी ठीक से नहीं कर पाते। ऐसे काम में मुख्यतः लिखना, खाना बनाना, ड्राइविंग करना जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल है। इन मरीजों को सामाजिक तौर पर भी काफी जिल्लतओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोग इस समस्या के कारण किसी से हाथ मिलाने से भी झिझकते हैं क्योंकि हथेली का पसीना दूसरे व्यक्ति को खराब भी लग सकता है। वही अधिक पसीने से कपड़े भी गिले हो जाते हैं और जगह-जगह दाग धब्बे बन जाते हैं। इस प्रकार के मरीज सर्वजनिक स्थानों पर जाने से काफी हिचिकाते है। मरीज किसी बारीक काम जैसे घड़ी सुधारना तथा कंप्यूटर रिपेयरिंग, ज्वेलरी मेकिंग,  केमिस्ट्री लैब  जैसे संवेदनशील कार्यों को सही तरीके से करने में असमर्थ हो जाते हैं।

 आखिर क्या फर्क है सामान्य और अधिक मात्रा में पसीना निकलने में? -------- 

शवेद ग्रंथियों से पसीना निकलना एक शरीर की एक प्रक्रिया है। गर्मी की ऋतु में तापमान बढ़ने के साथ तथा अधिक शारीरिक श्रम करने के उपरांत पसीना निकलना स्वभाविक है। पसीने के साथ शरीर के लिए उपयोगी अन्य खनिज तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं जैसे- महत्वपूर्ण एवं सर्वप्रथम पानी उसके साथ क्लोराइड, सोडियम, लेक्टेट, यूरिया इत्यादि। शरीर इसलिए पसीना निकलता है क्योंकि इससे शरीर का बढ़ा हुआ तापमान को कम कर सके। शरीर से गंदे एवं अपशिष्ट पदार्थों को निकालने के लिए भी पसीना आता है और मुख्य यही कारण है कि शरीर से निकलने वाला पसीना कभी भी शुद्ध पानी प्राप्त नहीं होता।


किसी को कम अथवा ज्यादा पसीना आने का कोई स्पष्ट कारण नहीं है। लेकिन ज्यादातर केस में अधिक पसीना आने का कारण चिकित्सीय होता है। कई बार अधिक पसीना आने का कारण अनुवांशिक भी हो सकता है जिसका पता बचपन में ही चल जाता है। कई व्यक्तियों को हाइपोथायरायडिज्म ( यानी थायराइड ग्रंथि की अत्यधिक मात्रा में सक्रिय हो जाना ) के कारण भी अधिक पसीना आता है तथा अन्य व्यक्तियों में रूमेटिक, गठिया, टीवी, आर्थराइटिस, हाइपोग्लाइसीमिया, लिंफोमा तथा डायबिटीज के कारण नाडिया क्षतिग्रस्त हो जाती है। अत्यधिक तनाव तथा हमेशा चिंता ग्रस्त रहने एवं घबराहट होने के कारण भी शरीर से खूब  पसीना निकलता है। ऐसे महिलाएं जिन्हें रजोनिवृत्ति के बाद हॉट फ्लेशस आते हैं उन्हें भी अधिक मात्रा में पसीना निकलने की शिकायत हो जाती है।

 क्या है इसका इलाज ?------



अधिक मात्रा में पसीना निकलने के इलाज के लिए आमतौर पर गोलियां एवं एक्यूपंचर कराने तथा कोई डिओ वगैरा लगाने का जमाना चल पड़ा है। क्योंकि इसमें इस समस्या से पूरी तरह निपटने की दर बहुत कम थी इसीलिए अब मरीज लेजर सर्जरी, बोटॉक्स तथा अन्य कई तरह के सर्जरी करने में यकीन रखते हैं। पसीना कम करने वाली दवाइयों एवं टेबलेट्स के कई प्रकार के साइड इफेक्ट भी होते हैं। इनमें प्रमुख आंखों से धुंधला दिखाई देना तथा मुंह का सूखना इत्यादि है।

