विटामिन डी के फायदे एवं नुकसान? और इसकी अधिकता से शरीर को का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है? कहां से मिलता है यह विटामिन डी ?Benefits and disadvantages of vitamin D? And its excessive body can suffer the brunt of it? Where does it get vitamin D?

ऐसे व्यक्ति जो धूप में निकल ना बिल्कुल पसंद नहीं करते या फिर धूप में निकलते समय हमेशा सन क्रीम को लगाए रखते हैं और दूध न पीने वाले एवं केवल शाकाहारी आहार ही लेने वाले लोगों को विटामिन डी की कमी होने की आशंका अधिकांश होता है। हमारे शरीर में विटामिन डी का निर्माण धूप के संपर्क में आने पर ही तैयार होता है। इस विटामिंस को आम बोलचाल की भाषा में सन साइन विटामिन के नाम से भी जाना जाता है। प्राकृतिक रूप से यह विटामिन कुछ चीजों में मौजूद होता है, जैसे अंडे का पीला हिस्सा, डेयरी उत्पाद, मछली इत्यादि लेकिन इससे विटामिन डी की आपूर्ति नहीं होती है।
 आखिर क्यों जरूरी है विटामिन D ? 
Why Vitamin D Why Is It Important?
why vitamin d why is it important?
हमारे शरीर में हड्डियों के विकास के लिए यह महत्वपूर्ण होता है इसके अलावा शरीर के विकास एवं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी यह बहुत जरूरी होता है हमारे शरीर की त्वचा धूप के सीधे संपर्क में आने से विटामिन डी का निर्माण शुरू कर देता है लेकिन इसमें भी इसकी कमी को पूर्णतया रूप से पूरा नहीं किया जा सकता क्योंकि त्वचा से मिलने वाला विटामिन डी बहुत कम मात्रा में होता है,

यह हमारे हड्डियों को मजबूत बनाता है क्योंकि विटामिन डी कि उपस्थिति से शरीर कैल्शियम को आसानी से अवशोषित कर पाता है पारंपरिक रुप से विटामिन डी की कमी को रिकेट्स नाम की बीमारी से भी जोड़ा जाता है इस बीमारी में मुख्य रूप से हड्डियों में कैल्शियम ठीक से नहीं पहुंच पाता और वह धीरे-धीरे नरम एवं कमजोर होती जाती हैं, रिकेट्स बीमारी से गुजर रहे हैं मरीजों को हड्डियों में फैक्चर आसानी से हो सकता है, आज के आधुनिक विज्ञान में नए शोध से यह पता चला है कि विटामिन डी न केवल हड्डियों को मजबूत बनाता है बल्कि अन्य कई प्रकार के गंभीर बीमारियों से भी बचाता है,

 कमी होने पर ? 
What can be done if there is a decrease?
what can be done if there is a decrease?
शरीर में विटामिन डी के थोड़ी मात्रा में कमी से शरीर में वैसे कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता, बहुत मुमकिन है कि इसकी कमी का व्यक्ति को एहसास भी ना हो और कोई लक्षण भी दिखाई ना पड़े, अगर बाई चांस कोई लक्षण उभरकर सामने आता है तो इसके लक्षण इतने मामूली होते हैं कि व्यक्ति को यह सामान्य सी बात महसूस होने लगती है। जैसे हल्का-हल्का दर्द होना, इसके गंभीर लक्षण विटामिन डी के स्तर में काफी कमी पर ही साफ तौर पर देखा जा सकता है। इन लक्षणों में मुख्य रूप से ऑस्टियोमेंलेशिया और रिकेट्स बीमारी शामिल है। रिकेट्स मुख्य रूप से बच्चों में ज्यादातर पाई जाती है और यह लगभग ऑस्टियोमेंलेशिया की तरह के ही लक्षण दिखाई पड़ते हैं फर्क सिर्फ इतना है कि यह वयस्कों में ज्यादा पाया जाता है।

