डायबिटीज के कारण हो सकता है आपका किडनी गंभीर रूप से प्रभावित ?इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान दे सकते हैं? Due to diabetes, your kidneys are severely affected? What are the things you can do to avoid it?

पूरी दुनिया में हृदय रोग और कैंसर जैसे गंभीर रोग के बाद गुर्दे (किडनी) रोग मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण है, हमारे देश में ही लगभग किडनी फेलियर की वजह से दो से ढाई लाख व्यक्ति हर साल मृत्यु हो जाती है, यह यहीं नहीं रुकता बल्कि हर साल इसकी संख्या में बढ़ोतरी हो रही है 
आंकड़ों के मुताबिक गंभीर किडनी रोगियों की संख्या में एक लाख हर साल नए मरीज जुड़ रहे हैं और इन मरीजों में लगभग 9 लाख इस मरीज होते हैं जिन्हें डायलिसिस की जरूरत होती ही होती है और लगभग इसमें 2 से 3% मरीज ही डायलिसिस की प्रक्रिया को पूरा करा पाते हैं तथा 5 से 6% में ही किडनी ट्रांसप्लांट हो पाता है ऐसे में मिडिल क्लास मध्यवर्गीय व्यक्तियों के लिए डायलिसिस का प्रति माह का खर्चा उनके मासिक कुल आय के बराबर या उससे भी अधिक हो सकता है जिस कारण उनका इलाज सही तरीके और वक्त पर नहीं हो पाता, इसमें लगभग 90% मरीज इलाज के खर्च को उठाने में असमर्थ होते हैं।

 कारण जिस पर ध्यान देना आवश्यक है? 
Due to which attention is necessary?
due to which attention is necessary?

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां आज की जीवनशैली की का हिस्सा ही बन गई है यह बीमारियां 10 में से 6 किडनी के मरीजों में गंभीर किडनी रोग का कारण बन सकती है हमारी इंडिया को विश्व भर के अन्य देशों में डायबिटीज का गढ़ माना जाता है इसलिए किडनी रोगियों के लिए यह और भी गंभीर समस्या बन सकती है, अधेड़ तो अधेड़ युवा भी इस बीमारी से अछूते नहीं है इसके कारण यह स्थिति और भी चिंताजनक बन गई है।

 आखिर डायबिटीज से कैसे प्रभावित होती है किडनीया ? 
After all how diabetes affects kidneys?
after all how diabetes affects kidneys?

डायबिटीज से ग्रसित मरीजों में किडनी रोग होने का जोखिम की आशंका बहुत अधिक होती है, डायबिटीज के अनियंत्रित होने की स्थिति में खून में शर्करा का स्तर में इजाफा हो जाता है और लगातार लंबे समय तक स्तर उच्च रहने के कारण गुर्दे में उपस्थित बारीक-बारीक रक्त वाहिनियां नष्ट होना शुरू होने लगती हैं और वक्त के साथ किडनी की कार्य क्षमता घटती जाती है। रक्त वाहिनियों के क्षतिग्रस्त होने के फलस्वरुप खून का रिसाव शुरू हो जाता है और खून में उपस्थित प्रोटीन पेशाब के माध्यम से धीरे-धीरे बाहर निकलने लगता है इस परिस्थिति को माइक्रो एल्ब्यूमिनयूरिया कहते हैं।
Blood vessel damaged
blood vessel damaged
माइक्रो एल्ब्यूमिनयूरिया किडनी रोग की प्रथम लक्षणों में से एक है एवं सबसे महत्वपूर्ण अवस्था भी है ऐसी स्थिति में समय रहते इसके लक्षणों को समझकर अगर सही उपचार कराया जाए तो इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है, अगर इसमें लापरवाही की जाए तो यह जो समय के साथ बढ़ता चला जाएगा और खून में प्रोटीन की मात्रा भी निकलती चली जाएगी इस स्थिति को मेक्रो एल्ब्यूमिनयूरिया कहते हैं, और अगर ऐसा ही चलता रहा तो कभी भी किडनी फेलियर जैसी अवस्था आ सकती है। रोग का गंभीर रुप ले लेने के बाद किडनी को पुनः पहले जैसी स्वस्थ स्थिति में लाना तो पॉसिबल नहीं है परंतु कुछ सावधानियां बरतने से बीमारी की बढ़ोतरी की दर को घटाया जरूर जा सकता है।

डायबिटीज के रोगियों को शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने के अलावा हर साल एस्टिमेटेड ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट ( ई जी एफ आर ) नामक टेस्ट जरूर करवाना चाहिए जिससे किडनी की कार्य क्षमता एवं प्रणाली के परिस्थिति का पता चल सके, इस टेस्ट से यह पता चल जाता है कि किडनीया प्रति मिनट के दर से कितनी मात्रा में रक्त को फिल्टर करती है अगर यह दर 60 मिलीलीटर प्रति मिनट से कम हो तो सावधान हो जाइए क्योंकि ऐसी स्थिति में किडनी रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। खाने पीने में भी सतर्कता रखने एवं हल्की-फुल्की शारीरिक परिश्रम से भी किडनी रोग के जोखिम को काफी हद तक घटाया जा सकता है। अपने आहार में नमक, शक्कर और प्रोटीन जैसे खनिज तत्वों की मात्रा को नियंत्रित रखना चाहिए। अपनी जीवनशैली को स्वस्थ बदलाव लाकर आप ब्लड प्रेशर एवं डायबिटीज जैसे बीमारियों से भी सुरक्षित बचे रह सकते हैं।

 इन बातों का भी रखें ध्यान? 
Keep these things also attention?
keep these things also attention?

शरीर में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने के उपाय के साथ डायबिटीज के रोगी इन तमाम बातों का भी ध्यान रखें ताकि किडनी में किसी प्रकार रोग के संभावना को घटाया जा सके -

- सब्जी, साबुत, अनाज, वसा रहित एवं फलडेयरी उत्पादों से बने पोशाक युक्त आहार लें, ऐसे आहार जिससे खून में शर्करा की मात्रा बड़े जैसे सैचुरेटेड फैट, सोडियम, ट्रांस फैट एवं शक्कर की अधिकता वाले खाद्य पदार्थों से दूर ही रहे।

- हमारे शरीर में प्रोटीन की कमी से हड्डियों के वजन में गिरावट होना शुरू हो जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि प्रोटीन का परहेज पूरी तरह से कर दिया जाए थोड़ी-थोड़ी मात्रा में नियंत्रित रूप से इसे लेना चाहिए।

- सप्ताह के करीब 4 से 5 दिन रोज लगभग 40 से 60 मिनट व्यायाम करें तथा किसी अन्य प्रकार के शारीरिक श्रम या व्यायाम करने से पहले चिकित्सक से एक बार जरूर सलाह ले लें।

- किसी भी दवा दवाइयों का उपयोग अपने मन से शुरू ना करें, डॉक्टर के निर्देशानुसार ही दवाइयों का प्रयोग करना उचित है इसमें खास करके ऐसे दवाइयां जैसे डायबिटीज एवं हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने वाली मेडिसिन एवं दवाइयां

- हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखें।

- तंबाकू, धूम्रपान, शराब जैसे मादक पदार्थों से दूर ही रहें, यदि आप इसके आदी हो चुके हैं तो इससे छुटकारा पाने के लिए प्रयास शुरू कर दें। 
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