 पसीना रोकने वाली क्रीम ?------ 

जब पसीने से बचाव करने वाली क्रीम भी असफल हो जाती है। तब चिकित्सक मुख्य रूप से एलमुनियम क्लोराइड हेक्साहाइड्रेट के लोशन के प्रयोग करने की सलाह देते हैं। इस लोशन का प्रयोग व्यक्ति अपनी सुविधानुसार मुख्य रूप रात के सोते समय करना चाहिए और यह इलाज बहुत मरीजों में अच्छे से काम भी करता है। परंतु कुछ ऐसे मरीज जिनके हथेलियों एवं तलवों से आने वाले पसीनो में यह कारगर नहीं है। इस लोशन के इस्तेमाल से स्वेद नलिकाएं मे ब्लॉकेज आ जाती हैं जिसके कारण पसीना बाहर नहीं निकल पाता। इस लोशन कुछ- कुछ देर में बार-बार लगाने की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि एक बार लगाने के बाद कुछ समय बाद यह पसीना में ही घुल जाता है तथा शरीर से बाहर आ जाता है। इस लोशन के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं जिसमें मुख्य रूप से त्वचा की खुजली प्रमुख है।

 लोंटोफारेसिस ?-----
इस तकनीक आविष्कार आज से 55 वर्ष पूर्व ही इजाद कर ली गई थी। जिसमें स्वेद ग्रंथियों को पानी के माध्यम से हल्का करंट दिया जाता है। जिससे की ग्रंथियां शॉक स्थिति में पहुंच जाती है और इसी कारण ग्रंथियों से पसीना निकलना बंद हो जाता है।

 बोटॉक्स ?-----

बोटॉक्स मांसपेशियों का एक जहर होता है जो चेहरे की झुर्रियों को हटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसके अलावा भी बोटॉक्स के कई अन्य प्रकार के चिकित्सीय उपयोग भी हैं जिसमें कुछ खास तरह के सिर दर्द के इलाज के साथ मांसपेशियों में ऐंठन का इलाज भी शामिल है, इसमें हथेलियों, बाजू, तलवों से पसीना निकलने की समस्या पर काबू के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं ऐसी जगह जहां सबसे ज्यादा पसीना निकलता है वहां बोटॉक्स के इंजेक्शन लगाए जाते हैं इस प्रकार 6 से 8 महीनों के लिए पसीनो को निकालने के रोका जाता है।

 अगर आता हो पसीना के साथ दुर्गंध ?------ 

हाल ही में एक रिसर्च के अनुसार हर 5 में से एक व्यक्ति के शरीर से दुर्गंध( बदबू ) आती है। यह समस्या उस वक्त काफी परेशान करती है जब बारिश के कारण नमी युक्त वातावरण तीव्र हो जाता है। इसी कारण शरीर से पसीना भी बहुत निकलता है तथा ऐसे नमी युक्त वातावरण के कारण बैक्ट्रिया को पनपने के लिए पर्याप्त माहौल मिल जाता है। शरीर से निकलती इसी दुर्गंध के कारण रिश्तेदारों तथा दोस्तों से तथा परिवार के लोगों से शिकायत सुनने को मिलती है।

तन की दुर्गंध आपके नजदीकी रिश्तेदारों तथा अपनों के बीच दूरी पैदा कर सकती है। इसमें अगर यह पति एवं पत्नी में से किसी को भी समस्या हो तो एक दूसरे के साथ दूभर हो जाता है। इसके अलावा भी ऐसे व्यक्ति जिसके शरीर से बहुत ज्यादा बदबू आती है उसका आत्मविश्वास भी कम हो जाता है और किसी भी सामाजिक कार्य करने में भी हिचकिचाता है। उसके मन में हमेशा यही डर बना रहता है कि कहीं दूसरा व्यक्ति उस से बदबू के कारण कुछ बोल ना दे।