 इलाज ? 
treatment ?
treatment ?
विटामिन डी की कमी में शरीर में शुरुआत में इसके लक्षण बिल्कुल ही दिखाई नहीं पड़ते हैं, इस कारण आमतौर पर इसके कमी का समय पर इलाज नहीं हो पाता और गंभीर बीमारी के लक्षण जब तक उत्पन्न ना हो जाए तब तक लोगों को इसकी भनक भी नहीं लगती। अपने आहार, सप्लीमेंट एवं धूप में कुछ समय बिताना इस बीमारी के इलाज में शामिल हैं।

 शरीर में विटामिन डी की कमी के अन्य कई कारण भी हो सकते हैं? 
There may be other reasons for vitamin D deficiency in the body too.
there may be other reasons for vitamin d deficiency in the body too.
- इसमें ऐसे लोग जो पूर्णतया शाकाहारी होते हैं ऐसे लोगों को विटामिन डी की कमी होने की संभावना अधिक होती है। प्राकृतिक रूप से विटामिन डी केवल पशुओं से मिलने वाले आहारों से ही प्राप्त किया जाता है।

- प्रयाप्त धूप में ना निकलने से,

 - त्वचा का रंग सामान्य से कुछ ज्यादा ही गहरा होना, त्वचा का यह गहरा रंग मिलेनिन नामक पिगमेंट कारण होता है इसी मिलेनन के अधिकता के कारण ही त्वचा धूप से मिलने वाले विटामिन डी का निर्माण ठीक से नहीं कर पाता,

- रक्त में विटामिन डी के स्तर को नापने के लिए कुछ जांच प्रक्रियाएं हैं जिससे आप अपने किसी डॉक्टर से इसके बारे में जानकारी ले सकते हैं,

 बच्चों में विटामिन डी की कमी ना हो पाए इसके लिए आप इन सभी बातों का ध्यान रख सकते हैं? 
Can you take care of all these things in order to prevent vitamin D deficiency in children?
can you take care of all these things in order to prevent vitamin d deficiency in children?
- गर्भावस्था के दौरान अगर महिला के शरीर में विटामिन डी की कमी हो तो ज्यादा संभावना यह है कि होने वाली शिशु पर भी इसकी कमी नजर आएगी। जिन महिलाओं का स्किन का रंग गहरा होता है उन्हें विटामिन डी के लिए विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।

- ऐसे शिशु जो समय से पहले ही जन्म हो गया हो ऐसे शिशुओं में विटामिन डी की कमी हो सकती है। ऐसे में केवल स्तनपान कराने भर से विटामिन डी की कमी को पूर्णतया दूर नहीं किया जा सकता। अगर बच्चों का फार्मूला दूध ( packet milk ) दिया जा रहा है तो और भी संभावना बढ़ जाती है इसकी कमी होने का।

- शरीर में चर्बी बढ़ने( मोटापा ) से शरीर में उपस्थित विटामिन डी का लेवल भी घटना लगता है, ऐसे लोगों को अपने शरीर से अतिरिक्त चर्बी को दूर करने के उपाय करने चाहिए। ऐसा शरीर में इसलिए होता है क्योंकि शरीर में उपस्थित रक्त में विटामिन डी फैट( चर्बी ) में उपस्थित कोशिकाएं अवशोषित कर लेती हैं और यह समस्या वक्त के साथ और भी बदतर होती जाती है।