शरीर अपने बढ़े हुए तापमान को घटाने के लिए पसीना निकलता है लेकिन शरीर द्वारा निकाला गया इस पसीने में किसी प्रकार का कोई भी दुर्गंध या बदबू नहीं होता। यह गंध हीन होता है बल्कि बदबू का कारण हमारे शरीर के ऊपर त्वचा में रहने वाले बैक्टीरिया है। यह बदबू वैसे तो पूरे शरीर से आती है लेकिन हमें ज्यादा प्रॉब्लम बाजूओ( कांख ) की दुर्गंध अधिक परेशान करती है। शरीर के दूसरे स्थानों से निकला हुआ पसीना आसानी से सूख जाता है परंतु बाजुओ पसीना सुख नहीं पाता और पसीने की नमी हमेशा बने रहने के कारण यहां बैक्ट्रिया अधिक मात्रा में पनत जाते हैं। शरीर में अन्य स्थानों पर बैक्ट्रिया की मौजूदगी अलग-अलग स्तर पर हो सकती है परंतु सबसे अधिक प्रक्रिया बाजुएँ, सिर तथा जननांगों के आसपास ज्यादा पैदा होते हैं।

 इससे छुटकारा के लिए क्या कर सकते हैं ?---- 

- व्यक्तिगत साफ सफाई का विशेष रुप से ध्यान रखें जिन जिन स्थानों पर अधिक पसीना आता है उसे नियमित रूप से साबुन से अच्छी तरह से साफ करें।

- हमेशा साफ एवं धुले हुए कपड़े ही पहने तथा पहने हुए कपड़े को दोबारा पहनने से बचें।

- नियमित रूप से डिओडरेंट का प्रयोग करें। ऐसे में जिन्हें  सामान्य पसीना आता हो उन्हें जिंक एवं एलुमिनियम युक्त डिओडरेंट। जिन्हें ज्यादा पसीना आता है उन्हें एलुमिनियम फ्लोराइड युक्त डिओडरेंट का ही प्रयोग करना चाहिए।

- दुर्गंध नाशक साबुन का ही उपयोग करना चाहिए।

- ज्यादा स्पाइसी यानी ज्यादा मसाले युक्त एवं तेज महक वाले खाद्य पदार्थों को खाने से बचे इससे पसीने में बदबू का आना लगभग बंद हो जाएगा।

- पुदीने की 30 से 35 पत्तियों को 1 लीटर पानी में 5 से 10 मिनट के लिए उबाल ले तथा पानी को ठंडा होने के पश्चात शरीर के जिस - जिस हिस्से से ज्यादा दुर्गंध आती हो वहां इस पानी से अच्छे से साफ करें।

- दिन में कम से कम एक बार याद से एंटीबैक्टीरियल साबुन से जरूर नहाए।

- एक जग पानी में एक चम्मच विनेगर डालकर अच्छी तरह से मिला ले फिर इस विनेगर युक्त पानी को शरीर के प्रभावित हिस्सों को रगड़ कर अच्छी तरह से साफ कर लें।

- उसी प्रकार एक जगह पानी में दो नींबू को निचोड़ कर अच्छी तरह से मिलाएं तथा नहाने के बाद इसे अपनी बाजूओ एवं जननांगों के आसपास के हिस्सों को इससे अच्छी तरह से साफ कर लें।

- एक चम्मच चंदन पाउडर, आधा चम्मच के आसपास हल्दी पाउडर तथा दो चम्मच कचूर सुगंधी, एक छोटी चम्मच खस पाउडर एवं दो चार बूंद गुलाब जल की मात्रा को मिलाकर एक पेस्ट बना लें तथा शरीर के प्रभावित हिस्सों पर लगाकर 20 से 25 मिनट के लिए छोड़ दें फिर साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। यह तरीका तन की दुर्गंध के लिए बहुत कारगर है।

 इसके साथ यह भी करें ?------

- दिन में दो बार जरूर नहाए सफाई के लिए मुख्य रूप से एंटीसेप्टिक साबुन का ही प्रयोग करें हो। सके तो एंटीसेप्टिक क्रीम का भी प्रयोग कर सकते हैं इससे भी फायदा होता है।

- बाजूओं ( कांखों ) के बालों को रेजर से साफ करवा ले जिस से बदबू से काफी हद तक निजात मिल जाएगा।

- कैफ़ीन एवं इस तरह के कई खाद्य पदार्थ के प्रयोग से शरीर में पसीना निकलने की दर बढ़ जाता है इसलिए कैफीन युक्त पदार्थों का सेवन बंद कर दें।
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