- धूप दो धारी तलवार की भांति है गोरे लोगों में विटामिन डी का निर्माण किसी भी मौसम में 10 से 15 मिनट धूप सेकने भर से ही प्राप्त हो जाता है, और मात्र यही 10 से 15 मिनट के धूप से ही शरीर के लिए प्राप्त विटामिन डी का निर्माण हो जाता है।
लेकिन जिन लोगों की त्वचा का रंग गहरा होता है ऐसे लोगों पर है यह नियम लागू नहीं होता, ऐसे लोगों को इसकी पूर्ति के लिए अधिक मात्रा में विटामिन डी युक्त आहार लेने की आवश्यकता होती है। एक तरफ इसका फायदा है तो दूसरी तरफ इसका नुक्सान भी।
अधिक विटामिन डी की अधिकता से त्वचा कैंसर का भी खतरा होता है, ऐसे शिशु जिनकी उम्र महज 6 महीने भी नहीं हुई है उन्हें सीधे रूप में ले जाने से बचाना चाहिए और उन शिशुओं को भी बड़े ध्यान की आवश्यकता है जिनका रंग गोरा होता है ऐसी शिशुओं को धूप में कुछ मिनटों की सिकाई भी पर्याप्त होता है।
 वयस्कों में भी विटामिन डी की कमी के लक्षण - 
- शरीर में जगह - जगह पर तेज दर्द होना।
- कमजोरी और आस्टियोमेलेशिया की शिकायत।
- हड्डियों में दर्द (खास तौर पर पसलियों कूल्हों और पैरों की हड्डियों में)

 खून में विटामिन डी की कमी होने पर यह संभावना भी घटित हो सकती हैं? 
This possibility can occur even when there is a shortage of vitamin D in the blood?
this possibility can occur even when there is a shortage of vitamin d in the blood?
- कार्डियोवैस्कुलर रोग के कारण जान का खतरा।

- मानसिक स्थिति एवं याददाश्त में कमजोरी होना।

- बच्चों में अस्थमा का प्रभाव गंभीर रूप से उभरना तथा कैंसर का भी जोखिम बने रहना।

- विटामिन डी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, ग्लूकॉल, इंटॉलरेंस जैसे बीमारियों से बचाव के लिए इलाज के रूप में महत्वपूर्ण हो सकता है।


 क्या होते हैं बच्चों में विटामिन डी के कमी के सामान्य लक्षण? 
What are the common symptoms of vitamin D deficiency in children?
what are the common symptoms of vitamin d deficiency in children?
- छोटे बच्चों में विटामिन डी के कमी होने के कारण मांस पेशियों में मरोड़े तथा सांस लेने में परेशानी एवं दौरे आने जैसी स्थिति भी उत्पन्न होती दिखाई पड़ सकती है। ऐसे में विटामिन डी के लगातार कमी से शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है, सांस लेने में मुश्किल होने के कारण बच्चे की पसलियां ( रिंब केज ) नर्म जाती हैं और आसपास की मांसपेशियां कमजोर ही रह जाती हैं।

- अगर बच्चों के शरीर में विटामिन डी का स्तर यूं ही गिरा रहे तो ऐसे में पैरों की हड्डियों और खोपड़ी कमजोर रह जाती हैं जिसे आप छूने भर से ही नर्म महसूस कर सकते हैं हड्डियों से ही शरीर का बुनियादी रुप से ढांचा तैयार होता है लेकिन रिकेट्स नामक बीमारी की चपेट में आने से हड्डियों लचीली होना शुरू हो जाती है और पैरों और हाथों की हड्डियां कमजोर होकर मुड़ने लगती है आप यह भी कह सकते हैं कि रिकेट्स बीमारी का यह प्रमुख लक्षण है।

- समय पर दांतों का न निकलना भी इसकी कमी को दर्शाता है।

-  बच्चों में चिड़चिड़ापन पैदा होना शुरू हो जाता है।

- शारीरिक विकास रुक जाता है तथा बच्चा सामान्य बच्चों के मुकाबले देर से चलना शुरू करता है।

- विटामिन डी के कमी के कारण बच्चों में अचानक से किसी भी संक्रमण का होने का खतरा बढ़ जाता है विशेषकर श्वसन तंत्र से रिलेटेड संक्रमण आसानी से बच्चों को शिकार बनाते हैं।

- बच्चा कार्डियोमायोपैथी नामक एक गंभीर बीमारी का भी शिकार हो सकता है। इस बीमारी के कारण हृदय की मांसपेशियों धीरे-धीरे कमजोर होना शुरू हो जाती हैं और यह अपने सामान्य काम को ठीक से अंजाम नहीं दे पाती।
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